कलाकृति, जगह, कलाकार और दर्शक क्या हैं?
हर प्रदर्शनी में चार चीज़ें मिलती हैं: कलाकृति, उसके आसपास की जगह, उसे बनाने वाला कलाकार और देखने वाला दर्शक। दीवार पर टँगे चित्र के सामने दर्शक ज़्यादातर खड़ा रहता है। इंस्टॉलेशन में कलाकार कमरे में वस्तुएँ, रोशनी, ध्वनि या चित्र ऐसे सजाता है कि दर्शक कृति के अंदर जाकर पूरे शरीर से उसे महसूस करे।
कलाकार का शरीर और हाव-भाव
कलाकार का शरीर औज़ार भी हो सकता है और विषय भी। ब्रश या कोयले के साथ बाँह का बड़ा झूला उस गति का निशान छोड़ता है। परफ़ॉर्मेंस में क्रिया ही कला है (चलना, नाचना, स्थिर खड़ा रहना)। कुछ कृतियों में कलाकार के हाथ के छाप, कद या आवाज़ शामिल होती है। निशान देखकर हम उस हाव-भाव की कल्पना कर सकते हैं जिसने उसे बनाया।
जगह में कृति की भौतिक उपस्थिति
मूर्ति या इंस्टॉलेशन असली होती है, किसी चीज़ की तस्वीर नहीं। उसकी ऊँचाई, चौड़ाई, गहराई, वज़न, पदार्थ और जगह होती है। आप कई तरफ़ से देख सकते हैं; चलने पर दृश्य बदलता है। टँगी हुई, खड़ी, फ़र्श पर पड़ी या दीवार से टिकी, हर स्थिति अलग एहसास देती है। रोशनी से परछाइयाँ बनती हैं जो कृति का हिस्सा बन जाती हैं।
दर्शक का अनुभव: आकार, रास्ता और मंचन
आकार (पैमाना) यानी कृति का आकार दर्शक की तुलना में। बहुत बड़ी कृति आपको छोटा या घिरा हुआ महसूस करा सकती है; बहुत छोटी कृति के पास आप झुककर सावधानी से देखते हैं। रास्ता वह तरीक़ा है जिससे आप कमरे में चलते हैं: कलाकार दीवारों, फ़र्श की रेखाओं और दरवाज़ों से आपको ले जा सकता है, या आपको खुला छोड़ सकता है। मंचन (फ़्रेंच में मीज़-अँ-सेन) का अर्थ है रोशनी, दूरी, ध्वनि और क्रम इस तरह सजाना कि दर्शक वही देखे जो कलाकार चाहता है। दर्शक चलकर, देखकर और महसूस करके कृति को पूरा करता है।
कृतियाँ कहाँ और कैसे प्रदर्शित होती हैं
कृतियाँ कई जगह दिखाई जाती हैं: सफ़ेद दीवारों वाला संग्रहालय या गैलरी, सड़क या पार्क, पुरानी फ़ैक्ट्री, गिरजाघर, स्टेशन, या वेब-पेज। जगह से अर्थ बदलता है: शांत गैलरी में कृति वैसी नहीं लगती जैसी भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में। प्रदर्शन के चुनाव हैं: ऊँचाई, फ़्रेम, आधार, लेबल, रोशनी और कृतियों का क्रम। साइट-स्पेसिफ़िक कृति सिर्फ़ एक ख़ास जगह के लिए बनती है।
दृश्य कला और डिजिटल तकनीक का मेल
डिजिटल साधन भौतिक कला में स्क्रीन, प्रोजेक्शन, सेंसर, ध्वनि और कंप्यूटर के बनाए चित्र जोड़ते हैं। कैमरा कृति को दर्शक की गति पर प्रतिक्रिया करा सकता है। प्रोजेक्शन दीवार या मूर्ति पर चलता चित्र बना सकता है। डिजिटल कला की नक़ल और कई जगह प्रदर्शन आसान है, पर उसकी ताक़त अक्सर असली कमरे में असली लोगों के बीच रखे जाने से आती है।
इंस्टॉलेशन को कैसे देखें
पाँच सवाल पूछो: यह किससे बनी है? मेरी तुलना में यह कितनी बड़ी है? मुझे कहाँ चलने और देखने की ओर ले जाया जा रहा है? कलाकार के शरीर या हाथों ने क्या किया? रोशनी, ध्वनि या स्क्रीन ने क्या जोड़ा? फिर बताओ आप क्या महसूस करते हैं और क्यों।
करके देखो
3D में: आख़िरी चरण में कृति को छोटा, फिर बड़ा करो। किस आकार में आप घिरे हुए महसूस करते हैं? दर्शक को चारों ओर चलाओ और देखो क्या बदलता है।
घर पर: दरवाज़े या अलमारी से काग़ज़ की डोरियाँ लटकाओ, टॉर्च से रोशनी करो और दोस्त को उनके बीच चलने दो। बनाओ कि रोशनी और परछाइयाँ रास्ते के साथ कैसे बदलती हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: इंस्टॉलेशन, हाव-भाव, परफ़ॉर्मेंस, आकार, रास्ता, मंचन, प्रदर्शन, साइट-स्पेसिफ़िक, प्रोजेक्शन
- आकार का अनुपात = कृति का आकार ÷ दर्शक की ऊँचाई
- पूरी कृति देखने की दूरी ≈ उसकी सबसे लंबी भुजा का 1.5 से 2 गुना
- असली माप = चित्र का माप × पैमाने की संख्या
हल किए गए उदाहरण
1. लटकी कृति 3 मी ऊँची है। दर्शक 1.5 मी ऊँचा है। आकार का अनुपात क्या है?
3 ÷ 1.5 = 2। कृति दर्शक की ऊँचाई से दोगुनी है।
2. कृति 2 मी चौड़ी है। पूरी देखने के लिए दर्शक लगभग कितनी दूर खड़ा हो?
2 मी का 1.5 से 2 गुना, यानी 3 से 4 मी।
3. इंस्टॉलेशन के मॉडल की चौड़ाई 1 : 10 पैमाने पर 20 सेमी है। असली चौड़ाई?
20 × 10 = 200 सेमी = 2 मी।
4. मंचन दर्शक को दिशा देने के दो तरीक़े बताओ।
कृति पर स्पॉटलाइट डालना; फ़र्श की रेखाओं या दीवारों से रास्ता बनाना ताकि दर्शक चुने हुए क्रम में कृतियाँ देखे।
आम गलतियाँ
- सोचना कि कृति सिर्फ़ वस्तु है। इंस्टॉलेशन में कमरा, रोशनी और दर्शक का चलना भी कृति का हिस्सा हैं।
- सिर्फ़ एक जगह से देखना। घूमो: दृश्य बदलता है।
- बिना कारण बताए कृति को 'अच्छा' या 'बुरा' कहना। पहले जो दिखे बताओ, फिर कैसा लगा और क्यों।
- जगह को भूल जाना। वही कृति गैलरी, सड़क या स्क्रीन पर अलग मतलब रखती है।