पुरानी व्यवस्था और उसमें दरारें
1700 के दशक में यूरोप के ज़्यादातर हिस्से पर निरंकुश राजा राज करते थे, जो पूरी सत्ता का दावा करते थे। समाज दर्जों में बँटा था। फ़्रांस में ये तीन एस्टेट थे: पादरी (पहला), कुलीन (दूसरा) और बाक़ी सब (तीसरा: किसान, मज़दूर, व्यापारी, वकील)। पहले दो के पास विशेषाधिकार थे और वे कम कर देते थे। तीसरा एस्टेट, लगभग 97% लोग, ज़्यादातर कर देता था।
बड़े साम्राज्य अटलांटिक पार उपनिवेशों पर भी राज करते थे और लाखों ग़ुलाम बनाए गए अफ़्रीकियों से काम लेते थे।
महँगे युद्धों से सरकारें भारी कर्ज़ में थीं। चुकाने के लिए कर बढ़ाए गए, अक्सर उन पर जिन्हें वोट का हक़ नहीं था। ख़राब फ़सल से रोटी महँगी हुई।
नए विचार: प्रबोधन
प्रबोधन (Enlightenment) के लेखकों ने कहा कि सरकार परंपरा से नहीं, तर्क से चलनी चाहिए। मुख्य विचार:
- प्राकृतिक अधिकार: हर व्यक्ति को जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति का अधिकार है (जॉन लॉक)।
- सामाजिक अनुबंध और जन-संप्रभुता: सत्ता लोगों से आती है (रूसो)।
- शक्तियों का पृथक्करण: क़ानून बनाना, शासन करना और न्याय करना अलग-अलग हाथों में हो (मॉन्टेस्क्यू)।
ये विचार किताबों, अख़बारों, पर्चों, क्लबों और कॉफ़ी हाउसों से फैले। (प्रबोधन पर हमारा अलग पाठ भी देखें।)
अमेरिकी क्रांति (1775–1783)
कारण: एक महँगे युद्ध के बाद ब्रिटेन ने अपने 13 उत्तर अमेरिकी उपनिवेशों पर कर (स्टांप, चाय) लगाए, पर उन्हें संसद में वोट नहीं दिया: "प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं"।
घटनाएँ: 1775 में लड़ाई शुरू हुई। 4 जुलाई 1776 को उपनिवेशों ने स्वतंत्रता की घोषणा जारी की: लोगों के अधिकार हैं और अत्याचारी सरकार बदली जा सकती है। फ़्रांस की मदद से वे जीते; 1783 में ब्रिटेन ने स्वतंत्रता मानी।
परिणाम: संयुक्त राज्य अमेरिका लिखित संविधान (1787) और अधिकार-पत्र (1791) वाला गणराज्य बना। पर दासता जारी रही और महिलाएँ व मूल निवासी बाहर रहे। युद्ध के ख़र्च ने फ़्रांस को भी संकट की ओर धकेला।
फ़्रांसीसी क्रांति (1789–1799)
कारण: भारी शाही कर्ज़, तीसरे एस्टेट पर अन्यायपूर्ण कर, रोटी की क़ीमतें, और प्रबोधन के विचार।
- मई 1789: पैसा जुटाने के लिए राजा ने एस्टेट्स-जनरल बुलाई। तीसरे एस्टेट ने ख़ुद को राष्ट्रीय सभा घोषित किया और संविधान बनने तक न बिखरने की शपथ ली (टेनिस कोर्ट शपथ)।
- 14 जुलाई 1789: पेरिस की भीड़ ने शाही क़िले और जेल बास्तील पर धावा बोला।
- अगस्त 1789: सामंती विशेषाधिकार ख़त्म; मनुष्य और नागरिक के अधिकारों की घोषणा ने कहा कि लोग स्वतंत्र और अधिकारों में बराबर पैदा होते हैं।
- 1791: संविधान ने राजा की शक्ति सीमित की। ओलम्प द गूज ने जवाब में महिलाओं के अधिकारों की घोषणा लिखी।
- 1792–1794: फ़्रांस गणराज्य बना; राजा को मृत्युदंड (1793); आतंक के दौर में हज़ारों को "दुश्मन" कहकर मारा गया। 1794 में फ़्रांसीसी उपनिवेशों में दासता ख़त्म हुई।
