साम्राज्य, राष्ट्रवाद और सुधार, 1900–1914
1900 के आसपास ब्रिटेन, फ़्रांस, रूस, ऑस्ट्रिया-हंगरी और ऑटोमन जैसे साम्राज्य बहुत से लोगों पर राज करते थे। साम्राज्यवाद का मतलब है धन और ताकत के लिए एक देश का दूसरी ज़मीनों पर कब्ज़ा।
- राष्ट्रवाद: साम्राज्यों के अंदर के समूह (पोल, सर्ब, भारतीय, आयरिश) अपना राष्ट्र चाहते थे।
- सुधार आंदोलन: मज़दूरों ने संघ बनाए; महिलाओं ने वोट माँगा (सबसे पहले न्यूज़ीलैंड, 1893); लोगों ने स्कूल और स्वास्थ्य कानून माँगे।
- होड़: बड़ी ताकतों ने सेनाएँ और नौसेनाएँ बढ़ाईं और दो गुट बनाए।
पहला विश्व युद्ध और उसके नतीजे, 1914–1919
मुख्य कारण (याद रखो MAIN): सैन्यवाद (Militarism), गठबंधन (Alliances), साम्राज्यवाद (Imperialism), राष्ट्रवाद (Nationalism)। चिंगारी थी जून 1914 में साराजेवो में आर्चड्यूक फ़्रांज़ फ़र्डिनेंड की हत्या।
- खाइयों की लड़ाई, मशीनगन और ज़हरीली गैस; लगभग 1.7–2 करोड़ मौतें।
- उपनिवेशों से भी सैनिक आए: भारत से दस लाख से ज़्यादा।
- तुरंत नतीजे: जर्मन, ऑस्ट्रो-हंगेरियन, रूसी और ऑटोमन साम्राज्य टूटे; रूसी क्रांति (1917); वर्साय की संधि (1919) ने जर्मनी को दोषी ठहराकर सज़ा दी; राष्ट्र संघ बना।
दो युद्धों के बीच और दूसरा विश्व युद्ध, 1919–1945
- राष्ट्र संघ: शांति के लिए पहला विश्व संगठन। उसके पास सेना नहीं थी और अमेरिका कभी शामिल नहीं हुआ, इसलिए 1930 के दशक के हमले नहीं रोक सका।
- महामंदी (1929): बैंक डूबे, करोड़ों की नौकरियाँ गईं; गुस्से से कट्टर दलों को मदद मिली।
- तानाशाह: इटली में मुसोलिनी, जर्मनी में हिटलर, जापान में सैन्य नेता; डर और ताकत से राज।
- दूसरा विश्व युद्ध (1939–45): लगभग 7–8.5 करोड़ मौतें। नाज़ी जर्मनी ने होलोकॉस्ट में साठ लाख यहूदियों और लाखों दूसरों को मारा (जनसंहार = पूरे समूह की जानबूझकर हत्या)। युद्ध हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमों के साथ खत्म हुआ।
- संयुक्त राष्ट्र (1945): सुरक्षा परिषद और शांति सैनिकों वाला मज़बूत संगठन; 1948 में मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा अपनाई।
शीत युद्ध और उपनिवेशों की आज़ादी, 1945–1991
- शीत युद्ध: अमेरिका (पूँजीवाद, लोकतंत्र) और सोवियत संघ (साम्यवाद) ने सीधे लड़े बिना होड़ की: हथियारों की दौड़, अंतरिक्ष की दौड़, नाटो बनाम वारसा संधि, कोरिया, वियतनाम और अफ़गानिस्तान में छद्म युद्ध।
- वि-उपनिवेशीकरण: उपनिवेश आज़ाद हुए। भारत और पाकिस्तान (1947), इंडोनेशिया (1949), घाना (1957), 1960 के दशक के मध्य तक ज़्यादातर अफ़्रीका। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य 51 (1945) से 154 (1980) हो गए।
- गुटनिरपेक्ष आंदोलन (1961): भारत, मिस्र, इंडोनेशिया, घाना और यूगोस्लाविया ने उन देशों का नेतृत्व किया जो किसी गुट में नहीं गए।
- मानव अधिकार आंदोलन: दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद के खिलाफ़ और दुनिया भर में नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष।
1991 के बाद वैश्वीकरण वाली दुनिया
