Poland Liceum ogólnokształcące, klasa II History
अध्याय: 17
1. The Polish–Lithuanian state under the last Jagiellons
The Polish–Lithuanian state under the last Jagiellons
- मध्यकालीन राज्य: कैसे बने, बँटे और फिर जुड़े – लगभग 900 से 1600 ई. के बीच यूरोप के कई राज्य एक जैसे ढंग से बने। एक शासक वंश ने कबीलों को जोड़ा, ईसाई धर्म अपनाया और शाही मुकुट पाया। ज़मीन वारिसों में बाँटने से अक्सर विखंडन हुआ; बाद में ताक़तवर राजा ने ज़मीन फिर जोड़ी और किले, नगर व कानून बनाए। राज्य शादी से भी जुड़े (व्यक्तिगत और वास्तविक संघ), और संसद के ज़रिए सामंतों की ताक़त बढ़ी।
2. Formation of the Polish–Lithuanian Commonwealth
Formation of the Polish–Lithuanian Commonwealth
- संवैधानिक इतिहास: नियमों ने शासकों को कैसे बाँधा – संविधान सर्वोच्च क़ानून है जो बताता है कि शक्ति किसके पास है, वह कैसे सीमित है और लोगों के क्या अधिकार हैं। शासकों पर सीमाएँ धीरे-धीरे बढ़ीं: मैग्ना कार्टा (1215), पोलिश–लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेम जैसी सामंती संसदें और चुने हुए राजा (1569–1573 से), और इंग्लैंड का अधिकार विधेयक (1689)। प्रबोधन के विचारकों ने प्राकृतिक अधिकार, सामाजिक अनुबंध, राष्ट्र की संप्रभुता और शक्तियों के पृथक्करण के विचार जोड़े। फिर पहले लिखित राष्ट्रीय संविधान आए: अमेरिका (1787), पोलैंड–लिथुआनिया का 3 मई संविधान और फ़्रांस (1791), और स्पेन का काडिज़ संविधान (1812)। 19वीं सदी के उदार शासन संपत्ति-आधारित मताधिकार वाले संवैधानिक राजतंत्र थे; 20वीं सदी में वोट सभी पुरुषों और फिर सभी वयस्कों तक फैला। भारत (1950) और 1989 के बाद मध्य-पूर्वी यूरोप के आधुनिक संविधान गारंटीशुदा अधिकार और संवैधानिक अदालतें जोड़ते हैं।
3. First free elections and their results
First free elections and their results
- भारत में चुनाव – चुनाव से करोड़ों लोग प्रतिनिधि चुनते हैं और शांति से सरकार बदल सकते हैं। लोकसभा और विधानसभाओं के लिए भारत में सर्वाधिक मत से जीत (FPTP) प्रणाली है, और राज्यसभा व राष्ट्रपति के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व का एक रूप। परिसीमन से निर्वाचन क्षेत्रों की आबादी लगभग बराबर रखी जाती है। स्वतंत्र निर्वाचन आयोग मतदाता सूची बनाता है और चुनाव कराता है। भारत में बहुदलीय व्यवस्था है, गठबंधन सरकारें आम हैं, और दल-बदल विरोधी कानून चुने हुए सदस्यों को पाला बदलने से रोकता है।
4. Renaissance in Poland
Renaissance in Poland
- बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ: पुनर्जागरण, धर्म-सुधार और विज्ञान – 14वीं से 17वीं सदी में इटली के व्यापारी शहरों से यूनानी-रोमन ज्ञान में नई रुचि जगी, जिसे मानवतावाद कहते हैं। कलाकारों ने परिप्रेक्ष्य और शरीर-रचना के अध्ययन से असली जैसे चित्र बनाए; वास्तुकारों ने बड़े गुंबद बनाए। छपाई ने विचार फैलाए। कुछ पढ़ी-लिखी महिलाओं ने लिखा और शासन किया। 1517 में लूथर के विरोध से पश्चिमी चर्च कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट में बँटा, और कैथोलिक चर्च ने भी सुधार किए। कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने ब्रह्मांड की समझ बदली, और नाविकों ने अमेरिका और भारत के समुद्री रास्ते खोजे।
