उपनिवेशीकरण क्या है?
उपनिवेशीकरण (colonization) यानी एक देश दूर की किसी ज़मीन पर कब्ज़ा कर ले। जिस ज़मीन पर कब्ज़ा होता है, वह उपनिवेश (colony) है। वहाँ जाकर बसने वाले उपनिवेशी या प्रवासी (settlers) कहलाते हैं। राज करने वाला देश मूल देश या साम्राज्यवादी शक्ति कहलाता है। एक शासक के कई उपनिवेश मिलकर साम्राज्य बनाते हैं।
मूल निवासी (indigenous) वे लोग हैं जो किसी ज़मीन पर सबसे पहले से रहते आए हैं। उपनिवेशीकरण ने लगभग हमेशा उनकी ज़मीन, ताक़त और आज़ादी छीनी।
लगभग 1450 से 1750 तक पाँच यूरोपीय देश आगे रहे: पुर्तगाल, स्पेन, नीदरलैंड, फ़्रांस और ब्रिटेन। उन्होंने नए जहाज़, बंदूकें, नक्शे और संयुक्त पूँजी कंपनियाँ (joint-stock company: बहुत लोग शेयर ख़रीदकर मुनाफ़ा और जोखिम बाँटते हैं) इस्तेमाल कीं। ये यात्राएँ 'खोज का युग' वाले पाठ में हैं।
उपनिवेशवाद (colonialism) उपनिवेशों पर राज करने की पूरी व्यवस्था और सोच है; उपनिवेशीकरण उपनिवेश बसाने का काम है।
संपर्क से पहले का अमेरिका
1492 से पहले अमेरिका में करोड़ों लोग रहते थे। उनका जीवन उनकी ज़मीन के हिसाब से था।
- एज़्टेक (मध्य मेक्सिको): झील पर बनी बड़ी राजधानी तेनोच्तितलान, तैरते बगीचे, बाज़ार और मंदिर।
- इंका (एंडीज़ पहाड़, आज का पेरू और आसपास): लगभग 40,000 किमी सड़कें, रस्सी के पुल, पहाड़ों पर सीढ़ीदार खेत, और गाँठ वाली रस्सियों (क्विपु) से हिसाब।
- माया (दक्षिण मेक्सिको और मध्य अमेरिका): लिपि, कैलेंडर और शून्य वाला गणित।
- उत्तर अमेरिका: अनेक जनजातियाँ (nations)। कुछ मक्का, सेम और कद्दू ('तीन बहनें') उगाते, कुछ मैदानों में बाइसन का शिकार करते, कुछ तटों पर मछली पकड़ते। हौडेनोसौनी (इरोक्वा) जैसे समूहों ने संघ (confederacy) बनाया, जहाँ कई जनजातियाँ मिलकर फ़ैसले लेती थीं।
यूरोप में 1492 में ही स्पेन का आख़िरी मुस्लिम राज्य ग्रेनाडा हारा। मूरिश स्पेन सदियों तक ज्ञान का केंद्र रहा था। घर में जीत से स्पेनी शासकों को समुद्र पार जीत के लिए हौसला और सैनिक मिले।
जीत और स्पेनी औपनिवेशिक व्यवस्था
छोटी स्पेनी टुकड़ियों ने बड़े साम्राज्य हराए: कोर्टेस ने 1521 में एज़्टेक राजधानी ली और पिज़ारो ने 1532–33 में इंका को जीता। वजहें: बीमारी (चेचक उनसे पहले फैल गई), स्थानीय साथी जो एज़्टेक राज से नाराज़ थे, घोड़े और स्टील के हथियार, और इंका का आपसी गृहयुद्ध।
फिर स्पेन ने धन निकालने की व्यवस्था बनाई:
- एनकोमिएंडा (encomienda): एक स्पेनी को मूल निवासियों का समूह मिलता, जो उसके लिए काम करते और कर देते; बदले में उसे उनकी रक्षा करनी और ईसाई धर्म सिखाना था। असल में यह लगभग ग़ुलामी थी।
