साम्राज्यों का पतन (Collapse of empires)
युद्ध ने चार बड़े साम्राज्य तोड़ दिए: रूसी (1917 में क्रांति), जर्मन (नवंबर 1918 में कैसर ने गद्दी छोड़ी), ऑस्ट्रो-हंगेरियन (अक्टूबर–नवंबर 1918 में टूटा) और ऑटोमन (1918 में हारा; 1922 में सुल्तान हटा और 1923 में तुर्की गणतंत्र बना)।
उनकी जगह नए देश बने, जैसे पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया, यूगोस्लाविया, ऑस्ट्रिया, हंगरी, फ़िनलैंड, बाल्टिक देश और तुर्की। आत्मनिर्णय (कोई जनता अपनी सरकार खुद चुने) के विचार के कारण कई लोगों ने इसका स्वागत किया। पर नई सीमाओं ने कई अल्पसंख्यकों को ऐसे देशों में छोड़ दिया जो उनके अपने नहीं थे, जिससे आगे झगड़े हुए।
वर्साय की संधि, 1919
28 जून 1919 को फ़्रांस में हुई इस संधि ने जर्मनी के साथ युद्ध खत्म किया। मुख्य शर्तें:
- युद्ध-अपराध: जर्मनी को युद्ध का दोष मानना पड़ा।
- भूमि: जर्मनी ने इलाक़े खोए (जैसे अल्सास-लोरेन फ़्रांस को लौटा) और अपने उपनिवेश भी।
- सेना: 1,00,000 सैनिकों तक सीमित, वायुसेना नहीं और कुछ ही जहाज़।
- हर्जाना (reparations): क्षति का पैसा; रकम 1921 में तय हुई।
दूसरी संधियाँ ऑस्ट्रिया, हंगरी, बुल्गारिया और ऑटोमन के लिए थीं। कई जर्मनों को यह थोपी हुई कठोर शांति लगी, और उस गुस्से का बाद में नेताओं ने इस्तेमाल किया।
वाशिंगटन संधियाँ, 1921–22
वर्साय मुख्यतः यूरोप के लिए था। वाशिंगटन सम्मेलन ने प्रशांत और समुद्र को देखा। इसकी संधियों ने तीन काम किए: अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ़्रांस और इटली के सबसे बड़े युद्धपोत 5 : 5 : 3 : 1.75 : 1.75 के अनुपात में सीमित किए; बड़ी शक्तियों से चीन की स्वतंत्रता का सम्मान करने को कहा; और प्रशांत में प्रतिद्वंद्वी दावों को सुलझाया।
यूरोप की वर्साय संधियाँ और प्रशांत की वाशिंगटन संधियाँ मिलकर वर्साय–वाशिंगटन व्यवस्था कहलाती हैं: वे समझौते जिन्होंने 1918 के बाद की दुनिया को संगठित किया।
राष्ट्र संघ (League of Nations)
राष्ट्र संघ 1920 में जिनेवा में शुरू हुआ। उसका लक्ष्य था बातचीत, नियमों और नियम तोड़ने वालों पर दबाव से शांति रखना। उसने शरणार्थियों की मदद और स्वास्थ्य के काम भी किए।
वह कमज़ोर क्यों था?
- उसकी अपनी कोई सेना नहीं थी।
- अमेरिका कभी शामिल नहीं हुआ, जबकि उसके राष्ट्रपति ने यह विचार आगे बढ़ाया था।
- बड़े फ़ैसलों के लिए सभी सदस्यों की सहमति चाहिए थी।
- जर्मनी और सोवियत संघ शुरू में बाहर रखे गए; जर्मनी 1926 में शामिल हुआ।
- 1930 के दशक में जापान, जर्मनी और इटली ने उसे छोड़ दिया।
संघ ने कुछ छोटे झगड़े सुलझाए, पर बड़ी शक्तियों के सामने वह असफल रहा।
आशा से दरार तक: 1918–1938
1920 के दशक के बीच में आशा थी: जर्मनी ने अपनी पश्चिमी सीमाएँ मानीं (लोकार्नो, 1925) और संघ में शामिल हुआ (1926)। फिर 1929 में महामंदी शुरू हुई; नौकरियाँ और पैसा गए, और गुस्साए मतदाता चरमपंथी नेताओं की ओर गए। 1938 तक 1919–22 में बनी व्यवस्था टूट रही थी। अगला पाठ देखिए: 1930 के दशक में अंतरराष्ट्रीय संबंध।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 4 साम्राज्य गिरे: जर्मन, ऑस्ट्रो-हंगेरियन, रूसी, ऑटोमन
- वर्साय की संधि: 28 जून 1919
- राष्ट्र संघ: 1920, जिनेवा
- वाशिंगटन नौसेना अनुपात (अमेरिका : ब्रिटेन : जापान : फ़्रांस : इटली) = 5 : 5 : 3 : 1.75 : 1.75
- वर्साय + वाशिंगटन = वर्साय–वाशिंगटन व्यवस्था
हल किए गए उदाहरण
1. प्रथम विश्व युद्ध के कारण गिरे चार साम्राज्यों के नाम बताइए।
जर्मन, ऑस्ट्रो-हंगेरियन, रूसी और ऑटोमन साम्राज्य।
2. राष्ट्र संघ के कमज़ोर होने के दो कारण लिखिए।
उसकी अपनी सेना नहीं थी, और अमेरिका (एक बहुत शक्तिशाली देश) कभी शामिल नहीं हुआ। साथ ही बड़े फ़ैसलों के लिए सबकी सहमति चाहिए थी।
3. वाशिंगटन नौसेना अनुपात में अमेरिका को 5 और जापान को 3 मिला। अगर अमेरिका 5,00,000 टन बड़े युद्धपोत रख सकता था, तो जापान कितने रख सकता था?
अनुपात 5 : 3 है। 5,00,000 ÷ 5 = 1,00,000 प्रति भाग। जापान: 3 × 1,00,000 = 3,00,000 टन।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि राष्ट्र संघ की अपनी सेना थी। नहीं थी।
- वर्साय (यूरोप, जर्मनी) और वाशिंगटन (नौसेनाएँ और प्रशांत) को आपस में मिला देना।
- यह सोचना कि अमेरिका ने संघ का नेतृत्व किया। अमेरिका कभी शामिल नहीं हुआ।
- यह मानना कि सारे नए देश शांत थे। उनकी सीमाओं ने अल्पसंख्यक छोड़े और झगड़े पैदा किए।