बरोक क्या था और क्यों आया?
बरोक लगभग 1600 से 1750 तक की मुख्य यूरोपीय शैली का नाम है। यह शब्द शायद पुर्तगाली भाषा के "टेढ़े-मेढ़े मोती" वाले शब्द से आया; बाद के आलोचकों ने इसे "अजीब, ज़रूरत से ज़्यादा" के अर्थ में लिया।
उसी समय क्यों?
- धर्मसुधार के बाद कैथोलिक चर्च (प्रति-धर्मसुधार) ऐसी कला चाहता था जो भावनाओं को छुए और लोगों को फिर चर्च की ओर खींचे।
- वर्साय के लुई चौदहवें जैसे शक्तिशाली राजा अपनी ताक़त दिखाने के लिए भव्य भवन और बगीचे बनवाते थे (निरंकुश राजतंत्र)।
- विज्ञान ब्रह्मांड को देखने का तरीका बदल रहा था (गैलीलियो, न्यूटन), इसलिए अनंतता, गति और प्रकाश कलाकारों को आकर्षित करते थे।
रोम से यह शैली स्पेन, फ़्रांस, मध्य और पूर्वी यूरोप (जैसे कीव और प्राग के नाशपाती-आकार गुंबदों वाले चर्च) तक, और औपनिवेशिक चर्चों के ज़रिए लैटिन अमेरिका और गोवा तक फैली।
बरोक चित्रकला और मूर्तिकला
- गति और तिरछी रेखाएँ: दृश्य सबसे नाटकीय पल पर पकड़ा जाता है।
- उजाला और अँधेरा: कियारोस्कूरो (तेज़ प्रकाश-छाया) और टेनेब्रिज़्म (चित्र का ज़्यादातर भाग लगभग काला, एक तेज़ रोशन जगह)। कारावाज्जो इसके उस्ताद हैं।
- भावना और यथार्थ: असली, आम चेहरे, धूल भरे पैर, झुर्रियाँ; संत जीवित लोगों की तरह।
- गहरे रंग: फ़्लैंडर्स के रूबेन्स।
- शांत रोज़मर्रा का बरोक हॉलैंड में: रेम्ब्रांट (गहरी रोशनी में चित्र), वरमीर (खिड़की से रोशन कमरे), खोपड़ी और मोमबत्ती वाले स्थिर-जीवन चित्र (वैनिटास: जीवन बीत जाता है)।
- स्पेन: वेलाज़्केज़ ने ढीली, असली-सी तूलिका से दरबार चित्रित किया।
मूर्तिकला
जियान लोरेंज़ो बेर्निनी ने संगमरमर को मुलायम और गतिशील बना दिया: मुड़ती आकृतियाँ, उड़ते कपड़े, जमा हुआ एक पल। उन्होंने मूर्ति, वास्तु और छिपी रोशनी को मिलाकर रंगमंच जैसा दृश्य बनाया।
बरोक वास्तुकला
- वक्र: अंदर-बाहर होते लहरदार मुखौटे; अंडाकार नक्शे (रोम में बोर्रोमिनी के छोटे चर्च)।
- गुंबद और मीनारें, मुड़े हुए स्तंभ, टूटे त्रिकोणिका (pediment)।
- भ्रम: चित्रित छतें जो स्वर्ग में खुलती लगती हैं, दर्पण और सोना।
- भव्य योजना: विशाल चौक (सेंट पीटर चौक का बाँहें फैलाता स्तंभ-घेरा) और लंबी धुरी व सजे बगीचों वाले महल (वर्साय)।
1700 के दशक का बाद वाला, हल्का और चंचल रूप रोकोको कहलाता है: हल्के रंग, सीपी जैसे आकार, छोटे कमरे।
बरोक संगीत
- बासो कोंतिनुओ: एक स्थिर बेस लाइन (चेलो, हार्पसीकॉर्ड) जो सबको सहारा देती है।
- बहुस्वरता (polyphony): एक साथ कई धुनें। फ़्यूग में एक विषय आता है और स्वर एक-एक करके उसे दोहराते हैं।
- सीढ़ीदार तीव्रता: तेज़ और धीमा अचानक बदलता है, सीढ़ी की तरह, धीरे-धीरे नहीं।
- अलंकरण: सुरों पर ट्रिल और सजावट।
- नए रूप: ओपेरा (मोंतेवेर्दी, लगभग 1607), ओरेटोरियो, कंचेर्टो (विवाल्दी का चार ऋतुएँ), सुइट।
बड़े नाम: मोंतेवेर्दी, पर्सेल, विवाल्दी, योहान सेबास्टियन बाख़, जॉर्ज फ़्रेडरिक हैंडल।
बरोक साहित्य और कविता
बरोक लेखक युद्धों, महामारी और धार्मिक संघर्षों के समय में जिए। उनके लेखन में बेचैनी और विरोध दिखता है:
- विरोध और विरोधाभास: जीवन और मृत्यु, शरीर और आत्मा, सपना और यथार्थ, धरती का सुख और स्वर्ग।
- वैनिटास और बीतता समय: हर सुंदर चीज़ मुरझा जाएगी।
- चौंकाने वाले रूपक (conceit) और भारी अलंकार: प्रेमियों की तुलना परकार की दो टाँगों से (तत्त्वमीमांसी कविता, जॉन डन)।
- स्पेन में दो शैलियाँ: कल्तेरानिस्मो (कठिन, सजी भाषा, गोंगोरा) और कोंसेप्तिस्मो (तीखे, चतुर विचार, केवेदो)।
