ऑटोमन, सफ़वी और मुग़ल साम्राज्य
लगभग 1450 से 1700 तक एशिया के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में तीन बड़े साम्राज्य उभरे। इतिहासकार इन्हें बारूद साम्राज्य (gunpowder empires) कहते हैं, क्योंकि तोपों और बंदूकों ने उन्हें ज़मीन जीतने और सँभालने में मदद की।
- ऑटोमन: 1453 में कुस्तुंतुनिया लिया। पूर्वी भूमध्यसागर के आसपास शासन किया; वेतन वाली सेना थी और अफ़सर केंद्र से भेजे जाते थे।
- सफ़वी: 1501 से ईरान पर शासन। भूमि को एक साझा मत और मज़बूत दरबार दिया। उनकी सड़कों पर रेशम और सामान चलता था।
- मुग़ल: 1526 से भारत के बड़े हिस्से पर शासन। अफ़सरों को मनसब (पद) मिलते थे और किसान नकद भू-राजस्व देते थे।
तीनों में समान: मज़बूत शासक, वेतन वाली सेना, कर वसूली और व्यापार।
मिंग और छिंग (चिंग) चीन
मिंग राजवंश ने 1368 से 1644 तक चीन पर शासन किया। मंगोल शासन के बाद उसने राज्य फिर खड़ा किया और अफ़सर चुनने के लिए परीक्षा-व्यवस्था रखी। विश्व-व्यापार की चाँदी चीन आई, इसलिए कर धीरे-धीरे चाँदी में दिए जाने लगे।
1644 में उत्तर-पूर्व से आए छिंग ने गद्दी ली। उन्होंने मिंग का ज़्यादातर शासन-ढंग रखा और साम्राज्य को बहुत बड़ा किया। छिंग 1912 तक रहे।
यूरोप में धर्म-सुधार और संप्रभु राज्य
1517 में मार्टिन लूथर ने चर्च की कुछ प्रथाओं का विरोध किया। छपे पर्चों से उनके विचार तेज़ी से फैले। जल्द ही ईसाइयों के कई समूह बने, जैसे लूथरन और काल्विनवादी। इसे धर्म-सुधार (Reformation) कहते हैं।
राजाओं और राजकुमारों ने पक्ष चुने, युद्ध लड़े और ताकतवर हुए। लंबे युद्धों के बाद वेस्टफ़ेलिया की शांति (1648) ने संप्रभु राज्य (sovereign state) के विचार को जमाया: ऐसा राज्य जिसका अपना शासक, कानून और सेना हो और जिसके ऊपर कोई और सत्ता न हो।
करके देखो: तालिका से तुलना
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मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बारूद साम्राज्य: ऑटोमन, सफ़वी, मुग़ल
- ऑटोमन ने कुस्तुंतुनिया लिया: 1453
- सफ़वी 1501, मुग़ल 1526
- मिंग 1368-1644, छिंग 1644-1912
- धर्म-सुधार की शुरुआत: 1517 (लूथर)
- वेस्टफ़ेलिया की शांति: 1648, संप्रभु राज्य
हल किए गए उदाहरण
1. ऑटोमन, सफ़वी और मुग़ल साम्राज्यों को बारूद साम्राज्य क्यों कहते हैं?
उन्होंने तोपों और बंदूकों के साथ वेतन वाली सेना का उपयोग करके युद्ध जीते और बड़ी भूमि पर नियंत्रण रखा।
2. समय-क्रम में लगाओ: वेस्टफ़ेलिया की शांति, कुस्तुंतुनिया पर कब्ज़ा, लूथर का विरोध।
कुस्तुंतुनिया पर कब्ज़ा (1453), लूथर का विरोध (1517), वेस्टफ़ेलिया की शांति (1648)।
3. धर्म-सुधार से राजा ताकतवर कैसे हुए?
चर्च बँट गया, तो राजा पक्ष चुन सकते थे और अपने राज्य में चर्च की ज़मीन व फ़ैसलों पर नियंत्रण ले सकते थे। इससे उनकी शक्ति बढ़ी।
आम गलतियाँ
- तीनों एशियाई साम्राज्यों को एक जैसा मान लेना: हर एक का अपना मत, सेना और कर-तंत्र था।
- सालों में गड़बड़ी: मिंग का अंत और छिंग की शुरुआत 1644 में है (1368 नहीं)।
- धर्म-सुधार को एक ही चर्च समझना: उससे कई समूह बने।
- संप्रभु राज्य को बड़ा राज्य समझना: इसका मतलब है ऐसा राज्य जिसके ऊपर कोई सत्ता नहीं।