चार शक्तियाँ, 1500 से 1800: राजनीतिक इतिहास की झलक
चार एशियाई भूमियाँ दुनिया के सबसे धनी और सुव्यवस्थित राज्यों में थीं।
- फ़ारस (ईरान): सफ़वी वंश 1501 में शाह इस्माइल से शुरू हुआ। शाह अब्बास प्रथम (1588–1629) ने मज़बूत सेना बनाई और इस्फ़हान को शानदार राजधानी बनाया। सफ़वी 1736 में गिरे; 1796 से क़ाजार शासक आए।
- भारत: बाबर ने 1526 में मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी। अकबर (1556–1605) ने उसे मज़बूत किया; शाहजहाँ ने ताजमहल बनवाया; औरंगज़ेब (1707 तक) के समय साम्राज्य सबसे बड़ा था। 1707 के बाद वह कमज़ोर हुआ और क्षेत्रीय राज्य उभरे।
- चीन: मिंग (1368–1644) के बाद छिंग (1644–1912) आए, जो मंचूरिया से थे। सम्राट कांग्शी और छियानलोंग के समय चीन विशाल और धनी था।
- जापान: सौ साल के गृहयुद्ध के बाद तोकुगावा शोगुन (1603–1868) ने एदो (आज का टोक्यो) से शासन किया। सम्राट क्योतो में रहता था, पर असली ताक़त शोगुन के पास थी।
राजवंश यानी शासक परिवार। मज़बूत शासक, अच्छा कर-संग्रह और वफ़ादार सेना राज्य को टिकाऊ रखते थे; कमज़ोर वारिस, युद्ध और विद्रोह उसे तोड़ देते थे।
समाज, धर्म और संस्कृति
चारों भूमियों में ज़्यादातर लोग किसान थे; शिल्पकार और व्यापारी कस्बों में रहते थे; शासक और सामंत सबसे ऊपर थे।
- फ़ारस: सफ़वियों ने शिया इस्लाम को राज्य का धर्म बनाया। फ़ारसी कविता, लघु-चित्र, टाइलें और क़ालीन प्रसिद्ध हैं।
- भारत: हिंदू, मुस्लिम, सिख, जैन और अन्य साथ रहते थे। अकबर ने सभी धर्मों के साथ न्याय करने की कोशिश की। मुग़ल इमारतें (ताजमहल, लाल क़िला), लघु-चित्र और संगीत में भारतीय और फ़ारसी शैलियाँ मिलीं। भारत का सूती कपड़ा कई देशों में बिकता था।
- चीन: सरकारी अधिकारी कठिन परीक्षाओं से चुने जाते थे, जो शिक्षक कन्फ़्यूशियस के विचारों पर थीं। चीन रेशम और बढ़िया चीनी मिट्टी (पोर्सलिन) बनाता था।
- जापान: समाज में चार वर्ग थे: समुराई (योद्धा), किसान, शिल्पकार और व्यापारी। लोग शिंतो और बौद्ध धर्म (ज़ेन सहित) मानते थे। एदो की संस्कृति ने काष्ठ-छापे (वुडब्लॉक प्रिंट) और काबुकी नाटक दिए।
यूरोपियों से संपर्क और आत्म-अलगाव
वास्को द गामा के समुद्र के रास्ते भारत पहुँचने (1498) के बाद यूरोपीय जहाज़ मसाले, सूती कपड़ा, रेशम, चाय और चाँदी के लिए एशिया आने लगे। पहले पुर्तगाली आए, फिर डच, अंग्रेज़ और फ़्रांसीसी।
- भारत और फ़ारस ने व्यापार का स्वागत किया। कंपनियों ने तटीय कस्बों में व्यापार-चौकियाँ बनाईं। आगे चलकर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में व्यापारी से शासक बन गई।
- चीन ने 1757 से यूरोपियों को केवल कैंटन (क्वांगचो) में कड़े नियमों के साथ व्यापार करने दिया। चीन चाय और रेशम बेचता था और बदले में कम चीज़ें चाहता था।
- जापान ने पहले पुर्तगालियों (1543) का स्वागत किया, पर शोगुन विदेशी असर और ईसाई प्रचार से डरते थे। 1630 के दशक में उन्होंने ज़्यादातर विदेशी संपर्क रोक दिया। केवल डच और चीनी व्यापारी नागासाकी के छोटे द्वीप देजिमा तक आ सकते थे। इसे आत्म-अलगाव (सकोकु) कहते हैं। जापान 200 साल से ज़्यादा शांत रहा, पर यूरोप की नई मशीनें और हथियार नहीं देख पाया।
एशिया का जागरण: 19वीं सदी के अंत और 20वीं के शुरू के एशियाई राज्य
1800 के दशक तक यूरोप के कारख़ाने सस्ता माल बनाते थे और यूरोपीय बंदूकें और जहाज़ ताक़तवर थे। कई एशियाई राज्यों पर दबाव पड़ा कि बाज़ार खोलें या ज़मीन खोएँ। पढ़े-लिखे एशियाइयों ने पूछा: हम कमज़ोर क्यों हैं, और फिर मज़बूत कैसे बनें? सुधार और राष्ट्रीय भावना की इसी लहर को एशिया का जागरण कहते हैं।
- चीन: अफ़ीम युद्धों (1839–42, 1856–60) में हार से असमान संधियाँ करनी पड़ीं। सुधार धीमे रहे। 1911 की क्रांति ने छिंग को हटाया और 1912 में चीन गणराज्य बना।
