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पोलैंड के विभाजन और राष्ट्रमंडल का पतन

1772, 1793 और 1795 में रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया ने पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल को बाँट लिया, जब तक वह मिट नहीं गया। सरदारों के झगड़े, लिबरम वीटो, छोटी सेना और विदेशी दख़ल से राज्य कमज़ोर था। सुधार का संविधान (3 मई 1791) देर से आया: टारगोविका संघ ने रूसी सेना बुला ली, और 1794 का कोशिउश्को विद्रोह हार गया। पोलैंड फिर राज्य बनकर 1918 में लौटा।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1771 में राष्ट्रमंडल बड़ा राज्य है, जिसे एक लाल डिस्क से दिखाया है। पर अंदर से कमज़ोर है: सरदार झगड़ते हैं और तीनों पड़ोसी ताकतवर हैं।
  2. 3 मई 1791 को नया संविधान पास होता है। हरा खंभा उठता है: राज्य को मज़बूत और न्यायपूर्ण बनाने वाले सुधार।
  3. 1792 में कुछ सरदार (टारगोविका संघ) सुधारों के ख़िलाफ़ रूस से मदद माँगते हैं। रूसी सेनाएँ आ जाती हैं और सुधार का खंभा गिर जाता है।
  4. 1793 में रूस और प्रशिया बड़ा हिस्सा ले लेते हैं: दूसरा विभाजन। डिस्क बहुत छोटी हो जाती है।
  5. 1794 में तादेउश कोशिउश्को विद्रोह का नेतृत्व करते हैं। विद्रोह बहादुरी से लड़ा गया पर हार गया, और 1795 में रूस, प्रशिया, ऑस्ट्रिया बाकी हिस्सा भी ले लेते हैं: तीसरा विभाजन। डिस्क ख़त्म।
  6. अब आपकी बारी: साल वाला स्लाइडर 1771 से 1795 तक चलाओ और हर साल की घटना पढ़ो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

राष्ट्रमंडल इतना बड़ा था, फिर कमज़ोर क्यों?

आकार ही ताकत नहीं है। राजा के पास कम अधिकार थे, वीटो कानून रोकता था, और सेना व ख़ज़ाना छोटे थे (चरण 0)।

1791 का संविधान क्या ठीक करना चाहता था?

वह वीटो हटाना, सरकार और सेना मज़बूत करना और शहरवासियों को ज़्यादा अधिकार देना चाहता था (चरण 1)।

कुलीनों ने रूस को क्यों बुलाया?

उन्हें विदेशी सेना से ज़्यादा अपने पुराने विशेषाधिकार जाने का डर था। उनके फ़ैसले से सुधार ख़त्म हुए (चरण 2)।

1793 में रूस और प्रशिया ने फिर विभाजन क्यों किया?

उन्हें ज़मीन चाहिए थी और सुधरे, मज़बूत पोलैंड का डर था। ऑस्ट्रिया कहीं और व्यस्त था (चरण 3)।

क्या विद्रोह सिर्फ़ सेना की वजह से हारा?

सेना छोटी थी, पर राष्ट्र भी बँटा था, संसाधन कम थे और दो बड़ी सेनाओं ने हमला किया (चरण 4)।

क्या पोलैंड हमेशा के लिए मिट गया?

नहीं। राज्य 1795 में मिटा, पर लोग और संस्कृति रहे और स्वतंत्रता 1918 में लौटी (चरण 5, स्लाइडर 1795 पर)।

पृष्ठभूमि: बड़ा पर कमज़ोर राज्य

1700 के दशक तक पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल यूरोप के सबसे बड़े राज्यों में था, पर उसकी ताकत बिखरी हुई थी। राजा को सरदार (कुलीन) चुनते थे और उसके पास बहुत कम अधिकार थे। कोई भी एक कुलीन सदस्य लिबरम वीटो से सेइम (संसद) को रोक सकता था, इसलिए कानून अक्सर पास नहीं हो पाते थे। ताकतवर मैग्नेट परिवार विदेशी राज्यों का साथ देते थे। सेना छोटी थी और ख़ज़ाना ख़ाली। इसके पड़ोसी रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया के पास मज़बूत शासक, बड़ी सेनाएँ और कर-व्यवस्था थी।