5. Domestic and foreign policy of the Commonwealth in the 17th century
Domestic and foreign policy of the Commonwealth in the 17th century
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: देश एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं – अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) पढ़ता है कि राज्य और दूसरे कर्ता (अंतरराष्ट्रीय संगठन, कंपनियाँ, NGO) आपस में कैसे व्यवहार करते हैं। राज्य संप्रभु हैं और कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए हर राज्य विदेश नीति से अपना राष्ट्रीय हित साधता है: कूटनीति, व्यापार, सहायता, गठबंधन और, सबसे बुरे हाल में, बल। ज़मीन, संसाधन, शक्ति और पहचान पर टकराव और सुरक्षा दुविधा से संघर्ष होता है। साझा फ़ायदे, संधियों, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संगठनों से सहयोग बढ़ता है। यथार्थवाद शक्ति पर, उदारवाद सहयोग पर ज़ोर देता है। शांति बातचीत, मध्यस्थता, शांति सेना और न्याय से बनती है।
6. System, society and culture of the 17th-century Commonwealth
System, society and culture of the 17th-century Commonwealth
- सामाजिक इतिहास: आम लोग कैसे जीते थे – सामाजिक इतिहास सिर्फ़ राजाओं, युद्धों और संधियों का नहीं, आम लोगों के जीवन का अध्ययन है। यह पूछता है कि लोग कैसे काम करते, रहते, खाते, कपड़े पहनते, शादी करते, पूजा करते, बीमार पड़ते और मनोरंजन करते थे, और समाज किन समूहों में बँटा था। आधुनिक समय से पहले ज़्यादातर समाज पिरामिड जैसे थे: ऊपर थोड़े शासक और सामंत, फिर पुरोहित और धनी परिवार, बीच में नगरवासी, व्यापारी और कारीगर, और नीचे किसानों की बहुत बड़ी परत, साथ में कुछ बंधुआ लोग जैसे भूदास या ग़ुलाम। गाँव अपना समुदाय खुद चलाते थे; शहर बाज़ार, गिल्ड और अलग-अलग समूहों के मेल की जगह थे। औद्योगीकरण ने लोगों को खेतों से कारख़ानों में पहुँचाया, मज़दूर वर्ग और बढ़ता मध्य वर्ग बनाया, और यूनियन, नए क़ानून और बाद में कल्याणकारी राज्य लाया। नई रोशनी, यातायात, अख़बार, स्कूल और दवाओं से रोज़ का जीवन बदला। सामाजिक इतिहासकार "छिपे" लोगों (महिलाएँ, ग़रीब, अल्पसंख्यक, प्रवासी) को भी खोजते हैं, और यह भी देखते हैं कि भावनाएँ और रीति-रिवाज कैसे बदले।
7. Europe in the Age of Enlightenment
Europe in the Age of Enlightenment
- ज्ञानोदय (प्रबोधन युग) – ज्ञानोदय (लगभग 1680–1800) यूरोप का एक आंदोलन था जिसने कहा कि दुनिया को समझने और समाज चलाने में सिर्फ़ परंपरा नहीं, तर्क और सबूत काम में लाओ। यह वैज्ञानिक क्रांति से निकला। लॉक, मॉन्टेस्क्यू, वॉल्टेयर, रूसो, कांट और मैरी वॉल्स्टनक्राफ़्ट जैसे विचारकों ने प्राकृतिक अधिकार, शक्तियों का बँटवारा, बोलने और धर्म की आज़ादी और जनता की सहमति से सरकार की बात की। विचार किताबों, अख़बारों, सैलूनों और विश्वकोश से फैले। कुछ राजाओं ने सुधार किए (प्रबुद्ध निरंकुशता); इन विचारों ने अमेरिकी (1776) और फ़्रांसीसी (1789) क्रांति और बाद में भारत समेत दुनिया भर के सुधारकों को प्रेरणा दी।
