साम्राज्यों का पतन और नए राज्य
1918 के अंत तक चार साम्राज्य गिर चुके थे: जर्मन, ऑस्ट्रो-हंगेरियन, रूसी और ऑटोमन। राष्ट्रीय आत्मनिर्णय के विचार से कई लोगों ने अपने राज्य बनाए या फिर से खड़े किए:
- पोलैंड (द्वितीय पोलिश गणराज्य, 1918–1939): 123 साल बाद फिर बना; 1921 में लोकतांत्रिक संविधान, फिर 1926 के तख़्तापलट के बाद युज़ेफ़ पिल्सुद्स्की के गुट (सानात्सिया) का शासन।
- चेकोस्लोवाकिया: क्षेत्र का सबसे स्थिर लोकतंत्र, तोमाश मासारिक के नेतृत्व में।
- हंगरी: त्रियानों संधि के बाद बहुत छोटा; मिक्लोश होर्थी के अधीन रूढ़िवादी शासन।
- रोमानिया: 1918 में "बृहत् रोमानिया" का आकार दोगुना; संवैधानिक राजतंत्र जो 1938 में राजा कैरोल द्वितीय के निजी शासन में बदला।
- सर्ब, क्रोएट और स्लोवेन राज्य (1929 से यूगोस्लाविया): राष्ट्रों में तनाव; 1929 से शाही तानाशाही।
- बुल्गारिया, बाल्टिक देश (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया), फ़िनलैंड और ऑस्ट्रिया ने भी नई शुरुआत की।
लगभग हर नए राज्य में बड़े राष्ट्रीय अल्पसंख्यक थे (जैसे यूक्रेनी, जर्मन, यहूदी, हंगेरियन)। संधियों ने उनकी रक्षा का वादा किया, पर ज़मीन, स्कूल और भाषा पर झगड़े आम थे। पोलैंड, रोमानिया और चेकोस्लोवाकिया में रहने वाले यूक्रेनियों जैसे अल्पसंख्यक अधिकारों और स्वायत्तता के लिए संघर्ष करते रहे।
वर्साय-वॉशिंगटन व्यवस्था और राष्ट्र संघ
पेरिस शांति सम्मेलन (1919–1920) में हर हारे देश से संधि हुई: वर्साय (जर्मनी), सेंट-जर्मेन (ऑस्ट्रिया), त्रियानों (हंगरी), न्यूई (बुल्गारिया) और सेव्र (ऑटोमन साम्राज्य, बाद में लोज़ान 1923 ने जगह ली)। जर्मनी ने ज़मीन और सारे उपनिवेश खोए, सेना 1,00,000 तक सीमित की, राइनलैंड से सेना हटाई, युद्ध-अपराध धारा मानी और हर्जाना भरना पड़ा।
वॉशिंगटन सम्मेलन (1921–1922) ने पूर्वी एशिया और प्रशांत के नियम जोड़े, जिनमें ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, फ़्रांस और इटली के युद्धपोतों की सीमा थी। इन संधियों को मिलाकर वर्साय-वॉशिंगटन व्यवस्था कहते हैं।
राष्ट्र संघ (1920, जिनेवा) का लक्ष्य सामूहिक सुरक्षा था: सदस्य झगड़े बातचीत से सुलझाएँ और आक्रमणकारी के ख़िलाफ़ साथ आएँ। कमज़ोरियाँ: अमेरिका कभी शामिल नहीं हुआ, जर्मनी और सोवियत संघ देर से आए, फ़ैसलों के लिए सबकी सहमति चाहिए थी, और उसकी अपनी सेना नहीं थी। उसने कुछ छोटे विवाद सुलझाए पर जापान (मंचूरिया, 1931) और इटली (इथियोपिया, 1935) के सामने विफल रहा।
स्थिरता से विश्व संकट तक: 1920 का दशक और महामंदी
