औद्योगीकरण ब्रिटेन में ही पहले क्यों शुरू हुआ?
इतिहासकार कई कारण बताते हैं जो एक साथ काम कर रहे थे:
- कोयला और लोहा पास-पास, और नदियों व समुद्र-तट के नज़दीक।
- बेहतर खेती (बाड़बंदी, फ़सल-चक्र, नए औज़ार) से कम किसानों में ज़्यादा लोगों का पेट भरा, और मज़दूर शहरों के लिए खाली हुए।
- पूँजी: व्यापार से कमाए पैसे वाले बैंक और व्यापारी (इसमें औपनिवेशिक व्यापार और ग़ुलामी पर टिकी अटलांटिक अर्थव्यवस्था भी शामिल), जो निवेश को तैयार थे।
- बाज़ार देश में और विदेश में, नहरों, सड़कों और बड़े जहाज़ी बेड़े से जुड़े।
- मज़दूर: बढ़ती आबादी।
- स्थिर सरकार, पेटेंट क़ानून और व्यावहारिक आविष्कार की परंपरा।
कोई एक कारण अकेला काफ़ी नहीं। अच्छे उत्तर कारणों को क्रम देते हैं और उनकी कड़ियाँ दिखाते हैं (जैसे खदानों को पंप चाहिए → भाप इंजन → सस्ता कोयला → और उद्योग)।
पहली लहर: भाप, कपड़ा और रेल (लगभग 1760–1840)
- कपड़ा: कताई मशीनों और बिजली-करघों (power loom) ने सूती काम को झोपड़ियों से कारख़ानों में पहुँचाया।
- भाप शक्ति: सुधरा हुआ भाप इंजन (1770 का दशक) पहले खदानों का पानी निकालता था, फिर मशीनें चलाने लगा; अब कारख़ानों को नदी के पास होना ज़रूरी नहीं रहा।
- लोहा कोक से बनने लगा, सस्ता और मज़बूत।
- परिवहन: नहरें, फिर भाप रेल (लगभग 1830 से यात्री लाइनें) ने ख़र्च और समय घटाया।
इससे औद्योगिक पूँजीवाद बना: मालिक (पूँजीपति) मशीनों में पैसा लगाते और मज़दूरों को मज़दूरी देते थे। कारख़ाना प्रणाली ने तय घंटे, घड़ी और श्रम-विभाजन लाया।
दूसरी लहर और उद्योग का फैलाव (लगभग 1870–1914)
- इस्पात सस्ता हुआ (1850 के दशक की नई विधि): रेल पटरी, जहाज़, पुल, ऊँची इमारतें।
- बिजली: बिजलीघर, बल्ब, टेलीफ़ोन, बिजली की मोटर।
- रसायन: रंग, उर्वरक, दवाइयाँ; तेल और पेट्रोल इंजन (1880 का दशक)।
- बड़े पैमाने पर उत्पादन: एक जैसे पुर्ज़े और चलती असेंबली लाइन (1913)।
फैलाव
उद्योग बेल्जियम, फ़्रांस, जर्मनी, फिर अमेरिका, रूस और जापान (1868 के बाद) तक फैला। देर से आने वाले देशों में अक्सर सरकार ने ज़ोर लगाया। अमेरिका में 1869 में महाद्वीप-पार रेल बनी, जिसने पश्चिम के खेत, पशुपालन और खदानों को पूर्व के कारख़ानों से जोड़ा; दक्षिण के कुछ नेताओं ने मिलों और रेल वाला 'नया दक्षिण' बनाना चाहा, पर वहाँ खेती ही हावी रही। भारत में 1850 के दशक से सूती और जूट मिलें खुलीं, पर औपनिवेशिक शासन ने विकास सीमित रखा।
बड़े उद्योगपति
इस्पात, तेल और रेल में विशाल कंपनियाँ, ट्रस्ट और एकाधिकार बने। उनके मालिकों को कोई 'निर्माता' कहता, कोई 'लुटेरे सामंत' (robber barons)। उन्नीसवीं सदी के अंत के अमेरिका की चमक और गहरी असमानता को गिल्डेड एज (मुलम्मा युग: ऊपर सोना, नीचे समस्याएँ) कहते हैं।
सामाजिक प्रभाव: शहर, वर्ग और प्रवास
- शहरीकरण: ब्रिटेन में 1801 में लगभग 20% लोग शहरों में, 1851 तक लगभग 50% और 1901 तक लगभग 77%।
- काम की हालत: 12–16 घंटे का दिन, बाल श्रम, ख़तरनाक मशीनें, कम मज़दूरी।
- रहने की हालत: भीड़ भरे घर, गंदा पानी, हैज़ा और टाइफ़ाइड।
