इतिहास में अंतरराष्ट्रीय संबंध क्या हैं?
अंतरराष्ट्रीय संबंध यानी राज्य एक-दूसरे से कैसे निपटते हैं: युद्ध, व्यापार, संधि, गठबंधन और बातचीत। राज्य अपनी सरकार वाला देश है। संधि राज्यों के बीच लिखित समझौता है। गठबंधन हमला होने पर एक-दूसरे की मदद का वादा है। शक्ति-संतुलन का विचार है कि कोई एक राज्य इतना ताकतवर न हो जाए कि सब पर राज करे।
हर दौर के लिए चार सवाल पूछो: मुख्य ताकतें कौन थीं, उन्हें क्या चाहिए था, वे कैसे लड़ीं या मिलकर चलीं, और बाद में क्या बदला?
1600 का दशक: तीस वर्षीय युद्ध और वेस्टफ़ालिया
तीस वर्षीय युद्ध (1618 से 1648) पवित्र रोमन साम्राज्य के भीतर कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट शासकों की टक्कर से शुरू हुआ। फिर यह सत्ता की लड़ाई बन गया: स्पेन, फ़्रांस, स्वीडन, डेनमार्क और कई छोटे राज्य कूद पड़े। सेनाएँ इलाके से ही रसद लेती थीं, शहर लुटे और अकाल व बीमारी से मध्य यूरोप में लाखों लोग मरे।
वेस्टफ़ालिया की संधि (1648) ने इसे खत्म किया। मुख्य बातें: हर शासक अपने इलाके का धर्म तय करेगा, कानून की नज़र में राज्य बराबर माने जाएँगे, और कोई दूसरे के इलाके के अंदर दखल नहीं देगा। इतिहासकार इसे संप्रभु राज्यों की आधुनिक व्यवस्था की शुरुआत मानते हैं। शांति कई राज्यों की एक बड़ी बैठक में तय हुई, जो युद्ध खत्म करने का नया तरीका था।
1700 का दशक: औपनिवेशिक युद्ध और बँटवारे
1700 के दशक में ब्रिटेन, फ़्रांस, स्पेन आदि उपनिवेशों, व्यापार-मार्गों और कच्चे माल के लिए होड़ में थे। यूरोप में शुरू हुए युद्ध, जैसे सात वर्षीय युद्ध (1756 से 1763), उत्तरी अमेरिका, कैरिबियन, पश्चिम अफ़्रीका और भारत में भी लड़े गए, जहाँ कंपनियों की सेनाओं और स्थानीय शासकों ने पक्ष लिए। समुद्र और व्यापार में ब्रिटेन सबसे ताकतवर निकला।
ताकतवर पड़ोसियों ने कमज़ोर पड़ोसी को भी बाँटा। विशाल पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सरकार बँटी हुई थी और वह अपनी रक्षा न कर सका। 1772, 1793 और 1795 में रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया ने उसकी ज़मीन आपस में बाँट ली, यहाँ तक कि वह राजनीतिक नक्शे से गायब हो गया। जहाँ ताकत ही फ़ैसला करे, वहाँ कमज़ोरी दबाव बुलाती है।
फ़्रांसीसी क्रांति और नेपोलियन के युद्धों के बाद वियना कांग्रेस (1815) ने शक्ति-संतुलन लौटाने की कोशिश की, और बड़ी ताकतें झगड़े सुलझाने को नियमित मिलती रहीं ("यूरोप का कंसर्ट")।
1800 से 1914: प्रथम विश्व युद्ध से पहले के गठबंधन
1800 के उत्तरार्ध में उद्योग, बड़ी सेनाओं और साम्राज्य की होड़ से तनाव बढ़ा। राज्यों ने सुरक्षा के लिए गठबंधन खोजे। 1907 तक यूरोप दो गुटों में था: त्रिपक्षीय गठबंधन (जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, इटली; 1882 से) और त्रिपक्षीय मैत्री (एंटेंट) (फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन)। और कारण: हथियारों की होड़ (ख़ासकर नौसेना), उपनिवेशों की प्रतिद्वंद्विता, बाल्कन में तेज़ राष्ट्रवाद और तय समय-सारणी वाली गुप्त युद्ध-योजनाएँ।
जून 1914 में ऑस्ट्रिया-हंगरी के उत्तराधिकारी की साराजेवो में हत्या हुई। ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया को सज़ा दी, रूस सर्बिया के साथ आया, जर्मनी ऑस्ट्रिया-हंगरी के साथ, फिर फ़्रांस और ब्रिटेन अपने साथियों के साथ। कुछ ही हफ़्तों में स्थानीय झगड़ा प्रथम विश्व युद्ध बन गया। 3D में यही श्रृंखला दिखती है।
1919 की संधियों ने बातचीत से शांति रखने को राष्ट्र संघ बनाया, पर उसकी अपनी सेना नहीं थी और कुछ बड़े राज्य बाहर रहे।
1930 का दशक: आक्रमण और तुष्टीकरण
महामंदी के बाद कई राज्यों में आक्रामक नेता आए। जापान ने मंचूरिया लिया (1931), इटली ने इथियोपिया पर हमला किया (1935), जर्मनी ने सेना खड़ी की, राइनलैंड में घुसा (1936) और ऑस्ट्रिया को अपने में मिला लिया (1938)। राष्ट्र संघ ने विरोध किया, पर कुछ कर न सका।