- मीता (mita): इंका की पुरानी बारी-बारी मज़दूरी, अब ज़बरदस्ती: गाँवों को पोटोसी जैसी चाँदी की खानों में आदमी भेजने पड़ते।
- कास्टा व्यवस्था: जन्म और वंश की सीढ़ी। सबसे ऊपर पेनिनसुलारेस (स्पेन में जन्मे), फिर क्रियोलो (स्पेनी माता-पिता, उपनिवेश में जन्मे), फिर मेस्तिज़ो और दूसरे मिश्रित वंश, फिर मूल निवासी और गुलाम अफ़्रीकी।
- मिशन: पादरियों ने चर्च बनाए और धर्म बदलवाने की कोशिश की। बार्तोलोमे दे लास कासास जैसे कुछ लोगों ने क्रूरता का विरोध भी किया।
संस्कृतियाँ घुली-मिलीं भी: नए खाने, भाषाएँ, त्योहार और मिले-जुले धार्मिक रीति-रिवाज। कोलंबियाई आदान-प्रदान में फ़सलें, जानवर और कीटाणु अटलांटिक के दोनों ओर गए।
समुद्री साम्राज्य: व्यापारिक चौकी और बस्ती वाले उपनिवेश
यूरोपीयों ने दो मुख्य तरीक़े अपनाए।
- व्यापारिक चौकी वाला साम्राज्य: तट पर किले और गोदाम, ताकि व्यापार पर क़ाबू रहे, पूरी ज़मीन पर नहीं। पुर्तगाल ने गोवा (1510), मलक्का और होर्मुज़ लिए और जहाज़ों को परमिट (पास) ख़रीदने पर मजबूर किया। डच VOC (1602) और अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी (1600) ने सूरत, मद्रास और बटाविया जैसी जगहों पर चौकियाँ बनाईं। इस दौर में मुग़ल जैसे मज़बूत एशियाई राज्यों के हाथ में ज़मीन की असली ताक़त रही।
- बस्ती वाला उपनिवेश: बहुत से लोग आकर ज़मीन लेते और खेती करते (स्पेनी अमेरिका, ब्राज़ील, ब्रिटिश उत्तर अमेरिका)।
साम्राज्य चलाने के लिए वायसराय और गवर्नर, किले, नौसेना, कर और वणिकवाद (mercantilism) थे: यानी उपनिवेश का काम है कच्चा माल भेजना और मूल देश का बना माल ख़रीदना। चुनौतियाँ भी थीं: मूल निवासियों और गुलामों के विद्रोह, समुद्री डाकू और यूरोपीय देशों की आपसी लड़ाइयाँ।
भारत में पहले यही चौकी वाला दौर आया; ज़मीन पर असली ब्रिटिश राज 1757 के प्लासी युद्ध के बाद शुरू हुआ, यानी इस दौर के ठीक बाद।
उत्तर अमेरिका में ब्रिटिश उपनिवेश
पहली टिकाऊ अंग्रेज़ी बस्ती जेम्सटाउन (1607, वर्जीनिया) थी। तंबाकू इसकी कमाई की फ़सल बना। पिलग्रिम्स ने प्लिमथ (1620) बसाया। 1732 तक अटलांटिक तट पर तेरह ब्रिटिश उपनिवेश थे, तीन इलाक़ों में:
- न्यू इंग्लैंड (उत्तर): ठंड, पथरीली मिट्टी; छोटे खेत, मछली, जहाज़ बनाना, व्यापार; चर्च और नगर-सभा के आसपास बसे क़स्बे।
- मध्य उपनिवेश: उपजाऊ मिट्टी, गेहूँ ('रोटी के उपनिवेश'), फ़िलाडेल्फ़िया और न्यूयॉर्क जैसे बंदरगाह; कई धर्म और भाषाएँ।
- दक्षिणी उपनिवेश: गर्मी, लंबा फ़सल-मौसम; तंबाकू, चावल और नील के बागान (बहुत बड़े खेत), जिन पर ज़्यादा से ज़्यादा गुलाम अफ़्रीकी काम करते।
