Ukraine 10 клас Ukrainian Literature (profile level)
अध्याय: 4
1. Introduction
Literature and reading
जल्द आ रहा है
2. Realism
Realism as a trend and method · I. Nechui-Levytskyi and Panas Myrnyi · Drama and theatre · B. Hrinchenko
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।
3. Ukrainian literature c. 1900: modernism
Trends of the turn of the century · Ivan Franko · Impressionism: M. Kotsiubynskyi · Expressionism: V. Stefanyk · Neoromanticism: O. Kobylianska, Lesia Ukrainka · Symbolism: V. Vynnychenko, P. Tychyna · B. Lepkyi and I. Gasprinsky
- प्रभाववाद (इम्प्रेशनिज़्म) – प्रभाववाद (Impressionism) 1860–1870 के दशक में फ़्रांस में शुरू हुआ कला आंदोलन था। क्लॉद मोने, पियेर-ऑगस्त रेनुआ, एडगर देगा, कामी पिसारो, आल्फ़्रेड सिसले, बर्थ मोरिसो और मैरी कसाट जैसे चित्रकार बाहर खुली हवा में, जल्दी-जल्दी चित्र बनाते थे ताकि एक पल की बदलती रोशनी और माहौल पकड़ सकें। वे चमकीले, शुद्ध रंगों को दिखते ब्रश-स्ट्रोक में साथ-साथ रखते, छाया को रंगीन बनाते और रोज़ के आधुनिक जीवन को चित्रित करते थे। 1874 में पेरिस में उनकी पहली प्रदर्शनी का आलोचकों ने मज़ाक़ उड़ाया और मोने के चित्र 'इम्प्रेशन, सनराइज़' से नाम पड़ा। इसके बाद उत्तर-प्रभाववाद (सरा, वान गॉग, सेज़ान, गोगाँ) और आधुनिक कला आई; यह शब्द संगीत (दबूसी) और साहित्य के लिए भी इस्तेमाल हुआ।
- अभिव्यंजनावाद: जो दिखता है नहीं, जो महसूस होता है – अभिव्यंजनावाद (लगभग 1905–1925) एक आधुनिक कला आंदोलन था जो बाहर की दुनिया नहीं, अंदर की भावनाएँ दिखाता था। कलाकार आकार मोड़ते, असली न लगने वाले तेज़ रंग और खुरदुरे ब्रश-स्ट्रोक लगाते थे — डर, ग़ुस्सा, ख़ुशी या अकेलापन दिखाने के लिए। अग्रदूत: वान गॉग और मुंक। पेरिस में फ़ॉविज़्म (माटीस) ने रंग को आज़ाद किया; जर्मनी में डी ब्रुके (किर्शनर) ने नुकीले आकार और डेर ब्लाउए राइटर (कैंडिंस्की, मार्क) ने रंग को आत्मिक भावना माना। फ़िल्म, नाटक, कविता और कहानी पर भी इसका असर पड़ा।
- स्वच्छंदतावाद (रोमांटिसिज़्म) – स्वच्छंदतावाद साहित्य, कला और संगीत का एक आंदोलन था, लगभग 1780 से 1850 तक। यह तर्क के युग के कड़े नियमों और धुएँ भरे कारख़ाना-शहरों के विरोध में उभरा। स्वच्छंदतावादी प्रकृति, ख़ासकर जंगली और 'उदात्त' प्रकृति, गहरी व्यक्तिगत भावना, आज़ाद व्यक्ति, कल्पना और सपनों, अतीत और लोक-संस्कृति को महत्व देते थे। मुख्य नाम: वर्ड्सवर्थ, कीट्स, गोएथे, पुश्किन, मैरी शेली, विक्टर ह्यूगो, चित्रकार टर्नर और फ़्रीड्रिख़, और संगीतकार शोपां व शूबर्ट।
4. Local literature and review
Home-region writers and review
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