Spain 2º Bachillerato Foundations of Art
अध्याय: 6
1. Foundations of art
Art technology, materials and techniques · Art and architecture terminology · Historical, geographical and social aspects of art · Theories and definitions of art · Gender perspective in art · Conceptual art and object art
- कला सामग्री और तकनीकें: सही माध्यम कैसे चुनें – कलाकार वह सामग्री (माध्यम) चुनते हैं जिससे मनचाहा असर मिले। हर रंग (पेंट) में पिगमेंट यानी रंगीन चूर्ण और बाइंडर यानी चिपकाने वाला द्रव होता है: तैल रंग में अलसी का तेल, जल रंग में गोंद (गम अरेबिक), एक्रेलिक में एक्रेलिक राल, टेम्परा में अंडा। सूखे माध्यम हैं ग्रेफ़ाइट पेंसिल (H = सख़्त और हल्की, B = नरम और गहरी), चारकोल, पेस्टल और रंगीन पेंसिल। गीले माध्यम हैं स्याही, जल रंग, गुआश, एक्रेलिक और तैल रंग। पारदर्शी माध्यम में नीचे की परत दिखती है, अपारदर्शी उसे ढक देता है। सपोर्ट वह सतह है जिस पर काम होता है: कागज़, कैनवास, लकड़ी, दीवार। त्रि-आयामी काम में मिट्टी से गढ़ना, तराशना, जोड़ना और ढलाई आते हैं; छापा कला में एक ब्लॉक या स्क्रीन से कई प्रतियाँ बनती हैं। डिजिटल माध्यम में टैबलेट, फ़ोटो और वीडियो हैं। अच्छे कलाकार सामग्री को परखते हैं, प्रयोग से काम निखारते हैं और उसे सुरक्षित व टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल करते हैं।
- कला का इतिहास: गुफा की दीवारों से आज तक – मनुष्य कम से कम 40,000 साल से कला बना रहा है। प्रागैतिहासिक कला में गुफा की दीवारों पर जानवर और हाथ की छाप हैं। प्राचीन सभ्यताओं ने शासकों, देवताओं और परलोक के लिए कला बनाई। शास्त्रीय परंपराएँ यूनान-रोम, भारत, चीन, अफ़्रीका और अमेरिका में पनपीं। पुनर्जागरण ने परिप्रेक्ष्य और यथार्थ दिया; आधुनिक कला (लगभग 1860 से) ने ये नियम तोड़े; समकालीन कला कोई भी सामग्री अपनाती है। किसी कलाकृति को समझने के लिए वर्णन, विश्लेषण, संदर्भ में व्याख्या और कारण सहित निर्णय करें।
- कला का दर्शन: कला क्या है, और क्यों ज़रूरी है? – कला का दर्शन (सौंदर्यशास्त्र का हिस्सा) पूछता है: कला क्या है, सुंदरता क्या है, क्या रुचि सिर्फ़ निजी है, रचनाकार कौन है, और क्या कला सच दिखा सकती है? जवाब बदलते रहे हैं: "कला प्रकृति की नक़ल है" से "कला भावना है" तक और "विचार ही कला है" तक।
- कला में महिलाएँ: चित्र में कौन? बनाया किसने? – दो अलग सवाल हैं: चित्र में महिलाओं को कैसे दिखाया गया और कितनी कलाकृतियाँ महिलाओं ने बनाईं? सदियों तक महिलाएँ अक्सर चित्र में रहीं, पर कलाकार कम रहीं, क्योंकि कला-विद्यालय, मॉडल से चित्रण और काम बेचना उनके लिए बंद थे। महिला कलाकारों और समूहों ने यह बदला।
2. Vision, reality and representation
Pre-Columbian and pre-colonial African art · Spatial representation in painting · Impressionism and Post-Impressionism · Realism and Hyperrealism · Surrealism and its influence · Abstraction: origins and evolution