1772 में तीनों शक्तियों ने पहले विभाजन में सीमा के इलाके ले लिए। पोलैंड-लिथुआनिया की बहुत ज़मीन और आबादी चली गई, और सेइम को यह मानना पड़ा। (यहाँ जानबूझकर नक्शा नहीं दिया गया है; 3D में आकार सिर्फ़ मोटे अंदाज़ के लिए है।)

सुधार और 3 मई 1791 का संविधान

1772 के बाद कई सुधारक मज़बूत राज्य चाहते थे। महान सेइम (1788–1792) ने सेना बढ़ाई, शहरों की मदद की, और 3 मई 1791 को लिखित संविधान पास किया। उसने लिबरम वीटो ख़त्म किया, राजा और सरकार को मज़बूत किया, शहरवासियों को ज़्यादा अधिकार दिए और किसानों को कानूनी सुरक्षा दी। यह यूरोप के पहले आधुनिक लिखित संविधानों में से एक था। पर पड़ोसी, ख़ासकर रूस, मज़बूत पोलैंड नहीं चाहते थे।

टारगोविका संघ और रूस से युद्ध (1792)

रूढ़िवादी मैग्नेटों के एक समूह ने, जिन्हें अपने पुराने विशेषाधिकार जाने का डर था, मई 1792 में टारगोविका संघ बनाया। उन्होंने संविधान को रद्द घोषित किया और रूस से मदद बुलाई। रूसी सेना आ गई, और राष्ट्रमंडल की सेना ने संविधान की रक्षा के युद्ध में लड़ाई की। कुछ जगह सेना अच्छा लड़ी, पर वह छोटी थी, और राजा जल्दी ही टारगोविका में शामिल हो गया। सुधार पलट दिए गए।

दूसरा विभाजन (1793)

पुरानी व्यवस्था लौटाने के बजाय रूस और प्रशिया ने और ज़मीन लेने का समझौता किया। 1793 में ग्रोदनो में बुलाए गए सेइम को, जो रूसी सैनिकों से घिरा था, दूसरे विभाजन को मानना पड़ा। इस बार ऑस्ट्रिया शामिल नहीं हुआ। जो बचा वह छोटा-सा राज्य था, जिस पर रूस का बहुत दबाव था।

कोशिउश्को का विद्रोह (1794)

कई अफ़सरों और नागरिकों ने लड़ने का फ़ैसला किया। तादेउश कोशिउश्को, जो अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध में लड़ चुके थे, ने मार्च 1794 में क्राकोव में शपथ ली और नेता बने। उन्होंने राचवावित्से (अप्रैल 1794) में जीत पाई, जहाँ दरांती वाले किसान सैनिकों ने साथ दिया। वारसॉ में जूते बनाने वाले यान किलिन्स्की जैसे शहरवासियों ने रूसी चौकी के ख़िलाफ़ विद्रोह किया। कोशिउश्को ने किसानों को कुछ राहत का वादा भी किया (पोवानिएत्स घोषणा), क्योंकि उन्हें पूरा राष्ट्र चाहिए था। पर रूस और प्रशिया ने बड़ी सेनाएँ भेजीं। अक्टूबर 1794 में माचिएयोविस में कोशिउश्को हारे और पकड़े गए, और नवंबर में वारसॉ गिर गया।

तीसरा विभाजन (1795) और राष्ट्रमंडल क्यों गिरा

1795 में रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया ने जो बचा था उसे बाँट लिया। राजा स्तानिस्लाव अगस्त ने गद्दी छोड़ दी और राज्य यूरोप के राजनीतिक मानचित्र से मिट गया। लोग, भाषा और संस्कृति नहीं मिटे; पोलैंडवासियों ने अपनी पहचान रखी और बाद में फिर उठे (जैसे 1830 और 1863 में), और स्वतंत्र पोलैंड 1918 में लौटा।

