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दो विश्व युद्धों के बीच का काल (1918–1939)

प्रथम विश्व युद्ध के अंत (1918) से द्वितीय के आरंभ (1939) तक चार साम्राज्य टूटे और मध्य-पूर्वी यूरोप में कई नए राज्य बने। वर्साय-वॉशिंगटन शांति व्यवस्था और राष्ट्र संघ ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। 1920 के दशक की शुरुआती अशांति के बाद थोड़ी स्थिरता आई, पर 1929 के शेयर बाज़ार पतन से महामंदी शुरू हुई। भारी बेरोज़गारी ने लोकतंत्रों को कमज़ोर किया; ज़्यादातर नए राज्य सत्तावादी बने, जबकि फ़ासीवादी इटली, नाज़ी जर्मनी और स्टालिन का सोवियत संघ सर्वसत्तावादी बने। सरकारें अर्थव्यवस्था सँभालने लगीं, राष्ट्र संघ आक्रमण नहीं रोक सका, और स्पेनी गृहयुद्ध व तुष्टीकरण 1939 के युद्ध तक ले गए।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1918: चार बड़े साम्राज्य गिरते हैं और उनकी जगह कई छोटे नए राज्य उठते हैं।
  2. शांति व्यवस्था: संधियाँ हारे देशों को दंड देती हैं और झगड़े बातचीत से सुलझाने के लिए राष्ट्र संघ बनता है।
  3. 1920 के दशक के बीच शांति आती है: क़र्ज़, शांति संधियाँ और बढ़ते कारख़ाने।
  4. 1929: शेयर बाज़ार गिरता है। उत्पादन घटता है और बेरोज़गारों की संख्या बढ़ती है।
  5. लोकतंत्र बनाम तानाशाही: 1938 तक यूरोप के ज़्यादातर राज्यों में सत्तावादी शासक हैं।
  6. खुद खेलिए: वर्ष स्लाइडर 1918 से 1939 तक खिसकाइए और हर मोड़ पढ़िए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

साम्राज्य 1918 में ही क्यों टूटे?

लंबे युद्ध ने उन्हें थका दिया: हार, भूख और विद्रोहों से अधीन लोग अलग हो गए।

राष्ट्र संघ युद्ध क्यों नहीं रोक सका?

उसकी सेना नहीं थी, अमेरिका बाहर रहा, और बड़े सदस्य अपने हित पहले रखते थे।

क्या 1920 का दशक हर जगह अच्छा था?

नहीं। शांति मुख्यतः 1924–1929 में आई, और कई देशों में किसान पहले से परेशान थे।

न्यूयॉर्क के पतन से भारत के किसानों को नुक़सान कैसे हुआ?

दुनिया में फ़सलों की माँग और दाम तेज़ी से गिरे, किसानों की कमाई घटी पर लगान और क़र्ज़ उतना ही रहा।

क्या हर तानाशाही सर्वसत्तावादी होती है?

नहीं। सत्तावादी शासन राजनीति सीमित करते हैं; सर्वसत्तावादी जीवन के हर हिस्से पर नियंत्रण चाहते हैं।

साम्राज्यों का पतन और नए राज्य

1918 के अंत तक चार साम्राज्य गिर चुके थे: जर्मन, ऑस्ट्रो-हंगेरियन, रूसी और ऑटोमन। राष्ट्रीय आत्मनिर्णय के विचार से कई लोगों ने अपने राज्य बनाए या फिर से खड़े किए:

लगभग हर नए राज्य में बड़े राष्ट्रीय अल्पसंख्यक थे (जैसे यूक्रेनी, जर्मन, यहूदी, हंगेरियन)। संधियों ने उनकी रक्षा का वादा किया, पर ज़मीन, स्कूल और भाषा पर झगड़े आम थे। पोलैंड, रोमानिया और चेकोस्लोवाकिया में रहने वाले यूक्रेनियों जैसे अल्पसंख्यक अधिकारों और स्वायत्तता के लिए संघर्ष करते रहे।

