1930 का दशक खतरनाक क्यों बना
महामंदी (1929) के बाद कई देशों में बेरोज़गारी और गुस्सा था। कुछ ने ऐसे नेताओं की ओर रुख किया जो ताक़त और ज़मीन का वादा करते थे। राष्ट्र संघ कमज़ोर था (सेना नहीं, अमेरिका बाहर), और ब्रिटेन-फ़्रांस 1914–18 जैसा युद्ध फिर नहीं चाहते थे। चार कारणों ने मिलकर आक्रमण आसान किया: महामंदी, गुस्से वाला राष्ट्रवाद, कमज़ोर संघ और युद्ध का डर।
बढ़ता आक्रमण: सीढ़ी, 1931–1937
- 1931 मंचूरिया: जापान ने उत्तर-पूर्वी चीन के मंचूरिया पर कब्ज़ा किया। संघ ने रिपोर्ट भेजी और जापान ने 1933 में संघ छोड़ दिया।
- 1933: हिटलर जर्मनी का चांसलर बना; जर्मनी ने संघ छोड़ा।
- 1935 इथियोपिया: इटली ने इथियोपिया पर हमला किया। संघ ने कुछ व्यापार रोका पर तेल नहीं, इसलिए वह असफल रहा। जर्मनी ने अनिवार्य भर्ती घोषित की।
- 1936 राइनलैंड: जर्मन सैनिक राइनलैंड में घुसे, वर्साय संधि तोड़ते हुए। स्पेन का गृहयुद्ध शुरू हुआ, जिसमें जर्मनी और इटली ने एक पक्ष की मदद की जबकि ब्रिटेन-फ़्रांस दूर रहे। जर्मनी और इटली ने रोम–बर्लिन धुरी बनाई।
- 1937: जापान ने चीन में पूर्ण युद्ध छेड़ा; जर्मनी, इटली और जापान एंटी-कॉमिन्टर्न समझौते से जुड़े।
1938: अंशलुस और सुडेटनलैंड
मार्च 1938 में जर्मनी ने ऑस्ट्रिया को अपने में मिला लिया (अंशलुस)। फिर हिटलर ने सुडेटनलैंड माँगा, जो चेकोस्लोवाकिया का सीमावर्ती इलाक़ा था जहाँ कई जर्मन-भाषी रहते थे। चेकोस्लोवाकिया के पास मज़बूत सेना और फ़्रांस से गठबंधन था, पर उसके मित्र युद्ध नहीं चाहते थे।
म्यूनिख समझौता और तुष्टीकरण
29–30 सितंबर 1938 को ब्रिटेन (चेम्बरलेन), फ़्रांस (दलादिए), इटली (मुसोलिनी) और जर्मनी (हिटलर) के नेता म्यूनिख में मिले। उन्होंने तय किया कि जर्मनी सुडेटनलैंड लेगा। चेकोस्लोवाकिया को बुलाया नहीं गया। चेम्बरलेन ने कहा कि इससे "हमारे समय के लिए शांति" मिली।
तुष्टीकरण (appeasement) वह नीति है जिसमें युद्ध टालने के लिए आक्रामक को उसकी माँग दे दी जाती है। समर्थक कहते थे कि ब्रिटेन-फ़्रांस तैयार नहीं थे और एक और बड़े युद्ध से डरते थे; आलोचक कहते हैं कि इससे आक्रामक को बढ़ावा मिला और एक मज़बूत मित्र छूट गया।
रास्ते का अंत: 1939
मार्च 1939 में जर्मनी ने बाक़ी चेक भूभाग पर कब्ज़ा कर लिया। अगस्त 1939 में जर्मनी और सोवियत संघ ने अनाक्रमण समझौता किया। 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर हमला किया, और दो दिन बाद ब्रिटेन-फ़्रांस ने युद्ध की घोषणा की। पाठ देखिए: दूसरा विश्व युद्ध।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1931 मंचूरिया → 1935 इथियोपिया → 1936 राइनलैंड → 1938 अंशलुस + म्यूनिख → 1939 पोलैंड
- तुष्टीकरण = युद्ध टालने के लिए आक्रामक के आगे झुकना
- म्यूनिख समझौता: 29–30 सितंबर 1938
- सुडेटनलैंड: चेकोस्लोवाकिया का सीमावर्ती इलाक़ा, जो जर्मनी को दिया गया
- दूसरा विश्व युद्ध शुरू: 1 सितंबर 1939 (पोलैंड पर हमला)
हल किए गए उदाहरण
1. तुष्टीकरण क्या है?
किसी आक्रामक देश को युद्ध टालने के लिए उसकी माँग दे देना। ब्रिटेन और फ़्रांस ने 1938 में म्यूनिख में यही किया।
2. म्यूनिख समझौते की आलोचना क्यों हुई?
चेकोस्लोवाकिया को बुलाया नहीं गया, उसने सीमा का इलाक़ा खोया, और इस रियायत ने जर्मनी को बढ़ावा दिया: उसने मार्च 1939 में बाक़ी चेक भूभाग लिया और सितंबर में पोलैंड पर हमला किया।
3. जापान के मंचूरिया लेने और यूरोप में दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत के बीच कितने साल बीते?
1939 − 1931 = 8 साल।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि राष्ट्र संघ ने इटली को रोक दिया। उसने कुछ व्यापार रोका, पर तेल नहीं, और इटली जीत गया।
- यह सोचना कि चेकोस्लोवाकिया म्यूनिख में सहमत था। उसे बुलाया ही नहीं गया।
- तुष्टीकरण को सिर्फ़ मूर्खता कहना। लोग 1914–18 के दोहराव से डरते थे, फिर भी यह असफल रहा।
- तारीखें मिला देना: अंशलुस मार्च 1938 में है, म्यूनिख सितंबर 1938 में।