- फ़ारस: क़ाजार शाहों ने विदेशी कंपनियों को विशेष अधिकार दिए। संवैधानिक क्रांति (1905–1911) में लोगों ने चुनी हुई संसद पाई।
- भारत: 1857 के विद्रोह के बाद 1858 में ताज का शासन शुरू हुआ। पढ़े-लिखे भारतीयों ने 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बनाई और शासन में हिस्सेदारी माँगी।
- अन्य: उस्मानी साम्राज्य और उसके यंग टर्क, तथा वियतनाम, इंडोनेशिया और फ़िलीपींस में भी सुधार और आज़ादी के आंदोलन चले।
जापान का आधुनिकीकरण
1853 में अमेरिकी युद्धपोत कमोडोर पेरी के साथ आए और जापान से बंदरगाह खोलने को कहा। शोगुन मना नहीं कर सका, और कई समुराइयों को वह कमज़ोर लगा। 1868 में युवा नेताओं ने शोगुन का शासन ख़त्म किया और सम्राट को केंद्र में रखा: यह मेइजी पुनर्स्थापना ("प्रबुद्ध शासन") है।
इसके बाद जापान बहुत तेज़ी से बदला:
- रेलें, तार और आधुनिक डाक-व्यवस्था।
- कपड़ा, इस्पात और जहाज़ों के कारख़ाने, जो सरकारी पैसे से शुरू हुए।
- सब बच्चों के लिए स्कूल, और पढ़ने के लिए विदेश भेजे गए छात्र।
- आधुनिक सेना और नौसेना (हर आदमी भर्ती हो सकता था, केवल समुराई नहीं)।
- 1889 में संविधान और संसद।
जापान ने चीन (1894–95) और रूस (1904–05) को हराया। इससे एशियाइयों को दिखा कि एशिया का देश यूरोपीय शक्तियों की बराबरी कर सकता है, और दूसरी जगह आज़ादी के आंदोलनों को हौसला मिला। जापान ख़ुद भी साम्राज्य बना और पड़ोसियों की ज़मीन ली, जिससे बहुत दुख हुआ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- फ़ारस: सफ़वी 1501–1736, फिर 1796 से क़ाजार
- भारत: 1526 से मुग़ल (बाबर); 1707 तक मज़बूत; 1858 से ताज का शासन
- चीन: मिंग 1368–1644, छिंग 1644–1912, गणराज्य 1912
- जापान: तोकुगावा शोगुन 1603–1868; 1630 के दशक से अलगाव; 1868 से मेइजी
- समाज का ढेर: किसान व शिल्प (नीचे), धर्म व विचार (बीच), शासक (ऊपर)
- मुख्य शब्द: राजवंश, शोगुन, समुराई, कन्फ़्यूशियस परीक्षा, कैंटन व्यवस्था, सकोकु (अलगाव), मेइजी पुनर्स्थापना, एशिया का जागरण
हल किए गए उदाहरण
1. समय-क्रम में रखिए: मेइजी पुनर्स्थापना, बाबर द्वारा मुग़ल साम्राज्य की स्थापना, छिंग का बीजिंग पर क़ब्ज़ा, तोकुगावा शोगुन का आरंभ।
बाबर (1526) → तोकुगावा शोगुन (1603) → छिंग (1644) → मेइजी पुनर्स्थापना (1868)। 3D की साल-स्लाइडर पर हर एक जाँचिए।
2. चीन ने यूरोपियों को केवल कैंटन में ही क्यों आने दिया?
चीन धनी था और व्यापार पर नियंत्रण रखना तथा विदेशी असर कम रखना चाहता था। एक बंदरगाह होने से व्यापारियों पर नज़र रखना और कर लेना आसान था। विदेशी व्यापारियों को यह पसंद नहीं था, जिससे झगड़े और बाद में युद्ध हुए।
3. तोकुगावा शोगुन का शासन कितने साल चला?
यह 1603 में शुरू हुआ और 1868 में ख़त्म। 1868 − 1603 = 265 साल।
4. मेइजी जापान ने मज़बूत बनने के लिए जो तीन चीज़ें बनाईं, उनके नाम बताइए।
इनमें से कोई तीन: रेल और तार, कारख़ाने, स्कूल, आधुनिक सेना और नौसेना, संविधान और संसद (1889)।
5. 1600 के दशक में भारत और जापान ने यूरोपियों से कैसे संपर्क रखा, तुलना कीजिए।
भारत (मुग़ल) ने व्यापार का स्वागत किया और तट पर कई चौकियाँ बनीं। जापान (तोकुगावा) ने डच और चीनी व्यापारियों के लिए केवल एक छोटा द्वीप खुला रखा। भारत खुला रहा, जापान अलग-थलग था।
आम गलतियाँ
- सब एशियाई भूमियों को एक जैसा मान लेना। फ़ारस, भारत, चीन और जापान के धर्म, शासक और फ़ैसले अलग थे।
- यह कहना कि जापान हमेशा बंद था। 1630 के दशक तक वह पुर्तगालियों से और उसके बाद डच और चीनियों से व्यापार करता था।
- मेइजी (1868, आधुनिकीकरण) और तोकुगावा शोगुन (1603–1868, अलगाव) को मिला देना। मेइजी ने तोकुगावा की जगह ली।
- यह सोचना कि यूरोपियों के आने से पहले एशिया कमज़ोर था। 1600 के आसपास ये एशियाई भूमियाँ यूरोप के किसी भी देश जितनी धनी और सुव्यवस्थित थीं।