8. Revolutions of the 18th century
Revolutions of the 18th century
- क्रांतियों का युग (लगभग 1770–1850) – लगभग 1770 से 1850 के बीच अमेरिका और यूरोप में लोगों ने राजाओं, औपनिवेशिक शासकों और पुराने विशेषाधिकारों को उखाड़ा या चुनौती दी। स्वतंत्रता, समानता और अधिकारों के नए विचार असली मुश्किलों से मिले: अन्यायपूर्ण कर, कर्ज़, भूख और दासता। अमेरिकी क्रांति (1776) ने लिखित संविधान वाला गणराज्य बनाया। फ़्रांसीसी क्रांति (1789) ने सामंती विशेषाधिकार ख़त्म किए और नागरिकों के अधिकार घोषित किए। लहर हैती, लैटिन अमेरिका और 1848 में यूरोप तक फैली। 1815 में वियना में राजाओं ने पलटवार किया, पर नागरिकता, संविधान और राष्ट्र के विचार बने रहे।
9. The Commonwealth in the 18th century (Saxon era to 3 May Constitution)
The Commonwealth in the 18th century (Saxon era to 3 May Constitution)
- संवैधानिक इतिहास: नियमों ने शासकों को कैसे बाँधा – संविधान सर्वोच्च क़ानून है जो बताता है कि शक्ति किसके पास है, वह कैसे सीमित है और लोगों के क्या अधिकार हैं। शासकों पर सीमाएँ धीरे-धीरे बढ़ीं: मैग्ना कार्टा (1215), पोलिश–लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेम जैसी सामंती संसदें और चुने हुए राजा (1569–1573 से), और इंग्लैंड का अधिकार विधेयक (1689)। प्रबोधन के विचारकों ने प्राकृतिक अधिकार, सामाजिक अनुबंध, राष्ट्र की संप्रभुता और शक्तियों के पृथक्करण के विचार जोड़े। फिर पहले लिखित राष्ट्रीय संविधान आए: अमेरिका (1787), पोलैंड–लिथुआनिया का 3 मई संविधान और फ़्रांस (1791), और स्पेन का काडिज़ संविधान (1812)। 19वीं सदी के उदार शासन संपत्ति-आधारित मताधिकार वाले संवैधानिक राजतंत्र थे; 20वीं सदी में वोट सभी पुरुषों और फिर सभी वयस्कों तक फैला। भारत (1950) और 1989 के बाद मध्य-पूर्वी यूरोप के आधुनिक संविधान गारंटीशुदा अधिकार और संवैधानिक अदालतें जोड़ते हैं।
10. Fall of the Commonwealth
Fall of the Commonwealth
- पोलैंड के विभाजन और राष्ट्रमंडल का पतन – 1772, 1793 और 1795 में रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया ने पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल को बाँट लिया, जब तक वह मिट नहीं गया। सरदारों के झगड़े, लिबरम वीटो, छोटी सेना और विदेशी दख़ल से राज्य कमज़ोर था। सुधार का संविधान (3 मई 1791) देर से आया: टारगोविका संघ ने रूसी सेना बुला ली, और 1794 का कोशिउश्को विद्रोह हार गया। पोलैंड फिर राज्य बनकर 1918 में लौटा।
11. Enlightenment culture in the Commonwealth
Enlightenment culture in the Commonwealth
