प्रागैतिहासिक और प्राचीन काल में नृत्य
लगभग 10,000 साल पुराने गुफा-चित्रों में भी लोग समूह में नाचते दिखते हैं। शुरुआती नृत्य पूजा, उत्सव, इलाज और कहानी कहने का तरीका था।
- घेरा और पंक्ति नृत्य: सब शामिल होते हैं, कोई दर्शक नहीं।
- मिस्र: मंदिर और अंतिम संस्कार की रस्मों में नर्तक।
- यूनान: थिएटर में कोरस नाचता-गाता था; 'कोरियोग्राफ़ी' शब्द यूनानी 'कोरिया' (नृत्य) और 'ग्राफ़ीन' (लिखना) से बना।
- भारत: भरतमुनि का नाट्यशास्त्र (लगभग 200 ई.पू.–200 ई.) नृत्य, नाटक, संगीत, मुद्राओं और भावों (रस) को समझाता है। यही भारतीय शास्त्रीय नृत्य की जड़ है।
मध्य युग और पुनर्जागरण
यूरोप में आम लोग त्योहारों पर घेरे वाले गोल नृत्य करते थे। राजदरबारों में नृत्य अच्छी शिक्षा की निशानी बन गया।
- बास-डांस और पावान जैसे नृत्य धीमे और फिसलते हुए थे; गैलियार्ड में छोटी छलाँगें थीं।
- नृत्य-गुरुओं ने कदमों और नियमों वाली पहली किताबें लिखीं।
- दरबारी कार्यक्रमों में नृत्य, संगीत, कविता और पोशाक मिलते थे। फ़्रांस में यही बैले दे कूर (दरबारी बैले) बना।
इसी समय भारत में नृत्य मंदिरों और राजदरबारों में था, और लोक-नृत्य गाँव की परंपराएँ ज़िंदा रखते थे।
बारोक और क्लासिसिज़्म
- लुई चौदहवें ख़ुद नाचते थे; उन्होंने 1661 में शाही नृत्य अकादमी बनाई। बैले एक पेशा बन गया।
- पियेर बोशाँ ने पैरों की पाँच स्थितियाँ तय कीं, जो आज भी चलती हैं। पैर कूल्हे से बाहर मुड़ते हैं (टर्न-आउट), ताकि नर्तक आसानी से बगल में चल सके और दर्शकों की ओर खुला दिखे।
- बैले नाच-घर से निकलकर प्रोसीनियम मंच (फ़्रेम वाला मंच, जिसे सामने से देखते हैं) पर आया।
- सामाजिक नृत्य: सुंदर मिनुएट।
- 1700 के दशक में ज़्याँ-जॉर्ज नोवेर ने बैले द'एक्शन माँगा: नृत्य भाव के साथ कहानी कहे, सिर्फ़ कदम न दिखाए।
रोमांटिक और क्लासिकल बैले
- रोमांटिक बैले (लगभग 1830–1850): आत्माओं, परियों और खोए प्यार की कहानियाँ। नर्तकियाँ भारहीन दिखने के लिए पॉइंट (पंजों की नोक) पर उठती थीं। सफ़ेद, घंटी जैसे लंबे टूटू। मशहूर रचनाएँ: ला सिल्फ़ीड (1832), जिज़ेल (1841)। मारी टाल्योनी जैसी नर्तकियाँ स्टार बनीं।
- क्लासिकल बैले (1800 के आख़िर में, ज़्यादातर रूस में): कोरियोग्राफ़र मारियस पेतिपा और संगीतकार चाइकोव्स्की ने स्लीपिंग ब्यूटी, स्वान लेक और द नटक्रैकर बनाए। छोटे कड़े टूटू पैर दिखाते थे; बड़े समूह-दृश्य और कठिन एकल।
- इसी समय राष्ट्रीय और लोक-नृत्य (जैसे पोलैंड के पोलोनेज़ और माज़ुर्का, हंगरी का चारदाश) बैले और नाच-घरों में आए।
20वीं सदी का बैले, आधुनिक और समकालीन नृत्य
- बैले रूस (1909–1929, सर्गेई दियाग़िलेव): आधुनिक संगीत और चित्रकला के साथ छोटे नए बैले; नर्तक निजिंस्की और पावलोवा; स्ट्राविंस्की के द राइट ऑफ़ स्प्रिंग (1913) ने दर्शकों को चौंका दिया।
- नव-क्लासिकल बैले: न्यूयॉर्क में जॉर्ज बालानचीन — सादी पोशाक, तेज़ कदम, संगीत ही कहानी।
- आधुनिक नृत्य: इसाडोरा डंकन ढीले कपड़ों में नंगे पैर नाचीं; मार्था ग्राहम ने साँस का संकुचन और विमोचन (contraction and release) इस्तेमाल किया; डोरिस हम्फ़्री ने गिरना और उठना; रुडोल्फ़ लाबान ने चाल को समझने और लिखने का तरीका बनाया।
