धर्मसुधार आंदोलन के कारण
- धार्मिक: माफ़ीनामे (indulgences) की बिक्री, अमीर और दुनियादार धर्मगुरु, कम प्रशिक्षित पादरी।
- बौद्धिक: इरास्मस जैसे मानवतावादी विद्वान मूल ग्रंथ पढ़ने को कहते थे।
- तकनीकी: छापाख़ाना (गुटेनबर्ग, लगभग 1450) ने स्थानीय भाषाओं में पर्चे और बाइबिल फैलाईं।
- राजनीतिक-आर्थिक: राजा चर्च की ज़मीन, कर और नियुक्तियों पर क़ब्ज़ा चाहते थे।
इससे पहले जॉन वाइक्लिफ़ और यान हुस ने भी ऐसे सवाल उठाए थे।
मार्टिन लूथर और लूथरन सुधार
1517 में जर्मन भिक्षु मार्टिन लूथर ने 95 सिद्धांत छापे। मुख्य विचार:
- केवल विश्वास: मुक्ति ईश्वर में विश्वास से, माफ़ीनामा ख़रीदने से नहीं।
- केवल बाइबिल: बाइबिल सबसे ऊँचा प्रमाण।
- सभी विश्वासी पुजारी: हर व्यक्ति सीधे ईश्वर तक पहुँच सकता है।
वर्म्स की सभा (1521) में उन्होंने अपने विचार वापस नहीं लिए। बाइबिल का जर्मन अनुवाद किया। ऑग्सबर्ग की शांति (1555) ने हर राजकुमार को अपने क्षेत्र का धर्म चुनने दिया।
काल्विन, एंग्लिकन चर्च और अन्य प्रोटेस्टेंट
- जॉन काल्विन ने 1541 से जिनेवा में चर्च चलाया। उन्होंने पूर्वनियति (predestination) सिखाई: ईश्वर ने पहले ही तय कर रखा है कि किसे मुक्ति मिलेगी। सख़्त नैतिक नियम और मेहनत। विचार स्कॉटलैंड, नीदरलैंड और फ़्रांस (ह्यूगनॉट) तक फैले।
- इंग्लैंड: हेनरी अष्टम ने विवाह के सवाल पर पोप से नाता तोड़ा। सर्वोच्चता अधिनियम (1534) ने राजा को चर्च का प्रमुख बनाया।
- एनाबैप्टिस्ट केवल वयस्कों का बपतिस्मा मानते थे।
कैथोलिक सुधार (प्रति धर्मसुधार) और धर्म-युद्ध
- ट्रेंट की परिषद (1545–63): मूल शिक्षाएँ बनाए रखीं, माफ़ीनामे की बिक्री रोकी, पादरियों के प्रशिक्षण के लिए विद्यालय खोले।
- जेसुइट संघ (इग्नेशियस लोयोला, 1540): स्कूल, विश्वविद्यालय, मिशन; भारत में गोवा (फ़्रांसिस ज़ेवियर, 1542)।
- इन्क्विज़िशन और प्रतिबंधित किताबों की सूची।
धर्म-युद्ध: फ़्रांस के युद्ध (1562–98) नैंट के आदेश (1598) से ख़त्म। तीस वर्षीय युद्ध (1618–48) वेस्टफेलिया की शांति (1648) से ख़त्म।
धर्मसुधार आंदोलन के प्रभाव
- पश्चिमी ईसाई धर्म कैथोलिक और कई प्रोटेस्टेंट चर्चों में बँटा।
- राज्य और राजा मज़बूत हुए; पोप की राजनीतिक ताक़त घटी।
- स्थानीय भाषाओं में बाइबिल से पढ़ना-लिखना और स्कूल बढ़े।
- लंबे युद्ध, उत्पीड़न और अल्पसंख्यकों का पलायन।
- धीरे-धीरे धार्मिक सहिष्णुता का विचार बढ़ा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- माफ़ीनामा (indulgence): पाप की सज़ा घटाने का दावा करने वाला चर्च का पत्र
- प्रोटेस्टेंट: अलग हुए ("विरोध करने वाले") चर्चों के अनुयायी
- केवल विश्वास, केवल बाइबिल, सभी विश्वासी पुजारी (लूथर)
- पूर्वनियति (काल्विन)
- प्रति धर्मसुधार / कैथोलिक सुधार: ट्रेंट की परिषद, जेसुइट
- मुख्य तिथियाँ: 1517, 1534, 1545–63, 1555, 1598, 1648
हल किए गए उदाहरण
1. लूथर के विचार इतनी तेज़ी से क्यों फैले? कारण → प्रभाव शृंखला बनाओ।
छापाख़ाना → पर्चे सस्ते और तेज़ → हज़ारों ने जर्मन में लूथर को पढ़ा → राजकुमारों और नगरवासियों का समर्थन → लूथरन चर्च बने।
2. लूथर और काल्विन की दो बातों में तुलना करो।
दोनों ने विश्वास और बाइबिल को पहले रखा। लूथर ने पुरानी प्रथाएँ ज़्यादा रखीं और राजकुमारों पर भरोसा किया; काल्विन ने पूर्वनियति सिखाई और जिनेवा में बुज़ुर्गों द्वारा चलाया सख़्त चर्च बनाया।
3. शुरू में अंग्रेज़ी धर्मसुधार धार्मिक था या राजनीतिक?
मुख्यतः राजनीतिक: हेनरी अष्टम विवाह ख़त्म करना और चर्च-ज़मीन पर नियंत्रण चाहते थे। 1534 के अधिनियम से राजा चर्च-प्रमुख बने। प्रोटेस्टेंट विश्वास बाद के शासकों में ज़्यादा आया।
आम गलतियाँ
- सोचना कि धर्मसुधार एक दिन में हुआ। यह सौ साल से ज़्यादा चला।
- कैथोलिक सुधार को सिर्फ़ दंड समझना। उसने स्कूल भी बनाए और बुराइयाँ भी रोकीं।
- माफ़ीनामे को ही एकमात्र कारण मानना। छापाख़ाना, राजनीति और पैसा भी कारण थे।
- तिथियाँ मिलाना: 1517 शुरुआत, 1648 लंबे युद्धों का अंत।