South 중학교 2학년 History ①
अध्याय: 7
1. Foundations of learning history
What history is and why we study it · Methods of historical inquiry
- ऐतिहासिक चिंतन: इतिहासकार कैसे काम करते हैं – इतिहास साक्ष्य के सहारे अतीत का अध्ययन है। घटनाओं को समय-रेखा पर क्रम से रखिए और उनके संदर्भ में पढ़िए। प्राथमिक स्रोत (उसी समय बने) और द्वितीयक स्रोत (बाद में बने) दोनों का उपयोग कीजिए। हर स्रोत को परखिए: किसने, कब, क्यों बनाया और क्या छूट गया। घटनाओं के कई कारण होते हैं: धीमे दीर्घकालिक कारण और एक तात्कालिक कारण। परिवर्तन और निरंतरता दोनों देखिए, महत्व तय कीजिए और साक्ष्य के साथ तर्क दीजिए।
2. Rise of civilisations and the ancient world
Prehistoric cultures and early civilisations · West Asia and the Mediterranean world · Ancient China and India
- प्रारंभिक मानव और सभ्यता की शुरुआत – आज के इंसान (होमो सेपियन्स) लगभग 3 लाख साल पहले अफ़्रीका में आए और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैले। इतिहासकार बीते समय को औज़ारों के हिसाब से युगों में बाँटते हैं: पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण, फिर ताँबा, कांसा और लोहा। खेती सीखने पर लोग गाँवों में बस गए, अनाज जमा करने लगे और बर्तन बनाने लगे। कुछ गाँव बढ़कर योजनाबद्ध नगर बने, जैसे सिंधु और घग्गर नदियों के किनारे हड़प्पा के नगर। लगभग उसी समय मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन में भी नदी-घाटी सभ्यताएँ बनीं।
- प्राचीन साम्राज्य: फ़ारस, यूनान, रोम, भारत और चीन – साम्राज्य एक बहुत बड़ा राज्य है जिसमें एक शासक कई इलाक़ों और समुदायों पर शासन करता है। प्राचीन विश्व में फ़ारस (लगभग 550 ई.पू.) ने सड़कें और राज्यपालों वाले प्रांत बनाए। मकदूनिया के सिकंदर ने यूनानी विचार सिंधु तक पहुँचाए। रोम एक नगर से साम्राज्य बना, जिसे क़ानून, सड़कें और सेनादल जोड़े रखते थे। भारत में मौर्य साम्राज्य और अशोक ने दया का संदेश फैलाया; चीन में चिन ने कई राज्य जोड़े और हान साम्राज्य ने रेशम मार्ग चलाया। इन साम्राज्यों ने व्यापार, क़ानून, धर्म और विचारों से यूरोप, पश्चिम एशिया, भारत और चीन को जोड़ा।
3. World religions and regional cultures
East Asian order under Sui and Tang · India, West Asia and Islam · Christian Europe and Islamic contacts
- पूर्वी एशिया का इतिहास: चीन, कोरिया और जापान ने एक-दूसरे को कैसे बदला – पूर्वी एशिया (चीन, कोरिया, जापान, मंगोलिया और वियतनाम जैसे पास के इलाक़े) का इतिहास आपस में जुड़ा है। स्टेपी के पशुपालक और नदी मैदानों के किसान मिले भी और लड़े भी। शुरुआती राज्य साम्राज्य बने। नज़राना व्यवस्था, चीनी लिपि, कन्फ़्यूशियस के विचार, बौद्ध धर्म और क़ानून संहिताओं ने पूरे क्षेत्र को जोड़ा। व्यापार, मंगोल विजय और 1590–1640 के युद्धों ने इसे बदला, फिर छिंग, जोसॉन और एदो का दौर आया।
4. Exchange and change across regions
Song, the Mongol Empire and Eurasian trade · Ming-Qing, Edo Japan and Mughal India · Ottoman growth and early modern Europe
- दुनिया के व्यापार नेटवर्क, लगभग 1200–1450 – लगभग 1200 से 1450 के बीच तीन बड़े नेटवर्क अफ़्रीका, एशिया और यूरोप को जोड़ते थे: ज़मीन पर रेशम मार्ग, समुद्र में हिंद महासागर के रास्ते, और रेगिस्तान में सहारा पार के ऊँट-मार्ग। व्यापार इसलिए बढ़ा क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों के पास अलग चीज़ें थीं, नई तकनीक ने सफ़र सुरक्षित और सस्ता किया, और ताक़तवर राज्यों (चीन के सोंग और मिंग, मंगोल साम्राज्य, माली, स्वाहिली शहर-राज्य और मुस्लिम सल्तनतें) ने व्यापारियों की रक्षा की। इन रास्तों पर रेशम, मसाले, सोना और नमक ही नहीं, धर्म, तकनीक, फ़सलें और बीमारी भी चलीं। साथ ही पूर्वी एशिया, इस्लामी दुनिया, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ़्रीका, यूरोप और अमेरिका में राज्य अपने-अपने ढंग से बढ़े।
