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1930 के दशक के अंतरराष्ट्रीय संबंध: आक्रमण और तुष्टीकरण

1930 के दशक में कई देशों ने बल से अपनी चाही चीज़ें ले लीं: जापान ने मंचूरिया (1931) और चीन (1937) में, इटली ने इथियोपिया (1935) में, जर्मनी ने राइनलैंड (1936), ऑस्ट्रिया (1938) और चेकोस्लोवाकिया (1938–39) में। राष्ट्र संघ केवल विरोध कर सका। ब्रिटेन और फ़्रांस ने तुष्टीकरण की नीति अपनाई, यानी युद्ध टालने के लिए झुक गए; म्यूनिख समझौते (सितंबर 1938) में उन्होंने जर्मनी को सुडेटनलैंड लेने दिया। यह काम नहीं आया: जर्मनी ने 1 सितंबर 1939 को पोलैंड पर हमला किया और दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1919 के बाद आशा थी समझौते से शांति की, जिसे यहाँ तराज़ू से दिखाया है। यह तभी चलता है जब सब इसे मानें।
  2. महामंदी (1929) ने गुस्सा और ताक़तवर नेता दिए। सीढ़ी की पहली पायदानें: जापान मंचूरिया लेता है (1931), जर्मनी संघ छोड़ता है (1933)।
  3. कोई असली सज़ा नहीं मिली, इसलिए पायदानें और साहसी हुईं: इथियोपिया (1935), राइनलैंड (1936), धुरी और चीन में युद्ध (1937)। यानी 5 पायदानें।
  4. 1938 में जर्मनी ने ऑस्ट्रिया को मिलाया, फिर सुडेटनलैंड माँगा। म्यूनिख में ब्रिटेन और फ़्रांस मान गए, चेकोस्लोवाकिया के बिना। इस तरह झुकने को तुष्टीकरण कहते हैं।
  5. यह असफल रहा। जर्मनी ने बाक़ी चेक भूभाग ले लिया (मार्च 1939) और 1 सितंबर 1939 को पोलैंड पर हमला किया। दूसरा विश्व युद्ध शुरू हुआ।
  6. वर्ष 1931 से 1939 तक खिसकाइए और हर पायदान पर पूछिए: दूसरे क्या कर सकते थे?

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

राष्ट्र संघ ने जापान या इटली को क्यों नहीं रोका?

उसके पास सेना नहीं थी, फ़ैसलों के लिए सदस्यों की सहमति चाहिए थी, और कुछ सदस्य युद्ध का जोखिम या व्यापार का नुकसान नहीं चाहते थे।

ब्रिटेन और फ़्रांस म्यूनिख में क्यों झुके?

उन्हें 1914–18 के भारी नुकसान याद थे, वे पूरी तरह तैयार नहीं थे, और उन्हें आशा थी कि एक और सौदा शांति लाएगा।

चेकोस्लोवाकिया को क्यों नहीं बुलाया गया?

चारों नेताओं ने उसके सिर के ऊपर से फ़ैसला किया। उसे मानना पड़ा। इसीलिए कई लोग म्यूनिख को धोखा कहते हैं।

क्या 1930 के दशक में केवल जर्मनी आक्रामक था?

नहीं। जापान ने 1931 में मंचूरिया लिया और 1937 में चीन में पूर्ण युद्ध छेड़ा, और इटली ने 1935 में इथियोपिया पर हमला किया।

क्या म्यूनिख से शांति आई?

नहीं। छह महीने में जर्मनी ने बाक़ी चेक भूभाग ले लिया, और एक साल में पोलैंड पर हमला किया।

क्या युद्ध रोका जा सकता था?

इतिहासकार इस पर बहस करते हैं। शुरुआती पायदान पर, जैसे 1936 के राइनलैंड पर, कड़ा जवाब शायद मदद करता। वर्षों में खिसकाइए और सोचिए।

1930 का दशक खतरनाक क्यों बना

महामंदी (1929) के बाद कई देशों में बेरोज़गारी और गुस्सा था। कुछ ने ऐसे नेताओं की ओर रुख किया जो ताक़त और ज़मीन का वादा करते थे। राष्ट्र संघ कमज़ोर था (सेना नहीं, अमेरिका बाहर), और ब्रिटेन-फ़्रांस 1914–18 जैसा युद्ध फिर नहीं चाहते थे। चार कारणों ने मिलकर आक्रमण आसान किया: महामंदी, गुस्से वाला राष्ट्रवाद, कमज़ोर संघ और युद्ध का डर।