ब्रिटेन और फ़्रांस ने तुष्टीकरण की नीति अपनाई: युद्ध टालने को माँगें मान लेना। म्यूनिख़ समझौते (सितंबर 1938) में उन्होंने मान लिया कि जर्मनी चेकोस्लोवाकिया से सुडेटनलैंड ले ले, चेक लोगों की मौजूदगी के बिना। कुछ महीनों में जर्मनी ने बाकी हिस्सा भी ले लिया और सितंबर 1939 में पोलैंड पर हमला किया। द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया। सबक: आक्रमणकारी के आगे झुकना अक्सर उसे बढ़ावा देता है, पर 1914 से 1918 की भयानक हानि दोहराने का डर भी था।
1945 के बाद: गुट, संयुक्त राष्ट्र और बदलती दुनिया
1945 में द्वितीय विश्व युद्ध खत्म हुआ और शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र बना, जिसमें सुरक्षा परिषद और महासभा हैं। दुनिया अमेरिका और सोवियत संघ के नेतृत्व वाले दो गुटों में बँटी: शीत युद्ध, जिसमें सैन्य गठबंधन (नाटो 1949, वारसा संधि 1955), परमाणु हथियारों की होड़ और क्यूबा मिसाइल संकट (1962) जैसे तनावपूर्ण पल आए। दोनों सीधे युद्ध से बचे और परोक्ष युद्धों और होड़ वाली सहायता से लड़े।
साथ ही एशिया और अफ़्रीका उपनिवेशी शासन से आज़ाद हुए (उपनिवेशवाद का अंत)। भारत और कई नए राज्यों ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (1961) चुना, यानी दोनों गुटों से बाहर रहना। 1970 के दशक में वार्ताओं और हथियार-नियंत्रण संधियों ने तनाव घटाया (डेटांत)। सोवियत संघ 1991 में समाप्त हुआ।
तब से शक्ति ज़्यादा बँटी है: अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ, भारत आदि, जबकि जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, महामारी और साइबर ख़तरे जैसी साझा समस्याओं में सहयोग चाहिए। संयुक्त राष्ट्र, व्यापार-नियम और क्षेत्रीय संगठन ही 3D की खुली छूट वाले "बातचीत के मंच" हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: संप्रभुता = राज्य का अपनी ज़मीन पर पूरा नियंत्रण
- गठबंधन = मदद का वादा; जितने ज़्यादा बंधन, उतने ज़्यादा राज्य खिंचने का ख़तरा
- शक्ति-संतुलन = कोई एक राज्य सब पर राज करने जितना ताकतवर न हो
- तुष्टीकरण = युद्ध टालने के लिए माँगें मान लेना
- तिथियाँ: 1618 से 1648 तीस वर्षीय युद्ध; 1648 वेस्टफ़ालिया; 1815 वियना; 1914 से 1918 प्रथम विश्व युद्ध; 1938 म्यूनिख़; 1939 से 1945 द्वितीय विश्व युद्ध; 1945 संयुक्त राष्ट्र; 1991 सोवियत संघ का अंत
हल किए गए उदाहरण
1. तीस वर्षीय युद्ध कितने साल चला और किस संधि से खत्म हुआ?
1648 − 1618 = 30 साल। वेस्टफ़ालिया की संधि (1648) से खत्म हुआ।
2. 1914 में ऑस्ट्रिया-हंगरी और सर्बिया की लड़ाई विश्व युद्ध कैसे बनी?
सर्बिया के साथ रूस था, ऑस्ट्रिया-हंगरी के साथ जर्मनी, और फ़्रांस-ब्रिटेन रूस से बँधे थे। हर गठबंधन अगले राज्य को खींचता गया, जैसे श्रृंखला।
3. म्यूनिख़ समझौता शांति क्यों न रख सका?
जर्मनी को बिना लड़े माँगा हुआ मिल गया, तो उसकी हिम्मत बढ़ी और उसने और माँगा। कुछ महीनों में उसने बाकी चेकोस्लोवाकिया ले लिया और फिर पोलैंड पर हमला किया।
4. शीत युद्ध अमेरिका और सोवियत संघ के सीधे युद्ध में क्यों नहीं बदला? दो कारण दो।
दोनों के पास परमाणु हथियार थे, इसलिए सीधा युद्ध दोनों को खत्म कर देता। साथ ही वे परोक्ष युद्धों से लड़े और संयुक्त राष्ट्र व संधियों से बात करते रहे।
5. 1648 और 1945 में युद्ध खत्म करने के तरीकों की तुलना करो।
1648 में बड़ी शांति-बैठक ने राज्यों की संप्रभुता के नियम तय किए। 1945 में राज्यों ने स्थायी संस्था संयुक्त राष्ट्र भी बनाई, ताकि सिर्फ़ युद्ध खत्म न हो, नए युद्ध रुकें भी।
आम गलतियाँ
- कहना कि तीस वर्षीय युद्ध सिर्फ़ धर्म का था। सत्ता और ज़मीन भी मायने रखती थी, इसीलिए कैथोलिक फ़्रांस प्रोटेस्टेंट पक्ष में लड़ा।
- यह सोचना कि 1914 में सिर्फ़ एक हत्या ने विश्व युद्ध करवाया। वह आख़िरी चिंगारी थी; गठबंधन, हथियारों की होड़ और होड़ ने श्रृंखला-प्रतिक्रिया बनाई।
- तुष्टीकरण और गठबंधन को मिला देना। तुष्टीकरण झुकना है; गठबंधन मदद का वादा है।
- शीत युद्ध को अमेरिका-सोवियत सीधा युद्ध समझना। वह गुटों, हथियारों की होड़ और परोक्ष युद्धों वाली लंबी होड़ थी।