- विश्व कला: अलग-अलग संस्कृतियाँ कला कैसे बनाती हैं – हर सांस्कृतिक क्षेत्र की अपनी कला-भाषा है, जो उसकी आस्था, सामग्री और जीवन-शैली से बनती है। अफ़्रीकी कला मुखौटों, लकड़ी की मूर्तियों, काँसे और कपड़ों में साहसी, सरल आकार इस्तेमाल करती है, अक्सर अनुष्ठान और समुदाय के लिए, और इसने क्यूबिज़्म जैसी आधुनिक यूरोपीय कला को प्रेरित किया। भारतीय कला बारीकी और समरूपता से भरी है: मंदिर शिखर, स्तूप, मूर्तियाँ, लघु और लोक चित्र। सुदूर पूर्वी कला ब्रश-स्याही, सुलेख और खाली जगह को महत्व देती है। अरब-इस्लामी कला नियम से दोहराकर ज्यामितीय तारे, अरबेस्क और सुलेख बनाती है। कोलंबस-पूर्व अमेरिका ने सीढ़ीदार पिरामिड, कपड़े और सोने का काम बनाया; बाद में टोटम और मैक्सिकन भित्ति चित्र आए। यूरोपीय कला यूनानी स्तंभों से गॉथिक, पुनर्जागरण के परिप्रेक्ष्य और आधुनिक शैलियों तक जाती है। किसी कृति को समझने के लिए उसका वर्णन करें, उसकी संस्कृति से जोड़ें, अपनी भावना पहचानें, फिर उस शैली में ख़ुद कुछ बनाएँ।
- परिप्रेक्ष्य चित्रण: क्षितिज, लोप बिंदु और छाया – परिप्रेक्ष्य (पर्सपेक्टिव) चित्रण से सपाट काग़ज़ गहरा दिखता है। आँख की ऊँचाई पर क्षितिज रेखा खींचो, फिर दूर जाती रेखाएँ लोप बिंदुओं पर मिलती हैं। दूर की चीज़ें छोटी बनती हैं (आकार ∝ 1 ÷ दूरी)। एक-बिंदु में एक लोप बिंदु, दो-बिंदु में दो। छाया दो काटती रेखाओं से मिलती है।
- प्रभाववाद (इम्प्रेशनिज़्म) – प्रभाववाद (Impressionism) 1860–1870 के दशक में फ़्रांस में शुरू हुआ कला आंदोलन था। क्लॉद मोने, पियेर-ऑगस्त रेनुआ, एडगर देगा, कामी पिसारो, आल्फ़्रेड सिसले, बर्थ मोरिसो और मैरी कसाट जैसे चित्रकार बाहर खुली हवा में, जल्दी-जल्दी चित्र बनाते थे ताकि एक पल की बदलती रोशनी और माहौल पकड़ सकें। वे चमकीले, शुद्ध रंगों को दिखते ब्रश-स्ट्रोक में साथ-साथ रखते, छाया को रंगीन बनाते और रोज़ के आधुनिक जीवन को चित्रित करते थे। 1874 में पेरिस में उनकी पहली प्रदर्शनी का आलोचकों ने मज़ाक़ उड़ाया और मोने के चित्र 'इम्प्रेशन, सनराइज़' से नाम पड़ा। इसके बाद उत्तर-प्रभाववाद (सरा, वान गॉग, सेज़ान, गोगाँ) और आधुनिक कला आई; यह शब्द संगीत (दबूसी) और साहित्य के लिए भी इस्तेमाल हुआ।
3. Classical art and its legacy
Greek architecture and sculpture · Portrait sculpture in Ancient Rome · Architecture from Romanisation to late Middle Ages · Rebirth of classical art: Renaissance · Classical legacy in modern times
- प्राचीन यूनानी कला – प्राचीन यूनानी कला लगभग 900 साल में चार कालों में विकसित हुई: ज्यामितीय, आर्कैइक, शास्त्रीय और हेलेनिस्टिक। रंगे बर्तन काली-आकृति से लाल-आकृति की ओर बढ़े। मूर्तियाँ अकड़े कूरोस से शास्त्रीय काल के सहज कॉन्त्रापोस्तो और हेलेनिस्टिक काल की नाटकीयता तक पहुँचीं। मंदिरों में तीन स्तंभ शैलियाँ (डोरिक, आयोनिक, कोरिंथियन) और सधा हुआ अनुपात था। संतुलन और सौंदर्य के इन आदर्शों ने रोमन, पुनर्जागरण और गांधार कला को भी प्रभावित किया।
- मध्यकालीन कला: मोज़ेक से गोथिक गिरजाघरों तक – यूरोप और भूमध्य क्षेत्र की मध्यकालीन कला लगभग 300 से 1400 ई. तक फैली है। प्रारंभिक ईसाई कला ने रोमन बेसिलिका और कैटाकॉम्ब चित्र अपनाए। बाइज़ेंटाइन कला ने गुंबद, सुनहरे मोज़ेक और आइकन जोड़े। रोमनेस्क चर्च (लगभग 1000–1150) में गोल मेहराब, मोटी दीवारें और छोटी खिड़कियाँ हैं, दरवाज़ों पर शिक्षा देने वाली मूर्तियाँ। गोथिक गिरजाघर (लगभग 1140 से) नुकीले मेहराब, पसलीदार छत और उड़ते पुश्तों से ऊँची पतली दीवारें बनाते हैं जिनमें रंगीन काँच भरा है। भिक्षुओं ने सचित्र पांडुलिपियाँ बनाईं। जॉटो जैसे उत्तर गोथिक चित्रकारों ने कला को जीवंत बनाया और पुनर्जागरण का रास्ता खोला। इस युग की कला मुख्यतः आस्था के लिए थी और न पढ़ पाने वालों को कहानियाँ सिखाती थी।
- बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ: पुनर्जागरण, धर्म-सुधार और विज्ञान – 14वीं से 17वीं सदी में इटली के व्यापारी शहरों से यूनानी-रोमन ज्ञान में नई रुचि जगी, जिसे मानवतावाद कहते हैं। कलाकारों ने परिप्रेक्ष्य और शरीर-रचना के अध्ययन से असली जैसे चित्र बनाए; वास्तुकारों ने बड़े गुंबद बनाए। छपाई ने विचार फैलाए। कुछ पढ़ी-लिखी महिलाओं ने लिखा और शासन किया। 1517 में लूथर के विरोध से पश्चिमी चर्च कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट में बँटा, और कैथोलिक चर्च ने भी सुधार किए। कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने ब्रह्मांड की समझ बदली, और नाविकों ने अमेरिका और भारत के समुद्री रास्ते खोजे।
- नवशास्त्रीयता: यूनान और रोम की ओर लौटती कला – नवशास्त्रीयता (लगभग 1750–1830) कला, इमारतों और साहित्य की एक शैली थी जिसने प्राचीन यूनान और रोम के शांत क्रम को अपनाया। पॉम्पेई की खुदाई और ज्ञानोदय के तर्क-प्रेम से यह बढ़ी। इसमें सीधी रेखाएँ, संतुलन, साफ़ रूपरेखा, सफ़ेद संगमरमर और कर्तव्य की गंभीर कहानियाँ थीं — चंचल रोकोको के उलट। मुख्य नाम: दावीद, आंग्र, एंजेलिका कॉफ़मान, कनोवा। 1920 के दशक में 'क्रम की ओर वापसी' और मेटाफ़िज़िकल चित्रकला में यह फिर लौटी।
4. Art and expression
Baroque painting and sculpture · Romanticism and the birth of modernity · Fauvism and Expressionism · From Dada to Fluxus
- बरोक: गति में कला (लगभग 1600–1750) – बरोक लगभग 1600 से 1750 तक की यूरोपीय शैली है, जो चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, संगीत और साहित्य में दिखती है। यह धर्मसुधार (Reformation) के बाद रोम में पनपी, जब कैथोलिक चर्च और राजा लोगों को भावुक और प्रभावित करने के लिए कला का उपयोग करते थे। इसकी पहचान है गति, विरोध और भावना: तिरछी रेखाएँ, नाटकीय रोशनी (कियारोस्कूरो और टेनेब्रिज़्म), घुमावदार दीवारें और गुंबद, सोना और भ्रम वाली छतें, बासो कोंतिनुओ और गुँथे हुए स्वरों वाला संगीत, और विरोधाभास, चौंकाने वाले रूपकों और बीतते समय से भरा लेखन। मुख्य नाम: कारावाज्जो, बेर्निनी, रूबेन्स, रेम्ब्रांट, वेलाज़्केज़, बोर्रोमिनी, मोंतेवेर्दी, विवाल्दी, बाख़, हैंडल, गोंगोरा, डन। क्लासिकवाद ने इसका उत्तर व्यवस्था, तर्क और शांति से दिया।
- स्वच्छंदतावाद (रोमांटिसिज़्म) – स्वच्छंदतावाद साहित्य, कला और संगीत का एक आंदोलन था, लगभग 1780 से 1850 तक। यह तर्क के युग के कड़े नियमों और धुएँ भरे कारख़ाना-शहरों के विरोध में उभरा। स्वच्छंदतावादी प्रकृति, ख़ासकर जंगली और 'उदात्त' प्रकृति, गहरी व्यक्तिगत भावना, आज़ाद व्यक्ति, कल्पना और सपनों, अतीत और लोक-संस्कृति को महत्व देते थे। मुख्य नाम: वर्ड्सवर्थ, कीट्स, गोएथे, पुश्किन, मैरी शेली, विक्टर ह्यूगो, चित्रकार टर्नर और फ़्रीड्रिख़, और संगीतकार शोपां व शूबर्ट।
