Italy Secondaria di secondo grado – classe 4ª Art history (liceo artistico, musicale e coreutico)
अध्याय: 1
1. 15th century to Impressionism
Renaissance · 17th–18th centuries · 19th century
- पुनर्जागरण कला (लगभग 1400–1600) – पुनर्जागरण कला लगभग 1400 में फ़्लोरेंस में शुरू हुई और 1600 तक इटली व उत्तरी यूरोप में फैली। मानववाद और प्राचीन यूनानी-रोमन कला से प्रेरित कलाकारों ने रेखीय परिप्रेक्ष्य, सही अनुपात और शरीर-रचना, प्रकाश-छाया (कियारोस्कूरो, स्फ़ुमातो) और तेल रंग अपनाए। मेदिची परिवार, पोप और शहरी श्रेणियाँ जैसे संरक्षक काम का ख़र्च उठाते थे। इस काल को आरंभिक पुनर्जागरण, उच्च पुनर्जागरण (लियोनार्डो, माइकलएंजेलो, राफ़ेल), उत्तरी पुनर्जागरण (वान आइक, ड्यूरर, ब्रूगेल) और मैनरिज़्म में बाँटते हैं।
- बरोक: गति में कला (लगभग 1600–1750) – बरोक लगभग 1600 से 1750 तक की यूरोपीय शैली है, जो चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, संगीत और साहित्य में दिखती है। यह धर्मसुधार (Reformation) के बाद रोम में पनपी, जब कैथोलिक चर्च और राजा लोगों को भावुक और प्रभावित करने के लिए कला का उपयोग करते थे। इसकी पहचान है गति, विरोध और भावना: तिरछी रेखाएँ, नाटकीय रोशनी (कियारोस्कूरो और टेनेब्रिज़्म), घुमावदार दीवारें और गुंबद, सोना और भ्रम वाली छतें, बासो कोंतिनुओ और गुँथे हुए स्वरों वाला संगीत, और विरोधाभास, चौंकाने वाले रूपकों और बीतते समय से भरा लेखन। मुख्य नाम: कारावाज्जो, बेर्निनी, रूबेन्स, रेम्ब्रांट, वेलाज़्केज़, बोर्रोमिनी, मोंतेवेर्दी, विवाल्दी, बाख़, हैंडल, गोंगोरा, डन। क्लासिकवाद ने इसका उत्तर व्यवस्था, तर्क और शांति से दिया।
- प्रभाववाद (इम्प्रेशनिज़्म) – प्रभाववाद (Impressionism) 1860–1870 के दशक में फ़्रांस में शुरू हुआ कला आंदोलन था। क्लॉद मोने, पियेर-ऑगस्त रेनुआ, एडगर देगा, कामी पिसारो, आल्फ़्रेड सिसले, बर्थ मोरिसो और मैरी कसाट जैसे चित्रकार बाहर खुली हवा में, जल्दी-जल्दी चित्र बनाते थे ताकि एक पल की बदलती रोशनी और माहौल पकड़ सकें। वे चमकीले, शुद्ध रंगों को दिखते ब्रश-स्ट्रोक में साथ-साथ रखते, छाया को रंगीन बनाते और रोज़ के आधुनिक जीवन को चित्रित करते थे। 1874 में पेरिस में उनकी पहली प्रदर्शनी का आलोचकों ने मज़ाक़ उड़ाया और मोने के चित्र 'इम्प्रेशन, सनराइज़' से नाम पड़ा। इसके बाद उत्तर-प्रभाववाद (सरा, वान गॉग, सेज़ान, गोगाँ) और आधुनिक कला आई; यह शब्द संगीत (दबूसी) और साहित्य के लिए भी इस्तेमाल हुआ।