1450–1650: समाजों के बीच संपर्क क्यों बढ़ा
संपर्क बढ़ने के कारण
- तकनीक: मज़बूत जहाज़ (कैरेवल, कैरेक), चुंबकीय कम्पास, एस्ट्रोलैब और छपे हुए समुद्री नक़्शे।
- व्यापार: एशिया के मसालों, रेशम और सूती कपड़े की ऊँची क़ीमत; बाद में अमेरिका की चाँदी से चीनी और भारतीय सामान ख़रीदा गया।
- शासक और पैसा: राजाओं और व्यापारिक कंपनियों ने धन के लिए यात्राओं का ख़र्च उठाया।
- धर्म: शासक और मिशनरी ईसाई धर्म फैलाना चाहते थे; इस्लाम पहले ही हिंद महासागर के व्यापार से फैल चुका था।
सोच और मान्यताओं ने संपर्क को आकार दिया
कई यूरोपीय मानते थे कि उनका धर्म और जीवन-शैली श्रेष्ठ है। इसी सोच से ज़मीन छीनने और लोगों से ज़बरदस्ती काम कराने को सही ठहराया गया। मिंग चीन और तोकुगावा जापान जैसे कुछ समाजों ने अपनी व्यवस्था बचाने के लिए विदेशी संपर्क सीमित रखा। मुग़ल दरबार ज़्यादा खुला था और कई धर्मों के विद्वानों का स्वागत करता था।
कोलंबियाई विनिमय
पौधे, पशु, लोग और बीमारियाँ अटलांटिक के आर-पार गए। मक्का और आलू से यूरोप, अफ़्रीका और एशिया की बढ़ती आबादी का पेट भरा। घोड़े और मवेशी अमेरिका पहुँचे। पर चेचक जैसी बीमारियों से अमेरिका के मूल निवासियों का बहुत बड़ा हिस्सा मारा गया।
संघर्ष, युद्ध और उपनिवेशवाद
युद्ध में बदलाव
- बारूदी साम्राज्य: उस्मानी, सफ़वी और मुग़ल राज्यों ने तोप और बंदूकों से बड़े साम्राज्य बनाए।
- पुराने क़िलों का महत्व घटा; सितारे के आकार के क़िले और स्थायी प्रशिक्षित सेनाएँ आईं।
- तोपों वाले जहाज़ी बेड़ों ने समुद्री व्यापार पर क़ब्ज़ा किया।
मुख्य युद्ध
- सुधार आंदोलन (1517) के बाद धार्मिक युद्ध, जैसे तीस वर्षीय युद्ध (1618–1648)। कारण: धार्मिक और राजनीतिक होड़। परिणाम: भारी जनहानि और यह विचार कि राज्य धर्म के लिए न लड़ें (वेस्टफेलिया की संधि)।
- सप्तवर्षीय युद्ध (1756–1763): यूरोप, अमेरिका और भारत में लड़ा गया। परिणाम: भारत और उत्तर अमेरिका में ब्रिटेन की ताक़त बढ़ी, पर उसके कर्ज़ से नए कर लगे, जो आगे अमेरिकी क्रांति का कारण बने।
- नेपोलियन के युद्ध (1803–1815): यूरोप में नए क़ानून और राष्ट्रवाद फैले।
उपनिवेशवाद का प्रभाव
| उपनिवेश बने लोगों पर | उपनिवेशकों पर |
|---|---|
| ज़मीन, आज़ादी और अक्सर जान का नुक़सान; बेगार; नए कर; पुराने उद्योगों को चोट; नई फ़सलें, धर्म और भाषाएँ | भारी धन, सस्ता कच्चा माल, नए बाज़ार, नए खाद्य; दूसरे उपनिवेशकों से होड़ और युद्ध; अपने शहरों में संस्कृतियों का मेल |
आर्थिक और सांस्कृतिक बदलाव
व्यापारिक कंपनियाँ (जैसे डच और अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी), बैंक और शेयर बाज़ार बढ़े। वाणिज्यिक क्रांति और फिर लगभग 1760 से औद्योगिक क्रांति ने सामान बनाने और बेचने का तरीक़ा बदला। छपाई से नए विचार फैले, जिनसे धर्म सुधार, वैज्ञानिक क्रांति और ज्ञानोदय (Enlightenment) को बल मिला।