- नए वर्ग: औद्योगिक मज़दूर वर्ग और बढ़ता मध्य वर्ग (मैनेजर, क्लर्क, इंजीनियर, डॉक्टर, दुकानदार), जिसके शिक्षा, परिवार और इज़्ज़त के नए विचार थे।
- महिलाएँ और बच्चे मिलों में काम करते थे; बाद में मध्यवर्गीय आदर्श महिलाओं को घर तक सीमित करने लगे, जबकि कई मज़दूर महिलाएँ काम करती रहीं।
- प्रवास: करोड़ों लोग गाँव से शहर और समुद्र पार गए (जैसे यूरोप और एशिया से अमेरिका)। मेज़बान देशों में कभी विरोध और रोक-क़ानून बने, पर प्रवासियों ने समुदाय बसाए और श्रम दिया।
- अमेरिका में पश्चिम की ओर विस्तार से बसने वाले, रेल और खेती आई, और मूल अमेरिकी जनजातियों की ज़मीन छिनी।
- लंबे समय के फ़ायदे: सस्ती चीज़ें, लगभग 1850 के बाद असली मज़दूरी में बढ़त, 1900 तक लंबी उम्र।
प्रतिक्रियाएँ: विचार, विरोध और सुधार
विचारधाराएँ
- शास्त्रीय उदारवाद: मुक्त बाज़ार, सीमित सरकार, व्यक्ति के अधिकार (laissez-faire / अहस्तक्षेप)।
- रूढ़िवाद: परंपरा और व्यवस्था बनाए रखो। 1815 के बाद यूरोप की बड़ी शक्तियाँ यूरोप की संगति (Concert of Europe) में मिलकर क्रांतियों को रोकती रहीं।
- समाजवाद: उद्योग पर मज़दूरों का साझा स्वामित्व हो; मार्क्स और एंगेल्स (1848) ने कहा वर्ग-संघर्ष पूँजीवाद को ख़त्म करेगा।
- सामाजिक डार्विनवाद से असमानता को सही ठहराया गया; सुधारक और धार्मिक समूहों ने ग़रीबों के प्रति कर्तव्य की बात की।
विरोध
मशीन तोड़ना (लुडाइट, 1811–16), वोट के लिए बड़ी सभाएँ, चार्टिस्ट आंदोलन (1838–48), और 1848 में पूरे यूरोप में क्रांतियाँ। मज़दूर संघ बढ़े और 1870–1900 के बीच कई देशों में क़ानूनी अधिकार पाए; बड़ी हड़तालें हुईं।
सुधार (उदाहरण: ब्रिटेन)
- 1832, 1867, 1884: सुधार अधिनियमों ने वोट कदम-दर-कदम बढ़ाया।
- 1833 कारख़ाना अधिनियम: बाल श्रम पर रोक और निरीक्षक; बाद में घंटे सीमित (दस घंटे का अधिनियम 1847)।
- 1834 नया निर्धन क़ानून (वर्कहाउस); 1846 अनाज क़ानूनों की समाप्ति (मुक्त व्यापार)।
- 1848 और 1875 जन-स्वास्थ्य अधिनियम: सीवर, साफ़ पानी।
- 1870 शिक्षा अधिनियम: सभी बच्चों के लिए स्कूल।
दूसरी जगह सुधार
जर्मनी ने 1880 के दशक में बीमारी, दुर्घटना और बुढ़ापे का सरकारी बीमा शुरू किया। अमेरिका में सरकार की भूमिका पर बहस चली: पॉपुलिस्ट (किसान) रेल और बैंकों के ख़िलाफ़ थे, 1890 में एकाधिकार-विरोधी क़ानून बना और बाद में प्रगतिशील सुधार आए।
निरंतरता और परिवर्तन
परिवर्तन: लोग कहाँ रहते और काम करते, कौन वोट देता, सरकार की भूमिका। निरंतरता: असमानता, कई इलाक़ों में खेती का महत्व, अमीरों के हाथ में सत्ता।
परीक्षा के सुझाव
- कारण वाले प्रश्न: कई कारण दो, कड़ियाँ समझाओ, और बताओ कौन सबसे अहम था।
- परिणाम वाले प्रश्न: थोड़े समय (बुरी हालत) और लंबे समय (बेहतर जीवन-स्तर, सुधार) को अलग करो।
- तुलना: ब्रिटेन (पहले, निजी उद्यम) बनाम जर्मनी/जापान/रूस (बाद में, सरकार के नेतृत्व में)।
- तारीख़ें और क़ानूनों के नाम सबूत की तरह लिखो; 'हालात सुधर गए' जैसी गोल-मोल बातें मत लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पहली लहर लगभग 1760–1840: कोयला, लोहा, भाप, कपड़ा, नहरें, रेल
