1682 का रूस और रीजेंसी
1682 में ज़ार एक निरंकुश शासक (autocrat) था: क़ानून बनाता और सिर्फ़ ईश्वर को जवाबदेह था, किसी संसद को नहीं। पुराने सामंत परिवार (बोयार) बोयार दूमा में सलाह देते थे। पैट्रिआर्क के नेतृत्व में ऑर्थोडॉक्स चर्च बहुत ताक़तवर था। ज़्यादातर लोग किसान थे; बहुत-से भूदास (serfs) थे — ज़मींदार की जागीर से बँधे, उसे श्रम या लगान देने वाले। व्यापार कम और शहर थोड़े थे।
1682 में ज़ार फ़्योदोर की मृत्यु पर महल के रक्षक (स्ट्रेल्त्सी) दंगा कर बैठे। दो लड़कों को एक साथ ताज मिला: इवान पंचम (जिनकी सेहत कमज़ोर थी) और पीटर (10 साल)। उनकी बड़ी बहन सोफ़िया अपने सलाहकार गोलित्सिन के साथ रीजेंट बनकर राज करती रहीं। 1689 में क्रीमिया ख़ानेत के विरुद्ध नाकाम युद्धों के बाद पीटर के समर्थकों ने सोफ़िया को हटाया और पीटर ने शासन शुरू किया (इवान की मृत्यु 1696 में)।
पीटर महान: पश्चिमीकरण, शुरुआती सुधार और विरोध (1689–1707)
जवानी में पीटर मॉस्को के 'जर्मन मोहल्ले' में विदेशियों के बीच समय बिताते और जहाज़ व फ़ौज के बारे में सीखते थे। 1697–98 में महान दूतावास (Grand Embassy) के साथ पश्चिमी यूरोप घूमे और एक शिपयार्ड में काम भी किया।
पश्चिमीकरण
लौटकर उन्होंने सामंतों को दाढ़ी कटवाने (या दाढ़ी कर देने), पश्चिमी कपड़े पहनने और कैलेंडर में साल जनवरी से शुरू करने का आदेश दिया। विदेशी विशेषज्ञ बुलाए, युवा सामंतों को पढ़ने विदेश भेजा, और नौवहन व गणित के स्कूल खोले।
शुरुआती सुधार और विरोध
उन्होंने अनिवार्य भर्ती (conscription) से आधुनिक सेना बनाई (घरों के हर समूह को जीवन भर के लिए रंगरूट देने पड़ते) और नौसेना खड़ी की। 1698 में स्ट्रेल्त्सी के विद्रोह को सख़्ती से कुचला और उन्हें भंग कर दिया। ओल्ड बिलीवर्स (चर्च के पुराने बदलाव न मानने वाले), रूढ़िवादी पादरी और सामंत सुधारों से नाख़ुश थे। भारी टैक्सों से विद्रोह हुए, जैसे आस्त्राख़ान (1705) और बुलाविन विद्रोह (1707)।
पीटर महान: युद्ध, पैसा, चर्च और शासन (1707–1725)
युद्ध
स्वीडन के विरुद्ध महान उत्तरी युद्ध (1700–21) बुरी तरह शुरू हुआ (नार्वा, 1700), पर पीटर ने सेना दोबारा बनाई और पोल्टावा (1709) में जीते। निस्ताद की संधि (1721) से रूस को बाल्टिक सागर का तट मिला। पीटर ने सम्राट की उपाधि ली। ऑटोमन साम्राज्य से युद्ध (1711) अच्छा नहीं गया।
पैसा और अर्थव्यवस्था
युद्ध के लिए पैसा चाहिए था। पीटर ने कई टैक्स लगाए, फिर हर पुरुष किसान पर प्रति व्यक्ति कर (poll/soul tax) (1718 से तय, 1724 से वसूली)। सरकारी मदद से लोहे के कारख़ाने, खदानें और कपड़ा मिलें खुलीं, जिनमें अक्सर भूदास काम करते थे (वणिकवाद/mercantilism: देश में उद्योग और निर्यात बढ़ाना)।
चर्च
1700 में पैट्रिआर्क की मृत्यु के बाद पीटर ने पद ख़ाली छोड़ा। 1721 में एक समिति, पवित्र धर्मसभा (Holy Synod), जिस पर एक सरकारी अधिकारी नज़र रखता था, उसकी जगह आई। चर्च राज्य के अधीन आ गया।
शासन
पीटर की ग़ैरहाज़िरी में कामकाज के लिए सीनेट (1711) बनी। कॉलेज नाम के मंत्रालय (1718 से) युद्ध, विदेश, पैसा और व्यापार देखते थे। देश प्रांतों (गुबेर्निया) में बँटा। पदों की तालिका (Table of Ranks) (1722) ने सेना, नौसेना और नागरिक सेवा में 14 ग्रेड बनाए; एक तय पद पर पहुँचकर आम आदमी भी सामंत बन जाता।
समाज