वर्साय-वॉशिंगटन व्यवस्था और राष्ट्र संघ

पेरिस शांति सम्मेलन (1919–1920) में हर हारे देश से संधि हुई: वर्साय (जर्मनी), सेंट-जर्मेन (ऑस्ट्रिया), त्रियानों (हंगरी), न्यूई (बुल्गारिया) और सेव्र (ऑटोमन साम्राज्य, बाद में लोज़ान 1923 ने जगह ली)। जर्मनी ने ज़मीन और सारे उपनिवेश खोए, सेना 1,00,000 तक सीमित की, राइनलैंड से सेना हटाई, युद्ध-अपराध धारा मानी और हर्जाना भरना पड़ा।

वॉशिंगटन सम्मेलन (1921–1922) ने पूर्वी एशिया और प्रशांत के नियम जोड़े, जिनमें ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, फ़्रांस और इटली के युद्धपोतों की सीमा थी। इन संधियों को मिलाकर वर्साय-वॉशिंगटन व्यवस्था कहते हैं।

राष्ट्र संघ (1920, जिनेवा) का लक्ष्य सामूहिक सुरक्षा था: सदस्य झगड़े बातचीत से सुलझाएँ और आक्रमणकारी के ख़िलाफ़ साथ आएँ। कमज़ोरियाँ: अमेरिका कभी शामिल नहीं हुआ, जर्मनी और सोवियत संघ देर से आए, फ़ैसलों के लिए सबकी सहमति चाहिए थी, और उसकी अपनी सेना नहीं थी। उसने कुछ छोटे विवाद सुलझाए पर जापान (मंचूरिया, 1931) और इटली (इथियोपिया, 1935) के सामने विफल रहा।

स्थिरता से विश्व संकट तक: 1920 का दशक और महामंदी

1920 के शुरुआती वर्ष कठिन थे: महँगाई (1923 में जर्मनी का पैसा लगभग बेकार हो गया), हड़तालें और सीमा युद्ध। 1924 से शांति आई: डॉज़ योजना ने अमेरिकी क़र्ज़ से जर्मन भुगतान आसान किए, लोकार्नो संधियों (1925) ने जर्मनी की पश्चिमी सीमाएँ तय कीं, और केलॉग-ब्रियां समझौते (1928) ने युद्ध को नकारा। कारख़ाने, कारें, रेडियो और सिनेमा बढ़े।

अक्टूबर 1929 में न्यूयॉर्क शेयर बाज़ार में दाम ढह गए। अमेरिकी बैंकों ने क़र्ज़ वापस माँगे, 1932 तक विश्व व्यापार लगभग दो-तिहाई घट गया, कृषि उपज के दाम गिरे और बेरोज़गारी आसमान छू गई (अमेरिका और जर्मनी में लगभग हर चार में से एक मज़दूर)। देशों ने बचाव के लिए आयात शुल्क बढ़ाए, जिससे मंदी और गहरी हुई।

अर्थव्यवस्था पर सरकारी नियंत्रण

पुराना विचार था कि बाज़ार ख़ुद ठीक हो जाता है। महामंदी ने इसे बदला। सरकारें अर्थव्यवस्था का नियमन करने लगीं:

अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स ने कहा कि जब निजी ख़र्च गिरे तो सरकार को ज़्यादा ख़र्च करना चाहिए।

लोकतंत्र बनाम सत्तावाद; विचारधाराएँ

चार मुख्य विचार आपस में होड़ में थे:

सर्वसत्तावादी शासन जीवन के हर हिस्से पर नियंत्रण चाहते हैं; सत्तावादी राजनीति सीमित करते हैं पर कुछ निजी जगह छोड़ते हैं। 1920 के आसपास यूरोप के लगभग 28 लोकतंत्रों में से 1938 तक लगभग एक दर्जन ही बचे।

