निरंकुशतावाद क्या है?
निरंकुशतावाद (Absolutism) का मतलब है एक व्यक्ति का पूरा (निरंकुश) शासन। यह शासक राजा, रानी, सम्राट या ज़ार होता है।
निरंकुश राजतंत्र में शासक:
- कानून बनाता है (किसी संसद की मंज़ूरी ज़रूरी नहीं),
- अपने अफ़सरों से कानून लागू करवाता है,
- सबसे बड़ा न्यायाधीश होता है।
यूरोप में यह दौर लगभग 1600 से 1789 तक चला। इससे पहले ताक़त राजा, बड़े सामंतों, चर्च और शहरों में बँटी थी (सामंतवाद)। निरंकुश राजाओं ने यह ताक़त एक केंद्र में खींच ली। इसे राज्य-निर्माण कहते हैं: पूरे देश के लिए एक मज़बूत केंद्रीय सरकार बनाना।
दैवी अधिकार: लोग इसे क्यों मानते थे
निरंकुश राजा राजाओं के दैवी अधिकार (Divine Right of Kings) का विचार इस्तेमाल करते थे: राजा को ताक़त ईश्वर से मिलती है, जनता से नहीं। इसलिए राजा की बात न मानना ईश्वर की बात न मानने जैसा था।
1500 और 1600 के दशकों में बहुत धार्मिक युद्ध और विद्रोह हुए। बहुत लोगों को लगा कि अराजकता से अच्छा एक मज़बूत राजा है। अंग्रेज़ विचारक थॉमस हॉब्स (1651) ने भी कहा कि शांति के लिए ताक़तवर शासक चाहिए।
निरंकुश ताक़त के औज़ार
स्थायी सेना
स्थायी सेना (Standing Army) वह पूरे समय की सेना है जिसे राज्य वेतन देता है, शांति में भी। पहले राजा सामंतों से सैनिक उधार लेते थे; अब सेना सिर्फ़ राजा की बात मानती थी।
नौकरशाही
नौकरशाही (Bureaucracy) यानी वेतन पाने वाले अफ़सरों का तंत्र। फ़्रांस में इंटेंडेंट नाम के शाही अफ़सर प्रांत चलाते थे। वे अक्सर मध्यम वर्ग से थे और सब कुछ राजा की कृपा से पाते थे।
कर
सेना और अफ़सरों पर बहुत खर्च होता था। कर किसानों और शहरियों से लिया जाता था; कुलीन और पादरी कम देते थे, जिससे बाद में गुस्सा भड़का।
कुलीनों और धर्म पर काबू
राजाओं ने सभाएँ बुलाना बंद कर दिया (फ़्रांस की एस्टेट्स-जनरल 1614 से 1789 तक नहीं बुलाई गई)। कई राजा एक ही धर्म चाहते थे: लुई चौदहवाँ ने 1685 में नैन्टेस का आदेश रद्द कर प्रोटेस्टेंटों की धार्मिक छूट ख़त्म कर दी।
लुई चौदहवाँ और वर्साय
लुई चौदहवाँ ने 1643 से 1715 तक फ़्रांस पर राज किया, यूरोप का सबसे लंबा शासन। उसने सूर्य को अपना प्रतीक बनाया: पूरा फ़्रांस उसके चारों ओर घूमे, जैसे ग्रह सूर्य के।
उसने पेरिस के पास विशाल वर्साय महल बनवाया। हज़ारों कुलीन वहाँ रहते थे और छोटे-छोटे सम्मानों के लिए होड़ करते थे, जैसे सुबह राजा को कमीज़ पकड़ाना। दरबार में व्यस्त रहकर वे अपनी ज़मीन से दूर रहते और अपनी ताक़त नहीं बना पाते।
लुई ने फ़्रांस बड़ा करने के लिए कई युद्ध लड़े। उनका खर्च इतना था कि उसकी मृत्यु पर फ़्रांस भारी कर्ज़ में था।
वाणिज्यवाद: निरंकुश राज्यों की अर्थव्यवस्था
वाणिज्यवाद (Mercantilism) उस दौर का मुख्य आर्थिक विचार था: जिस देश के पास ज़्यादा सोना-चाँदी है, वही अमीर है। इसके लिए:
- निर्यात (बाहर बेचना) आयात (बाहर से खरीदना) से ज़्यादा हो,
- विदेशी माल पर ऊँचा शुल्क (टैरिफ़) लगे,
- देश में कारख़ाने और सड़कें बनें,
- उपनिवेशों से सस्ता कच्चा माल आए।
लुई चौदहवाँ के वित्त मंत्री ज़्यां-बैप्टिस्ट कोलबेर इन्हीं नियमों पर चले। सोने से सेना, नौसेना और वर्साय का खर्च चला।
दूसरे निरंकुश शासक
- पीटर महान (रूस, 1682–1725) ने पश्चिमी तरीके अपनाए, आधुनिक सेना-नौसेना बनाई और सेंट पीटर्सबर्ग बसाया। उसने कुलीनों को राज्य की सेवा के लिए मजबूर किया।
- हैब्सबर्ग वंश ने स्पेन और ऑस्ट्रिया पर राज किया। 1683 में वियना की घेराबंदी नाकाम करने के बाद ऑस्ट्रिया ने मज़बूत सेना बनाई।
- प्रशिया छोटे राज्य से बड़ी सैनिक ताक़त बना।