सामंतों को जीवन भर राज्य की सेवा करनी पड़ती थी। प्रति व्यक्ति कर ने किसानों को ज़मींदारों से और कसकर बाँधा, भूदास प्रथा कड़ी हुई। पीटर के बेटे अलेक्सेई ने उनका विरोध किया और 1718 में जेल में मरे; फिर पीटर ने (1722) नियम बनाया कि शासक कोई भी वारिस चुन सकता है।
महल तख़्तापलट का दौर और एलिज़ाबेथ (1725–1762)
पीटर 1725 में वारिस का नाम लिए बिना चल बसे। उनके उत्तराधिकार नियम से कोई तय क्रम नहीं बचा, इसलिए ख़ास गार्ड रेजिमेंटें और दरबारी गुट फ़ैसला कर सकते थे। इसे महल तख़्तापलट का दौर कहते हैं।
- कैथरीन प्रथम (1725–27), पीटर की विधवा, गार्ड्स और मेन्शिकोव के सहारे। सर्वोच्च प्रिवी परिषद (1726) ने सरकार चलाई।
- पीटर द्वितीय (1727–30), पीटर का पोता, कम उम्र में मृत्यु।
- अन्ना (1730–40): परिषद ने उनकी ताक़त सीमित करने वाली 'शर्तों' के साथ ताज दिया; गार्ड्स के साथ उन्होंने शर्तें फाड़ दीं और निरंकुश राज किया।
- इवान षष्ठ (1740–41), एक शिशु, जल्दी हटाया गया।
- एलिज़ाबेथ (1741–62), पीटर की बेटी, गार्ड्स के साथ सत्ता ली।
एलिज़ाबेथ ने व्यवहार में मृत्युदंड बंद किया, सीनेट की भूमिका लौटाई, भव्य महल बनवाए, और मॉस्को विश्वविद्यालय (1755) व कला अकादमी स्थापित की। सप्तवर्षीय युद्ध में रूस प्रशा के विरुद्ध अच्छा लड़ा।
पीटर की विरासत: मज़बूत सेना-नौसेना, यूरोपीय राजधानी, सेवा करने वाला सामंत वर्ग और राज्य-नियंत्रित चर्च; पर साथ में कड़ी भूदास प्रथा और पश्चिमी रंग में रँगे सामंतों व पारंपरिक किसानों के बीच खाई।
1762 तक का रूस और कैथरीन महान (1762–1796)
1762 तक रूस बड़ी ताक़त था। सामंतों की सेवा छोटी हो चुकी थी, और 1762 में पीटर तृतीय ने उन्हें अनिवार्य सेवा से पूरी तरह मुक्त कर दिया। कुछ ही महीनों बाद उनकी जर्मन मूल की पत्नी कैथरीन ने गार्ड्स के साथ तख़्तापलट कर गद्दी ली।
कैथरीन और प्रबोधन
कैथरीन वॉल्टेयर और दिदरो जैसे विचारकों को पत्र लिखती थीं और प्रबुद्ध निरंकुश शासक (enlightened despot) दिखना चाहती थीं: पूरी ताक़त वाला शासक जो तर्क से देश सुधारे। उनके नकाज़ (निर्देश, 1767) में मॉन्टेस्क्यू और बेकारिया के विचार थे; उन्होंने कई सामाजिक समूहों का विधायी आयोग बुलाया (भूदास नहीं), पर वह बिना नई संहिता के ख़त्म हो गया।
शासन
पुगाचोव विद्रोह के बाद प्रांतीय सुधार (1775) से कई छोटे प्रांत और ज़िले बने, जिनमें गवर्नर, अदालतें और स्थानीय सामंतों की भूमिका थी। सामंतों का चार्टर (1785) ने उनके अधिकार पक्के किए: सेवा ज़रूरी नहीं, शारीरिक दंड नहीं, ज़मीन और भूदास अपने, और स्थानीय सामंत सभाएँ। शहरों के चार्टर ने शहरों को कुछ स्वशासन दिया।
कैथरीन के समय समाज, भूदास प्रथा, विरोध और विदेश नीति
1796 तक रूस की आबादी करीब 3.7 करोड़ हो गई। लगभग आधे किसान निजी भूदास थे। ज़मींदार भूदासों को कठोर श्रम पर भेज सकते थे, और भूदास अपने मालिक की शिकायत साम्राज्ञी से नहीं कर सकते थे। कैथरीन ने करीब 8 लाख सरकारी किसान चहेतों को दे दिए, जो भूदास बन गए। चर्च की ज़मीनें राज्य ने ले लीं (1764)।
अर्थव्यवस्था बढ़ी: ज़्यादा लोहा (रूस अग्रणी उत्पादक था), दक्षिण में ज़्यादा खेती, और काला सागर पर व्यापार। पर भूदास श्रम से तरीक़े पुराने ही रहे।
विरोध और विद्रोह
पुगाचोव विद्रोह (1773–75) का नेता कज़ाक येमेल्यान पुगाचोव था, जो ख़ुद को पीटर तृतीय बताता था। कज़ाक, भूदास, कारख़ाना मज़दूर, ओल्ड बिलीवर्स और बश्किर जैसे लोग जुड़े। यह वोल्गा के किनारे फैला, फिर सेना ने कुचल दिया। भूदास प्रथा की आलोचना करने वाले लेखक, जैसे रादिश्चेव (1790), दंडित हुए, ख़ासकर फ़्रांसीसी क्रांति के बाद।