स्पेनी गृहयुद्ध और युद्ध की राह

स्पेन में चुनी हुई पॉपुलर फ़्रंट सरकार के ख़िलाफ़ 1936 में जनरल फ़्रांको के नेतृत्व में सैन्य विद्रोह हुआ। स्पेनी गृहयुद्ध (1936–1939) बड़े युद्ध का पूर्वाभ्यास बना: जर्मनी और इटली ने फ़्रांको की, सोवियत संघ और अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवकों ने गणराज्य की मदद की, जबकि ब्रिटेन और फ़्रांस दूर रहे (अहस्तक्षेप)। 1939 में फ़्रांको जीता।

इस बीच जर्मनी ने फिर हथियार जुटाए, राइनलैंड में सेना भेजी (1936), ऑस्ट्रिया को मिलाया (1938) और म्यूनिख समझौते (1938) से चेकोस्लोवाकिया का हिस्सा लिया, जबकि ब्रिटेन और फ़्रांस ने तुष्टीकरण की नीति अपनाई। जर्मन-सोवियत समझौते (अगस्त 1939) के बाद 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर हमला किया।

करके देखिए: कारण-परिणाम की कड़ी

काग़ज़ की पट्टियों पर लिखिए: "1929 का पतन", "अमेरिकी क़र्ज़ वापस माँगे", "कारख़ाने बंद", "भारी बेरोज़गारी", "संसद पर से भरोसा उठा", "उग्र दलों को वोट"। तीरों से इन्हें कड़ी में जोड़िए। फिर एक पट्टी जोड़िए जो कड़ी तोड़ सकती थी (जैसे "सरकारी रोज़गार योजनाएँ") और कारण बताइए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 1918 में कई नए राज्य क्यों बने?

मध्य और पूर्वी यूरोप पर राज करने वाले चार साम्राज्य युद्ध के अंत में गिर गए, और लोगों ने राष्ट्रीय आत्मनिर्णय के विचार से अपने राज्य बनाए।

2. राष्ट्र संघ की कमज़ोरी के दो कारण बताइए।

अमेरिका कभी शामिल नहीं हुआ, और उसकी अपनी सेना नहीं थी; फ़ैसलों में सर्वसम्मति ज़रूरी थी, इसलिए कार्रवाई धीमी थी।

3. न्यूयॉर्क के 1929 के पतन से जर्मनी को कैसे नुक़सान हुआ?

जर्मनी अमेरिकी क़र्ज़ पर निर्भर था। क़र्ज़ वापस माँगे गए तो कंपनियाँ बंद हुईं, 1932 तक लगभग 60 लाख बेरोज़गार हुए और मतदाता उग्र दलों की ओर गए।

4. 1926 के बाद पिल्सुद्स्की के पोलैंड और हिटलर के जर्मनी में क्या अंतर था?

पोलैंड सत्तावादी बना: संसद सीमित हुई पर दूसरे दल और काफ़ी निजी जीवन बचा रहा। नाज़ी जर्मनी सर्वसत्तावादी था: एक दल, आतंक, और युवाओं, मीडिया व अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. 1918 में कौन-सा साम्राज्य नहीं गिरा?
2. राष्ट्र संघ का मुख्यालय कहाँ था?
3. महामंदी किस वर्ष के पतन से शुरू हुई?
4. न्यू डील किस देश का कार्यक्रम था?
5. स्पेनी गृहयुद्ध किसने जीता?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतर-युद्ध काल क्या है?

प्रथम विश्व युद्ध के अंत (1918) से द्वितीय विश्व युद्ध के आरंभ (1939) तक के वर्ष।

वर्साय-वॉशिंगटन व्यवस्था क्या थी?

पेरिस (1919–1920) और वॉशिंगटन सम्मेलन (1921–1922) की शांति संधियों का समूह, जिसने प्रथम विश्व युद्ध के बाद की विश्व व्यवस्था बनाई।

अंतर-युद्ध काल की शांति क्यों विफल हुई?

संधियों पर नाराज़गी, कमज़ोर राष्ट्र संघ, महामंदी, आक्रामक तानाशाहियों का उदय और तुष्टीकरण।

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