- पूर्वी एशिया का इतिहास: चीन, कोरिया और जापान ने एक-दूसरे को कैसे बदला – पूर्वी एशिया (चीन, कोरिया, जापान, मंगोलिया और वियतनाम जैसे पास के इलाक़े) का इतिहास आपस में जुड़ा है। स्टेपी के पशुपालक और नदी मैदानों के किसान मिले भी और लड़े भी। शुरुआती राज्य साम्राज्य बने। नज़राना व्यवस्था, चीनी लिपि, कन्फ़्यूशियस के विचार, बौद्ध धर्म और क़ानून संहिताओं ने पूरे क्षेत्र को जोड़ा। व्यापार, मंगोल विजय और 1590–1640 के युद्धों ने इसे बदला, फिर छिंग, जोसॉन और एदो का दौर आया।
- खोज का युग (लगभग 1400–1600) – लगभग 1400 से 1600 के बीच पुर्तगाल और स्पेन के नाविकों ने, और बाद में दूसरे यूरोपीय देशों ने, दुनिया के महासागरों में नए समुद्री रास्ते खोले। वे बिचौलियों के बिना मसाले और सोना चाहते थे, ईसाई धर्म फैलाना चाहते थे और नाम कमाना चाहते थे। कैरवेल जहाज़, कुतुबनुमा, एस्ट्रोलैब और बेहतर नक्शों ने लंबी यात्राएँ मुमकिन कीं। डियास अफ़्रीका के दक्षिणी सिरे तक पहुँचा (1488), कोलंबस अमेरिका पहुँचा (1492), वास्को द गामा भारत पहुँचा (1498) और मैगलन के बेड़े ने दुनिया का चक्कर लगाया (1519–22)। इससे पहले चीन के झेंग हे के बड़े बेड़े अफ़्रीका तक गए थे (1405–33)। इन यात्राओं ने पहली बार पूरी दुनिया को जोड़ा। यूरोप को व्यापार, नई फ़सलें और धन मिला, पर दूसरों को जीत लिया जाना, जानलेवा बीमारियाँ और अटलांटिक दास व्यापार झेलना पड़ा।
5. Imperialism and nation-building
Citizens' revolutions and nation states · Industrialisation and imperialism · Asian responses and nation-building
- क्रांतियों का युग (लगभग 1770–1850) – लगभग 1770 से 1850 के बीच अमेरिका और यूरोप में लोगों ने राजाओं, औपनिवेशिक शासकों और पुराने विशेषाधिकारों को उखाड़ा या चुनौती दी। स्वतंत्रता, समानता और अधिकारों के नए विचार असली मुश्किलों से मिले: अन्यायपूर्ण कर, कर्ज़, भूख और दासता। अमेरिकी क्रांति (1776) ने लिखित संविधान वाला गणराज्य बनाया। फ़्रांसीसी क्रांति (1789) ने सामंती विशेषाधिकार ख़त्म किए और नागरिकों के अधिकार घोषित किए। लहर हैती, लैटिन अमेरिका और 1848 में यूरोप तक फैली। 1815 में वियना में राजाओं ने पलटवार किया, पर नागरिकता, संविधान और राष्ट्र के विचार बने रहे।
- औद्योगिक क्रांति: कारण, प्रभाव और सुधार (1760–1914) – लगभग 1760 से 1914 के बीच काम घर के हाथ-औज़ारों से हटकर कारख़ानों की मशीनों पर आ गया। पहली लहर (लगभग 1760–1840) ब्रिटेन में कोयला, लोहा, भाप शक्ति और सूती मिलों से शुरू हुई। दूसरी लहर (लगभग 1870–1914) में इस्पात, बिजली, रसायन और तेल आए, और उद्योग पश्चिमी यूरोप, अमेरिका, जापान और रूस तक फैला। शहर तेज़ी से बढ़े; मज़दूरों को लंबे घंटे, बाल श्रम और गंदे घर मिले। मज़दूरों ने संघ बनाए, नए विचारों (उदारवाद, समाजवाद, रूढ़िवाद) में बहस हुई, और सरकारों ने धीरे-धीरे कारख़ाना, स्वास्थ्य और मताधिकार के सुधार किए।
- राष्ट्रीय आंदोलन: लोकगीतों से स्वशासन तक – राष्ट्र लोगों का बड़ा समूह है जो साझी भाषा, संस्कृति, इतिहास या अपना भविष्य ख़ुद तय करने की इच्छा के कारण एक होने का एहसास करता है। 19वीं सदी में ज़्यादातर लोग कई जातीय समूहों वाले बड़े साम्राज्यों में रहते थे। राष्ट्रीय आंदोलन आमतौर पर तीन चरणों में बढ़े: विद्वानों ने भाषा और इतिहास को जगाया (A), कार्यकर्ताओं ने समितियाँ, स्कूल और अख़बार बनाए (B), फिर आम लोग दलों और जन आंदोलनों में जुड़े (C)। साम्राज्यों ने सुधार या दमन से जवाब दिया। यही ढर्रा एशिया और अफ़्रीका तक फैला, जहाँ राष्ट्रवाद औपनिवेशिक शासन के ख़िलाफ़ संघर्ष बना और 1945 के बाद कई नए देश बने।