विदेश नीति
ऑटोमन साम्राज्य से दो युद्धों (1768–74 और 1787–92) से रूस को काला सागर पर ज़मीन और बंदरगाह मिले; 1783 में क्रीमिया ख़ानेत को मिला लिया। प्रशा और ऑस्ट्रिया के साथ रूस ने पोलैंड के तीन बँटवारों (1772, 1793, 1795) में हिस्सा लिया।
खुद करो
वर्ष की स्लाइडर से 1698, 1722, 1741, 1773 और 1785 पर रुको। हर घटना के लिए बताओ: इससे शासक मज़बूत हुआ, सामंत मज़बूत हुए, या विरोध दिखा?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- निरंकुशता (autocracy): एक व्यक्ति (ज़ार/सम्राट) का असीम शासन।
- पश्चिमीकरण: सेना, पहनावे, स्कूल और शासन में पश्चिमी यूरोप के तरीक़े अपनाना।
- पदों की तालिका (1722): सेवा के 14 ग्रेड; पद सेवा से, जन्म से नहीं।
- पवित्र धर्मसभा (1721): राज्य-नियंत्रित समिति, जिसने पैट्रिआर्क की जगह ली।
- महल तख़्तापलट (1725–62): गार्ड रेजिमेंटों की मदद से शासक बिठाना।
- प्रबुद्ध निरंकुशता: सर्वशक्तिमान शासक जो तर्क से राज्य सुधारने का दावा करे।
- भूदास प्रथा (serfdom): किसान ज़मींदार की जागीर से बँधे, श्रम या लगान के देनदार।
हल किए गए उदाहरण
1. पीटर ने रूस का पश्चिमीकरण कैसे किया? तीन तरीके।
सामंतों की दाढ़ी कटवाई और पश्चिमी कपड़े पहनवाए; विदेशी विशेषज्ञों से नौसेना और आधुनिक सेना बनाई; राजधानी बाल्टिक पर यूरोपीय ढंग के शहर सेंट पीटर्सबर्ग में ले गए।
2. पदों की तालिका क्यों अहम थी?
इसमें पद राज्य-सेवा से मिलता था, सिर्फ़ जन्म से नहीं। योग्य आम लोग ऊपर उठकर सामंत बन सकते थे, और सभी सामंतों के लिए सेवा की साफ़ सीढ़ी थी।
3. 1725 के बाद इतने तख़्तापलट क्यों हुए?
पीटर के 1722 के नियम से शासक कोई भी वारिस चुन सकता था, पर वे बिना नाम लिए चल बसे। कोई साफ़ नियम नहीं था, कई दावेदार बच्चे या प्रतिद्वंद्वी गुटों वाली महिलाएँ थीं, और महल के पास तैनात गार्ड्स फ़ैसला कर सकते थे।
4. क्रम में लगाओ: पोल्टावा, पुगाचोव विद्रोह, पदों की तालिका, सामंतों का चार्टर, महान दूतावास।
महान दूतावास (1697) → पोल्टावा (1709) → पदों की तालिका (1722) → पुगाचोव विद्रोह (1773) → सामंतों का चार्टर (1785)।
5. क्या कैथरीन महान प्रबुद्ध शासक थीं? पक्ष-विपक्ष में एक-एक बात।
पक्ष: प्रबोधन के विचारों वाला नकाज़ लिखा, विधायी आयोग बुलाया, स्कूलों और कला को बढ़ावा दिया। विपक्ष: भूदास प्रथा कठोर हुई, सरकारी किसान सामंतों को दिए, और रादिश्चेव जैसे आलोचकों को दंड दिया।
6. इतने अलग-अलग समूह पुगाचोव से क्यों जुड़े?
भूदास कठोर ज़मींदारों से नफ़रत करते थे, कज़ाक अपनी आज़ादी खोने से नाराज़ थे, कारख़ानों के भूदास कड़ी मेहनत झेलते थे, ओल्ड बिलीवर्स पर धार्मिक दबाव था, और बश्किर ज़मीन व टैक्स से परेशान थे। पुगाचोव का 'असली ज़ार' पीटर तृतीय होने का दावा उन्हें एक नेता दे गया।
आम गलतियाँ
- कहना कि पीटर ने भूदासों को आज़ाद किया। उनके प्रति व्यक्ति कर ने उन्हें ज़मींदारों से और कसकर बाँधा।
- कैथरीन महान को रूस में जन्मी मानना। वे जर्मन राजकुमारी थीं जिनकी शादी पीटर तृतीय से हुई।
- कहना कि कैथरीन के विधायी आयोग ने नई क़ानून संहिता बनाई। वह बैठा, बहस हुई, पर संहिता नहीं बनी।
- 'महल तख़्तापलट' को जनक्रांति समझना। ये दरबारी गुटों और गार्ड्स के छोटे सत्ता-हथियाव थे।