कारण: भेदभाव और अलगाव
अमेरिका में दासता 1865 में ख़त्म हुई। कुछ समय (पुनर्निर्माण काल) काले पुरुषों ने वोट दिया और संसद में भी पहुँचे। फिर कई दक्षिणी राज्यों ने जिम क्रो क़ानून बनाए। 1896 में सुप्रीम कोर्ट (प्लेसी बनाम फ़र्ग्युसन) ने "अलग पर बराबर" सुविधाओं की अनुमति दी, जो असल में कभी बराबर नहीं थीं।
- अलगाव: अलग स्कूल, परिवहन, अस्पताल, रेस्तराँ।
- वोट की रुकावटें: मतदान कर, अनुचित साक्षरता परीक्षा, धमकी और हिंसा।
- आर्थिक और आवास भेदभाव: कम वेतन, नौकरी पर रोक, और रेडलाइनिंग, जिसमें बैंक काले मोहल्लों में क़र्ज़ नहीं देते थे, इसलिए परिवार घर से संपत्ति नहीं बना पाए।
- हिंसा: लिंचिंग और हमलों की सज़ा नहीं मिलती थी।
ये व्यवस्थाएँ मिलकर काम करती थीं (विद्वान इसे परस्पर जुड़ा उत्पीड़न कहते हैं): जाति-नस्ल, वर्ग और लिंग, हर एक ने ज़िंदगी कठिन की। कई काले परिवार "महान प्रवास" में उत्तर गए, पर वहाँ भी भेदभाव मिला।
दूसरा विश्वयुद्ध: एक चिंगारी
लगभग दस लाख काले अमेरिकियों ने युद्ध में सेवा दी। डबल V अभियान ने बाहर फ़ासीवाद और घर में नस्लवाद, दोनों पर जीत माँगी। G.I. बिल ने पढ़ाई और घर के लिए पैसा दिया, पर कई काले सैनिकों को इसका लाभ नहीं मिला, जिससे ग़ुस्सा बढ़ा।
मुख्य घटनाएँ, नेता और तरीके
- 1954 ब्राउन बनाम शिक्षा बोर्ड: सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में अलगाव को असंवैधानिक कहा (NAACP वकील थर्गुड मार्शल)।
- 1955–56 मॉन्टगोमरी बस बहिष्कार: रोज़ा पार्क्स की गिरफ़्तारी के बाद लोग 381 दिन पैदल चले और गाड़ियाँ बाँटीं; मार्टिन लूथर किंग जूनियर राष्ट्रीय नेता बने।
- 1957 लिटिल रॉक: गोरों के स्कूल में जाने के लिए नौ काले छात्रों को सैनिकों की सुरक्षा चाहिए थी।
- 1960 सिट-इन: छात्र ग्रीन्सबोरो में "सिर्फ़ गोरों" वाले काउंटर पर बैठे; यह कई शहरों में फैला।
- 1961 फ़्रीडम राइड: मिले-जुले समूह बसों में गए और उन पर हमले हुए।
- 1963 बर्मिंघम और वॉशिंगटन मार्च: लगभग 2,50,000 लोग; किंग का "आई हैव अ ड्रीम" भाषण।
- 1964 फ़्रीडम समर और नागरिक अधिकार अधिनियम।
- 1965 सेल्मा से मॉन्टगोमरी मार्च और मताधिकार अधिनियम।
- 1968 फ़ेयर हाउसिंग अधिनियम; किंग की हत्या।
संगठन
NAACP (अदालत), SCLC (चर्च आधारित, किंग), SNCC (छात्र, ज़मीनी मतदाता अभियान), CORE (सिट-इन, फ़्रीडम राइड), और अर्बन लीग (नौकरियाँ)।
ज़मीनी स्तर पर महिलाएँ
ज़्यादातर संगठन का काम महिलाओं ने किया: एला बेकर ने SNCC की सामूहिक शैली बनाई, फ़ैनी लू हैमर ने मिसिसिपी में मताधिकार के लिए संघर्ष किया, जो ऐन रॉबिन्सन ने रातोंरात बहिष्कार के पर्चे बाँटे, और डायन नैश ने फ़्रीडम राइड चलाईं।
अहिंसक सीधी कार्रवाई
बहिष्कार, सिट-इन, मार्च और मुक़दमे। प्रदर्शनकारी पलटकर न मारने की ट्रेनिंग लेते थे, जिससे टीवी पर अलगाव की क्रूरता सबको दिखी।
परिणाम और आगे के आंदोलन
परिणाम: क़ानूनी अलगाव ख़त्म हुआ; मतदाता पंजीकरण तेज़ी से बढ़ा (मिसिसिपी में काले वयस्कों का लगभग 7% से 1968 तक लगभग 60%); काले निर्वाचित प्रतिनिधि कुछ सौ से हज़ारों हुए। आरक्षण जैसी नीतियाँ (अफ़र्मेटिव एक्शन) और बढ़ता काला मध्यवर्ग आया, पर ग़रीबी और अलग मोहल्ले बने रहे।
ब्लैक पावर और दूसरी आवाज़ें
मैल्कम एक्स और नेशन ऑफ़ इस्लाम जैसे कुछ कार्यकर्ताओं ने एकीकरण को नकारा और आत्मसम्मान व आत्मरक्षा पर ज़ोर दिया। 1966 से ब्लैक पावर ने गर्व और समुदाय के अपने नियंत्रण की बात की। ब्लैक पैंथर पार्टी ने मुफ़्त नाश्ता और क्लिनिक चलाए, पर पुलिस से टकराव भी हुए। ब्लैक नारीवादियों ने बताया कि काली महिलाएँ नस्लवाद और लिंगभेद एक साथ झेलती हैं; किम्बर्ले क्रेंशॉ ने बाद में इसे इंटरसेक्शनैलिटी (अंतर्विभाजकता) कहा; एलिस वॉकर ने वुमनिज़्म शब्द दिया।
संस्कृति, विश्व से जुड़ाव और विरासत
