National Year 12 Art and Design
अध्याय: 2
1. 3.2 Overarching knowledge, understanding and skills
Contexts and purposes of art, craft and design · Visual language and formal elements · Media, materials and processes (traditional and new) · Drawing for different purposes · Critical and contextual analysis
- कला का इतिहास: गुफा की दीवारों से आज तक – मनुष्य कम से कम 40,000 साल से कला बना रहा है। प्रागैतिहासिक कला में गुफा की दीवारों पर जानवर और हाथ की छाप हैं। प्राचीन सभ्यताओं ने शासकों, देवताओं और परलोक के लिए कला बनाई। शास्त्रीय परंपराएँ यूनान-रोम, भारत, चीन, अफ़्रीका और अमेरिका में पनपीं। पुनर्जागरण ने परिप्रेक्ष्य और यथार्थ दिया; आधुनिक कला (लगभग 1860 से) ने ये नियम तोड़े; समकालीन कला कोई भी सामग्री अपनाती है। किसी कलाकृति को समझने के लिए वर्णन, विश्लेषण, संदर्भ में व्याख्या और कारण सहित निर्णय करें।
- कला के तत्व और डिज़ाइन के सिद्धांत – कला के तत्व वे ईंटें हैं जिनसे हर कलाकृति बनती है: रेखा, आकार, रूप, रंग, मान (हल्का-गहरा), बनावट और स्थान; कई शिक्षक बिंदु को भी जोड़ते हैं। डिज़ाइन के सिद्धांत बताते हैं कि इन ईंटों को कैसे जमाएँ: संतुलन, विरोधाभास (कंट्रास्ट), बल (एम्फ़ेसिस), गति, लय और पैटर्न, अनुपात और पैमाना, एकता और विविधता।
- कला सामग्री और तकनीकें: सही माध्यम कैसे चुनें – कलाकार वह सामग्री (माध्यम) चुनते हैं जिससे मनचाहा असर मिले। हर रंग (पेंट) में पिगमेंट यानी रंगीन चूर्ण और बाइंडर यानी चिपकाने वाला द्रव होता है: तैल रंग में अलसी का तेल, जल रंग में गोंद (गम अरेबिक), एक्रेलिक में एक्रेलिक राल, टेम्परा में अंडा। सूखे माध्यम हैं ग्रेफ़ाइट पेंसिल (H = सख़्त और हल्की, B = नरम और गहरी), चारकोल, पेस्टल और रंगीन पेंसिल। गीले माध्यम हैं स्याही, जल रंग, गुआश, एक्रेलिक और तैल रंग। पारदर्शी माध्यम में नीचे की परत दिखती है, अपारदर्शी उसे ढक देता है। सपोर्ट वह सतह है जिस पर काम होता है: कागज़, कैनवास, लकड़ी, दीवार। त्रि-आयामी काम में मिट्टी से गढ़ना, तराशना, जोड़ना और ढलाई आते हैं; छापा कला में एक ब्लॉक या स्क्रीन से कई प्रतियाँ बनती हैं। डिजिटल माध्यम में टैबलेट, फ़ोटो और वीडियो हैं। अच्छे कलाकार सामग्री को परखते हैं, प्रयोग से काम निखारते हैं और उसे सुरक्षित व टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल करते हैं।
- रेखांकन और चित्रकला (Drawing and Painting) – रेखांकन देखने और सोचने का तरीक़ा है: इससे हम जो देखते हैं उसे दर्ज करते हैं, याद रखते हैं, डिज़ाइन की योजना बनाते हैं और विचार व्यक्त करते हैं। अच्छा चित्र खाका (blocking in) से शुरू होता है: चीज़ों को सरल आकारों में देखना (गोला, घन, बेलन) और हल्की रेखाओं से अनुपात जाँचना। फिर रेखा किनारे तय करती है, और रेखा का वज़न (भारी या हल्का) पास-दूर दिखाता है। रोशनी रूप देती है: रोशन वस्तु पर चमक, मध्य-स्वर, मुख्य छाया, परावर्तित रोशनी और गिरती छाया दिखती है। स्वर (value) सफ़ेद से काले तक जाता है; रोशनी-अँधेरे का तेज़ अंतर छायांकन (chiaroscuro) कहलाता है, और चित्र ऊँची कुंजी (ज़्यादातर हल्का) या नीची कुंजी (ज़्यादातर गहरा) में हो सकता है। सूखे माध्यम (ग्रेफ़ाइट, चारकोल, पेस्टल, रंगीन पेंसिल) हैचिंग, क्रॉस-हैचिंग, बिंदु और मिलाने से स्वर बनाते हैं; गीले माध्यम (स्याही, जलरंग, गुआश, ऐक्रेलिक, तैलरंग) वॉश, परतों और रंग मिलाने से। रैखिक और वायुमंडलीय परिप्रेक्ष्य जगह दिखाते हैं, और आकृति चित्रण में अनुपात, मुद्रा और पूर्वसंक्षेपण (foreshortening) लगते हैं।
2. 3.3-3.8 Titles and areas of study