6. World wars and social change
The two world wars and world order · War crimes, human rights and peace · National movements in Asia and Africa
- दोनों विश्व युद्ध: कारण, नुक़सान और नई विश्व व्यवस्था – प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) सैन्यवाद, गुटबंदी, साम्राज्यवादी होड़ और राष्ट्रवाद से पैदा हुआ, और 1914 की एक हत्या ने चिंगारी लगाई। उसकी शांति संधि, महामंदी और तानाशाहों के उदय से द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) हुआ। दोनों संपूर्ण युद्ध थे, जिनमें पूरी अर्थव्यवस्था और नई तकनीक लगी। दूसरे युद्ध में लगभग चार गुना लोग मरे, आधे से ज़्यादा आम नागरिक, जिनमें होलोकॉस्ट में मारे गए साठ लाख यहूदी भी हैं। पहले युद्ध के बाद राष्ट्र संघ असफल रहा; दूसरे के बाद संयुक्त राष्ट्र, मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) और उपनिवेशों की आज़ादी ने दुनिया बदल दी।
- मानव अधिकार: अर्थ, इतिहास, प्रकार और संरक्षण – मानव अधिकार वे मूल स्वतंत्रताएँ और सुरक्षाएँ हैं जो हर व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण मिलती हैं। ये सार्वभौमिक, अविच्छेद्य, अविभाज्य और गरिमा पर आधारित हैं। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) ने सबके लिए एक साझा मानक बनाया, जिसे बाद में संधियों से बाध्यकारी बनाया गया। संविधान, न्यायालय, आयोग, संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज इनकी रक्षा करते हैं, और केवल दूसरों की रक्षा के लिए बने उचित क़ानून ही इन्हें सीमित कर सकते हैं।
- राष्ट्रीय आंदोलन: लोकगीतों से स्वशासन तक – राष्ट्र लोगों का बड़ा समूह है जो साझी भाषा, संस्कृति, इतिहास या अपना भविष्य ख़ुद तय करने की इच्छा के कारण एक होने का एहसास करता है। 19वीं सदी में ज़्यादातर लोग कई जातीय समूहों वाले बड़े साम्राज्यों में रहते थे। राष्ट्रीय आंदोलन आमतौर पर तीन चरणों में बढ़े: विद्वानों ने भाषा और इतिहास को जगाया (A), कार्यकर्ताओं ने समितियाँ, स्कूल और अख़बार बनाए (B), फिर आम लोग दलों और जन आंदोलनों में जुड़े (C)। साम्राज्यों ने सुधार या दमन से जवाब दिया। यही ढर्रा एशिया और अफ़्रीका तक फैला, जहाँ राष्ट्रवाद औपनिवेशिक शासन के ख़िलाफ़ संघर्ष बना और 1945 के बाद कई नए देश बने।
7. The contemporary world
Cold War and the Third World · Democracy and human rights movements · Globalisation today
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।
- मानव अधिकार: अर्थ, इतिहास, प्रकार और संरक्षण – मानव अधिकार वे मूल स्वतंत्रताएँ और सुरक्षाएँ हैं जो हर व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण मिलती हैं। ये सार्वभौमिक, अविच्छेद्य, अविभाज्य और गरिमा पर आधारित हैं। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) ने सबके लिए एक साझा मानक बनाया, जिसे बाद में संधियों से बाध्यकारी बनाया गया। संविधान, न्यायालय, आयोग, संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज इनकी रक्षा करते हैं, और केवल दूसरों की रक्षा के लिए बने उचित क़ानून ही इन्हें सीमित कर सकते हैं।
- वैश्वीकरण और वैश्विक शासन – वैश्वीकरण यानी सामान, पूँजी, सूचना और श्रम के प्रवाह का बढ़ना, जो जगहों को आपस में जोड़ता है। तकनीक, परिवहन और व्यापार समझौते इसे चलाते हैं। प्रवाह असमान हैं: अमीर देशों के पास ज़्यादा ताक़त है, ग़रीब देशों की बाज़ार तक पहुँच कमज़ोर है। TNC एक ही चीज़ को कई जगह बनवाती हैं। UN, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाएँ इन प्रवाहों को संभालने की कोशिश करती हैं, और संधियाँ अंटार्कटिका जैसे साझा क्षेत्रों को बचाती हैं। वैश्वीकरण विकास और सस्ता सामान लाता है, पर असमानता, टकराव और पर्यावरण का नुक़सान भी।