पतन के कारण:

करके देखो: कारण-परिणाम की कड़ी बनाओ

3D स्लाइडर से पाँच पंक्तियाँ लिखो: साल, घटना, डिस्क पर असर। फिर जवाब दो: तुम्हारे हिसाब से किस एक घटना ने सबसे ज़्यादा नुकसान किया: लिबरम वीटो, टारगोविका या 1794 की हार? दो वाक्यों में कारण के साथ अपनी बात रखो। खुद जाँचो: अच्छा उत्तर अंदर की कमज़ोरी को बाहर की कार्रवाई से जोड़ता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. लिबरम वीटो क्या था और उसने राज्य को कमज़ोर क्यों किया?

इससे कोई भी एक कुलीन सदस्य सेइम को रोककर उसके फ़ैसले रद्द कर सकता था। इससे कानून और सुधार रुक जाते थे, इसलिए राज्य अपनी समस्याएँ ठीक नहीं कर पाया।

2. 3 मई 1791 के संविधान ने क्या बदला?

उसने लिबरम वीटो ख़त्म किया, राजा और सरकार को मज़बूत किया, शहरवासियों को ज़्यादा अधिकार दिए और किसानों को कानूनी सुरक्षा दी।

3. टारगोविका संघ किसने बनाया और क्या माँगा?

रूढ़िवादी मैग्नेटों ने, जिन्हें विशेषाधिकार जाने का डर था। उन्होंने रूस से सेना भेजने और संविधान रद्द करने को कहा।

4. हर विभाजन में कौन-सी शक्तियाँ शामिल थीं?

1772: रूस, प्रशिया, ऑस्ट्रिया। 1793: रूस और प्रशिया। 1795: रूस, प्रशिया, ऑस्ट्रिया।

5. राचवावित्से में जीत के बाद भी कोशिउश्को का विद्रोह क्यों असफल रहा?

राष्ट्रमंडल के पास सैनिक और संसाधन कम थे। रूस और प्रशिया ने कहीं बड़ी सेनाएँ भेजीं, और अक्टूबर 1794 में माचिएयोविस में कोशिउश्को पकड़े गए।

6. पतन के दो अंदरूनी और दो बाहरी कारण बताइए।

अंदर के: कमज़ोर राजा, लिबरम वीटो (साथ में छोटी सेना, झगड़ते मैग्नेट)। बाहर के: बाँटने पर सहमत ताकतवर पड़ोसी, और पश्चिम से कोई मदद नहीं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. किस साल तीसरे विभाजन ने राष्ट्रमंडल को ख़त्म किया?
2. लिबरम वीटो से क्या हो सकता था?
3. 1794 के विद्रोह का नेता कौन था?
4. टारगोविका संघ ने किस शक्ति से मदद माँगी?
5. दूसरे विभाजन (1793) में कौन-सी दो शक्तियाँ थीं?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पोलैंड के विभाजन क्यों हुए?

राष्ट्रमंडल अंदर से कमज़ोर था (लिबरम वीटो, कमज़ोर राजा, छोटी सेना) जबकि रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया ताकतवर थे और उसे बाँटने पर सहमत हो गए।

पोलैंड के तीन विभाजन कौन-से थे?

1772 (रूस, प्रशिया, ऑस्ट्रिया ने सीमा के इलाके लिए), 1793 (रूस और प्रशिया ने बहुत ज़्यादा लिया) और 1795 (तीनों ने बाकी ले लिया)।

तादेउश कोशिउश्को कौन थे?

एक सैन्य इंजीनियर और अफ़सर, जो अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध में लड़े और 1794 में रूस और प्रशिया के ख़िलाफ़ विद्रोह का नेतृत्व किया।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

पोलैंडLiceum ogólnokształcące, klasa IIFall of the Commonwealth
पोलैंडLiceum ogólnokształcące, klasa IIFall of the Commonwealth

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