पुनर्जन्म क्यों? मानववाद, इटली और संरक्षक
रेनेसां फ़्रांसीसी शब्द है जिसका अर्थ है "पुनर्जन्म"। 1400 के दशक में इतालवी शहरों के विद्वानों ने पुराने यूनानी-रोमन ग्रंथ और खंडहर पढ़े। इस आंदोलन को मानववाद (humanism) कहते हैं: धार्मिक आस्था के साथ-साथ मनुष्य की क्षमता, तर्क और प्रकृति की सुंदरता को केंद्र में रखना।
इटली में धनी व्यापारिक और बैंकिंग शहर थे (फ़्लोरेंस, वेनिस, मिलान, रोम) और चारों ओर रोमन खंडहर। कला का ख़र्च संरक्षक उठाते थे: फ़्लोरेंस का बैंकर मेदिची परिवार, रोम के पोप, शासक, चर्च और शहरी श्रेणियाँ (guilds)। संरक्षक विषय और कभी-कभी सामग्री भी तय करते थे।
कलाकारों का दर्जा बढ़ा: कार्यशाला के कारीगर से सम्मानित "प्रतिभा" तक, जो अपने काम पर हस्ताक्षर करते और कला-सिद्धांत लिखते थे।
नई तकनीकें: परिप्रेक्ष्य, शरीर-रचना, प्रकाश और तेल रंग
- रेखीय परिप्रेक्ष्य: दूर जाती समांतर रेखाएँ क्षितिज रेखा पर एक लोप-बिंदु पर मिलती हैं। ब्रुनेलेस्की ने लगभग 1415 में दिखाया; अल्बर्टी ने 1435 में नियम लिखे। मसाच्चो का त्रिमूर्ति भित्तिचित्र इसके पहले प्रयोगों में है।
- वायवीय परिप्रेक्ष्य: दूर की चीज़ें हल्की और नीली दिखती हैं।
- शरीर-रचना और अनुपात: कलाकारों ने हड्डियाँ और मांसपेशियाँ पढ़ीं, कभी शव-विच्छेदन से भी, और रोमन लेखकों के आदर्श अनुपात अपनाए (जैसे फैली बाँहें = ऊँचाई)।
- कॉन्त्रापोस्तो: वज़न एक पैर पर, कूल्हे और कंधे झुके, जिससे मूर्ति सहज और जीवित लगे।
- कियारोस्कूरो (प्रकाश-अंधकार) से घनत्व; स्फ़ुमातो (लियोनार्डो) से धुएँ जैसे मुलायम किनारे।
- तेल रंग, फ़्लैंडर्स में निखरा, धीरे सूखता है, पतली परतें और बारीक विवरण देता है; इसने अंडे वाले टेम्परा की जगह ली और फ़्रेस्को (गीले प्लास्टर पर रंग) के साथ चला।
- छपाई: काष्ठ-छापे और उत्कीर्णन (ड्यूरर) से चित्र तेज़ी से पूरे यूरोप में फैले।
इटली में आरंभिक और उच्च पुनर्जागरण
आरंभिक पुनर्जागरण (लगभग 1400–1490, फ़्लोरेंस): ब्रुनेलेस्की (परिप्रेक्ष्य, 1436 में पूरा गिरजाघर का गुंबद), दोनातेल्लो (स्वतंत्र खड़ी कांस्य मूर्तियाँ), मसाच्चो (असली रोशनी में ठोस आकृतियाँ), बोतिचेल्ली (सुंदर पौराणिक दृश्य), पिएरो देल्ला फ़्रांचेस्का (ज्यामिति और शांति)।
उच्च पुनर्जागरण (लगभग 1490–1527, मुख्यतः रोम): संतुलन और सामंजस्य का छोटा शिखर।
- लियोनार्डो दा विंची: स्फ़ुमातो, प्रकृति का बारीक अध्ययन, 'अंतिम भोज' भित्तिचित्र जिसमें सारी रेखाएँ ईसा के सिर पर मिलती हैं।
- माइकलएंजेलो: मूलतः मूर्तिकार; संगमरमर का डेविड; सिस्टीन चैपल की छत पर शक्तिशाली आकृतियाँ।
- राफ़ेल: शांत, संतुलित समूह, जैसे भव्य रोमन कक्ष में प्राचीन दार्शनिकों का भित्तिचित्र।
- वेनिस: तिशियन और जियोर्जोने ने रेखांकन से ज़्यादा रंग और तेल रंग पर ज़ोर दिया।
वास्तुकला: ब्रामांते आदि ने रोमन स्तंभ, गोल मेहराब, गुंबद और सममित केंद्रीय योजनाएँ फिर अपनाईं।
उत्तरी पुनर्जागरण
फ़्लैंडर्स, नीदरलैंड और जर्मनी में कलाकार ज़्यादातर व्यापारियों और चर्चों के लिए काम करते थे। उन्हें प्राचीन खंडहरों से ज़्यादा बारीक विवरण में रुचि थी।
- यान वान आइक: तेल की परतों के उस्ताद; छोटे प्रतिबिंब और बनावट, जैसे उत्तल दर्पण वाला दंपति का चित्र।
- अल्ब्रेख्त ड्यूरर: इटली गए; परिप्रेक्ष्य और अनुपात उत्तर में लाए; छापों और आत्म-चित्रों के लिए प्रसिद्ध।