- अभिव्यंजनावाद: जो दिखता है नहीं, जो महसूस होता है – अभिव्यंजनावाद (लगभग 1905–1925) एक आधुनिक कला आंदोलन था जो बाहर की दुनिया नहीं, अंदर की भावनाएँ दिखाता था। कलाकार आकार मोड़ते, असली न लगने वाले तेज़ रंग और खुरदुरे ब्रश-स्ट्रोक लगाते थे — डर, ग़ुस्सा, ख़ुशी या अकेलापन दिखाने के लिए। अग्रदूत: वान गॉग और मुंक। पेरिस में फ़ॉविज़्म (माटीस) ने रंग को आज़ाद किया; जर्मनी में डी ब्रुके (किर्शनर) ने नुकीले आकार और डेर ब्लाउए राइटर (कैंडिंस्की, मार्क) ने रंग को आत्मिक भावना माना। फ़िल्म, नाटक, कविता और कहानी पर भी इसका असर पड़ा।
- कला और साहित्य में अवाँ-गार्द आंदोलन – अवाँ-गार्द (फ़्रेंच में "अगली टुकड़ी") उन कलाकारों और लेखकों का नाम है जिन्होंने लगभग 1905 से 1970 तक कला के पुराने नियम जान-बूझकर तोड़े। फ्यूचरिज़्म ने रफ़्तार और मशीनों की प्रशंसा की; अभिव्यंजनावाद ने भीतर की भावना दिखाई; दादा ने पहले विश्वयुद्ध के सदमे के बाद बकवास, संयोग और विरोध का सहारा लिया; अतियथार्थवाद ने स्वचालित लेखन से सपनों और अवचेतन को खोजा; रचनावाद ने नए समाज के लिए साफ़, उपयोगी आकार बनाए। दो विश्वयुद्धों के बीच अवाँ-गार्द कवियों ने तुक और तय छंद छोड़े, पन्ने पर शब्दों के आकार से खेले और शहरों व मशीनों पर लिखा। 1945 के बाद फ़्लक्सस जैसे समूहों ने कला को घटनाओं और रोज़मर्रा के कामों में बदल दिया।
5. Nature, society and communication in art
Art Nouveau and organic architecture · Bauhaus and Art Deco · Iron and glass architecture and the Modern Movement · Art and mass media: poster to Pop Art · Screen art and digital art · Art and ecology · Art for social change and urban art
- आर्ट नूवो और 1900 के आसपास की कला – आर्ट नूवो (फ़्रेंच में "नई कला") एक शैली थी जो लगभग 1890 से 1914 तक यूरोप और दूसरी जगहों पर फैली। पुरानी यूनानी, रोमन या गॉथिक शैलियों की नक़ल करने की जगह कलाकारों ने पौधों, फूलों, कीड़ों और पानी से लंबी लहराती "चाबुक जैसी" रेखाएँ लीं। उन्होंने मुड़ा लोहा और रंगीन काँच जैसे नए पदार्थ इस्तेमाल किए, और इमारत, फ़र्नीचर, पोस्टर और गहनों को एक ही शैली दी। उसी समय प्रतीकवादी चित्रकारों ने सपने और भावनाएँ दिखाईं, और आरंभिक अभिव्यंजनावादियों ने मन की भावना दिखाने के लिए तेज़ रंग लगाए। जैविक वास्तुकला ने यह विचार आगे बढ़ाया: ऐसी इमारतें जो प्रकृति से मेल खाएँ।
- डिजिटल कला और मीडिया कला – एनालॉग कला भौतिक सामग्री से बनती है; डिजिटल कला संख्याओं के रूप में बनती और रखी जाती है। रास्टर चित्र पिक्सेल का ग्रिड है (रिज़ॉल्यूशन = पिक्सेल की संख्या); वेक्टर चित्र बिंदु और वक्र रखता है और हर आकार में साफ़ रहता है। डिजिटल औज़ार परतें, अनडू, ख़ास ब्रश और पेन टैबलेट देते हैं। कलाकार अक्सर दोनों मिलाते हैं: बनाओ, स्कैन करो, सुधारो, छापो, फिर रंगो। मीडिया कला स्क्रीन, प्रकाश, ध्वनि, कोड और दर्शक की भागीदारी को सामग्री बनाती है: वीडियो कला, प्रोजेक्शन मैपिंग, इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन, जनरेटिव कला, वेब और गेम कला। हर माध्यम की ख़ूबियाँ बदल देती हैं कि कृति कैसे बनती, दिखती और महसूस होती है।