- नाटक: काल्देरोन का नाटक जीवन एक सपना है पूछता है कि जीवन असली है या सपना।
- पूर्वी यूरोप: पोलिश, यूक्रेनी और रूसी बरोक कविता में शब्द-खेल, दिल या क्रॉस के आकार वाली चित्र-कविताएँ, धार्मिक और नैतिक विषय, अक्सर चर्च के विद्वानों द्वारा लिखे।
आम रूप: सॉनेट, नैतिक कविता, प्रवचन, चरवाहा-काव्य और लंबा महाकाव्य।
बरोक और क्लासिकवाद की तुलना
| बरोक | क्लासिकवाद | |
|---|---|---|
| उद्देश्य | भावना जगाना, चौंकाना | तर्क को संतुष्ट करना, साफ़ सिखाना |
| आकार | वक्र, तिरछे, खुले | सीधी रेखाएँ, सममिति, बंद |
| सजावट | भरपूर, बहुत सोना | संयमित |
| साहित्य | विरोधाभास, रूपक, विधाओं का मिश्रण | नियम (तीन एकताएँ), साफ़ भाषा, शुद्ध विधाएँ |
| संगीत | कई स्वर, कोंतिनुओ, सीढ़ीदार तेज़/धीमा | एक साफ़ धुन, धीरे-धीरे तेज़, सोनाटा रूप |
17वीं सदी का फ़्रांसीसी साहित्य (कॉर्नेय, रासीन, मोलियर) पहले से क्लासिक था जबकि दूसरी जगह चित्र और भवन बरोक थे, इसलिए दोनों अक्सर साथ-साथ रहे।
करके देखिए
फ़ोन से कोई भी फ़ोटो लीजिए। फिर अँधेरे कमरे में सिर्फ़ बगल से एक टॉर्च की रोशनी में वही दृश्य लीजिए। कौन ज़्यादा नाटकीय लगता है? आपने टेनेब्रिस्ट चित्र बना लिया। 3D के चरण 3 में स्पॉटलाइट खिसकाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बरोक: लगभग 1600–1750, पुनर्जागरण के बाद, क्लासिकवाद से पहले
- कियारोस्कूरो: प्रकाश और छाया का तेज़ विरोध
- टेनेब्रिज़्म: ज़्यादातर अँधेरा चित्र, एक तेज़ रोशनी
- बासो कोंतिनुओ: संगीत को सहारा देने वाली स्थिर बेस लाइन
- फ़्यूग: एक विषय जिसे स्वर एक-एक करके दोहराते हैं
- वैनिटास: याद दिलाना कि जीवन और सुंदरता बीत जाते हैं
- कंसीट (conceit): चौंकाने वाला, खींचा हुआ रूपक
- रोकोको: हल्का, चंचल बाद का बरोक (1700 का दशक)
हल किए गए उदाहरण
1. एक चित्र में अँधेरा कमरा है; रोशनी की एक किरण बुलाए जाने पर चौंके एक आदमी के चेहरे पर पड़ती है। कौन-सी शैली और कौन-सी तकनीक?
बरोक, टेनेब्रिज़्म (तीव्र कियारोस्कूरो) के साथ। रोशनी मुख्य पल और भावना को उभारती है, जैसे कारावाज्जो करते थे।
2. एक चर्च का मुखौटा बीच में अंदर और किनारों पर बाहर मुड़ता है, अंदर अंडाकार है। पुनर्जागरण या बरोक? दो कारण दीजिए।
बरोक: लहरदार मुखौटा गति पैदा करता है, और अंडाकार नक्शा बोर्रोमिनी जैसे बरोक वास्तुकारों की पहचान है। पुनर्जागरण भवनों में सपाट मुखौटे और वृत्त या वर्ग होते हैं।
3. एक कविता कहती है कि गुलाब सुबह सुंदर है और रात तक धूल, इसलिए युवा को मृत्यु के बारे में सोचना चाहिए। विषय और शैली बताइए।
वैनिटास (जीवन और सुंदरता का बीत जाना), बरोक कविता की पहचान, जीवन और मृत्यु के विरोध पर बनी।
4. एक रचना में वायलिन एक छोटी धुन बजाता है, फिर दूसरा वायलिन उसे ऊँचे सुर में दोहराता है जबकि पहला चलता रहता है, नीचे हार्पसीकॉर्ड और चेलो। रूप और बेस वाले हिस्से का नाम बताइए।
फ़्यूग (अनुकरणात्मक बहुस्वरता) और बासो कोंतिनुओ, बाख़ जैसे बरोक संगीत की पहचान।
आम गलतियाँ
- बरोक और पुनर्जागरण को मिला देना: पुनर्जागरण शांत, संतुलित और स्थिर है; बरोक नाटकीय, तिरछा और गतिशील।
- सोचना कि बरोक सिर्फ़ चित्रकला है। यह पूरी संस्कृति है: संगीत, रंगमंच, कविता, बगीचे और नगर-योजना भी।
- बरोक को रोकोको समझ लेना। रोकोको 1700 के दशक की बाद वाली, हल्की और चंचल शैली है, हल्के रंगों और छोटी सजावट वाली।
- कहना कि बरोक संगीत में एक मुख्य धुन और कॉर्ड होते हैं। वह क्लासिकवाद है; बरोक में अक्सर कोंतिनुओ के ऊपर कई बराबर धुनें होती हैं।