पृष्ठभूमि: बड़ा पर कमज़ोर राज्य
1700 के दशक तक पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल यूरोप के सबसे बड़े राज्यों में था, पर उसकी ताकत बिखरी हुई थी। राजा को सरदार (कुलीन) चुनते थे और उसके पास बहुत कम अधिकार थे। कोई भी एक कुलीन सदस्य लिबरम वीटो से सेइम (संसद) को रोक सकता था, इसलिए कानून अक्सर पास नहीं हो पाते थे। ताकतवर मैग्नेट परिवार विदेशी राज्यों का साथ देते थे। सेना छोटी थी और ख़ज़ाना ख़ाली। इसके पड़ोसी रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया के पास मज़बूत शासक, बड़ी सेनाएँ और कर-व्यवस्था थी।
1772 में तीनों शक्तियों ने पहले विभाजन में सीमा के इलाके ले लिए। पोलैंड-लिथुआनिया की बहुत ज़मीन और आबादी चली गई, और सेइम को यह मानना पड़ा। (यहाँ जानबूझकर नक्शा नहीं दिया गया है; 3D में आकार सिर्फ़ मोटे अंदाज़ के लिए है।)
सुधार और 3 मई 1791 का संविधान
1772 के बाद कई सुधारक मज़बूत राज्य चाहते थे। महान सेइम (1788–1792) ने सेना बढ़ाई, शहरों की मदद की, और 3 मई 1791 को लिखित संविधान पास किया। उसने लिबरम वीटो ख़त्म किया, राजा और सरकार को मज़बूत किया, शहरवासियों को ज़्यादा अधिकार दिए और किसानों को कानूनी सुरक्षा दी। यह यूरोप के पहले आधुनिक लिखित संविधानों में से एक था। पर पड़ोसी, ख़ासकर रूस, मज़बूत पोलैंड नहीं चाहते थे।
टारगोविका संघ और रूस से युद्ध (1792)
रूढ़िवादी मैग्नेटों के एक समूह ने, जिन्हें अपने पुराने विशेषाधिकार जाने का डर था, मई 1792 में टारगोविका संघ बनाया। उन्होंने संविधान को रद्द घोषित किया और रूस से मदद बुलाई। रूसी सेना आ गई, और राष्ट्रमंडल की सेना ने संविधान की रक्षा के युद्ध में लड़ाई की। कुछ जगह सेना अच्छा लड़ी, पर वह छोटी थी, और राजा जल्दी ही टारगोविका में शामिल हो गया। सुधार पलट दिए गए।
दूसरा विभाजन (1793)
पुरानी व्यवस्था लौटाने के बजाय रूस और प्रशिया ने और ज़मीन लेने का समझौता किया। 1793 में ग्रोदनो में बुलाए गए सेइम को, जो रूसी सैनिकों से घिरा था, दूसरे विभाजन को मानना पड़ा। इस बार ऑस्ट्रिया शामिल नहीं हुआ। जो बचा वह छोटा-सा राज्य था, जिस पर रूस का बहुत दबाव था।
कोशिउश्को का विद्रोह (1794)
कई अफ़सरों और नागरिकों ने लड़ने का फ़ैसला किया। तादेउश कोशिउश्को, जो अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध में लड़ चुके थे, ने मार्च 1794 में क्राकोव में शपथ ली और नेता बने। उन्होंने राचवावित्से (अप्रैल 1794) में जीत पाई, जहाँ दरांती वाले किसान सैनिकों ने साथ दिया। वारसॉ में जूते बनाने वाले यान किलिन्स्की जैसे शहरवासियों ने रूसी चौकी के ख़िलाफ़ विद्रोह किया। कोशिउश्को ने किसानों को कुछ राहत का वादा भी किया (पोवानिएत्स घोषणा), क्योंकि उन्हें पूरा राष्ट्र चाहिए था। पर रूस और प्रशिया ने बड़ी सेनाएँ भेजीं। अक्टूबर 1794 में माचिएयोविस में कोशिउश्को हारे और पकड़े गए, और नवंबर में वारसॉ गिर गया।
तीसरा विभाजन (1795) और राष्ट्रमंडल क्यों गिरा