1920 के शुरुआती वर्ष कठिन थे: महँगाई (1923 में जर्मनी का पैसा लगभग बेकार हो गया), हड़तालें और सीमा युद्ध। 1924 से शांति आई: डॉज़ योजना ने अमेरिकी क़र्ज़ से जर्मन भुगतान आसान किए, लोकार्नो संधियों (1925) ने जर्मनी की पश्चिमी सीमाएँ तय कीं, और केलॉग-ब्रियां समझौते (1928) ने युद्ध को नकारा। कारख़ाने, कारें, रेडियो और सिनेमा बढ़े।
अक्टूबर 1929 में न्यूयॉर्क शेयर बाज़ार में दाम ढह गए। अमेरिकी बैंकों ने क़र्ज़ वापस माँगे, 1932 तक विश्व व्यापार लगभग दो-तिहाई घट गया, कृषि उपज के दाम गिरे और बेरोज़गारी आसमान छू गई (अमेरिका और जर्मनी में लगभग हर चार में से एक मज़दूर)। देशों ने बचाव के लिए आयात शुल्क बढ़ाए, जिससे मंदी और गहरी हुई।
अर्थव्यवस्था पर सरकारी नियंत्रण
पुराना विचार था कि बाज़ार ख़ुद ठीक हो जाता है। महामंदी ने इसे बदला। सरकारें अर्थव्यवस्था का नियमन करने लगीं:
- अमेरिका: फ़्रैंकलिन रूज़वेल्ट की न्यू डील (1933 से): रोज़गार के लिए सार्वजनिक निर्माण, बैंक और शेयर बाज़ार के नियम, किसानों की मदद, बेरोज़गारी बीमा और पेंशन।
- स्वीडन आदि: कल्याण पर ख़र्च और मज़दूर संघों व मालिकों में समझौते।
- तानाशाहियाँ: उद्योग पर सरकारी नियंत्रण और फिर से हथियारबंदी (जर्मनी के राजमार्ग और हथियार), सोवियत संघ में पूरी तरह नियोजित पंचवर्षीय योजनाएँ।
अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स ने कहा कि जब निजी ख़र्च गिरे तो सरकार को ज़्यादा ख़र्च करना चाहिए।
लोकतंत्र बनाम सत्तावाद; विचारधाराएँ
चार मुख्य विचार आपस में होड़ में थे:
- उदार लोकतंत्र: चुनाव, दल, स्वतंत्र प्रेस, अधिकार (ब्रिटेन, फ़्रांस, चेकोस्लोवाकिया, स्कैंडिनेविया, अमेरिका)।
- साम्यवाद: एक दल का शासन और सरकारी स्वामित्व (स्टालिन का सोवियत संघ)।
- फ़ासीवाद / नाज़ीवाद: उग्र राष्ट्रवाद, नेता-पूजा, विरोधियों पर हिंसा, और नाज़ीवाद में नस्लवाद व यहूदी-विरोध (मुसोलिनी 1922 से, हिटलर 1933 से)।
- रूढ़िवादी सत्तावाद: ताक़तवर नेता या राजा संसद को सीमित करता है पर पूरा जीवन नियंत्रित नहीं करता (1926 के बाद पोलैंड, हंगरी, 1938 से रोमानिया, यूगोस्लाविया, पुर्तगाल)।
सर्वसत्तावादी शासन जीवन के हर हिस्से पर नियंत्रण चाहते हैं; सत्तावादी राजनीति सीमित करते हैं पर कुछ निजी जगह छोड़ते हैं। 1920 के आसपास यूरोप के लगभग 28 लोकतंत्रों में से 1938 तक लगभग एक दर्जन ही बचे।
स्पेनी गृहयुद्ध और युद्ध की राह
स्पेन में चुनी हुई पॉपुलर फ़्रंट सरकार के ख़िलाफ़ 1936 में जनरल फ़्रांको के नेतृत्व में सैन्य विद्रोह हुआ। स्पेनी गृहयुद्ध (1936–1939) बड़े युद्ध का पूर्वाभ्यास बना: जर्मनी और इटली ने फ़्रांको की, सोवियत संघ और अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवकों ने गणराज्य की मदद की, जबकि ब्रिटेन और फ़्रांस दूर रहे (अहस्तक्षेप)। 1939 में फ़्रांको जीता।