- 1795–1799: एक कमज़ोर सरकार (डायरेक्टरी) चली, फिर सेनापति नेपोलियन बोनापार्ट ने सत्ता ले ली।
नारा: स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व।
नेपोलियन और वियना कांग्रेस
नेपोलियन ने 1799 में सत्ता ली और 1804 में ख़ुद को सम्राट बनाया। उसने कुछ क्रांतिकारी बदलाव रखे: नागरिक संहिता (1804) ने क़ानून के सामने समानता दी, संपत्ति की रक्षा की और जीते हुए इलाक़ों में सामंती कर ख़त्म किए। पर उसने तानाशाह की तरह राज किया, प्रेस पर रोक लगाई और 1802 में उपनिवेशों में दासता लौटा दी। 1815 में उसकी अंतिम हार हुई।
वियना कांग्रेस (1814–1815) में विजेता शक्तियों ने, ऑस्ट्रिया के मंत्री मेटरनिख के नेतृत्व में, पुराने राजवंश लौटाने और शक्ति-संतुलन बनाने की कोशिश की ताकि कोई एक देश हावी न हो। इस रूढ़िवाद ने दशकों तक उदार और राष्ट्रीय आंदोलनों को रोकने की कोशिश की।
लहर फैली: हैती और लैटिन अमेरिका
हैती (1791–1804): फ़्रांसीसी उपनिवेश सेंट-डोमिंग में ग़ुलाम बनाए गए अफ़्रीकियों ने बागानों की क्रूर दासता के ख़िलाफ़ विद्रोह किया। तूसां लूवेर्त्यूर और बाद में ज़ाँ-ज़ाक देसालीन के नेतृत्व में उन्होंने फ़्रांसीसी, स्पेनी और ब्रिटिश सेनाओं को हराया। 1804 में हैती पूर्व-ग़ुलामों का बनाया पहला स्वतंत्र देश बना, और वहाँ दासता ख़त्म हुई।
लैटिन अमेरिका (1810–1825): जब नेपोलियन ने स्पेन पर क़ब्ज़ा किया, तो दक्षिण और मध्य अमेरिका के उपनिवेश ख़ुद शासन करने लगे। सिमोन बोलिवार, होज़े दे सान मार्तीन और मिगेल इदाल्गो जैसे नेताओं ने स्वतंत्रता युद्ध लड़े। 1825 तक स्पेन के ज़्यादातर मुख्य भूमि उपनिवेश स्वतंत्र हो गए; ब्राज़ील 1822 में पुर्तगाल से अलग हुआ। अक्सर ज़्यादा फ़ायदा स्थानीय अमीरों को हुआ, जबकि कई ग़रीब और मूल निवासी लोगों के लिए कम बदला।
1830, 1848 और राष्ट्र का उदय
1830 में फ़्रांसीसियों ने अपने लौटाए गए राजा को हटाया, और यूनान स्वतंत्र हुआ। 1848 में क्रांतियों की लहर फ़्रांस, जर्मन और इतालवी राज्यों, ऑस्ट्रियाई साम्राज्य और हंगरी में फैली। लोग संविधान, मताधिकार, स्वतंत्र प्रेस और कई जगह एकीकृत राष्ट्र-राज्य चाहते थे। जर्मन राज्यों में चुनी हुई फ़्रैंकफ़र्ट संसद ने संविधान लिखा, पर प्रशिया के राजा ने उसका दिया ताज ठुकरा दिया और 1849 में वह बिखर गई।
1848 की ज़्यादातर क्रांतियाँ जल्दी विफल हुईं, पर ऑस्ट्रिया में भूदास प्रथा ख़त्म हुई और राष्ट्रीय एकता के विचार बढ़े। स्वच्छंदतावाद (Romanticism), भावनाओं, लोकगीतों और किसी जनता के इतिहास की प्रशंसा करने वाले कला-साहित्य आंदोलन ने राष्ट्रीय गर्व फैलाया।
विरासत: क्या बदला और क्या नहीं
- लोग राजा की प्रजा से अधिकारों वाले नागरिक बने।
- लिखित संविधान, चुनाव और शक्तियों का पृथक्करण फैले।
- राष्ट्रवाद: साझा भाषा और इतिहास वाले लोग ख़ुद अपना शासन करें।
- इन विचारों ने बाद के स्वतंत्रता संघर्षों को प्रेरित किया, भारत में भी।
सीमाएँ: वोट अक्सर सिर्फ़ संपत्ति वाले पुरुषों को मिला; महिलाओं को बराबर अधिकार नहीं मिले; कई जगह दासता दशकों चली; और कुछ क्रांतियाँ हिंसक हुईं या तानाशाही में ख़त्म हुईं।