दास प्रथा, कृषि दासता और असमान श्रम
अटलांटिक दास व्यापार
लगभग 1500 से 1866 तक करीब 1.25 करोड़ अफ़्रीकियों को ज़बरदस्ती जहाज़ों में अमेरिका ले जाया गया। लगभग 18 लाख रास्ते में मर गए; इस यात्रा को मिडिल पैसेज कहते हैं। व्यापार एक त्रिकोण था: बना हुआ सामान पश्चिम अफ़्रीका, बंदी अमेरिका, और चीनी, कपास व तंबाकू वापस यूरोप।
- अफ़्रीका पर प्रभाव: जवान लोगों का नुक़सान, दास पकड़ने के लिए युद्ध, स्थानीय अर्थव्यवस्था बर्बाद।
- अमेरिका पर प्रभाव: ज़बरदस्ती के श्रम पर टिकी बागान अर्थव्यवस्था; नस्लवाद की लंबी विरासत।
- यूरोप पर प्रभाव: व्यापारियों, बंदरगाहों और बैंकों को मुनाफ़ा।
दास बनाए लोगों ने विरोध किया: भागकर, काम धीमा करके, अपनी संस्कृति और धर्म बचाकर, और विद्रोह करके; सबसे बड़ा था हैती की क्रांति (1791–1804)।
दूसरे असमान रिश्ते
- कृषि दास (serf) और ज़मींदार: कृषि दास ज़मीन से बँधे होते और ज़मींदार के लिए बेगार करते थे (रूस में 1861 तक)।
- उस्ताद और शागिर्द: शागिर्द सालों तक खाने और सीखने के बदले कड़ी निगरानी में काम करते थे।
- गिरमिटिया (indentured) मज़दूर: दास प्रथा ख़त्म होने के बाद भारत और चीन से बहुत से मज़दूर अनुबंध पर मॉरीशस, फ़िजी और कैरिबियन के बागानों में भेजे गए।
1789–1900: क्रांतियाँ, सुधार, धर्म और स्त्री-पुरुष भूमिकाएँ
क्रांतियाँ और विद्रोह
- अमेरिकी क्रांति (1776): उपनिवेश ब्रिटेन से अलग हुए; लिखित संविधान।
- फ़्रांसीसी क्रांति (1789): निरंकुश राजशाही का अंत; मनुष्य के अधिकारों की घोषणा; स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचार।
- हैती क्रांति (1791): दास बनाए लोगों का अकेला सफल विद्रोह जिससे नया राज्य बना।
- लैटिन अमेरिका की आज़ादी (1810–1820 के दशक)।
- पूरे यूरोप में 1848 की क्रांतियाँ।
- भारत का 1857 का विद्रोह और चीन का ताइपिंग विद्रोह (1850–1864) ने शासकों और विदेशी ताक़त को चुनौती दी।
युद्ध का प्रभाव
युद्धों में बहुत जानें गईं, कर बढ़े, सीमाएँ बदलीं, और कभी-कभी बदलाव तेज़ हुआ: नए हथियार, रेल और टेलीग्राफ़, और राष्ट्रवाद, जिससे आगे इटली (1861) और जर्मनी (1871) एक हुए।
सुधार आंदोलन
- दास प्रथा का अंत: ब्रिटेन 1833, अमेरिका 1865, ब्राज़ील 1888।
- कारख़ाना और बाल श्रम क़ानून, मज़दूर संघ और वोट का बढ़ता अधिकार।
- भारत में समाज सुधार: राजा राममोहन राय ने सती के विरुद्ध काम किया; सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले ने लड़कियों के स्कूल खोले (1848)।
धर्म
धर्म ने सुधारकों को प्रेरित किया (दास प्रथा के कई विरोधी धार्मिक थे) और उपनिवेशों में मिशनरियों को भी। पुनर्जागरण आंदोलन, ब्रह्म समाज और आर्य समाज जैसी सुधार संस्थाएँ, और विज्ञान व आस्था पर बहस, इन सबने उस सदी को आकार दिया।
