अभिव्यंजनावाद क्या है?
अभिव्यंजनावाद (एक्सप्रेशनिज़्म) वह कला है जो कलाकार की अंदरूनी भावनाएँ दिखाती है, दुनिया की हूबहू नक़ल नहीं। यह लगभग 1905 से 1925 तक, ख़ासकर जर्मनी और ऑस्ट्रिया में, सबसे मज़बूत था।
मुख्य विशेषताएँ:
- विकृति (डिस्टॉर्शन): आकार मुड़े, खिंचे या टूटे।
- तेज़, असली न लगने वाले रंग: हरा चेहरा, लाल आसमान।
- खुरदुरे, दिखते ब्रश-स्ट्रोक और मोटी रेखाएँ।
- भावनात्मक विषय: डर, अकेलापन, ग़ुस्सा, शहर का शोर, और आत्मिक आशा भी।
अग्रदूत: वान गॉग (घूमते स्ट्रोक) और एडवर्ड मुंक, जिनकी द स्क्रीम (1893) में सूर्यास्त घबराहट की लहरें बन जाता है।
फ़ॉविज़्म से आकृतिमूलक अभिव्यंजनावाद तक
फ़ॉविज़्म 1905 में पेरिस में शुरू हुआ। एक आलोचक ने इन चित्रकारों को फ़ॉव यानी 'जंगली जानवर' कहा, क्योंकि उनके रंग चौंकाने वाले थे।
- कलाकार: हेनरी माटीस, आंद्रे डेरें, व्लामिंक।
- ट्यूब से सीधे शुद्ध, चमकीले, सपाट रंग; रंग भावना के लिए, सच्चाई के लिए नहीं।
- ज़्यादातर ख़ुशनुमा विषय: प्रकृति, बंदरगाह, कमरे, लोग।
- यह कुछ ही साल चला, पर इसने आगे की सारी कला के लिए रंग को आज़ाद कर दिया।
जर्मन चित्रकारों ने यह आज़ादी और आगे बढ़ाई। उनकी कला आकृतिमूलक रही (लोग, घर, सड़कें पहचान में आते हैं) पर ज़्यादा गहरी और भावुक हो गई। यही आकृतिमूलक अभिव्यंजनावाद है।
जर्मन अभिव्यंजनावाद: डी ब्रुके और डेर ब्लाउए राइटर
डी ब्रुके (पुल), ड्रेसडेन, 1905
- किर्शनर, हेकेल, श्मिट-रोटलुफ़; बाद में नोल्डे।
- नुकीले, कोणदार आकार; टकराते रंग; वुडकट (लकड़ी का छापा) फिर से लोकप्रिय किया।
- विषय: भीड़ भरी शहर की सड़कें, प्रकृति में लोग, भविष्य की ओर 'पुल'।
डेर ब्लाउए राइटर (नीला घुड़सवार), म्यूनिख, 1911
- कैंडिंस्की, फ़्रांज़ मार्क, गैब्रिएल म्यूंटर, आउगुस्त माके, पॉल क्ले।
- रंग और आकार में आत्मिक अर्थ। मार्क ने नीले-पीले जानवर बनाए; कैंडिंस्की ने रंग की तुलना संगीत से की और अमूर्त कला की ओर बढ़े।
ऑस्ट्रिया
शीले और कोकोश्का ने बेचैन, मुड़े हुए पोर्ट्रेट बनाए।
1933 के बाद नाज़ी सरकार ने इस कला को 'पतित' कहकर संग्रहालयों से हटा दिया। बाद में 1940 के दशक में अमेरिका में अमूर्त अभिव्यंजनावाद (पोलॉक, रॉथको) आया।
फ़िल्म, नाटक और साहित्य में अभिव्यंजनावाद
- फ़िल्म: डॉ. कालिगारी की कैबिनेट (1920) में पेंट किए हुए टेढ़े सेट और कठोर छायाएँ; फिर नोस्फ़ेरातु और मेट्रोपोलिस।
- नाटक: पात्र नाम नहीं, प्रकार ('आदमी', 'माँ'); छोटे चिल्लाते संवाद; सपने जैसे दृश्य।