- उत्तर-आधुनिक और समकालीन: मर्स कनिंघम ने चालों का क्रम संयोग से तय किया; पीना बाउश ने नृत्य और नाटक मिलाया (तान्ज़थिएटर); एल्विन एली ने अफ़्रीकी-अमेरिकी कहानियाँ मंच पर लाईं।
- स्ट्रीट डांस: 1970 के दशक से हिप-हॉप, ब्रेकिंग, पॉपिंग और लॉकिंग; ब्रेकिंग 2024 ओलंपिक में था।
- भारत: रुक्मिणी देवी अरुंडेल ने भरतनाट्यम को मंच पर फिर से जीवित किया; उदय शंकर ने भारतीय और पश्चिमी नृत्य मिलाया; आज भारतीय दल दुनिया भर में जाते हैं और खजुराहो नृत्य महोत्सव जैसे उत्सव शास्त्रीय नृत्य मनाते हैं।
नृत्य, समाज और एथ्नोकोरियोलॉजी
एथ्नोकोरियोलॉजी नृत्य — ख़ासकर लोक और पारंपरिक नृत्य — को उसकी संस्कृति के भीतर पढ़ना है: कौन नाचता है, कब, क्यों और उसका मतलब क्या है।
- नृत्य बताता है कि कोई समूह कौन है: राष्ट्रीय नृत्य (पोलैंड का माज़ुर्का, आयरलैंड का स्टेप डांस, पंजाब का भांगड़ा) पहचान लिए चलते हैं।
- नृत्य समाज के साथ बदलता है: पुनर्जागरण में दरबारी नियम, आधुनिक नृत्य में महिलाओं के शरीर की आज़ादी, हिप-हॉप में शहर की ज़िंदगी।
- हर देश के अपने कोरियोग्राफ़र, गुरु और सिद्धांतकार हैं; किसी को पढ़ते समय पूछो: उन्होंने क्या बदला, और उनके समाज में तब क्या हो रहा था?
- किसी नृत्य-रचना को परखना: चाल, नर्तक, स्थान (मंच, सेट, रोशनी), ध्वनि और संदर्भ (समय, जगह, उद्देश्य) देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कोरियोग्राफ़ी (नृत्य-रचना): नृत्य बनाने और सजाने की कला (यूनानी कोरिया + ग्राफ़ीन)
- टर्न-आउट: पैरों को कूल्हे से बाहर की ओर घुमाना (बैले की नींव)
- पॉइंट: ख़ास जूतों में पंजों की नोक पर नाचना (रोमांटिक बैले से)
- संकुचन और विमोचन (contraction and release): मार्था ग्राहम की साँस पर आधारित तकनीक
- एथ्नोकोरियोलॉजी: नृत्य को उसकी संस्कृति के भीतर पढ़ना
हल किए गए उदाहरण
1. एक नृत्य में नर्तक बंद घेरे में हैं, सरल दोहराए कदम, ढोल, और कोई दर्शक नहीं। यह किस दौर या प्रकार का होगा?
समुदाय का लोक या रस्मी नृत्य, जैसा प्राचीन समय में था: सब शामिल होते हैं, घेरे का कोई 'सामने' नहीं, और ताल सबकी साझा है।
2. लंबे सफ़ेद घंटी जैसे टूटू में एक नर्तकी पॉइंट पर भूत बनकर नाचती है। रोमांटिक या क्लासिकल बैले?
रोमांटिक बैले (लगभग 1830–1850): लंबे सफ़ेद टूटू और अलौकिक कहानियाँ, जैसे ‘जिज़ेल’।
3. शाही नृत्य अकादमी (1661) और ‘द राइट ऑफ़ स्प्रिंग’ (1913) के बीच कितने साल बीते?
1913 − 1661 = 252 साल। इस बीच बैले फ़्रांसीसी दरबार से बैले रूस के आधुनिक झटके तक पहुँचा।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि बैले रूस में शुरू हुआ। यह इटली और फ़्रांस के दरबारों में शुरू हुआ; रूस ने 1800 के आख़िर में क्लासिकल बैले को मशहूर किया।
- रोमांटिक टूटू (लंबा, घंटी जैसा) और क्लासिकल टूटू (छोटा, कड़ा) में गड़बड़ करना।
- आधुनिक और समकालीन नृत्य को एक ही मानना। आधुनिक नृत्य लगभग 1900 में शुरू हुआ; समकालीन नृत्य (लगभग 1950 के बाद) कई तकनीकें मिलाता है।
- लोक-नृत्य को 'आसान' समझना। लोक-नृत्य में गहरे अर्थ होते हैं, जिन्हें संस्कृति के संदर्भ के बिना नहीं समझ सकते।