1900 के आसपास की कला: नई शैली क्यों?
1800 के दशक में कई वास्तुकार पुरानी शैलियों की नक़ल करते थे: यूनानी मंदिर, गॉथिक चर्च, पुनर्जागरण के महल। कारख़ाने भी सस्ती, बेढंगी सजावटी नक़लें बनाते थे।
लगभग 1890 में युवा कलाकार कुछ नया और आधुनिक चाहते थे, जो उनके अपने समय का हो। ब्रिटेन के आर्ट्स एंड क्राफ़्ट्स आंदोलन और जापानी छापों (प्रिंट) से प्रेरित होकर उन्होंने एक शैली शुरू की, जिसके कई स्थानीय नाम हैं: आर्ट नूवो (फ़्रांस, बेल्जियम), युगेंडस्टिल (जर्मनी), सेसेशन (ऑस्ट्रिया, मध्य यूरोप), मॉडर्निस्मे (कैटेलोनिया), स्टाइल लिबर्टी (इटली)। यह लगभग 1914 तक चली।
आर्ट नूवो की मुख्य विशेषताएँ
- चाबुक रेखा (whiplash line): लंबा S आकार का घुमाव, जो चाबुक या पौधे के तने की तरह मुड़ता है।
- प्रकृति के मोटिफ़: लिली, आइरिस, बेलें, मोर पंख, ड्रैगनफ़्लाई, हंस, लहरें। (मोटिफ़ यानी डिज़ाइन में बार-बार आने वाला आकार।)
- सपाट, सजावटी सतह जिनमें बाहरी रेखाएँ हों, अक्सर जापानी काठ-छापों से सीखी गई।
- "नई स्त्री": पोस्टरों और चित्रों में लंबे लहराते बालों वाली सुंदर स्त्रियाँ।
- नए पदार्थ: लोहा, इस्पात और काँच, घुमावों में मोड़े हुए; रंगीन काँच, मोज़ेक और चीनी मिट्टी की टाइलें।
- सम्पूर्ण कलाकृति (जर्मन: गेसाम्टकुन्स्टवर्क): वास्तुकार इमारत, फ़र्नीचर, लैंप, दरवाज़े के हत्थे और चम्मच-काँटे तक एक ही शैली में बनाता है।
- शिल्प भी कला है: गहने, काँच, पोस्टर और फ़र्नीचर चित्रकला जितने ही अहम।
मुख्य कलाकार और कृतियाँ
- विक्टर ओर्टा (ब्रसेल्स): लोहे के तनों और घुमावदार सीढ़ियों वाले टाउन हाउस।
- एक्टर गिमार (पेरिस): पौधों जैसे हरे ढलवाँ लोहे के मेट्रो द्वार।
- आंतोनी गाउदी (बार्सिलोना): लहरदार पत्थर के घर और सग्रादा फ़ामीलिया चर्च।
- अल्फ़ोंस मूशा: फूलों और प्रभामंडल से घिरी स्त्रियों के पोस्टर।
- गुस्ताव क्लिम्ट (वियना सेसेशन): सुनहरे, नक़्क़ाशीदार चित्र।
- लुई कम्फ़र्ट टिफ़नी और एमील गाले: काँच के लैंप और फूलदान। रेने लालीक: गहने।
- चार्ल्स रेनी मैकिंटॉश (ग्लासगो): ऊँचा, सीधा, सुरुचिपूर्ण फ़र्नीचर।
- स्तानिस्वाफ़ विस्पियान्स्की (क्राकोव): फूलों वाले रंगीन काँच और सजावट।
वियना और ग्लासगो में बाद का आर्ट नूवो ज़्यादा ज्यामितीय हो गया, जिससे आधुनिक डिज़ाइन और आगे आर्ट डेको का रास्ता बना।
प्रतीकवाद और आरंभिक अभिव्यंजनावाद
1900 के आसपास चित्रकला भी दुनिया को ठीक वैसा ही दिखाने से हट गई जैसी वह दिखती है।
प्रतीकवाद (Symbolism)
प्रतीकवादी कलाकारों ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी नहीं, बल्कि सपने, मिथक, भावनाएँ और रहस्य चित्रित किए। चित्र किसी विचार का प्रतीक होता है: स्फ़िंक्स रहस्य का, बंद आँख भीतर की दुनिया का। उदाहरण: गुस्ताव मोरो, ओदिलों रेदों, आर्नोल्ड बॉकलिन, यात्सेक मालचेव्स्की।
आरंभिक अभिव्यंजनावाद (Proto-expressionism)
"प्रोटो" यानी "शुरुआती"। कुछ चित्रकार भावना दिखाने के लिए आकार मोड़ने और तेज़, अवास्तविक रंग लगाने लगे: डर, अकेलापन, उत्साह। विन्सेंट वैन गॉग के घूमते आकाश, एडवर्ड मुंक की पुल पर चीख़ती आकृति और जेम्स एन्सोर के मुखौटों ने 1905 के बाद के अभिव्यंजनावाद की नींव रखी।
जैविक वास्तुकला