जब कोई एक राज्य बहुत ताक़तवर हो जाता, तो बाकी मिलकर उसके ख़िलाफ़ खड़े होते। इसे शक्ति-संतुलन (Balance of Power) कहते हैं: कोई एक देश पूरे यूरोप पर हावी न हो। लुई चौदहवाँ के ख़िलाफ़ युद्ध इसी सोच से लड़े गए।
दूसरा रास्ता: संविधानवाद
हर देश निरंकुश नहीं बना। संविधानवाद में शासक की ताक़त कानून और चुनी हुई सभा से सीमित रहती है।
- इंग्लैंड: राजा चार्ल्स प्रथम ने संसद के बिना राज करना चाहा। इससे गृहयुद्ध (1642–1651) हुआ और 1649 में उसे मृत्युदंड मिला। 1688–89 की गौरवपूर्ण क्रांति में संसद ने विलियम और मैरी को बुलाया और अधिकार-पत्र (Bill of Rights, 1689) पास किया। अब राजा को कानून और कर के लिए संसद की मंज़ूरी चाहिए थी।
- डच गणराज्य: स्पेन से आज़ाद होकर नीदरलैंड्स को शहरों के अमीर व्यापारी 'रीजेंट' और एक स्टैडहोल्डर चलाते थे। व्यापार से 1600 का दशक उनका स्वर्ण युग बना।
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निरंकुशतावाद का अंत
1700 के दशक में प्रबोधन के विचारकों ने प्राकृतिक अधिकार और शक्तियों के बँटवारे की बात की। प्रशिया के फ़्रेडरिक द्वितीय और रूस की कैथरीन द्वितीय जैसे शासकों ने सुधार किए पर पूरी ताक़त अपने पास रखी (प्रबुद्ध निरंकुशता)। फ़्रांस में कर्ज़ और अन्यायपूर्ण करों से 1789 की फ़्रांसीसी क्रांति हुई, जिसने वहाँ निरंकुश राजतंत्र ख़त्म किया।
परीक्षा टिप: अक्सर निरंकुशतावाद और संविधानवाद की तुलना, या लुई चौदहवाँ ने कुलीनों को कैसे काबू किया, पूछा जाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- निरंकुशतावाद: एक राजा का पूरा शासन
- दैवी अधिकार: राजा की ताक़त ईश्वर से आती है, यह मान्यता
- स्थायी सेना: राज्य से वेतन पाने वाली पूरे समय की सेना
- नौकरशाही: वेतन पाने वाले सरकारी अफ़सरों का तंत्र
- वाणिज्यवाद: निर्यात आयात से ज़्यादा हो, ताकि सोना आए
- संवैधानिक राजतंत्र: ऐसा राजा जिसकी ताक़त कानून और संसद से सीमित हो
- शक्ति-संतुलन: राज्य मिलकर किसी एक को हावी नहीं होने देते
हल किए गए उदाहरण
1. वर्साय से लुई चौदहवाँ को कुलीनों पर काबू पाने में कैसे मदद मिली?
चरण 1: कुलीनों को महल में रहने बुलाया गया। चरण 2: उनका समय और पैसा दरबारी शान और छोटे सम्मानों में लगा। चरण 3: अपनी ज़मीन से दूर रहकर वे सेना नहीं बना सकते थे, न बगावत की योजना। यानी महल सिर्फ़ घर नहीं, ताक़त का औज़ार था।
2. एक देश 50 करोड़ का माल बेचता (निर्यात) है और 30 करोड़ का खरीदता (आयात) है। वाणिज्यवादी क्या कहेगा?
निर्यात आयात से 20 करोड़ ज़्यादा है। यह 'अनुकूल व्यापार संतुलन' है, यानी सोना देश में आ रहा है। वाणिज्यवादी ख़ुश होगा और टैरिफ़ लगाकर आयात कम रखना चाहेगा।
3. 1700 के आसपास फ़्रांस और इंग्लैंड की तुलना करो।
फ़्रांस: लुई चौदहवाँ बिना किसी सभा के कानून बनाता था (निरंकुश राजतंत्र)। इंग्लैंड: 1689 के बाद राजा को कानून और कर के लिए संसद चाहिए थी (संवैधानिक राजतंत्र)। दोनों में राजा थे, पर ताक़त सिर्फ़ इंग्लैंड में बँटी थी।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि निरंकुश राजा पर कोई सीमा नहीं थी। वह भी पैसे, अफ़सरों, सेना और परंपरा पर निर्भर था; बस कानून बनाने की ताक़त किसी सभा से नहीं बाँटता था।
- निरंकुशतावाद और तानाशाही को एक मान लेना। निरंकुशतावाद में वंशानुगत राजा दैवी अधिकार का दावा करता था, ज़्यादातर 1600–1789 में।
- यह कहना कि 1689 के बाद इंग्लैंड निरंकुश था। अधिकार-पत्र ने उसे संवैधानिक राजतंत्र बनाया।
- वाणिज्यवाद को मुक्त व्यापार समझना। इसका मतलब उल्टा है: आयात घटाओ, निर्यात बढ़ाओ।