रूस की विदेश नीति के चार लक्ष्य
विदेश नीति का मतलब है कि एक राज्य दूसरे राज्यों से कैसा बर्ताव करता है: युद्ध, संधियाँ, गठबंधन और व्यापार। 1725 से 1881 तक रूस के उद्देश्य चार विचारों के आसपास रहे।
- समुद्र तक पहुँच: रूस के उत्तरी बंदरगाह सर्दी में जम जाते हैं। शासक बाल्टिक और काला सागर पर गर्म पानी के बंदरगाह चाहते थे।
- यूरोप में संतुलन: रूस गठबंधनों में इसलिए जुड़ा कि प्रशा या फ़्रांस जैसी कोई एक शक्ति बहुत बड़ी न हो जाए।
- बाल्कन के मित्र: ओटोमन साम्राज्य में बहुत से स्लाव और ऑर्थोडॉक्स ईसाई रहते थे। रूस उनकी रक्षा का दावा करता था।
- दूर के इलाक़े: साइबेरिया, प्रशांत तट और मध्य एशिया। इन्हें रखना महँगा था, पर राज्य बढ़ता गया।
महल तख़्तापलट का दौर (1725–1762): सात वर्षीय युद्ध
पीटर महान के बाद शासक जल्दी बदलते रहे, पर रूस बड़ी शक्ति बना रहा। 1741–43 में उसने स्वीडन से युद्ध किया और बाल्टिक तट का और हिस्सा रखा।
सात वर्षीय युद्ध (1756–1763)
यह यूरोप और समुद्र पार तक बड़ी शक्तियों का युद्ध था। साम्राज्ञी एलिज़ाबेथ के समय रूस ऑस्ट्रिया और फ़्रांस के साथ प्रशा और उसके राजा फ़्रेडरिक II के विरुद्ध लड़ा। रूसी सेना ने ग्रॉस-येगर्सडॉर्फ़ (1757) और कुनर्सडॉर्फ़ (1759) जैसी बड़ी लड़ाइयाँ जीतीं और थोड़े समय के लिए बर्लिन में घुसी (1760)।
1762 की शांति
1762 में एलिज़ाबेथ की मृत्यु हुई। उसका उत्तराधिकारी पीटर III फ़्रेडरिक का प्रशंसक था। उसने जल्दी शांति और फिर प्रशा से गठबंधन कर लिया। रूस ने अपने लाभ लौटा दिए। जल्द ही कैथरीन II गद्दी पर आई और रूस को युद्ध से बाहर रखा। सबक: शासक बदलने से विदेश नीति हफ़्तों में पलट सकती है।
कैथरीन II और पॉल I (1762–1801): काला सागर और पोलैंड
कैथरीन II काला सागर का उत्तरी तट चाहती थी, जो ओटोमन साम्राज्य और उसके सहयोगी क्रीमियाई ख़ानत के पास था।
- पहला तुर्की युद्ध (1768–74)। रूस ज़मीन और समुद्र पर जीता। कुचुक-कैनार्जी की संधि (1774) से रूस को तट तक पहुँच मिली और ओटोमन देशों के ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों की ओर से बोलने का अधिकार मिला।
- क्रीमिया (1783)। क्रीमिया रूस में मिला और सेवस्तोपोल में नौसेना का अड्डा बना।
- दूसरा तुर्की युद्ध (1787–92)। रूस ने उत्तरी काला सागर तट अपने पास रखा।
- पोलैंड का बँटवारा (1772, 1793, 1795)। पोलैंड-लिथुआनिया कमज़ोर और भीतर से बँटा था। रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया ने तीन चरणों में उसके हिस्से ले लिए, यहाँ तक कि वह राज्य मानचित्र से मिट गया। बहुत से पोल इसे अन्याय मानते थे, और आज भी ऐसा ही याद किया जाता है।
पॉल I
1798–99 में पॉल क्रांतिकारी फ़्रांस के विरुद्ध दूसरे राज्यों से जुड़ा। जनरल सुवोरोव ने 1799 में इटली से होकर आल्प्स पार रूसी सेना का नेतृत्व किया।
अलेक्ज़ेंडर II (1855–1881): क्रीमिया के बाद पुनर्निर्माण
क्रीमिया युद्ध (1853–56) हार के साथ ख़त्म हुआ। 1856 की पेरिस संधि से रूस काला सागर में युद्धक बेड़ा नहीं रख सकता था। अलेक्ज़ेंडर II और उसके विदेश मंत्री गोरचाकोव ने युद्ध के बाद ताक़त फिर बनाने और नए टकराव से बचने की कोशिश की।
- अमूर क्षेत्र (1858–60): चीन से संधियों से रूस को अमूर नदी की ज़मीन और प्रशांत तट मिला, जहाँ व्लादिवोस्तोक बसा।
- मध्य एशिया (1865–76): रूसी सेना ने ताशकंद, समरकंद और दूसरी जगहें लीं।