- ज्ञानोदय (प्रबोधन युग) – ज्ञानोदय (लगभग 1680–1800) यूरोप का एक आंदोलन था जिसने कहा कि दुनिया को समझने और समाज चलाने में सिर्फ़ परंपरा नहीं, तर्क और सबूत काम में लाओ। यह वैज्ञानिक क्रांति से निकला। लॉक, मॉन्टेस्क्यू, वॉल्टेयर, रूसो, कांट और मैरी वॉल्स्टनक्राफ़्ट जैसे विचारकों ने प्राकृतिक अधिकार, शक्तियों का बँटवारा, बोलने और धर्म की आज़ादी और जनता की सहमति से सरकार की बात की। विचार किताबों, अख़बारों, सैलूनों और विश्वकोश से फैले। कुछ राजाओं ने सुधार किए (प्रबुद्ध निरंकुशता); इन विचारों ने अमेरिकी (1776) और फ़्रांसीसी (1789) क्रांति और बाद में भारत समेत दुनिया भर के सुधारकों को प्रेरणा दी।
12. The Napoleonic era
The Napoleonic era
जल्द आ रहा है
13. Europe and the world after the Congress of Vienna
Europe and the world after the Congress of Vienna
- यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय – 1789 से पहले यूरोप कई छोटे राज्यों में बँटा था और लोग राजा के वफ़ादार थे। फ़्रांसीसी क्रांति ने कहा कि सत्ता जनता की है और जनता मिलकर एक राष्ट्र है। नेपोलियन ने बराबरी वाले कानून फैलाए। 1815 में राजा लौटे, पर उदारवादी, लेखक और भूखे आम लोग 1830 और 1848 में उठ खड़े हुए। कई छोटे राज्य जोड़कर इटली (1861) और जर्मनी (1871) बने। राष्ट्र को मारियान और जर्मेनिया जैसी स्त्री-आकृतियों से दिखाया गया। 1914 तक राष्ट्रवाद साम्राज्यवाद से जुड़ गया और बाल्कन का तनाव पहले विश्व युद्ध तक ले गया।
14. Polish lands and their inhabitants 1815–1848
Polish lands and their inhabitants 1815–1848
जल्द आ रहा है
15. The January Uprising and its consequences
The January Uprising and its consequences
जल्द आ रहा है
16. Europe and the world, late 19th – early 20th century
Europe and the world, late 19th – early 20th century
- यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय – 1789 से पहले यूरोप कई छोटे राज्यों में बँटा था और लोग राजा के वफ़ादार थे। फ़्रांसीसी क्रांति ने कहा कि सत्ता जनता की है और जनता मिलकर एक राष्ट्र है। नेपोलियन ने बराबरी वाले कानून फैलाए। 1815 में राजा लौटे, पर उदारवादी, लेखक और भूखे आम लोग 1830 और 1848 में उठ खड़े हुए। कई छोटे राज्य जोड़कर इटली (1861) और जर्मनी (1871) बने। राष्ट्र को मारियान और जर्मेनिया जैसी स्त्री-आकृतियों से दिखाया गया। 1914 तक राष्ट्रवाद साम्राज्यवाद से जुड़ गया और बाल्कन का तनाव पहले विश्व युद्ध तक ले गया।
17. Economic and social change; new ideas
Economic and social change; new ideas
- औद्योगिक क्रांति: कारण, प्रभाव और सुधार (1760–1914) – लगभग 1760 से 1914 के बीच काम घर के हाथ-औज़ारों से हटकर कारख़ानों की मशीनों पर आ गया। पहली लहर (लगभग 1760–1840) ब्रिटेन में कोयला, लोहा, भाप शक्ति और सूती मिलों से शुरू हुई। दूसरी लहर (लगभग 1870–1914) में इस्पात, बिजली, रसायन और तेल आए, और उद्योग पश्चिमी यूरोप, अमेरिका, जापान और रूस तक फैला। शहर तेज़ी से बढ़े; मज़दूरों को लंबे घंटे, बाल श्रम और गंदे घर मिले। मज़दूरों ने संघ बनाए, नए विचारों (उदारवाद, समाजवाद, रूढ़िवाद) में बहस हुई, और सरकारों ने धीरे-धीरे कारख़ाना, स्वास्थ्य और मताधिकार के सुधार किए।