ललित कला क्या है?
ललित कला मुख्य रूप से कोई विचार, भावना या देखने का नया ढंग बताने के लिए बनती है। कुर्सी को काम का होना चाहिए; कुर्सी की पेंटिंग को नहीं। ललित कला और डिज़ाइन में यही आसान अंतर है।
ललित कलाकार एक सृजन प्रक्रिया से गुज़रता है: खोज (दुनिया और दूसरे कलाकारों को देखना), सामग्री से प्रयोग, विचार का विकास, स्केचबुक में दर्ज करना, और अंतिम कृति बनाना। कला के कोर्स में अंक सिर्फ़ अंतिम कृति पर नहीं, इन चारों हिस्सों पर मिलते हैं।
ड्रॉइंग और पेंटिंग
ड्रॉइंग यानी पेंसिल, चारकोल, स्याही, पेस्टल या डिजिटल पेन से निशान बनाना। कलाकार देखा हुआ दर्ज करने, योजना बनाने और पूरी कृति के रूप में भी ड्रॉ करते हैं। अच्छी ड्रॉइंग हल्की सहायक रेखाओं से शुरू होती है, फिर पक्की रूपरेखा, फिर टोन (हल्के से गहरे तक छायांकन) से रूप दिखता है।
पेंटिंग में सतह पर रंग लगाते हैं। आम रंग: जलरंग (पतला, आर-पार दिखने वाला), गुआश (गाढ़ा जलरंग), एक्रेलिक (जल्दी सूखता है) और तैलरंग (धीरे सूखता, अच्छे से मिलता है)। चित्रकार परतों में काम करते हैं: पहले बड़े रंग-क्षेत्र, फिर आकार, फिर चमक और बारीकी।
मूर्तिकला और सिरेमिक
मूर्तिकला तीन आयामों (3D) की कला है। इसे बनाने के चार मुख्य तरीके:
- तराशना (carving) – पत्थर, लकड़ी से सामग्री हटाना। यह घटाने वाली विधि है।
- गढ़ना (modelling) – मिट्टी, मोम थोड़ा-थोड़ा जोड़ना। यह जोड़ने वाली विधि है।
- ढलाई (casting) – पिघला काँसा, प्लास्टर या रेज़िन साँचे में डालना।
- संयोजन (construction) – अलग हिस्से (धातु, गत्ता, मिली वस्तुएँ) जोड़ना।
सिरेमिक मिट्टी की कला है: चुटकी से, कुंडली से, पट्टी से या चाक पर बर्तन बनाना। मिट्टी सुखाकर भट्टी में पकाई जाती है; ग्लेज़ उस पर काँच जैसी रंगीन परत देता है।
छापा कला (प्रिंटमेकिंग)
छापा कला में कलाकार एक ब्लॉक, प्लेट या स्क्रीन बनाकर उसे कई बार छापता है। हर प्रति एक प्रिंट है; गिनी हुई प्रतियों का समूह संस्करण (edition) कहलाता है।
- उभरी छपाई (relief – लिनो, काष्ठ, ठप्पा): जो नहीं चाहिए उसे काट दीजिए; उभरी सतह पर स्याही लगती है।
- इंटैग्लियो (एचिंग, ड्राईपॉइंट): धातु प्लेट में रेखाएँ खोदी जाती हैं; स्याही खाँचों में रहती है और गीले कागज़ पर दबकर आती है।
- स्क्रीन प्रिंटिंग: स्याही बारीक जाली से धकेली जाती है; स्टेंसिल कुछ हिस्से रोकता है। हर रंग की अलग स्क्रीन।
- लिथोग्राफ़ी: सपाट पत्थर या प्लेट पर चिकने क्रेयॉन से चित्र। चिकनाई और पानी नहीं मिलते, इसलिए स्याही सिर्फ़ चित्र पर चिपकती है।
भारत की कपड़े पर हाथ की ठप्पा छपाई उभरी छपाई है।
लेंस और प्रकाश आधारित माध्यम: फ़ोटोग्राफ़ी और चलचित्र
फ़ोटोग्राफ़र और फ़िल्मकार कैमरा, प्रकाश और समय से काम करते हैं। उनके चुनाव हैं: फ़्रेमिंग (चित्र के अंदर क्या, बाहर क्या), दृष्टिकोण (ऊपर से, नीचे से, पास, दूर), प्रकाश (नरम या तेज़, गर्म सुबह या ठंडी शाम) और क्षण। चलचित्र में क्रम, ध्वनि और संपादन भी जुड़ते हैं। प्रकाश आधारित काम में प्रोजेक्शन, परछाईं या फ़ोटोग्राम (प्रकाश-संवेदी कागज़ पर वस्तु रखकर) भी होते हैं।