स्त्री-पुरुष भूमिकाएँ
ज़्यादातर समाज मानते थे कि महिलाएँ घर पर रहें और पुरुष कमाएँ और शासन करें। फिर भी महिलाएँ खेतों, मिलों और घरों में काम करती थीं, अक्सर कम मज़दूरी पर। 1800 के दशक में महिलाओं ने पढ़ाई, संपत्ति के अधिकार और वोट के लिए आंदोलन किए; न्यूज़ीलैंड ने 1893 में महिलाओं को वोट दिया।
करके देखिए: कारण-परिणाम की कड़ी बनाइए
स्लाइडर से कोई एक घटना लीजिए, जैसे फ़्रांसीसी क्रांति। काग़ज़ पर बाईं ओर तीन डिब्बे (कारण), बीच में घटना, और दाईं ओर तीन डिब्बे (परिणाम) बनाइए। फिर किसी एक परिणाम को स्लाइडर की किसी बाद की घटना से जोड़िए। आपने इतिहासकार जैसी कड़ी बना ली।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संपर्क के कारण: तकनीक + व्यापार + शासकों का धन + धर्म
- कोलंबियाई विनिमय: अटलांटिक के आर-पार फ़सलें, पशु, लोग, बीमारियाँ
- त्रिकोणीय व्यापार: सामान → पश्चिम अफ़्रीका → बंदी → अमेरिका → चीनी/कपास → यूरोप
- क्रांति: सरकार या समाज में अचानक बदलाव, अक्सर बल से
- सुधार: आंदोलनों से क़ानूनों और रीतियों में धीरे-धीरे बदलाव
- कारण → घटना → परिणाम (ऐतिहासिक सोच)
हल किए गए उदाहरण
1. 1450 के बाद यूरोपीय यात्राएँ बढ़ने के तीन कारण बताइए।
1. तकनीक: बेहतर जहाज़ और कम्पास। 2. व्यापार: मसालों और रेशम से भारी मुनाफ़ा। 3. शासक और व्यापारी धन और ताक़त चाहते थे, और कुछ अपना धर्म फैलाना चाहते थे।
2. सप्तवर्षीय युद्ध से अमेरिकी क्रांति कैसे हुई?
ब्रिटेन जीता पर कर्ज़ में डूब गया। चुकाने के लिए उसने अमेरिकी उपनिवेशों पर कर लगाए। उपनिवेशवासियों ने कहा 'प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं', विरोध बढ़ा, और 1776 में उन्होंने आज़ादी की घोषणा कर दी।
3. उपनिवेशक और उपनिवेश पर उपनिवेशवाद के प्रभाव की तुलना कीजिए।
उपनिवेशक को धन, कच्चा माल और बाज़ार मिले। उपनिवेश ने ज़मीन और आज़ादी खोई, कर दिए और स्थानीय उद्योग गिरे, हालाँकि नई फ़सलें और विचार भी आए। फ़ायदा और नुक़सान बहुत असमान थे।
4. हैती की क्रांति क्यों महत्वपूर्ण है?
दास बनाए लोगों ने एक औपनिवेशिक ताक़त को हराकर आज़ाद हैती (1804) बनाया। इससे साबित हुआ कि दास प्रथा को उखाड़ा जा सकता है, और दास-विरोधी आंदोलनों को प्रेरणा मिली।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि संपर्क सिर्फ़ शांत खोज यात्रा थी। इससे विजय, बीमारी और दास प्रथा भी आई।
- क्रांति (तेज़, अक्सर हिंसक बदलाव) और सुधार (क़ानूनों में धीमा बदलाव) को एक समझना।
- यह मानना कि सिर्फ़ यूरोपीय सक्रिय थे। एशियाई, अफ़्रीकी और अमेरिकी समाजों ने भी व्यापार किया, विरोध किया और घटनाओं को आकार दिया।
- यह सोचना कि 1900 से पहले महिलाएँ काम नहीं करती थीं। वे बहुत काम करती थीं, पर कम मज़दूरी और कम अधिकारों के साथ।