संगीत और कला
संगीत की धारा स्पिरिचुअल और ब्लूज़ से गॉस्पेल, जैज़, आज़ादी के गीत ("वी शैल ओवरकम", जिसका हिंदी रूप "हम होंगे कामयाब" है), सोल और बाद में हिप-हॉप तक जाती है। ब्लैक आर्ट्स आंदोलन और नारे "ब्लैक इज़ ब्यूटीफ़ुल" ने काली संस्कृति और अफ़्रीकी जड़ों का उत्सव मनाया। जैकी रॉबिन्सन (बेसबॉल, 1947) और मुहम्मद अली जैसे खिलाड़ियों, और मंच, टीवी व फ़िल्म के कलाकारों-लेखकों ने रूढ़ियों को चुनौती दी। जब बाहर रखा गया तो काले वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने अपने अस्पताल और कॉलेज बनाए और अनुचित चिकित्सा प्रयोगों का विरोध किया।
दुनिया से जुड़ाव
नेग्रिट्यूड (फ़्रेंच भाषी अफ़्रीका और कैरिबियन) और नेग्रिस्मो (स्पेनिश भाषी कैरिबियन) के लेखकों ने काली पहचान का उत्सव मनाया, उन्हीं वर्षों में जब अफ़्रीकी और एशियाई देश औपनिवेशिक शासन से आज़ाद हो रहे थे। अहिंसा भारत में गांधी से आई; बाद में आंदोलन ने दक्षिण अफ़्रीका, उत्तरी आयरलैंड और भारत के अभियानों को प्रेरित किया।
विरासत
ब्लैक स्टडीज़ विभाग, काले भविष्य की कल्पना करने वाली एफ़्रोफ़्यूचरिस्ट कला, और पुलिस, मतदान पहुँच और आवास पर आज की बहसें दिखाती हैं कि आंदोलन के सवाल अब भी ज़िंदा हैं। आज काले समुदाय मूल (हाल के अफ़्रीकी और कैरिबियन प्रवासी सहित) और धर्म में विविध हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अलगाव = क़ानून या रिवाज से समूहों को अलग रखना
- जिम क्रो = दक्षिणी राज्यों के अलगाव क़ानून (1870–1960 के दशक)
- अहिंसक सीधी कार्रवाई = बहिष्कार, सिट-इन, मार्च, मुक़दमा
- ब्राउन बनाम बोर्ड (1954) → स्कूलों में अलगाव असंवैधानिक
- नागरिक अधिकार अधिनियम (1964) → सार्वजनिक जगहों पर अलगाव नहीं, नौकरी में भेदभाव नहीं
- मताधिकार अधिनियम (1965) → साक्षरता परीक्षा नहीं; मतदान पर संघीय निगरानी
- फ़ेयर हाउसिंग अधिनियम (1968) → घर बेचने-किराए में भेदभाव नहीं
- इंटरसेक्शनैलिटी = कई पहचानों से एक साथ भेदभाव
हल किए गए उदाहरण
1. मॉन्टगोमरी बस बहिष्कार असरदार क्यों रहा?
लगभग तीन-चौथाई बस यात्री काले थे, इसलिए कंपनी की ज़्यादातर कमाई चली गई। बहिष्कार अनुशासित और शांत था, जिससे जनता का साथ मिला, और 1956 में सुप्रीम कोर्ट ने बस अलगाव को असंवैधानिक कहा।
2. समयरेखा से एक कारण → परिणाम श्रृंखला दिखाइए।
मार्च 1965 में सेल्मा के मार्च करने वालों को टीवी पर पिटते दिखाया गया → देश भर में आक्रोश → राष्ट्रपति जॉनसन ने संसद से मतदान क़ानून माँगा → अगस्त 1965 में मताधिकार अधिनियम पास → काले मतदाता पंजीकरण तेज़ी से बढ़ा।
3. रेडलाइनिंग ने पीढ़ियों तक काले परिवारों पर क्या असर डाला?
बैंक लाल निशान वाले इलाक़ों, ज़्यादातर काले मोहल्लों, में घर का क़र्ज़ नहीं देते थे। परिवार घर नहीं ख़रीद पाए, जो संपत्ति बनाने और आगे देने का मुख्य तरीका है, इसलिए संपत्ति का अंतर बढ़ा जो आज भी है।
4. मार्टिन लूथर किंग जूनियर और मैल्कम एक्स में क्या अंतर था?
किंग अहिंसक विरोध और क़ानूनों से एकीकरण चाहते थे। मैल्कम एक्स (शुरुआती सालों में) काले आत्मनिर्भरता, गर्व और आत्मरक्षा के अधिकार पर ज़ोर देते थे और एकीकरण पर शक करते थे। दोनों सम्मान और बराबर अधिकार चाहते थे।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि रोज़ा पार्क्स बस थकी थीं: वे प्रशिक्षित कार्यकर्ता और NAACP सचिव थीं जिन्होंने सोच-समझकर विरोध किया।
- यह मानना कि आंदोलन सिर्फ़ मार्टिन लूथर किंग था: हज़ारों स्थानीय लोगों, ख़ासकर महिलाओं और छात्रों ने इसे चलाया।
- यह सोचना कि 1964–65 के क़ानूनों से सारी असमानता ख़त्म हो गई: आवास, संपत्ति और न्याय के अंतर बने रहे।
- अलगाव (क़ानून से अलग रखना) और दासता (इंसानों को मालिकाना बनाना) में गड़बड़ करना।