इंस्टॉलेशन, भू-कला और मिश्रित माध्यम
इंस्टॉलेशन (संस्थापन) में पूरी जगह ही कलाकृति बन जाती है। दर्शक उसके अंदर चलता है; प्रकाश, ध्वनि, वस्तुएँ और कमरा मिलकर काम करते हैं। यह अक्सर अस्थायी होता है।
भू-कला (land art) बाहर पत्थर, पत्ते, रेत या बर्फ़ जैसी प्राकृतिक चीज़ों से बनती है। मौसम इसे बदलता है, इसलिए कलाकार इसे फ़ोटो या फ़िल्म से सहेजते हैं।
मिश्रित माध्यम में एक कृति में एक से ज़्यादा सामग्री होती है। कोलाज में सपाट चीज़ें (कागज़, कपड़ा, फ़ोटो) चिपकाते हैं; असेंबलाज में मिली हुई 3D वस्तुएँ जोड़ते हैं।
करके देखिए: एक छोटा ललित कला प्रोजेक्ट
घर की कोई एक चीज़ चुनिए, जैसे कप, जूता या पौधा। (1) उसकी तीन अलग दृष्टिकोण से जल्दी-जल्दी ड्रॉइंग बनाइए। (2) एक को तीन परतों में रंगिए। (3) आलू या रबर पर डिज़ाइन काटकर पाँच बार ठप्पा लगाइए। (4) सुबह और शाम की रोशनी में उसकी फ़ोटो लीजिए। चारों को स्केचबुक के एक पन्ने पर लगाइए और एक पंक्ति लिखिए कि क्या बदला। 3D के चरण 1–5 से अपनी प्रक्रिया मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सृजन प्रक्रिया: खोज → प्रयोग → विकास → दर्ज करना → प्रस्तुति
- तराशना = घटाना; गढ़ना = जोड़ना; ढलाई = साँचा; संयोजन = हिस्से जोड़ना
- उभरी छपाई = उभरे भाग पर स्याही; इंटैग्लियो = खाँचों में स्याही; स्क्रीन = जाली से स्याही; लिथो = चिकनाई और पानी
- कोलाज = सपाट सामग्री चिपकाना; असेंबलाज = 3D वस्तुएँ जोड़ना
- संस्करण (edition) = एक ब्लॉक से गिनी हुई प्रतियाँ
हल किए गए उदाहरण
1. एक विद्यार्थी साबुन की टिकिया से चेहरा तराशता है। यह मूर्तिकला की कौन-सी विधि है?
तराशना (carving)। ठोस टुकड़े से सामग्री हटाई जा रही है, इसलिए यह घटाने वाली विधि है।
2. एक कलाकार लिनो पर डिज़ाइन काटता है, स्याही लगाकर 20 बार कागज़ पर दबाता है। प्रक्रिया का नाम और 20 प्रतियों को क्या कहते हैं?
उभरी छपाई (लिनो कट)। 20 गिनी हुई प्रतियाँ एक संस्करण (edition) हैं।
3. एक कृति में अख़बार की पट्टियाँ, रंग और चिपका हुआ बोतल का ढक्कन है। यह किस क्षेत्र की है और क्यों?
मिश्रित माध्यम। इसमें कई सामग्री हैं; सपाट अख़बार कोलाज है और 3D ढक्कन असेंबलाज जोड़ता है।
4. भू-कलाकार एक ही कृति की सुबह 7 बजे और शाम 6 बजे फ़ोटो क्यों ले सकता है?
दिन भर में प्रकाश की दिशा, रंग और परछाईं की लंबाई बदलती है, और मौसम से कृति भी बदल सकती है। फ़ोटो ये बदलाव दर्ज करती हैं और कृति की कहानी का हिस्सा बनती हैं।
आम गलतियाँ
- ललित कला को सिर्फ़ पेंटिंग समझना। मूर्ति, छापा कला, फ़ोटोग्राफ़ी, इंस्टॉलेशन, भू-कला और मिश्रित माध्यम भी ललित कला हैं।
- उभरी छपाई और इंटैग्लियो में उलझना। उभरी छपाई में उभरा भाग छपता है; इंटैग्लियो में खाँचे स्याही पकड़ते हैं।
- सिर्फ़ अंतिम कृति दिखाना। कोर्स में स्केचबुक की खोज, प्रयोग और विकास के भी अंक हैं।
- हर 3D कृति को तराशी हुई मान लेना। वह गढ़ी, ढाली या जोड़ी हुई भी हो सकती है।