खोज का युग क्या था?
खोज का युग (Age of Exploration) लगभग 1400 से 1600 का वह समय है जब नाविकों ने लंबी समुद्री यात्राएँ कीं और नए समुद्री रास्ते खोजे। इससे पहले ज़्यादातर लंबा व्यापार ज़मीन के रास्ते (जैसे रेशम मार्ग) या तटों के पास-पास होता था। इसके बाद महासागरों ने हर महाद्वीप को जोड़ दिया।
'खोज' शब्द यूरोप की नज़र से है। जिन ज़मीनों पर वे पहुँचे, वहाँ पहले से लोग रहते थे और उनका अपना लंबा इतिहास था। इसलिए आज इतिहासकार अक्सर 'मुलाक़ात' (encounter) कहते हैं।
यूरोप वाले क्यों निकले? कारण
- मसाले और व्यापार: काली मिर्च, लौंग, दालचीनी से खाना स्वादिष्ट बनता और लंबे समय तक चलता था। ये भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया से कई व्यापारियों के हाथों होकर आते, इसलिए यूरोप में बहुत महँगे थे।
- बिचौलियों का कब्ज़ा: 1453 में उस्मानी (ऑटोमन) तुर्कों ने कुस्तुनतुनिया जीत लिया। पूरब के रास्ते उस्मानी और वेनिस के व्यापारियों के हाथ में थे। बाकी देश सीधा समुद्री रास्ता चाहते थे।
- सोना-चाँदी: राजाओं को सेना और दरबार के लिए धन चाहिए था।
- धर्म: ईसाई धर्म फैलाना एक बड़ा उद्देश्य था।
- शान: राजा और नाविक नाम और नई ज़मीन चाहते थे।
- जिज्ञासा: पुनर्जागरण की सोच और छपी किताबों (जैसे मार्को पोलो की यात्रा कथा) ने उत्सुकता जगाई।
छोटे में: Gold, God, Glory (सोना, धर्म, शान)।
नए औज़ार: जहाज़, कुतुबनुमा और नक्शे
ज़मीन से बहुत दूर जाने के लिए अच्छे औज़ार चाहिए:
- कैरवेल: पुर्तगाल का हल्का, तेज़ जहाज़। इसका तिकोना लैटीन पाल (अरब नाविकों से सीखा) हवा के उलट भी जहाज़ चला सकता था।
- कुतुबनुमा (चुंबकीय दिक्सूचक): चीन में बना; बादल हों तब भी उत्तर दिशा बताता है।
- एस्ट्रोलैब और क्वाड्रेंट: सूर्य या ध्रुव तारे की ऊँचाई नापकर अक्षांश (कितना उत्तर या दक्षिण) बताते हैं।
- बेहतर नक्शे और छापाख़ाना जानकारी जल्दी फैलाते थे।
पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी (नाविक हेनरी) (1394–1460) ने अफ़्रीका के तट पर कई यात्राओं का ख़र्च उठाया और कुशल नाविक व नक्शा-निर्माता जुटाए।
पुर्तगाल: अफ़्रीका घूमकर भारत तक
पुर्तगाल अटलांटिक तट पर है और एशिया तक समुद्री रास्ता चाहता था। उसके जहाज़ धीरे-धीरे अफ़्रीका के किनारे दक्षिण की ओर बढ़े। बार्तोलोमियो डियास 1488 में अफ़्रीका के दक्षिणी सिरे (उत्तमाशा अंतरीप, Cape of Good Hope) तक पहुँचा। वास्को द गामा उसे पार करके, हिंद महासागर की मानसूनी हवाओं को जानने वाले एक स्थानीय मार्गदर्शक की मदद से, 1498 में केरल के कालीकट (कोझिकोड) पहुँचा। उसके लाए मसाले यात्रा के ख़र्च से कई गुना महँगे बिके।