- कविता और गद्य: छोटे, टूटे वाक्य, चीख़ें, दोहराए शब्द, दर्द या ख़ुशी के चरम पल। लेखक शांत वर्णन की जगह पात्र के अंदर का झटका दिखाता है।
- यूक्रेनी साहित्य में वासिल स्तेफ़ानिक ने गाँव के लोगों के दुख और ग़रीबी पर बहुत छोटी, तीखी कहानियाँ लिखीं — उन्हें अक्सर अभिव्यंजनावादी माना जाता है; ओल्हा कोबिल्यान्स्का और बाद में ओसिप तुर्यान्स्की ने भी गहरी भावना और प्रतीक का प्रयोग किया।
हर कला में एक नियम: पहले भावना, फिर यथार्थ।
करके देखो
अपना स्कूल या घर दो बार बनाओ। पहली बार जैसा वह सच में दिखता है। दूसरी बार जैसा वह परीक्षा वाले दिन या छुट्टियों से पहले के आख़िरी दिन महसूस होता है — सिर्फ़ रंग और आकार बदलो। फिर 3D स्लाइडर से तुलना करो। कौन-सा चित्र तुम्हारे बारे में ज़्यादा बताता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अभिव्यंजनावाद ≈ अंदर की भावना + विकृति + तेज़ असली न लगने वाले रंग + खुरदुरे स्ट्रोक
- अग्रदूत: वान गॉग, मुंक (द स्क्रीम, 1893)
- फ़ॉविज़्म (पेरिस, 1905): माटीस, डेरें — जंगली, ख़ुशनुमा रंग
- डी ब्रुके (ड्रेसडेन, 1905): किर्शनर — नुकीले आकार, वुडकट, शहर की बेचैनी
- डेर ब्लाउए राइटर (म्यूनिख, 1911): कैंडिंस्की, मार्क — रंग = आत्मिक भावना → अमूर्त कला
- चित्रकला से आगे: कालिगारी (1920) फ़िल्म, नाटक, कविता, कहानी
हल किए गए उदाहरण
1. 1905 पेरिस का एक चित्र: स्त्री के चेहरे पर हरी धारी, सपाट चमकीले रंग। कौन-सी शैली?
फ़ॉविज़्म। सुराग: भावना के लिए असली न लगने वाले चमकीले सपाट रंग; पेरिस; 1905 (माटीस ने अपनी पत्नी का ऐसा पोर्ट्रेट बनाया)।
2. सड़क का दृश्य: लंबे पतले लोग, मुखौटे जैसे चेहरे, नुकीले कोण, तीखे गुलाबी-हरे रंग। फ़ॉविज़्म या डी ब्रुके?
डी ब्रुके (जर्मन अभिव्यंजनावाद, जैसे किर्शनर)। नुकीले कोण और तनाव भरा शहर बेचैनी दिखाते हैं; फ़ॉविज़्म आमतौर पर शांत और ख़ुशनुमा है।
3. एक सूर्यास्त से प्रभाववाद और अभिव्यंजनावाद की तुलना करो।
प्रभाववादी उस पल की असली रोशनी और रंग बनाता है। अभिव्यंजनावादी आसमान को लाल लहरों में मोड़कर भावना दिखाता है, जैसे मुंक की 'द स्क्रीम' की घबराहट।
आम गलतियाँ
- प्रभाववाद और अभिव्यंजनावाद को मिला देना। प्रभाववाद बाहर की रोशनी, अभिव्यंजनावाद अंदर की भावना।
- सोचना कि अभिव्यंजनावादी असली जैसा नहीं बना सकते थे। उन्होंने जानबूझकर आकार मोड़े।
- कहना कि फ़ॉविज़्म और जर्मन अभिव्यंजनावाद एक ही हैं। फ़ॉविज़्म ज़्यादातर ख़ुशनुमा रंग है; जर्मन अक्सर गहरा और बेचैन।
- सोचना कि यह सिर्फ़ चित्रकला है। फ़िल्म, नाटक, कविता, गद्य, संगीत और वास्तुकला में भी।