इटली ही क्यों? इटली के शहर
पश्चिमी रोमन साम्राज्य के पतन के बाद इटली के शहर छोटे हो गए थे। 12वीं सदी से वे फिर बढ़े, क्योंकि यूरोप, बाइज़ेंटाइन साम्राज्य और इस्लामी देशों के बीच का व्यापार उन्हीं से होकर गुज़रता था। वेनिस और जेनोआ अमीर बंदरगाह गणराज्य थे, फ़्लोरेंस बैंकिंग और ऊन का केंद्र था, और रोम पोप का शहर था। वेनिस जैसे शहरों में अमीर व्यापारी और बैंकर शासन में हिस्सा लेते थे, और लोग ख़ुद को नागरिक समझने लगे। पादुआ और बोलोन्या के विश्वविद्यालयों में क़ानून और चिकित्सा पढ़ाई जाती थी।
फ़्रांसीसी शब्द रेनेसां का अर्थ है पुनर्जन्म। 19वीं सदी में इतिहासकार याकोब बर्कहार्ट ने इस समय के लिए इसे प्रसिद्ध किया।
मानवतावाद और इतिहास लिखने का नया ढंग
मानवतावाद एक नई तरह की पढ़ाई थी। मानवतावादियों ने यूनानी और रोमन ग्रंथ फिर से पढ़े और व्याकरण, अलंकार-शास्त्र, कविता, इतिहास और नीति-दर्शन पढ़ाया (इन्हें मानविकी कहते हैं)। पेट्रार्क (1304–78) शुरुआती मानवतावादी थे। उनका मानना था कि इंसान मेहनत और पढ़ाई से अपना जीवन बना सकता है, सिर्फ़ जन्म से नहीं। कई यूनानी ग्रंथ इब्न सीना और इब्न रुश्द जैसे अरब विद्वानों ने बचाए और समझाए थे, जिनकी रचनाएँ यूरोप पहुँचीं।
मानवतावादियों ने इतिहास को प्राचीन, मध्य युग और नए ज्ञान के आधुनिक युग में बाँटा। छापाख़ाने (गुटेनबर्ग, 1455) से किताबें सस्ती हुईं और विचार तेज़ी से फैले। फ़्लोरेंस के मेदिची परिवार जैसे अमीर संरक्षकों ने विद्वानों और कलाकारों की मदद की।
कला और वास्तुकला में यथार्थवाद
कलाकार दुनिया को वैसा दिखाना चाहते थे जैसा आँख देखती है: यह यथार्थवाद है। उन्होंने परिप्रेक्ष्य (रेखाएँ एक लोप बिंदु पर मिलें), रोशनी-छाया और तैल रंग का प्रयोग किया। शरीर सही बनाने के लिए शरीर-रचना पढ़ी। लियोनार्डो दा विंची ने चित्र बनाए और पौधों, मशीनों और उड़ने का भी अध्ययन किया। माइकल एंजेलो ने सिस्टीन चैपल की छत रँगी और मूर्तियाँ गढ़ीं। जर्मनी में ड्यूरर ने बारीक छापे बनाए।
वास्तुकारों ने रोमन मेहराब, स्तंभ और गुंबद अपनाए। ब्रुनेलेशी ने फ़्लोरेंस के बड़े गिरजाघर का गुंबद बनाया। रोम का सेंट पीटर गिरजाघर इसी शैली में फिर बना, जिसे शास्त्रीय शैली कहते हैं। कलाकार अब अपने काम पर नाम लिखते और व्यक्ति के रूप में प्रसिद्ध होते थे।
महिलाओं की आकांक्षाएँ
ज़्यादातर नए विचार सिर्फ़ ऊँचे वर्ग के पुरुषों तक पहुँचे। सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की आवाज़ कम थी; उनका दहेज परिवार के व्यापार में लगता था। फिर भी कुछ पढ़ी-लिखी महिलाएँ आगे आईं। वेनिस की कसांद्रा फ़ेदेले ने लिखा कि महिलाओं को भी मानवतावादी शिक्षा मिलनी चाहिए। इसाबेला दे एस्ते ने पति की ग़ैरमौजूदगी में मंटुआ राज्य चलाया और दरबार को ज्ञान का केंद्र बनाया। ऐसी महिलाओं ने कहा कि व्यक्ति क्या कर सकता है, यह योग्यता तय करे, लिंग नहीं।
धर्म-सुधार और कैथोलिक चर्च का जवाब
कई ईसाई इस बात से नाराज़ थे कि चर्च बहुत अमीर था और पाप-मुक्ति पत्र (इंडल्जेंस) बेचता था, जिनसे पापों की सज़ा से छुटकारे का दावा किया जाता था। इरास्मस और टॉमस मोर जैसे मानवतावादियों ने इसकी आलोचना की। 1517 में जर्मन भिक्षु मार्टिन लूथर ने इसके ख़िलाफ़ 95 बातें (थीसिस) लिखीं और कहा कि ईश्वर तक पहुँचने के लिए सिर्फ़ आस्था काफ़ी है। छपाई से उनके विचार फैले। इस प्रोटेस्टेंट धर्म-सुधार से नए चर्च बने: जर्मनी में लूथरवादी, स्विट्ज़रलैंड में ज़्विंगली और काल्विन के, और इंग्लैंड में राजा चर्च का प्रमुख बना। ऐनाबैप्टिस्ट और आगे गए और सामाजिक बराबरी माँगी; लूथर ने 1525 के किसान विद्रोह का विरोध किया।
