यूरोप, 1500 से 1700
1500 में यूरोप के ज़्यादातर लोग गाँवों में खेती करते थे। शहरों के कारीगर अपनी छोटी दुकान में हाथ से चीज़ें बनाते थे। अगले 200 सालों में यह धीरे-धीरे बदला।
तीन बड़े बदलाव साथ आए: नई तकनीक, मैन्युफ़ैक्टरी और पूँजीवादी संबंध।
नई तकनीक
तकनीक (टेक्नोलॉजी) यानी वे औज़ार और मशीनें जो काम आसान करें। इस समय:
- छपाई मशीन ने किताबें सस्ती कीं, इसलिए विचार और हुनर तेज़ फैले।
- पानी और हवा की चक्कियाँ अनाज पीसतीं, लकड़ी चीरतीं और पानी खींचतीं।
- बेहतर करघे और खदान के पंपों से ज़्यादा कपड़ा और धातु मिली।
- बेहतर जहाज़ और बंदूकें व्यापार और युद्ध में काम आईं।
अब एक आदमी एक दिन में ज़्यादा बना सकता था।
मैन्युफ़ैक्टरी: काम का बँटवारा
मैन्युफ़ैक्टरी एक बड़ी कार्यशाला थी जहाँ कई मज़दूर एक छत के नीचे काम करते थे। काम छोटे-छोटे हिस्सों में बँटा था। इसे श्रम-विभाजन कहते हैं।
तेज़ क्यों? जो आदमी एक छोटा काम बार-बार करता है, वह उसमें जल्दी और माहिर हो जाता है। औज़ार बदलने में समय नहीं जाता।
यहाँ कपड़ा, शीशा, काग़ज़, साबुन और हथियार बनते थे। ज़्यादातर काम अब भी हाथ के औज़ारों से होता था। बड़ी मशीनें औद्योगिक क्रांति में आईं।
पूँजीवादी संबंध
पूँजी वह पैसा है जो और पैसा बनाने में लगाया जाए। पूँजीपति (मालिक या व्यापारी) कारोबार में पूँजी लगाता है। वह माल और औज़ार ख़रीदता है, मज़दूरों को मज़दूरी देता है, माल बेचता है और मुनाफ़ा रखता है।
मज़दूर के पास औज़ार या माल नहीं होता था। वह मज़दूरी के बदले अपना काम बेचता था। बैंक, व्यापारिक कंपनियाँ और हिस्सेदारी (शेयर) बड़ी रक़म जुटाने में मदद करते थे।
सबको फ़ायदा नहीं हुआ। मज़दूरी कम थी और कई ग़रीबों की ज़मीन छिन गई।
समाज कैसे बदला
शहर बड़े हुए। अमीर व्यापारियों और मालिकों का नया वर्ग उभरा। साथ में मज़दूरों का बड़ा समूह भी बढ़ा। सामंत और किसान अब भी थे, पर उनकी ताक़त और ज़मीन कुछ घटी।
ट्राई-इट (करके देखो)
काग़ज़ के हवाई जहाज़ का टेस्ट। 4 दोस्तों से 8 जहाज़ बनवाओ। पहले हर कोई पूरा जहाज़ अकेले बनाए। 2 मिनट में गिनो। फिर काम बाँटो: एक आधा मोड़े, एक पंख मोड़े, एक नोक मोड़े, एक जाँचे। फिर गिनो। पहले अंदाज़ा लगाओ: कौन-सा तरीक़ा ज़्यादा जहाज़ देगा? फिर 3D में आख़िरी स्टेप पर स्लाइडर चलाकर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पूँजी → माल, औज़ार और मज़दूरी पर ख़र्च → माल की बिक्री → मुनाफ़ा → नई पूँजी
- श्रम-विभाजन = बड़े काम को छोटे कामों में बाँटना
- रोज़ का उत्पादन = मज़दूर × हर मज़दूर की बनाई चीज़ें
हल किए गए उदाहरण
1. एक कारीगर अकेले दिन में 2 थान कपड़ा बनाता है। बेहतर करघा इसे दोगुना कर देता है। 5 दिन में कितने थान?
रोज़ = 2 × 2 = 4 थान। 5 दिन में = 4 × 5 = 20 थान।
2. हॉल में 4 मज़दूर हैं और हर एक दिन में 10 चीज़ें बनाता है। अकेले कारीगर 4 चीज़ें बनाता था। हॉल कितने गुना ज़्यादा है?
हॉल = 4 × 10 = 40 चीज़ें। 40 ÷ 4 = 10 गुना।
3. मालिक 100 सिक्के लगाता है, माल 130 सिक्कों में बिकता है, मज़दूरी और माल का ख़र्च 110 है। मुनाफ़ा कितना?
मुनाफ़ा = बिक्री − ख़र्च = 130 − 110 = 20 सिक्के।
आम गलतियाँ
- मैन्युफ़ैक्टरी में बड़ी भाप-मशीनें होती थीं, ऐसा सोचना। ज़्यादातर हाथ के औज़ार थे; भाप के कारख़ाने बाद में आए।
- पूँजी और मुनाफ़े को मिलाना। पूँजी लगाया हुआ पैसा है; मुनाफ़ा सारे ख़र्च के बाद बचा पैसा है।
- सबको अमीर मान लेना। बहुत-से मज़दूर ग़रीब ही रहे।
- बदलाव अचानक हुआ, ऐसा सोचना। यह लगभग 200 साल में धीरे-धीरे हुआ।