1795 में रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया ने जो बचा था उसे बाँट लिया। राजा स्तानिस्लाव अगस्त ने गद्दी छोड़ दी और राज्य यूरोप के राजनीतिक मानचित्र से मिट गया। लोग, भाषा और संस्कृति नहीं मिटे; पोलैंडवासियों ने अपनी पहचान रखी और बाद में फिर उठे (जैसे 1830 और 1863 में), और स्वतंत्र पोलैंड 1918 में लौटा।
पतन के कारण:
- अंदर के: कमज़ोर राजा, लिबरम वीटो, झगड़ते मैग्नेट, छोटी सेना, ख़ाली ख़ज़ाना, और देर से आए सुधार।
- बाहर के: तीन ताकतवर पड़ोसी, जो कमज़ोर पोलैंड चाहते थे और बाँटने पर सहमत हो सके।
- हालात: 1792–1795 में पश्चिमी शक्तियाँ फ्रांसीसी क्रांति और उसके युद्धों में उलझी थीं, इसलिए किसी ने मदद नहीं की।
करके देखो: कारण-परिणाम की कड़ी बनाओ
3D स्लाइडर से पाँच पंक्तियाँ लिखो: साल, घटना, डिस्क पर असर। फिर जवाब दो: तुम्हारे हिसाब से किस एक घटना ने सबसे ज़्यादा नुकसान किया: लिबरम वीटो, टारगोविका या 1794 की हार? दो वाक्यों में कारण के साथ अपनी बात रखो। खुद जाँचो: अच्छा उत्तर अंदर की कमज़ोरी को बाहर की कार्रवाई से जोड़ता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य तिथियाँ: 1772 पहला विभाजन · 3 मई 1791 संविधान · 1792 टारगोविका और युद्ध · 1793 दूसरा विभाजन · 1794 कोशिउश्को विद्रोह · 1795 तीसरा विभाजन · 1918 स्वतंत्रता
- कारण की कड़ी: अंदर से कमज़ोर + ताकतवर पड़ोसी → विभाजन
- शक्तियाँ: रूस, प्रशिया, ऑस्ट्रिया (दूसरे विभाजन में ऑस्ट्रिया नहीं था)
- शब्द: लिबरम वीटो, सेइम, मैग्नेट, संघ (कन्फ़ेडरेशन), विभाजन
हल किए गए उदाहरण
1. लिबरम वीटो क्या था और उसने राज्य को कमज़ोर क्यों किया?
इससे कोई भी एक कुलीन सदस्य सेइम को रोककर उसके फ़ैसले रद्द कर सकता था। इससे कानून और सुधार रुक जाते थे, इसलिए राज्य अपनी समस्याएँ ठीक नहीं कर पाया।
2. 3 मई 1791 के संविधान ने क्या बदला?
उसने लिबरम वीटो ख़त्म किया, राजा और सरकार को मज़बूत किया, शहरवासियों को ज़्यादा अधिकार दिए और किसानों को कानूनी सुरक्षा दी।
3. टारगोविका संघ किसने बनाया और क्या माँगा?
रूढ़िवादी मैग्नेटों ने, जिन्हें विशेषाधिकार जाने का डर था। उन्होंने रूस से सेना भेजने और संविधान रद्द करने को कहा।
4. हर विभाजन में कौन-सी शक्तियाँ शामिल थीं?
1772: रूस, प्रशिया, ऑस्ट्रिया। 1793: रूस और प्रशिया। 1795: रूस, प्रशिया, ऑस्ट्रिया।
5. राचवावित्से में जीत के बाद भी कोशिउश्को का विद्रोह क्यों असफल रहा?
राष्ट्रमंडल के पास सैनिक और संसाधन कम थे। रूस और प्रशिया ने कहीं बड़ी सेनाएँ भेजीं, और अक्टूबर 1794 में माचिएयोविस में कोशिउश्को पकड़े गए।
6. पतन के दो अंदरूनी और दो बाहरी कारण बताइए।
अंदर के: कमज़ोर राजा, लिबरम वीटो (साथ में छोटी सेना, झगड़ते मैग्नेट)। बाहर के: बाँटने पर सहमत ताकतवर पड़ोसी, और पश्चिम से कोई मदद नहीं।
आम गलतियाँ
- कहना कि पोलैंड "एक युद्ध में जीत लिया गया"। वह तीन चरणों में बँटा: 1772, 1793 और 1795।
- भूल जाना कि दूसरे विभाजन में ऑस्ट्रिया शामिल नहीं था।
- सिर्फ़ पड़ोसियों को दोष देना। राज्य के अंदर की कमज़ोरी भी उतनी ही अहम थी।
- सोचना कि पोलैंडवासी मिट गए। राज्य 1795 में ख़त्म हुआ, पर लोग, भाषा और संस्कृति बने रहे और पोलैंड 1918 में लौटा।