- कला और प्रकृति: खुले में चित्र, लैंड आर्ट और इको आर्ट – कलाकार प्रकृति को चार तरह से इस्तेमाल करते हैं: बदलती रोशनी में खुले में चित्र बनाते हैं (प्लेन-एयर), कैमरे से दृश्य का एक हिस्सा चुनते हैं, प्रकृति में ही कृति बनाते हैं (लैंड आर्ट), और ऐसी कला बनाते हैं जो प्रकृति को हो रहे नुक़सान की चेतावनी दे या कचरे और प्राकृतिक चीज़ों से टिकाऊ ढंग से बने।
- सार्वजनिक कला: हम सबकी साझा जगहों की कला – सार्वजनिक कला वह कला है जो साझा जगहों पर हो — चौक, पार्क, सड़क, स्टेशन और दीवारें — जहाँ कोई भी बिना टिकट देख सके। इसमें स्मारक और मूर्तियाँ, भित्ति-चित्र (म्यूरल), भ्रम-चित्र (trompe-l'oeil, जो नक़ली गहराई से आँख को धोखा दे), स्ट्रीट आर्ट और ग्रैफ़िटी, किसी एक जगह के लिए बनी स्थल-विशेष कला, अस्थायी इंस्टॉलेशन और शहरी हस्तक्षेप, और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बनी सामुदायिक कला आती है। सार्वजनिक कला इतिहास याद दिला सकती है, जगह को सुंदर बना सकती है, मोहल्ले की कहानी कह सकती है, बहस छेड़ सकती है या सामाजिक बदलाव ला सकती है। क्योंकि यह सबकी जगह पर है, सवाल उठते हैं: फ़ैसला कौन करे, पैसा कौन दे, क्या यह क़ानूनी है, और क्या लोग इसे अपना मानते हैं? कला को जगहें भी चाहिए: संग्रहालय, गैलरी और कला के लिए बनी इमारतें, साथ ही गलियाँ और इंटरनेट।
6. Methods and strategies
Methods for studying artworks · Sharing tasks in group art projects · Project methodology in art · Choosing styles, techniques and languages
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।
- सहयोग और टीमवर्क – सहयोग यानी लोग एक साझा लक्ष्य के लिए मिलकर काम करें, विचार, काम और श्रेय बाँटें। अच्छी टीमें साफ़ लक्ष्य तय करती हैं, काम को ताक़त के हिसाब से भूमिकाओं में बाँटती हैं और साझा माध्यमों से बात करती हैं। संवाद की कड़ियाँ तेज़ी से बढ़ती हैं (n(n−1)/2), इसलिए 4–7 लोगों की टीम अक्सर अच्छी चलती है। टीमें चरणों से गुज़रती हैं: गठन, टकराव, नियम, प्रदर्शन और समापन। मतभेद सामान्य है और सुनने, नियमों और समस्या पर ध्यान से सुलझता है। सहयोगी समीक्षा (सराहना, प्रश्न, सुझाव) काम बेहतर बनाती है।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
- कला सामग्री और तकनीकें: सही माध्यम कैसे चुनें – कलाकार वह सामग्री (माध्यम) चुनते हैं जिससे मनचाहा असर मिले। हर रंग (पेंट) में पिगमेंट यानी रंगीन चूर्ण और बाइंडर यानी चिपकाने वाला द्रव होता है: तैल रंग में अलसी का तेल, जल रंग में गोंद (गम अरेबिक), एक्रेलिक में एक्रेलिक राल, टेम्परा में अंडा। सूखे माध्यम हैं ग्रेफ़ाइट पेंसिल (H = सख़्त और हल्की, B = नरम और गहरी), चारकोल, पेस्टल और रंगीन पेंसिल। गीले माध्यम हैं स्याही, जल रंग, गुआश, एक्रेलिक और तैल रंग। पारदर्शी माध्यम में नीचे की परत दिखती है, अपारदर्शी उसे ढक देता है। सपोर्ट वह सतह है जिस पर काम होता है: कागज़, कैनवास, लकड़ी, दीवार। त्रि-आयामी काम में मिट्टी से गढ़ना, तराशना, जोड़ना और ढलाई आते हैं; छापा कला में एक ब्लॉक या स्क्रीन से कई प्रतियाँ बनती हैं। डिजिटल माध्यम में टैबलेट, फ़ोटो और वीडियो हैं। अच्छे कलाकार सामग्री को परखते हैं, प्रयोग से काम निखारते हैं और उसे सुरक्षित व टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल करते हैं।