- दूसरी लहर लगभग 1870–1914: इस्पात, बिजली, रसायन, तेल, बड़े पैमाने पर उत्पादन
- कारण: कोयला + लोहा, पूँजी, बाज़ार, श्रम, खेती में बदलाव, स्थिर सरकार
- औद्योगिक पूँजीवाद: मालिक पूँजी लगाते, मज़दूर मज़दूरी पाते
- शहरीकरण (ब्रिटेन): ~20% (1801) → ~50% (1851) → ~77% (1901)
- विचारधाराएँ: उदारवाद, रूढ़िवाद, समाजवाद
- ब्रिटिश सुधार: सुधार अधिनियम 1832/1867/1884; कारख़ाना अधिनियम 1833; जन-स्वास्थ्य 1848/1875; शिक्षा 1870
- गिल्डेड एज: अमेरिका की तेज़ बढ़त + बड़े उद्योग + असमानता (लगभग 1865–1898)
हल किए गए उदाहरण
1. समझाओ कि भाप इंजन कोयला खदानों और कारख़ानों को कैसे जोड़ता है (कारण → प्रभाव की कड़ी)।
गहरी खदानों में पानी भरता था → भाप इंजन ने पानी निकाला → ज़्यादा और सस्ता कोयला → सस्ते कोयले से मिलों में और भाप इंजन → कारख़ाने नदियों से दूर शहरों में बन सके → शहर बढ़े।
2. पहली और दूसरी औद्योगिक क्रांति में दो अंतर बताओ।
1) मुख्य सामग्री और शक्ति: लोहा और भाप (पहली) बनाम इस्पात, बिजली और तेल (दूसरी)। 2) कहाँ: मुख्यतः ब्रिटेन (पहली) बनाम जर्मनी, अमेरिका, जापान समेत कई देश (दूसरी)। साथ ही दूसरी में विज्ञान-आधारित उद्योग (रसायन) और बड़े पैमाने पर उत्पादन आया।
3. शहर इतनी तेज़ी से क्यों बढ़े, और कौन-सी समस्याएँ आईं?
कारख़ानों को एक जगह बहुत मज़दूर चाहिए थे, और बेहतर खेती से गाँव में काम घटा, तो लोग शहर आए। घर जल्दी और सस्ते बने, साफ़ पानी और सीवर नहीं थे, इसलिए भीड़ और हैज़ा जैसी महामारियाँ फैलीं।
4. कारख़ाना-ग़रीबी पर एक उदारवादी और एक समाजवादी के जवाब में क्या फ़र्क़ था?
शास्त्रीय उदारवादी मुक्त बाज़ार और कम सरकारी दख़ल चाहता था, विकास और आत्म-सहायता पर भरोसा करता था। समाजवादी चाहता था कि उद्योग पर मज़दूरों का साझा स्वामित्व हो और धन का न्यायपूर्ण बँटवारा हो, अक्सर संघों या सरकार के ज़रिए।
5. इन ब्रिटिश सुधारों को क्रम में रखो और बताओ हर एक ने क्या बदला: 1870 शिक्षा अधिनियम, 1832 सुधार अधिनियम, 1833 कारख़ाना अधिनियम, 1875 जन-स्वास्थ्य अधिनियम।
1832 सुधार अधिनियम (ज़्यादा मध्यवर्गीय पुरुषों को वोट) → 1833 कारख़ाना अधिनियम (बाल श्रम पर रोक, निरीक्षक) → 1870 शिक्षा अधिनियम (सबके लिए स्कूल) → 1875 जन-स्वास्थ्य अधिनियम (नगर परिषदों को सीवर और साफ़ पानी देना ज़रूरी)।
6. उन्नीसवीं सदी के अंत के अमेरिका को 'गिल्डेड एज' क्यों कहते हैं?
गिल्डेड यानी सस्ती धातु पर सोने की पतली परत। रेल, इस्पात और तेल से अर्थव्यवस्था चमकी, पर नीचे कम मज़दूरी, असुरक्षित काम, भ्रष्टाचार और भारी असमानता थी।
आम गलतियाँ
- सिर्फ़ एक कारण देना ('ब्रिटेन के पास कोयला था')। परीक्षा में जुड़े हुए कई कारण और यह फ़ैसला चाहिए कि कौन सबसे अहम था।
- कहना कि ज़िंदगी सिर्फ़ बदतर हुई। शुरू में हालत बुरी थी, पर लगभग 1850 के बाद कई लोगों की असली मज़दूरी, स्वास्थ्य और पढ़ाई सुधरी।
- दोनों लहरों को मिला देना: बिजली और इस्पात दूसरी लहर (लगभग 1870 के बाद) के हैं, पहली के नहीं।
- सोचना कि सुधार एक साथ आए। वोट और कारख़ाना सुधार दशकों में, अक्सर विरोध के बाद, कदम-दर-कदम आए।