परिप्रेक्ष्य क्या है: क्षितिज रेखा और आँख की ऊँचाई
परिप्रेक्ष्य 3D चीज़ों को सपाट काग़ज़ पर वैसे बनाने का तरीका है जैसे आँख देखती है। दो सरल बातें: दूर की चीज़ें छोटी दिखती हैं, और दूर जाती समानांतर रेखाएँ मिलती दिखती हैं।
क्षितिज रेखा आँख की ऊँचाई पर होती है। समुद्र तट पर यह वहाँ है जहाँ समुद्र और आसमान मिलते हैं। बैठो तो नीचे, चढ़ो तो ऊपर। इसके नीचे की चीज़ें ऊपर की सतह दिखाती हैं; ऊपर की चीज़ें नीचे की सतह।
यूरोप के पुनर्जागरण कलाकारों ने रेखीय परिप्रेक्ष्य के नियम बनाए; दूसरी जगहों के कलाकार (चीनी स्क्रॉल चित्रकार, मुग़ल लघुचित्रकार) गहराई दिखाने के और तरीके अपनाते थे, जैसे चीज़ों को एक-दूसरे के आगे रखना और दूर की चीज़ों को पन्ने पर ऊपर बनाना।
एक-बिंदु परिप्रेक्ष्य
जब तुम किसी चीज़ के सामने वाले हिस्से को सीधे देखते हो (सड़क, गलियारा, कमरा), तब एक-बिंदु (केंद्रीय) परिप्रेक्ष्य लो।
- क्षितिज रेखा खींचो और उस पर एक लोप बिंदु (VP) लगाओ।
- सामने की सतह को असली आयत की तरह बनाओ (आड़ी और खड़ी रेखाएँ)।
- हर कोने को हल्की रेखा से VP से जोड़ो।
- गहराई चुनो और पीछे की किनारियाँ सामने वाली के समानांतर बनाओ।
- फ़ालतू सहायक रेखाएँ मिटा दो।
आकार और दूरी
आँख और चित्र के सरल मॉडल में, बना हुआ आकार 1 ÷ दूरी के अनुपात में होता है:
h′ = h × d₀ ÷ d, जहाँ h असली ऊँचाई, d दूरी और d₀ एक तय संदर्भ दूरी (चित्र-तल) है।
यानी दुगनी दूरी पर चीज़ आधी ऊँची बनती है। एक पंक्ति में बराबर ऊँची चीज़ों की चोटियाँ एक रेखा पर होती हैं जो लोप बिंदु तक जाती है।
दो-बिंदु और तीन-बिंदु परिप्रेक्ष्य
दो-बिंदु (कोणीय) परिप्रेक्ष्य: जब डिब्बे या इमारत का कोना सामने हो, तो क्षितिज के दोनों ओर एक-एक लोप बिंदु होता है। खड़ी किनारियाँ खड़ी रहती हैं। आड़ी किनारियों का हर समूह अपने VP तक जाता है। गली के कोने की इमारत का यही दृश्य है।
तीन-बिंदु परिप्रेक्ष्य ऊँची मीनारों के लिए ऊपर या नीचे तीसरा VP जोड़ता है।
हाथ से स्केच का सुझाव: VP दूर-दूर रखो (काग़ज़ से बाहर भी), ताकि डिब्बे खिंचे हुए न लगें।
परिप्रेक्ष्य में छाया
दीपक (बिंदु प्रकाश) के साथ: दीपक से चीज़ की चोटी से गुज़रती प्रकाश-किरण खींचो, और दीपक के नीचे वाले बिंदु से चीज़ के पैर से गुज़रती ज़मीन की रेखा। जहाँ दोनों मिलें, वहीं छाया का सिरा है।
धूप में किरणें समानांतर होती हैं, इसलिए सब छायाएँ एक ही दिशा में जाती हैं। नीचा सूरज लंबी छाया देता है, ऊँचा सूरज छोटी। छायांकन (रोशन पक्ष, छाया पक्ष, पड़ती छाया) से आकार ठोस लगते हैं।
करके देखो
किसी लंबे गलियारे या सीधी सड़क पर हाथ सीधा करके पेंसिल को किनारे की रेखा पर रखो। दो किनारे की रेखाओं को वहाँ तक देखो जहाँ वे मिलती हैं: वही लोप बिंदु है। फिर बैठकर देखो कि वह कैसे हिलता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- क्षितिज रेखा = आँख की ऊँचाई
- दूर जाती समानांतर रेखाएँ क्षितिज पर लोप बिंदु (VP) पर मिलती हैं
- एक-बिंदु: 1 VP; दो-बिंदु: 2 VP; तीन-बिंदु: 3 VP
- बनी ऊँचाई h′ = h × d₀ ÷ d (आकार ∝ 1 ÷ दूरी)
- छाया का सिरा = चोटी से गुज़रती किरण ∩ पैर से गुज़रती ज़मीन रेखा
- छाया की लंबाई (धूप) = ऊँचाई ÷ tan(सूर्य का कोण)
हल किए गए उदाहरण
1. 2 मी का खंभा 5 मी दूर होने पर 4 सेमी ऊँचा बनता है। 10 मी पर वही खंभा कितना ऊँचा बनेगा?
आकार ∝ 1 ÷ दूरी। दूरी दुगनी (5 → 10 मी), तो आकार आधा: 4 ÷ 2 = 2 सेमी।
2. 3 मी दूर का पेड़ 6 सेमी बनता है। वैसा ही पेड़ कितनी दूर हो कि 2 सेमी बने?
h′ × d स्थिर: 6 × 3 = 18। इसलिए d = 18 ÷ 2 = 9 मी।
3. क्षितिज रेखा के ऊपर डिब्बा बनाया। उसकी ऊपरी सतह दिखेगी या निचली?
आँख से ऊपर होने पर निचली सतह दिखती है, जैसे ऊँची अलमारी को नीचे से देखना।
4. घन का एक किनारा सीधे तुम्हारी ओर है। कितने लोप बिंदु चाहिए?
दो: आड़ी किनारियों का हर समूह अपने VP तक जाता है (दो-बिंदु परिप्रेक्ष्य)। खड़ी किनारियाँ खड़ी रहती हैं।
5. 1.5 मी की छड़ी धूप में है। सूरज क्षितिज से 45° ऊपर है। छाया कितनी लंबी?
छाया = ऊँचाई ÷ tan 45° = 1.5 ÷ 1 = 1.5 मी।
6. दीपक 4 मी ऊँचा है। 1 मी की छड़ी दीपक के पैर से 3 मी दूर है। छाया कितनी लंबी?
समरूप त्रिभुज: 4 ÷ (3 + s) = 1 ÷ s → 4s = 3 + s → 3s = 3 → s = 1 मी।
आम गलतियाँ
- लोप बिंदु को क्षितिज के ऊपर या नीचे रखना। एक- और दो-बिंदु में VP क्षितिज पर ही होते हैं।
- एक- या दो-बिंदु में खड़ी किनारियों को तिरछा करना। खड़ी रेखाएँ खड़ी रहती हैं।
- दूर की चीज़ों को पास वाली जितना बड़ा बनाना। दूरी के साथ आकार घटता है।
- छायाएँ मनमानी दिशा में बनाना। उन्हें प्रकाश-किरण और ज़मीन रेखा से ढूँढो।