- 1991 में सोवियत संघ टूटा; शीत युद्ध खत्म हुआ। 2011 तक संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य हो गए।
- वैश्वीकरण: व्यापार, निवेश, यात्रा, प्रवास और इंटरनेट से देश जुड़े (भारत ने 1991 में अपनी अर्थव्यवस्था खोली)।
- क्षेत्रीय संघर्ष: पुराने यूगोस्लाविया में युद्ध (1990 का दशक), रवांडा जनसंहार (1994), पश्चिम एशिया और दूसरी जगहों पर युद्ध।
- अंतर-सरकारी संगठन: संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, अफ़्रीकी संघ, आसियान, विश्व व्यापार संगठन। ये कितने सफल? सिएरा लियोन जैसी जगहों पर शांति सैनिकों ने मदद की, पर रवांडा और स्रेब्रेनिका में हत्याएँ नहीं रोक पाए।
- साझी समस्याएँ: जलवायु परिवर्तन (पेरिस समझौता 2015), महामारी (कोविड-19), आतंकवाद और असमानता।
करके देखो: 3D के आख़िरी चरण का स्लाइडर चलाओ। 1945, 1965 और 1993 में सदस्य संख्या लिखो। हर बड़ी छलाँग का एक कारण लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- साम्राज्यवाद: एक देश का दूसरी ज़मीनों और लोगों पर राज
- राष्ट्रवाद: अपने राष्ट्र के प्रति गहरी निष्ठा; अपना राष्ट्र-राज्य चाहना
- MAIN: सैन्यवाद, गठबंधन, साम्राज्यवाद, राष्ट्रवाद (पहले विश्व युद्ध के कारण)
- जनसंहार (genocide): किसी राष्ट्रीय, जातीय या धार्मिक समूह की जानबूझकर हत्या
- शीत युद्ध: अमेरिका–सोवियत संघ की होड़ (1947–91), आपस में सीधे युद्ध के बिना
- वि-उपनिवेशीकरण: उपनिवेशों का आज़ाद देश बनना
- गुटनिरपेक्षता: शीत युद्ध के दोनों गुटों से अलग रहना
- वैश्वीकरण: व्यापार, लोगों और विचारों से देशों का गहराई से जुड़ना
हल किए गए उदाहरण
1. पहले विश्व युद्ध से दूसरा विश्व युद्ध कैसे निकला?
चरण 1: वर्साय की संधि ने जर्मनी को सज़ा दी, जिससे गुस्सा बढ़ा। चरण 2: राष्ट्र संघ कमज़ोर था। चरण 3: 1929 की महामंदी से भारी बेरोज़गारी आई। चरण 4: हिटलर ने इस गुस्से से सत्ता पाई और 1939 में पड़ोसियों पर हमला किया। यानी पहले युद्ध के नतीजे दूसरे युद्ध के कारण बने।
2. 1945 से 1980 के बीच संयुक्त राष्ट्र के सदस्य 51 से 154 क्यों हुए?
वि-उपनिवेशीकरण के कारण। एशिया और अफ़्रीका के उपनिवेश आज़ाद होकर संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुए। 154 − 51 = 103 नए सदस्य, ज़्यादातर पुराने उपनिवेश।
3. शांति रक्षक के रूप में संयुक्त राष्ट्र का मूल्यांकन करो।
मज़बूती: लगभग हर देश को साथ लाता है, शांति मिशन और मदद चलाता है, कुछ युद्ध खत्म कराने में मदद की। कमज़ोरी: पाँच स्थायी सदस्य वीटो कर सकते हैं, सेना और पैसे के लिए सदस्यों पर निर्भर, रवांडा (1994) में असफल। निष्कर्ष: उपयोगी, पर ताकतवर देशों की इच्छा से सीमित।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि साराजेवो की हत्या ही पहले विश्व युद्ध का अकेला कारण थी। वह चिंगारी थी; असली कारण MAIN थे।
- राष्ट्र संघ (1919) और संयुक्त राष्ट्र (1945) को एक समझना।
- यह सोचना कि शीत युद्ध में कोई लड़ाई नहीं हुई। महाशक्तियाँ आपस में सीधे नहीं लड़ीं, पर छद्म युद्धों में लाखों मरे।
- यह मानना कि वैश्वीकरण 1991 में शुरू हुआ। व्यापारिक संबंध पुराने हैं; 1991 के बाद बहुत तेज़ हुए।