बढ़ता आक्रमण: सीढ़ी, 1931–1937

1938: अंशलुस और सुडेटनलैंड

मार्च 1938 में जर्मनी ने ऑस्ट्रिया को अपने में मिला लिया (अंशलुस)। फिर हिटलर ने सुडेटनलैंड माँगा, जो चेकोस्लोवाकिया का सीमावर्ती इलाक़ा था जहाँ कई जर्मन-भाषी रहते थे। चेकोस्लोवाकिया के पास मज़बूत सेना और फ़्रांस से गठबंधन था, पर उसके मित्र युद्ध नहीं चाहते थे।

म्यूनिख समझौता और तुष्टीकरण

29–30 सितंबर 1938 को ब्रिटेन (चेम्बरलेन), फ़्रांस (दलादिए), इटली (मुसोलिनी) और जर्मनी (हिटलर) के नेता म्यूनिख में मिले। उन्होंने तय किया कि जर्मनी सुडेटनलैंड लेगा। चेकोस्लोवाकिया को बुलाया नहीं गया। चेम्बरलेन ने कहा कि इससे "हमारे समय के लिए शांति" मिली।

तुष्टीकरण (appeasement) वह नीति है जिसमें युद्ध टालने के लिए आक्रामक को उसकी माँग दे दी जाती है। समर्थक कहते थे कि ब्रिटेन-फ़्रांस तैयार नहीं थे और एक और बड़े युद्ध से डरते थे; आलोचक कहते हैं कि इससे आक्रामक को बढ़ावा मिला और एक मज़बूत मित्र छूट गया।

रास्ते का अंत: 1939

मार्च 1939 में जर्मनी ने बाक़ी चेक भूभाग पर कब्ज़ा कर लिया। अगस्त 1939 में जर्मनी और सोवियत संघ ने अनाक्रमण समझौता किया। 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर हमला किया, और दो दिन बाद ब्रिटेन-फ़्रांस ने युद्ध की घोषणा की। पाठ देखिए: दूसरा विश्व युद्ध।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. तुष्टीकरण क्या है?

किसी आक्रामक देश को युद्ध टालने के लिए उसकी माँग दे देना। ब्रिटेन और फ़्रांस ने 1938 में म्यूनिख में यही किया।

2. म्यूनिख समझौते की आलोचना क्यों हुई?

चेकोस्लोवाकिया को बुलाया नहीं गया, उसने सीमा का इलाक़ा खोया, और इस रियायत ने जर्मनी को बढ़ावा दिया: उसने मार्च 1939 में बाक़ी चेक भूभाग लिया और सितंबर में पोलैंड पर हमला किया।

3. जापान के मंचूरिया लेने और यूरोप में दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत के बीच कितने साल बीते?

1939 − 1931 = 8 साल।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. जापान ने मंचूरिया पर कब्ज़ा किया:
2. तुष्टीकरण का अर्थ है:
3. म्यूनिख (1938) में जर्मनी को क्या लेने दिया गया?
4. म्यूनिख सम्मेलन की मेज़ पर कौन नहीं था?
5. यूरोप में दूसरा विश्व युद्ध तब शुरू हुआ जब जर्मनी ने हमला किया:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

म्यूनिख समझौता क्या था?

29–30 सितंबर 1938 का वह सौदा जिसमें ब्रिटेन, फ़्रांस, इटली और जर्मनी ने तय किया कि जर्मनी चेकोस्लोवाकिया से सुडेटनलैंड ले सकता है; चेकोस्लोवाकिया को बुलाया नहीं गया था।

तुष्टीकरण क्या था और क्या यह सफल रहा?

युद्ध टालने के लिए आक्रामक के आगे झुकना तुष्टीकरण था। यह सफल नहीं रहा: जर्मनी ने 1939 में बाक़ी चेकोस्लोवाकिया लिया और पोलैंड पर हमला किया।

दूसरे विश्व युद्ध तक किन घटनाओं ने पहुँचाया?

मंचूरिया में जापान (1931), इथियोपिया में इटली (1935), राइनलैंड में जर्मनी (1936), अंशलुस और म्यूनिख (1938), चेक भूभाग पर कब्ज़ा (1939) और पोलैंड पर हमला (1 सितंबर 1939)।

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