उपनिवेशों की अपनी चुनी हुई सभाएँ थीं, पर शासन ब्रिटेन का था। अमेरिकी इंडियन जनजातियों से रिश्ते कभी व्यापार (फ़र, बंदूकें, कपड़ा), कभी गठबंधन और कभी युद्ध के रहे, क्योंकि बसने वाले ज़मीन लेते रहे। स्पेनी अमेरिका की तुलना में ब्रिटिश उपनिवेशों में बसने वाले परिवार और स्वशासन ज़्यादा था, पर मूल निवासियों से मेल-जोल कम। फ़्रांसीसियों ने नदियों के किनारे फ़र-व्यापार का पतला साम्राज्य बनाया और जनजातियों से गहरे व्यापारिक रिश्ते रखे।
अटलांटिक दास व्यापार और त्रिकोणीय व्यापार
बागानों को बहुत मज़दूर चाहिए थे। मूल आबादी घटने के बाद यूरोपीय अफ़्रीका की ओर मुड़े। लगभग 1500 से 1860 के बीच क़रीब 1.25 करोड़ अफ़्रीकी लोगों को ज़बरदस्ती जहाज़ों में भरा गया; लगभग 18 लाख रास्ते में ही मर गए।
त्रिकोणीय व्यापार की तीन भुजाएँ:
- यूरोप → अफ़्रीका: कपड़ा, बंदूकें, धातु का सामान, शराब।
- अफ़्रीका → अमेरिका: गुलाम बनाए गए लोग, जहाज़ों में ठूँसकर। इस क्रूर रास्ते को मध्य मार्ग (Middle Passage) कहते हैं।
- अमेरिका → यूरोप: चीनी, तंबाकू, कपास और रम।
ब्रिटिश उपनिवेशों में दास संहिता (slave codes) नाम के क़ानूनों ने ग़ुलामी को उम्र भर का और बच्चों तक जाने वाला बना दिया। गुलाम लोगों ने विरोध किया: भागे, काम धीमा किया, अपना संगीत और आस्था बचाए रखी, और कभी विद्रोह भी किया (जैसे 1739 का स्टोनो विद्रोह)। हर जगह सामाजिक सीढ़ी नस्ल और जन्म पर दोबारा बनी।
असर: क्या बदला और क्या वैसा ही रहा
कारण संक्षेप में: धन (सोना, चाँदी, मसाले, चीनी), यूरोपीय देशों की होड़, धर्म, और नई तकनीक व कंपनियाँ।
बदलाव: मूल आबादी 90 % तक घटी; नए मिश्रित समाज बने; अमेरिका की चाँदी यूरोप और चीन पहुँची; बागानों की ग़ुलामी बढ़ी; यूरोपीय भाषाएँ और ईसाई धर्म फैले; दुनिया की अर्थव्यवस्था जुड़ गई।
निरंतरता (जो वैसा रहा): कई मूल भाषाएँ, हुनर और आस्थाएँ बचीं; एशियाई साम्राज्य ज़मीन पर मज़बूत रहे; हर जगह ज़्यादातर लोग खेती से ही जीते रहे।
लंबी विरासत: अंग्रेज़ी, स्पेनी, पुर्तगाली और फ़्रांसीसी विश्व-भाषाएँ बनीं ('ग्लोबल इंग्लिश')। उत्तर-औपनिवेशिक (postcolonial) लेखक और विचारक पढ़ते हैं कि औपनिवेशिक राज ने आज़ादी के बाद भी सोच, सीमाओं, अर्थव्यवस्था और पहचान को कैसे गढ़ा (देखो: उपनिवेशवाद का अंत वाला पाठ)।
करके देखो: अपने औपनिवेशिक रिश्ते खोजो
1. ऐसे पाँच अंग्रेज़ी शब्द लिखो जो औपनिवेशिक संपर्क से भारतीय भाषाओं से गए (जैसे shampoo, bungalow, jungle, pyjamas, verandah)।
2. घर की कोई चीज़ (चीनी, चाय, सूती कपड़ा, चॉकलेट) चुनो और उसका पुराना व्यापार-रास्ता 3D के पाँचवें चरण की तरह त्रिकोण या रेखा बनाकर खींचो।