इस बीच जर्मनी ने फिर हथियार जुटाए, राइनलैंड में सेना भेजी (1936), ऑस्ट्रिया को मिलाया (1938) और म्यूनिख समझौते (1938) से चेकोस्लोवाकिया का हिस्सा लिया, जबकि ब्रिटेन और फ़्रांस ने तुष्टीकरण की नीति अपनाई। जर्मन-सोवियत समझौते (अगस्त 1939) के बाद 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर हमला किया।
करके देखिए: कारण-परिणाम की कड़ी
काग़ज़ की पट्टियों पर लिखिए: "1929 का पतन", "अमेरिकी क़र्ज़ वापस माँगे", "कारख़ाने बंद", "भारी बेरोज़गारी", "संसद पर से भरोसा उठा", "उग्र दलों को वोट"। तीरों से इन्हें कड़ी में जोड़िए। फिर एक पट्टी जोड़िए जो कड़ी तोड़ सकती थी (जैसे "सरकारी रोज़गार योजनाएँ") और कारण बताइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अंतर-युद्ध काल: 11 नवंबर 1918 – 1 सितंबर 1939
- चार गिरे साम्राज्य: जर्मन, ऑस्ट्रो-हंगेरियन, रूसी, ऑटोमन
- वर्साय-वॉशिंगटन व्यवस्था = पेरिस शांति संधियाँ (1919–1920) + वॉशिंगटन सम्मेलन (1921–1922)
- राष्ट्र संघ (1920): सामूहिक सुरक्षा, अपनी सेना नहीं, अमेरिका अनुपस्थित
- महामंदी: अक्टूबर 1929 के वॉल स्ट्रीट पतन से शुरू
- सर्वसत्तावादी = पूरे जीवन पर नियंत्रण; सत्तावादी = केवल राजनीति पर रोक
हल किए गए उदाहरण
1. 1918 में कई नए राज्य क्यों बने?
मध्य और पूर्वी यूरोप पर राज करने वाले चार साम्राज्य युद्ध के अंत में गिर गए, और लोगों ने राष्ट्रीय आत्मनिर्णय के विचार से अपने राज्य बनाए।
2. राष्ट्र संघ की कमज़ोरी के दो कारण बताइए।
अमेरिका कभी शामिल नहीं हुआ, और उसकी अपनी सेना नहीं थी; फ़ैसलों में सर्वसम्मति ज़रूरी थी, इसलिए कार्रवाई धीमी थी।
3. न्यूयॉर्क के 1929 के पतन से जर्मनी को कैसे नुक़सान हुआ?
जर्मनी अमेरिकी क़र्ज़ पर निर्भर था। क़र्ज़ वापस माँगे गए तो कंपनियाँ बंद हुईं, 1932 तक लगभग 60 लाख बेरोज़गार हुए और मतदाता उग्र दलों की ओर गए।
4. 1926 के बाद पिल्सुद्स्की के पोलैंड और हिटलर के जर्मनी में क्या अंतर था?
पोलैंड सत्तावादी बना: संसद सीमित हुई पर दूसरे दल और काफ़ी निजी जीवन बचा रहा। नाज़ी जर्मनी सर्वसत्तावादी था: एक दल, आतंक, और युवाओं, मीडिया व अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण।
आम गलतियाँ
- सोचना कि पूरा 1920 का दशक शांत था। 1918–1923 में युद्ध, महँगाई और विद्रोह थे; शांति लगभग 1924–1929 में आई।
- सत्तावादी और सर्वसत्तावादी शासन को एक समझना।
- कहना कि अमेरिका ने राष्ट्र संघ चलाया। उसके राष्ट्रपति ने प्रस्ताव दिया, पर अमेरिकी सीनेट ने शामिल होने से इनकार किया।
- महामंदी को केवल अमेरिका की समस्या मानना। यह यूरोप, एशिया, लैटिन अमेरिका और भारत जैसे उपनिवेशों तक फैली।