कैथोलिक चर्च ने भी बदलाव किए: पाप-मुक्ति पत्रों की बिक्री रोकी, शिक्षा और सादे जीवन पर ज़ोर दिया, और इग्नेशियस लोयोला ने 1540 में सोसाइटी ऑफ़ जीसस (जेसुइट) बनाई, जो ग़रीबों की सेवा और धर्म-प्रचार करती थी।
वैज्ञानिक क्रांति
ईसाई मानते थे कि पृथ्वी ब्रह्मांड के बीच में स्थिर है। कोपरनिकस (1473–1543) ने कहा कि पृथ्वी समेत सारे ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। केप्लर ने दिखाया कि ग्रह वृत्त में नहीं, दीर्घवृत्त में घूमते हैं। गैलीलियो ने दूरबीन से देखा और सूर्य-केंद्रित व्यवस्था का समर्थन किया; चर्च ने उन पर मुक़दमा चलाया। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण समझाया (1687)। वैज्ञानिक अब अवलोकन और प्रयोग पर भरोसा करने लगे। लंदन की रॉयल सोसाइटी (1662) जैसी वैज्ञानिक संस्थाएँ बनीं।
खोज-यात्राओं का युग
यूरोपवासी सोना, मसाले और ईसाई धर्म का प्रसार चाहते थे। कुतुबनुमा (कंपास), बेहतर जहाज़ और नए नक़्शों ने मदद की। पुर्तगाल ने अफ़्रीका के चारों ओर जहाज़ भेजे: बार्थोलोम्यू डियास 1488 में दक्षिणी सिरे तक और वास्को द गामा 1498 में कालीकट पहुँचा। स्पेन की ओर से कोलंबस ने 1492 में अटलांटिक पार किया और अमेरिका के द्वीपों तक पहुँचा। मैगलन के बेड़े के एक जहाज़ ने पूरी दुनिया का चक्कर लगाया (1519–22)। इन यात्राओं से यूरोप में धन आया, पर अमेरिका और अफ़्रीका के लोगों के लिए विजय, बीमारियाँ और ग़ुलामी आई।
करके देखो: परिप्रेक्ष्य से चित्र बनाओ
काग़ज़ के बीच में एक बिंदु लगाओ (लोप बिंदु)। नीचे के दोनों कोनों से उस बिंदु तक दो रेखाएँ खींचो, यह सड़क है। किनारे पेड़ बनाओ जो बिंदु के पास जाते-जाते छोटे हों। सपाट काग़ज़ अब गहरा दिखेगा। 3D के तीसरे चरण से मिलाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पुनर्जागरण (रेनेसां) = पुनर्जन्म (14वीं–17वीं सदी), शब्द बर्कहार्ट ने प्रसिद्ध किया
- मानवतावाद = यूनानी/रोमन ग्रंथों का अध्ययन + इंसान की मेहनत पर भरोसा; मानविकी = व्याकरण, अलंकार-शास्त्र, कविता, इतिहास, नीति-दर्शन
- परिप्रेक्ष्य: समानांतर रेखाएँ एक लोप बिंदु पर मिलती हैं
- 1455 गुटेनबर्ग छपाई · 1517 लूथर की 95 थीसिस · 1540 जेसुइट · 1543 कोपरनिकस · 1609 गैलीलियो की दूरबीन · 1687 न्यूटन
- यात्राएँ: 1488 डियास · 1492 कोलंबस · 1498 द गामा · 1519–22 मैगलन का बेड़ा
हल किए गए उदाहरण
1. पुनर्जागरण इटली में ही क्यों शुरू हुआ?
इटली के शहर यूरोप, बाइज़ेंटियम और इस्लामी दुनिया के व्यापार से अमीर थे; व्यापारी और बैंकर कला और ज्ञान पर पैसा लगाते थे; रोमन खंडहर और पुराने ग्रंथ पास थे; और पादुआ, बोलोन्या जैसे विश्वविद्यालय पहले से क़ानून और चिकित्सा पढ़ाते थे।
2. छपाई ने धर्म-सुधार की मदद कैसे की?
लूथर के लेख जर्मन भाषा में हज़ारों प्रतियों में छपे, तो आम लोग उनके विचार जल्दी पढ़ सके, एक शहर से बहुत दूर तक।
3. कोपरनिकस का मॉडल पुराने मॉडल से कैसे अलग है?
पुराना: पृथ्वी बीच में, सूर्य और ग्रह उसके चारों ओर। कोपरनिकस: सूर्य बीच में, पृथ्वी और ग्रह सूर्य के चारों ओर।
4. पुनर्जागरण की एक महिला का नाम और उसका काम बताओ।
इसाबेला दे एस्ते ने पति के न रहने पर मंटुआ राज्य चलाया और दरबार को कला और ज्ञान का केंद्र बनाया।
आम गलतियाँ
- सोचना कि पुनर्जागरण सिर्फ़ कला था। इसने पढ़ाई, धर्म, विज्ञान और इंसान के बारे में सोच भी बदली।
- कहना कि लूथर ने कैथोलिक चर्च बनाया। उन्होंने उसका विरोध किया; उनके आंदोलन से प्रोटेस्टेंट चर्च बने।
- कोपरनिकस (सूर्य-केंद्र, 1543) और न्यूटन (गुरुत्व, 1687) को मिलाना।
- मानना कि यूनानी ज्ञान सिर्फ़ यूरोप ने बचाया। अरब विद्वानों ने कई यूनानी ग्रंथों का अनुवाद और व्याख्या की।