- हिएरोनिमस बॉश: अनोखे, कल्पनाशील नैतिक दृश्य।
- पीटर ब्रूगेल: गाँव का जीवन, ऋतुएँ और भू-दृश्य।
- हान्स होल्बाइन: यथार्थवादी दरबारी व्यक्ति-चित्र।
धर्मसुधार (1517 से) के बाद कुछ उत्तरी क्षेत्रों में धार्मिक चित्र घटे, इसलिए व्यक्ति-चित्र, भू-दृश्य और दैनिक जीवन के दृश्य बढ़े।
मैनरिज़्म: संतुलन तोड़ना
लगभग 1520–1527 के बाद (1527 में रोम की लूट एक प्रचलित निशान है) कई कलाकार शांत संतुलन से हट गए। मैनरिज़्म में लंबे शरीर, लंबी गर्दनें, मरोड़ी हुई मुद्राएँ (figura serpentinata), भीड़ भरी या अस्पष्ट जगह और अनोखे तीखे रंग होते हैं। इसमें नज़ाकत और चतुराई ("मैनर") को महत्त्व मिला।
उदाहरण: पोंतोर्मो, पार्मिजानिनो (बहुत लंबी गर्दन वाली मैडोना), ब्रोंज़िनो (ठंडे, चमकदार व्यक्ति-चित्र), मूर्तिकला में जियाम्बोलोन्या, और बाद में एल ग्रेको। लगभग 1600 में मैनरिज़्म से बारोक शुरू होता है।
पहचान: उच्च पुनर्जागरण = संतुलित, स्पष्ट, स्वाभाविक; मैनरिज़्म = खिंचा, मरोड़ा, तनाव भरा।
करके देखिए: एक-बिंदु परिप्रेक्ष्य में कमरा बनाइए
पन्ने पर क्षितिज रेखा खींचिए और एक लोप-बिंदु लगाइए। पीछे की दीवार के लिए आयत बनाइए, फिर उसके कोनों को लोप-बिंदु की सीध में पन्ने के किनारों तक जोड़िए। फ़र्श की टाइलें बनाइए: बगल की रेखाएँ बिंदु तक जाती हैं, सामने के किनारे क्षैतिज रहते हैं और पीछे जाते हुए पास-पास होते जाते हैं। आख़िरी चरण से मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मानववाद: मनुष्य की क्षमता और प्राचीन (यूनानी-रोमन) ज्ञान पर ध्यान
- रेखीय परिप्रेक्ष्य: दूर जाती समांतर रेखाएँ क्षितिज पर लोप-बिंदु पर मिलती हैं
- कियारोस्कूरो: रूप उभारने के लिए प्रकाश और अंधकार का तेज़ अंतर
- स्फ़ुमातो: किनारों का धुएँ जैसा मुलायम मेल (लियोनार्डो)
- कॉन्त्रापोस्तो: वज़न एक पैर पर, सहज स्वाभाविक मुद्रा
- फ़्रेस्को: गीले प्लास्टर पर रंग; टेम्परा: अंडे वाला रंग; तेल: धीरे सूखे, परतें
- मैनरिज़्म: लंबी, मरोड़ी आकृतियाँ और तनाव भरी जगह (लगभग 1520–1600)
हल किए गए उदाहरण
1. चित्र में सममित कक्ष में शांत समूह है और फ़र्श की सभी रेखाएँ बीच की आकृतियों के पीछे मिलती हैं। कौन-सा काल और कौन-सी तकनीक?
उच्च पुनर्जागरण: एक लोप-बिंदु वाला रेखीय परिप्रेक्ष्य, समरूपता और संतुलन।
2. छोटे फलक पर कमरा है, गोल दर्पण में छोटा प्रतिबिंब और कुत्ते का हर बाल रंगा है। कहाँ और किस माध्यम से?
उत्तरी पुनर्जागरण (फ़्लैंडर्स), पतली परतों वाला तेल रंग जो बारीक विवरण देता है।
3. मैडोना की गर्दन बहुत लंबी है, बच्चा बहुत बड़ा लगता है और जगह उलझी है। कौन-सी शैली?
मैनरिज़्म: स्वाभाविक संतुलन की जगह जान-बूझकर खिंचाव और तनाव।
4. फ़्लोरेंस पुनर्जागरण कला का पहला केंद्र क्यों बना?
वह धनी बैंकिंग-व्यापारिक शहर था, प्रतिस्पर्धी संरक्षक थे (मेदिची, श्रेणियाँ, चर्च), विद्वान प्राचीन ग्रंथ पढ़ रहे थे और रोमन खंडहर व नमूने पास थे।
आम गलतियाँ
- सोचना कि पुनर्जागरण ने धर्म छोड़ दिया। ज़्यादातर कलाकृतियाँ अब भी धार्मिक थीं; मानववाद ने मनुष्य और प्रकृति में रुचि जोड़ी।
- कियारोस्कूरो (प्रकाश-अंधकार अंतर) और स्फ़ुमातो (धुँधले मुलायम किनारे) को मिला देना।
- कहना कि तेल रंग इटली में बना। यह फ़्लैंडर्स में निखरा और फिर दक्षिण गया।
- मैनरिज़्म को 'ख़राब' पुनर्जागरण कला कहना। उसका खिंचाव सोची-समझी शैली थी।