- अलास्का (1867): रूस ने अलास्का 72 लाख डॉलर में अमेरिका को बेच दिया। वह दूर था, बचाना कठिन था और कमाई कम थी।
- काला सागर (1870–71): जब यूरोप फ़्रांस-प्रशा युद्ध में व्यस्त था, रूस ने कहा कि वह काला सागर की रोक नहीं मानेगा। 1871 में शक्तियों ने मान लिया।
- तीन सम्राटों का संघ (1873): रूस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया-हंगरी आपस में सलाह करने पर राज़ी हुए।
बाल्कन युद्ध और बर्लिन कांग्रेस (1877–78)
1870 के दशक में बाल्कन के स्लाव ईसाइयों ने ओटोमन शासन के विरुद्ध विद्रोह किया। बहुत से रूसी उनकी मदद करना चाहते थे। 1877 में रूस ने ओटोमन साम्राज्य पर युद्ध घोषित किया। प्लेवना की घेराबंदी जैसी कठिन लड़ाइयों के बाद रूसी सेना कॉन्स्टेंटिनोपल के पास पहुँच गई।
सैन स्टेफ़ानो की संधि (मार्च 1878) ने बड़ा बुल्गारिया बनाया। ब्रिटेन और ऑस्ट्रिया-हंगरी को रूस का प्रभाव बहुत बढ़ने का डर था। बर्लिन कांग्रेस (जुलाई 1878) में बुल्गारिया छोटा कर दिया गया और रूस के लाभ घटा दिए गए। रूसियों ने सोचा कि पुराने साथियों ने धोखा दिया, और जर्मनी-ऑस्ट्रिया से रिश्ते ठंडे पड़ गए।
मार्च 1881 में अलेक्ज़ेंडर II की हत्या हुई। उसके पुत्र अलेक्ज़ेंडर III ने अधिक सतर्क और रूढ़िवादी रास्ता चुना।
कारण और परिणाम: परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
शृंखला बनाओ: लक्ष्य → घटना → परिणाम।
- लक्ष्य: गर्म बंदरगाह → पहला तुर्की युद्ध → 1774 की संधि, 1783 में क्रीमिया।
- लक्ष्य: यूरोप में संतुलन → सात वर्षीय युद्ध → 1762 की शांति बताती है कि शासक का फ़ैसला नीति बदल देता है।
- लक्ष्य: बाल्कन के मित्र → 1877–78 का युद्ध → सैन स्टेफ़ानो, फिर बर्लिन में कटौती।
- लक्ष्य: दूर के इलाक़े और धन → अलास्का बिका, अमूर और मध्य एशिया लिए।
सुझाव: समय-रेखा पर तारीख़ें लिखो और हर घटना को एक पंक्ति दो। 3D लैब ठीक यही करती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सात वर्षीय युद्ध: 1756–1763 (1762 तक रूस बनाम प्रशा)
- कुचुक-कैनार्जी की संधि: 1774 (पहला तुर्की युद्ध)
- क्रीमिया रूस में: 1783
- पोलैंड का बँटवारा: 1772, 1793, 1795
- अलास्का अमेरिका को बेचा: 1867, 72 लाख डॉलर में
- रूस-तुर्की युद्ध 1877–78: सैन स्टेफ़ानो (मार्च), बर्लिन (जुलाई) 1878
हल किए गए उदाहरण
1. 1762 में पीटर III ने प्रशा से युद्ध क्यों रोक दिया?
वह प्रशा के राजा फ़्रेडरिक II को पसंद करता था और शांति व गठबंधन चाहता था। इसलिए रूस ने सेना की जीती चीज़ें लौटा दीं। बाद में कैथरीन II ने भी रूस को युद्ध से बाहर रखा।
2. रूस काला सागर का तट क्यों चाहता था? दो कारण दो।
पहला, उत्तरी बंदरगाह जम जाते हैं; काला सागर के बंदरगाह सारा साल व्यापार और जहाज़ों के लिए खुले रहते हैं। दूसरा, इससे नौसेना को अड्डा मिला और दक्षिणी सीमा हमलों से सुरक्षित हुई।
3. रूस ने 1867 में अलास्का क्यों बेचा?
वह रूस से बहुत दूर था, बचाना महँगा था और आय कम थी। रूस को धन चाहिए था, और वह ब्रिटेन से संभावित टकराव की जगह अमेरिका से अच्छे रिश्ते चाहता था।
आम गलतियाँ
- कैथरीन II के दो तुर्की युद्धों को मिला देना। पहले (1768–74) से तट मिला; दूसरे (1787–92) ने उसे पक्का किया।
- यह लिखना कि सात वर्षीय युद्ध में रूस ने ज़मीन जीती। 1762 के बाद उसने लाभ लौटा दिए।
- सैन स्टेफ़ानो को अंतिम शांति मान लेना। बर्लिन कांग्रेस ने कुछ महीने बाद उसे बदल दिया।
- "अलास्का युद्ध में खोया" लिखना। वह 1867 में संधि से बेचा गया।