दो ज़ार और एक रीजेंट: सोफ़िया की रीजेंसी (1682–1689)
1682 में ज़ार की मृत्यु बिना साफ़ उत्तराधिकारी के हुई। स्ट्रेल्ट्सी (मॉस्को की बंदूकधारी सेना) के विद्रोह के बाद दस साल का पीटर और उसका बीमार सौतेला भाई इवान पंचम साथ-साथ ज़ार बनाए गए। उनकी बड़ी बहन सोफ़िया रीजेंट (बच्चे की जगह राज करने वाली) बनी। उसने अपने सलाहकार राजकुमार गोलित्सिन के साथ 7 साल राज किया।
1687 और 1689 में गोलित्सिन ने क्रीमिया ख़ानत के विरुद्ध दो क्रीमिया अभियान चलाए। दोनों में ज़मीन नहीं मिली और सोफ़िया की लोकप्रियता घटी। 1686 में रूस ने पोलैंड से "शाश्वत शांति" की और 1689 में नेरचिंस्क की संधि ने चिंग चीन के साथ सीमा तय की।
पीटर सत्ता लेता है (1689)
पीटर क्रेमलिन के बाहर पला और उसे नावें, कवायद और "खिलौना" पलटनें पसंद थीं, जो आगे असली गार्ड रेजिमेंट बनीं। अगस्त 1689 में उसने सोफ़िया के विरुद्ध क़दम उठाया। रईस और कई सैनिक उसके साथ आए। सोफ़िया को मठ में रखा गया। इवान पंचम 1696 में अपनी मृत्यु तक नाम का सह-ज़ार रहा, पर राज पीटर करता था।
आज़ोव अभियान (1695–1696)
रूस दक्षिणी समुद्र का रास्ता और ऑटोमन साम्राज्य से टक्कर चाहता था। आज़ोव दोन नदी के मुहाने पर एक किला है। पीटर ने 1695 में सिर्फ़ सेना के साथ हमला किया। किले को समुद्र से जहाज़ों से रसद मिलती रही, इसलिए हमला विफल हुआ।
पीटर ने जल्दी सीखा। सर्दी में उसने वोरोनेज़ में नदी का बेड़ा बनाया। 1696 में उसके बेड़े ने समुद्र का रास्ता रोका और आज़ोव जीत लिया गया। यह रूस की इस तरह की पहली सफलता थी। इसके बाद पीटर ने और बड़ी नौसेना बनवाने का आदेश दिया।
महान दूत-मंडल (1697–1698)
1697 में एक बड़ा दल मॉस्को से निकला, ताकि ऑटोमन विरोधी साथी ढूँढे और सीखे। पीटर गुप्त रूप से "पीटर मिख़ाइलोव" नाम के साधारण बढ़ई के रूप में उसके साथ गया। वह पश्चिमी यूरोप की यात्रा करने वाला पहला रूसी शासक था।
- रीगा और कोएनिग्सबर्ग: तोपख़ाने की शिक्षा।
- हॉलैंड (ज़ानदाम, एम्स्टर्डम): उसने जहाज़ बनाना सीखने के लिए जहाज़-घाटों में काम किया।
- इंग्लैंड (लंदन, डेपटफ़ोर्ड): जहाज़, विज्ञान और रॉयल सोसाइटी की यात्रा।
- वियना: सेना और राजनय।
दूत-मंडल को साथी नहीं मिले, पर पीटर ने कई विशेषज्ञ नौकरी पर रखे और औज़ार व किताबें ख़रीदीं।
घर वापसी, 1698
1698 में स्ट्रेल्ट्सी ने फिर विद्रोह किया और पीटर जल्दी घर लौटा। विद्रोह दबाया जा चुका था, पर उसने नेताओं को कड़ी सज़ा दी और बाद में स्ट्रेल्ट्सी को भंग कर दिया। उसने रोज़मर्रा का जीवन बदलना शुरू किया: रईसों से लंबी दाढ़ी कटवाने और यूरोपीय कपड़े पहनने को कहा गया। उसके लाए विचारों ने बड़े सुधारों और स्वीडन से युद्ध की तैयारी की।
करके देखो
तारीख़ों की सड़क बनाओ। कागज़ की पट्टी पर 1682, 1689, 1695, 1696, 1697, 1698 लिखो। हर के नीचे पीटर की उम्र (साल − 1672) लिखो। पहले अंदाज़ा लगाओ: आज़ोव गिरा तब वह कितने साल का था? फिर 3D में स्लाइडर से जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पीटर की उम्र = साल − 1672 (जन्म 1672)
- 1682 दो ज़ार → 1689 पीटर सत्ता में → 1695 आज़ोव विफल → 1696 आज़ोव जीता → 1697-98 महान दूत-मंडल
- रीजेंट: बाल-शासक की जगह राज करने वाला व्यक्ति
हल किए गए उदाहरण
1. 1689 में सत्ता लेते समय पीटर कितने साल का था?
1689 − 1672 = 17 साल।
2. सोफ़िया ने रीजेंट के रूप में कितने साल राज किया (1682 से 1689)?
1689 − 1682 = 7 साल।
3. पहला आज़ोव अभियान क्यों विफल रहा पर दूसरा सफल?
1695 में पीटर के पास बेड़ा नहीं था, इसलिए किले को समुद्र से रसद मिलती रही। 1696 में वोरोनेज़ के नए बेड़े ने समुद्र का रास्ता रोका और आज़ोव जीत लिया गया।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पीटर ने 1682 से अकेले राज किया। उसने इवान पंचम के साथ पद बाँटा था और सोफ़िया ने उनकी जगह राज चलाया।
- 1695 (विफल) और 1696 (आज़ोव जीता) को मिलाना।
- यह मानना कि महान दूत-मंडल कोई युद्ध था। यह सीखने और साथी खोजने की यात्रा थी।
- यह सोचना कि पीटर खुले ज़ार के रूप में गया। उसने "पीटर मिख़ाइलोव" नाम इस्तेमाल किया।