फिर पुर्तगाल ने किलों और बंदरगाहों की कड़ी बनाई: गोवा (1510), मलक्का (1511) और मकाओ। उसने ताक़त से मसाला व्यापार पर कब्ज़ा करना चाहा और जहाज़ों से परमिट (कार्टाज़) ख़रीदवाया।
स्पेन: पश्चिम में अमेरिका और दुनिया का चक्कर
इटली के क्रिस्टोफ़र कोलंबस ने स्पेन की ओर से यात्रा की। उसे लगा कि पश्चिम जाकर एशिया पहुँचा जा सकता है। 1492 में वह कैरिबियन के द्वीपों पर पहुँचा। उसे लगा वह भारत के पास है, इसलिए उसने वहाँ के लोगों को 'इंडियन' कहा। जल्द ही यूरोप वालों ने समझा कि यह एक अनजान महाद्वीप है; इसे 'नई दुनिया' कहा गया और अमेरिगो वेस्पुची के नाम पर अमेरिका नाम पड़ा।
तोर्देसिलास की संधि (1494) में स्पेन और पुर्तगाल ने नई ज़मीनें आपस में बाँट लीं, वहाँ रहने वालों से पूछे बिना। फ़र्डिनैंड मैगलन 1519 में स्पेनी बेड़ा लेकर पश्चिम गया। वह फ़िलीपींस में मारा गया, पर एल्कानो के नेतृत्व में एक जहाज़ 1522 में लौटा: दुनिया की पहली परिक्रमा। इससे साबित हुआ कि पृथ्वी गोल है और लोगों की सोच से बहुत बड़ी है।
फिर स्पेनी सैनिकों (कॉन्क्विस्टाडोर) ने बंदूक़, घोड़ों, स्थानीय साथियों और सबसे बढ़कर बीमारियों के कारण एज़्टेक (कोर्टेस, 1521) और इंका (पिज़ारो, 1532) साम्राज्य जीत लिए।
सिर्फ़ यूरोप नहीं: झेंग हे के बेड़े
इससे पहले, 1405 से 1433 के बीच, चीन के एडमिरल झेंग हे ने हिंद महासागर पार भारत, अरब और पूर्वी अफ़्रीका तक सात बड़ी यात्राएँ कीं। उसके सबसे बड़े जहाज़ कोलंबस के जहाज़ों से कहीं बड़े थे। बाद में चीन ने ये यात्राएँ बंद कर दीं। अरब, भारतीय और मलय नाविक भी सदियों से मानसूनी हवाओं के सहारे हिंद महासागर में व्यापार करते आ रहे थे।
प्रभाव: कोलंबियाई आदान-प्रदान और जुड़ी हुई दुनिया
- कोलंबियाई आदान-प्रदान: पौधे, जानवर और कीटाणु दोनों गोलार्धों के बीच आए-गए। मक्का, आलू, टमाटर, मिर्च, कोको और तंबाकू अमेरिका से फैले; गेहूँ, गन्ना, घोड़े, गाय और सूअर वहाँ पहुँचे। चेचक जैसी बीमारियों ने अमेरिका के बहुत बड़े हिस्से के मूल निवासियों को मार डाला, क्योंकि उनमें इनसे लड़ने की ताक़त (प्रतिरक्षा) नहीं थी।
- अटलांटिक दास व्यापार: बागानों और खानों में काम के लिए लाखों अफ़्रीकियों को पकड़कर बहुत बुरी हालत में अमेरिका भेजा गया (त्रिकोणीय व्यापार)।
- वाणिज्यिक क्रांति: अमेरिका की चाँदी यूरोप और एशिया में आई; दाम बढ़े (मूल्य क्रांति)। बैंक, संयुक्त पूँजी कंपनियाँ और विश्व व्यापार बढ़े, जिससे पूँजीवाद का उदय हुआ।
- व्यापार का केंद्र बदला: लिस्बन, सेविल, एंटवर्प और बाद में एम्स्टर्डम व लंदन जैसे अटलांटिक बंदरगाह बढ़े; वेनिस जैसे भूमध्यसागरीय बंदरगाह कमज़ोर पड़े।
- उपनिवेश और साम्राज्य: बाद में डच, अंग्रेज़ और फ़्रांसीसी आए; व्यापारिक कंपनियाँ भारत आईं।