करके देखें: कारण-परिणाम की कड़ी
चार पर्चियाँ लें। उन पर लिखें: विचार, तनाव, चिंगारी, बदलाव। 3D टाइमलाइन से एक क्रांति चुनें और हर पर्ची पर एक तथ्य लिखें। फिर 1848 की क्रांतियों के लिए करें। किसमें चिंगारी तेज़ थी पर बदलाव कम? इससे समझ आएगा कि वह विफल क्यों हुई।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- निरंकुश राजतंत्र: असीमित शक्ति वाला राजा या रानी
- एस्टेट: पुरानी फ़्रांसीसी व्यवस्था के दर्जे (पादरी, कुलीन, आम लोग)
- गणराज्य: बिना राजा का राज्य, जिसे चुने हुए प्रतिनिधि चलाते हैं
- संविधान: देश के शासन और लोगों के अधिकारों को तय करने वाला मूल लिखित क़ानून
- रूढ़िवाद: पारंपरिक शासकों और संस्थाओं को बनाए रखने या लौटाने की चाह
- राष्ट्रवाद: यह विश्वास कि साझा भाषा और इतिहास वाले लोगों का अपना राज्य हो
हल किए गए उदाहरण
1. अमेरिकी क्रांति पर विचार → तनाव → चिंगारी → बदलाव की कड़ी लगाएँ।
विचार: प्राकृतिक अधिकार, प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं। तनाव: महँगे युद्ध के बाद नए ब्रिटिश कर। चिंगारी: 1775 में लेक्सिंगटन और कॉनकॉर्ड की लड़ाई, फिर 1776 की घोषणा। बदलाव: लिखित संविधान वाला स्वतंत्र गणराज्य।
2. फ़्रांस के तीसरे एस्टेट को व्यवस्था अन्यायपूर्ण क्यों लगती थी?
वह लगभग 97% लोग था और ज़्यादातर कर देता था, पर पादरी और कुलीनों के विशेषाधिकार थे और एस्टेट्स-जनरल में वे उसे 2 के मुक़ाबले 1 से हरा सकते थे।
3. नेपोलियन ने क्रांति के विचारों को किन दो तरीक़ों से बनाए रखा और किन दो से तोड़ा?
रखा: नागरिक संहिता में क़ानून के सामने समानता; जीते इलाक़ों में सामंती कर ख़त्म। तोड़ा: सम्राट बनकर प्रेस पर रोक; 1802 में दासता की वापसी।
4. हैती की क्रांति ख़ास क्यों है?
यह ग़ुलाम बनाए गए लोगों का सफल विद्रोह था। इसने पूर्व-ग़ुलामों का पहला देश बनाया और वहाँ दासता ख़त्म की, जो अमेरिकी और फ़्रांसीसी क्रांतियों से आगे की बात थी।
5. वियना कांग्रेस ने क्या करने की कोशिश की?
पुराने राजवंश लौटाना, शक्ति-संतुलन के लिए सीमाएँ फिर से तय करना, और नई क्रांतियाँ रोकना। इससे रूढ़िवाद का दौर आया।
6. 1848 की ज़्यादातर क्रांतियाँ विफल क्यों हुईं?
क्रांतिकारी बँटे हुए थे (मध्यवर्ग बनाम मज़दूर, अलग-अलग राष्ट्रीयताएँ), सेनाएँ राजाओं के प्रति वफ़ादार रहीं, और शासकों ने फिर नियंत्रण पा लिया। फिर भी संविधान और राष्ट्र-राज्य के विचार फैले।
आम गलतियाँ
- सोचना कि एक ही कारण क्रांति समझा देता है। विचार और असली मुश्किलें दोनों, और एक चिंगारी, देखें।
- कहना कि फ़्रांसीसी क्रांति ने सबको अधिकार दिए। शुरू में महिलाएँ, ग़रीब और ग़ुलाम बनाए गए लोग अक्सर बाहर रहे।
- स्वतंत्रता की घोषणा (अमेरिका, 1776) और मनुष्य के अधिकारों की घोषणा (फ़्रांस, 1789) में उलझना।
- सोचना कि नेपोलियन ने बस क्रांति ख़त्म कर दी। उसने कुछ बदलाव रखे, पर राजनीतिक स्वतंत्रता छीन ली।