7201 Art, craft and design · 7202 Fine art · 7203 Graphic communication · 7204 Textile design · 7205 Three-dimensional design · 7206 Photography
- दृश्य कला: तत्व, सिद्धांत और रचना प्रक्रिया – हर कलाकृति, चाहे पेंसिल स्केच हो, मूर्ति हो या पोस्टर, सात तत्वों से बनती है: रेखा, आकार, रूप, रंग, बनावट, मान (टोन) और स्थान। कलाकार इन्हें डिज़ाइन के सिद्धांतों से सजाते हैं: संतुलन, विरोधाभास, बल, लय और पैटर्न, अनुपात और एकता। रंग सिद्धांत (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक, पूरक, गर्म-ठंडे) और परिप्रेक्ष्य चित्र को असली या भावपूर्ण बनाते हैं। स्कूल के कला पाठ्यक्रम में एक प्रक्रिया भी सीखते हैं: कलाकारों पर शोध, विचार विकसित करना, माध्यमों से प्रयोग, अवलोकन दर्ज करना, और पोर्टफ़ोलियो में अपनी निजी अंतिम रचना प्रस्तुत करना।
- ललित कला: मुख्य क्षेत्र और कलाकार उनमें कैसे काम करते हैं – ललित कला (fine art) वह कला है जो मुख्य रूप से विचार, भावना और देखने का नया तरीका दिखाने के लिए बनती है, कोई व्यावहारिक काम करने के लिए नहीं। इसके मुख्य क्षेत्र हैं: ड्रॉइंग, पेंटिंग, मूर्तिकला, सिरेमिक, छापा कला, लेंस और प्रकाश आधारित माध्यम (फ़ोटोग्राफ़ी और चलचित्र), इंस्टॉलेशन, भू-कला और मिश्रित माध्यम (कोलाज और असेंबलाज)। हर क्षेत्र में कलाकार खोज करता है, सामग्री से प्रयोग करता है, विचार विकसित करता है, स्केचबुक में दर्ज करता है और अंतिम कृति प्रस्तुत करता है।
- ग्राफ़िक डिज़ाइन (Graphic Design) – ग्राफ़िक डिज़ाइन चित्र, शब्द और आकृतियों को इस तरह सजाना है कि संदेश साफ़, काम का और सुंदर लगे। डिज़ाइनर तत्वों (रेखा, आकृति, रंग, अक्षर, चित्र, खाली जगह) और सिद्धांतों (ग्रिड व संरेखण, पदानुक्रम, कंट्रास्ट, निकटता, दोहराव, संतुलन, खाली जगह) का उपयोग करते हैं। प्रक्रिया: ब्रीफ़, खोज, विचार, स्केच, डिजिटल ड्राफ़्ट, राय और अंतिम कलाकृति। पोस्टर, लोगो, किताब के कवर, पैकेट, साइन बोर्ड, वेबसाइट और ऐप सब इसी से बनते हैं।
- टेक्सटाइल डिज़ाइन: रेशे से डिज़ाइनदार कपड़े तक – टेक्सटाइल डिज़ाइन का मतलब है तय करना कि कपड़ा कैसे बनेगा, कैसा दिखेगा और कैसा लगेगा। रेशों को कातकर धागा बनता है; धागे से बुनकर, बुनाई (निटिंग) से या जोड़कर कपड़ा बनता है; फिर रंगाई, छपाई या कढ़ाई से रंग और डिज़ाइन आता है; और फ़िनिश कपड़े को खास गुण देती है, जैसे पानी-रोधी या सिलवट-रोधी।
- त्रि-आयामी डिज़ाइन: ऐसे रूप बनाना जो सुंदर दिखें और अच्छा काम करें – त्रि-आयामी (3D) डिज़ाइन लंबाई, चौड़ाई और गहराई वाली असली चीज़ें बनाता है: मूर्तियाँ, उत्पाद, फ़र्नीचर, पैकेजिंग, गहने, मंच और जगह का डिज़ाइन। कलाकार रूप बनाते हैं काटकर हटाने (घटाने वाली), जोड़कर बढ़ाने (जोड़ने वाली), हिस्से जोड़कर बनाने (निर्माण) या साँचे में ढालने से। अच्छा 3D डिज़ाइन शरीर के नाप में फिट होता है (एर्गोनॉमिक्स, शरीर के माप यानी एंथ्रोपोमेट्री से), प्रकृति से सीखता है (बायोनिक्स), सामान बचाता और बेचता है (पैकेजिंग), अलग क्षमता वाले लोगों के काम आता है (सार्वभौमिक डिज़ाइन) और धरती का ध्यान रखता है।
- फ़ोटोग्राफ़ी: प्रकाश, एक्सपोज़र और संयोजन – कैमरा एक अँधेरा डिब्बा है जो प्रकाश पकड़ता है। लेंस प्रकाश को मोड़कर सेंसर (या फ़िल्म) पर साफ़, उल्टा चित्र बनाता है। तीन सेटिंग तय करती हैं कि कितना प्रकाश चित्र बनाएगा: एपर्चर (लेंस के छेद का आकार, f-संख्या में), शटर गति (प्रकाश कितनी देर पड़ेगा) और ISO (सेंसर कितना संवेदनशील)। तीनों मिलकर एक्सपोज़र त्रिभुज बनाते हैं। संयोजन (फ़्रेम में चीज़ें कहाँ रखें) और प्रकाश की गुणवत्ता सही फ़ोटो को अच्छा फ़ोटो बनाते हैं। फ़ोटोग्राफ़र चित्रों से कहानी कहते, संपादन करते और चित्रों की समीक्षा करना सीखते हैं।