3. खुले खेल में स्लाइडर को 1600 और फिर 1650 पर रखो। हर बार कितनी घटनाएँ जगमगाती हैं, गिनो और बताओ क्या बदला।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उपनिवेशीकरण = प्रवासी (बसने वाले) + प्रभुत्व (दूर से राज) + फ़ायदा (ज़मीन, मेहनत, माल)
- त्रिकोणीय व्यापार: यूरोप → अफ़्रीका (माल) → अमेरिका (गुलाम बनाए लोग) → यूरोप (चीनी, तंबाकू, कपास)
- एनकोमिएंडा = मूल निवासियों की मेहनत और कर एक स्पेनी को; मीता = खानों में बारी-बारी ज़बरदस्ती काम
- कास्टा सीढ़ी: पेनिनसुलारेस > क्रियोलो > मेस्तिज़ो > मूल निवासी, गुलाम अफ़्रीकी
- व्यापारिक चौकी = व्यापार के लिए तट का किला; बस्ती वाला उपनिवेश = बहुत लोग बसकर खेती करें
- तेरह उपनिवेश: न्यू इंग्लैंड, मध्य, दक्षिणी
हल किए गए उदाहरण
1. कुछ सौ स्पेनी सैनिक एज़्टेक साम्राज्य को कैसे हरा पाए?
चरण 1: चेचक पहले ही बहुत लोगों को, नेताओं समेत, मार चुकी थी। चरण 2: एज़्टेक राज से नाराज़ हज़ारों स्थानीय लोग स्पेनियों के साथी बन गए। चरण 3: घोड़े, स्टील की तलवारें और बंदूकें अचानक बढ़त देती थीं। यानी जीत = बीमारी + साथी + हथियार, सिर्फ़ छोटी सेना नहीं।
2. व्यापारिक चौकी और बस्ती वाले उपनिवेश की तुलना एक-एक उदाहरण से करो।
व्यापारिक चौकी: भारत में पुर्तगाली गोवा। किला और बंदरगाह समुद्री व्यापार पर क़ाबू रखते थे; पुर्तगाली कम थे और आसपास के भारतीय राज्य ताक़तवर रहे। बस्ती वाला उपनिवेश: वर्जीनिया। हज़ारों अंग्रेज़ आए, जनजातियों से ज़मीन ली और तंबाकू के खेत बनाए। फ़र्क़: व्यापार पर क़ाबू बनाम ज़मीन पर क़ाबू और बसावट।
3. त्रिकोणीय व्यापार का एक चक्कर बताओ और कहो किसे फ़ायदा, किसे नुक़सान हुआ।
भुजा 1: ब्रिटेन से जहाज़ कपड़ा और बंदूकें लेकर पश्चिम अफ़्रीका जाता है। भुजा 2: इनके बदले पकड़े गए लोग ख़रीदे जाते हैं, जिन्हें ज़बरदस्ती अटलांटिक पार (मध्य मार्ग) ले जाकर कैरिबियन में बेचा जाता है। भुजा 3: जहाज़ चीनी और रम लेकर लौटता है। फ़ायदा: यूरोपीय व्यापारी, बागान-मालिक और कुछ अफ़्रीकी शासक। नुक़सान: करोड़ों गुलाम बनाए अफ़्रीकी और उनके परिवार; अफ़्रीकी समाजों ने अपने जवान खोए।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि 1492 से पहले अमेरिका ख़ाली या 'जंगली' था। वहाँ करोड़ों लोग, बड़े शहर, सड़कें और खेत थे।
- यह सोचना कि जीत सिर्फ़ बंदूकों से हुई। बीमारी और स्थानीय साथी कहीं ज़्यादा अहम थे।
- एनकोमिएंडा और मीता को मिला देना: एनकोमिएंडा में मूल मज़दूर एक स्पेनी को मिलते थे; मीता में गाँवों को खानों के लिए मज़दूर भेजने पड़ते थे।
- यह सोचना कि ब्रिटेन ने 1600 से भारत पर राज किया। 1757 से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी के पास सिर्फ़ व्यापारिक चौकियाँ थीं; ज़मीन पर मुग़ल और दूसरे भारतीय शासक थे।