जैविक वास्तुकला (organic architecture) यानी ऐसी इमारतें जो प्रकृति के साथ तालमेल में रहें। यह नाम अमेरिकी वास्तुकार फ़्रैंक लॉयड राइट ने दिया।
- इमारत अपनी जगह से मेल खाती है: समतल घास के मैदान जैसे नीचे फैले घर, या झरने के ऊपर बना घर।
- प्राकृतिक पदार्थ: लकड़ी, स्थानीय पत्थर, ईंट, जैसे हैं वैसे दिखाए जाते हैं।
- प्रकृति से आकार: घुमाव, सीप, पेड़, फूल। गाउदी ने पेड़ की तरह शाखाओं वाले खंभे बनाए।
- बड़ी खिड़कियों और खुले नक़्शे से अंदर और बाहर मिल जाते हैं।
- नक़्शे से फ़र्नीचर तक हर हिस्सा, एक जीवित शरीर की तरह, एक पूरा बनाता है।
बाद में आल्वार आल्तो जैसे वास्तुकारों ने इसे आगे बढ़ाया। आज की पर्यावरण-अनुकूल वास्तुकला (हरी छतें, प्राकृतिक रोशनी, स्थानीय पदार्थ) में भी ये विचार हैं।
करके देखो
- घर का कोई पौधा चुनो (मनी प्लांट, तुलसी की टहनी या कोई फूल)। उसे पेंसिल उठाए बिना एक लंबी लहराती रेखा से बनाओ। फिर उसे दोहराकर किनारी का पैटर्न बनाओ: यही आर्ट नूवो मोटिफ़ है।
- स्कूल के किसी कार्यक्रम के पोस्टर का शीर्षक ऐसे अक्षरों में लिखो जो तनों की तरह मुड़ें।
- 3D के आख़िरी चरण में घुमाव 0 पर, फिर 100% पर करो। कौन-सा आर्ट नूवो जैसा लगता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- समय: लगभग 1890–1914
- नाम: आर्ट नूवो, युगेंडस्टिल, सेसेशन, मॉडर्निस्मे, स्टाइल लिबर्टी
- विशेषताएँ: चाबुक रेखा, प्रकृति के मोटिफ़, लोहा-काँच, सम्पूर्ण कलाकृति
- प्रतीकवाद = विचार, सपने, मिथक; आरंभिक अभिव्यंजनावाद = तेज़ रंग और मुड़े आकारों से भावना
- जैविक वास्तुकला = जगह, प्राकृतिक पदार्थ और आकारों से तालमेल वाली इमारत
हल किए गए उदाहरण
1. एक मेट्रो द्वार के हरे लोहे के खंभे तनों की तरह ऊपर मुड़ते हैं और लैंप की "कलियों" पर ख़त्म होते हैं। कौन-सी शैली?
आर्ट नूवो: प्रकृति के मोटिफ़, चाबुक रेखाएँ और मुड़ा लोहा (जैसे पेरिस में गिमार के द्वार)।
2. एक वास्तुकार घर के साथ उसकी कुर्सियाँ, लैंप, क़ालीन और दरवाज़े के हत्थे भी बनाता है। यह कौन-सा विचार है?
सम्पूर्ण कलाकृति (गेसाम्टकुन्स्टवर्क): पूरे डिज़ाइन के लिए एक शैली।
3. एक चित्र में अजीब फूलों के बीच बंद आँखों वाली पीली स्त्री है, जो नींद और मृत्यु का प्रतीक है। कौन-सा आंदोलन?
प्रतीकवाद: चित्र रोज़ की असलियत नहीं, विचारों और भावनाओं का प्रतीक है।
4. एक घर झरने के ऊपर बना है, स्थानीय पत्थर से, जिसके छज्जे पानी के ऊपर तक फैले हैं। कौन-सी वास्तुकला?
जैविक वास्तुकला: इमारत अपनी प्राकृतिक जगह से मेल खाती है और प्राकृतिक पदार्थ इस्तेमाल करती है।
5. आर्ट नूवो आर्ट डेको से कैसे अलग है?
आर्ट नूवो (लगभग 1890–1914) पौधों जैसे नरम, लहराते घुमाव लेता है। आर्ट डेको (1920–30 का दशक) मोटे ज्यामितीय आकार, ज़िगज़ैग और सीधी रेखाएँ लेता है।
आम गलतियाँ
- हर पुरानी सजी इमारत को आर्ट नूवो कहना। यूनानी या गॉथिक की नक़ल ऐतिहासिकतावाद है, आर्ट नूवो नहीं।
- आर्ट नूवो और आर्ट डेको को मिला देना। नूवो = पौधों जैसे लहराते घुमाव (लगभग 1900); डेको = ज्यामितीय (1920–30)।
- यह सोचना कि आर्ट नूवो सिर्फ़ चित्रकला है। इसमें वास्तुकला, फ़र्नीचर, पोस्टर, काँच और गहने सब थे।
- यह सोचना कि जैविक वास्तुकला बस लकड़ी की इमारत है। इसका मतलब है पूरा डिज़ाइन प्रकृति और अपनी जगह से मेल खाए।