- ज्ञान: बेहतर नक्शे, पृथ्वी के गोल होने का सबूत, नए पौधों और लोगों का अध्ययन।
करके देखो: मिर्च जासूस
रसोई खोलो। दो सूची बनाओ: अमेरिका से आई चीज़ें (आलू, टमाटर, मिर्च, मक्का, मूँगफली, काजू, अनानास, पपीता) और 1500 से पहले भी भारत में मौजूद चीज़ें (चावल, गेहूँ, दालें, काली मिर्च, अदरक, हल्दी)। आज के खाने में कौन-सी सूची लंबी है? फिर 3D का चरण 5 देखो और दोनों तरफ़ जाती चीज़ें गिनो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- खोज का युग ≈ 1400–1600
- कारण: सोना, धर्म, शान + मसाले, 1453 के बाद उस्मानी कब्ज़ा, जिज्ञासा
- औज़ार: कैरवेल + तिकोना (लैटीन) पाल, कुतुबनुमा, एस्ट्रोलैब, नक्शे
- 1405–33 झेंग हे · 1488 डियास · 1492 कोलंबस · 1494 तोर्देसिलास · 1498 द गामा कालीकट · 1510 गोवा · 1519–22 मैगलन–एल्कानो
- कोलंबियाई आदान-प्रदान = अमेरिका और बाकी दुनिया के बीच पौधों, जानवरों, लोगों और कीटाणुओं का आना-जाना
- प्रभाव: विश्व व्यापार, मूल्य क्रांति, पूँजीवाद, उपनिवेश, दास व्यापार, बीमारी से मौतें
हल किए गए उदाहरण
1. 1498 से पहले यूरोप में मसाले इतने महँगे क्यों थे?
पहला: मसाले भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में उगते थे। दूसरा: वे कई व्यापारियों (भारतीय, अरब, उस्मानी, वेनिस) के हाथों से गुज़रते थे। तीसरा: हर व्यापारी मुनाफ़ा और कर जोड़ता था। इसलिए शुरू में 1 का माल यूरोप में लगभग 20 का हो जाता। सीधा समुद्री रास्ता बिचौलियों को हटा देता।
2. डियास, कोलंबस, द गामा और मैगलन को क्रम में लगाओ और बताओ हर एक ने क्या किया।
डियास (1488) अफ़्रीका के दक्षिणी सिरे तक गया। कोलंबस (1492) अटलांटिक पार कर अमेरिका पहुँचा। द गामा (1498) समुद्र के रास्ते कालीकट, भारत पहुँचा। मैगलन के बेड़े (1519–22) ने दुनिया का चक्कर लगाया।
3. खोज के युग ने भारत का खाना कैसे बदला?
कोलंबियाई आदान-प्रदान से पुर्तगाली अमेरिका के पौधे भारत लाए: मिर्च, आलू, टमाटर, मक्का, काजू, अनानास और पपीता। खाने में मिर्च ने काफ़ी हद तक काली मिर्च की जगह ले ली। आज ये रोज़ के भारतीय खाने का हिस्सा हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि कोलंबस भारत पहुँचा। वह अमेरिका के कैरिबियन द्वीपों पर पहुँचा था; समुद्र से भारत वास्को द गामा पहुँचा।
- यह सोचना कि ज़मीनें ख़ाली थीं। अमेरिका और अफ़्रीका में करोड़ों लोग पहले से रहते थे; 'खोज' यूरोप का शब्द है।
- डियास और द गामा में गड़बड़। डियास अफ़्रीका के सिरे तक गया (1488); द गामा भारत तक (1498)।
- यह सोचना कि मैगलन ख़ुद दुनिया घूमकर लौटा। वह 1521 में फ़िलीपींस में मारा गया; आख़िरी जहाज़ एल्कानो 1522 में लाया।