Ukraine 10 клас World History (1914–1945)
अध्याय: 8
1. Causes of WWI; war and revolutions
First World War
- प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918): कारण, घटनाक्रम और परिणाम – प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक मित्र राष्ट्रों (फ़्रांस, ब्रिटेन, रूस, बाद में इटली, अमेरिका आदि) और केंद्रीय शक्तियों (जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ऑटोमन साम्राज्य और बुल्गारिया) के बीच लड़ा गया। चार दीर्घकालिक कारणों ने तनाव बढ़ाया: सैन्यवाद, गठबंधन, साम्राज्यवाद और राष्ट्रवाद (MAIN)। चिंगारी थी 28 जून 1914 को साराजेवो में आर्चड्यूक फ़्रांज़ फ़र्डिनेंड की हत्या। पश्चिमी मोर्चे पर युद्ध खाइयों का गतिरोध बन गया; नए हथियारों ने इसे बहुत घातक बनाया। यह संपूर्ण युद्ध था: पूरी अर्थव्यवस्था, महिला कामगार और उपनिवेश लगाए गए, जिनमें लगभग 13 लाख भारतीय भी थे। 1917 की क्रांति के बाद रूस बाहर हुआ, अमेरिका 1917 में आया, और 11 नवंबर 1918 के युद्धविराम से लड़ाई रुकी। 1919–1920 की शांति संधियों, जिनमें वर्साय भी है, ने यूरोप को नया रूप दिया, चार साम्राज्य ख़त्म किए, राष्ट्र संघ बनाया और ऐसा ग़ुस्सा छोड़ा जिसने दूसरे विश्व युद्ध का रास्ता बनाया।
2. Post-war settlement
Versailles–Washington system
- दो विश्व युद्धों के बीच का काल (1918–1939) – प्रथम विश्व युद्ध के अंत (1918) से द्वितीय के आरंभ (1939) तक चार साम्राज्य टूटे और मध्य-पूर्वी यूरोप में कई नए राज्य बने। वर्साय-वॉशिंगटन शांति व्यवस्था और राष्ट्र संघ ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। 1920 के दशक की शुरुआती अशांति के बाद थोड़ी स्थिरता आई, पर 1929 के शेयर बाज़ार पतन से महामंदी शुरू हुई। भारी बेरोज़गारी ने लोकतंत्रों को कमज़ोर किया; ज़्यादातर नए राज्य सत्तावादी बने, जबकि फ़ासीवादी इटली, नाज़ी जर्मनी और स्टालिन का सोवियत संघ सर्वसत्तावादी बने। सरकारें अर्थव्यवस्था सँभालने लगीं, राष्ट्र संघ आक्रमण नहीं रोक सका, और स्पेनी गृहयुद्ध व तुष्टीकरण 1939 के युद्ध तक ले गए।
3. Leading states between the wars
Democracies · Totalitarian regimes · Challenges of the interwar era
- महामंदी (1929–1939) – महामंदी बीसवीं सदी का सबसे बड़ा आर्थिक संकट था। यह अक्टूबर 1929 में अमेरिका के वॉल स्ट्रीट शेयर बाज़ार के गिरने से शुरू हुई। शेयर गिरे, बैंक डूबे, कारखाने बंद हुए और 1933 तक अमेरिका में हर चार में से एक मज़दूर बेरोज़गार था। देशों ने आयात पर भारी कर (टैरिफ़) लगाए, जिससे दुनिया का व्यापार लगभग दो-तिहाई घट गया और संकट यूरोप, एशिया, अफ़्रीका तक फैल गया। अमेरिका ने न्यू डील अपनाई; जर्मनी और जापान में संकट ने उग्र राष्ट्रवादी दलों को ताक़त दी, जो आगे दूसरे विश्व युद्ध की ओर ले गया।
- सर्वसत्तावाद (Totalitarianism) – सर्वसत्तावादी शासन एक-दलीय राज्य है जो जीवन के हर हिस्से — राजनीति, अर्थव्यवस्था, अख़बार, स्कूल और लोगों के विचार तक — को एक नेता, प्रचार और आतंक के सहारे नियंत्रित करना चाहता है। पहले विश्व युद्ध और 1929 की मंदी के बाद ऐसे शासन फ़ासीवादी इटली (1922), स्तालिन के सोवियत संघ (1920 के दशक का अंत) और नाज़ी जर्मनी (1933) में आए। उनके विचार अलग थे पर तरीक़े मिलते-जुलते, और उनका उदय दूसरे विश्व युद्ध की एक वजह बना।
- दो विश्व युद्धों के बीच का काल (1918–1939) – प्रथम विश्व युद्ध के अंत (1918) से द्वितीय के आरंभ (1939) तक चार साम्राज्य टूटे और मध्य-पूर्वी यूरोप में कई नए राज्य बने। वर्साय-वॉशिंगटन शांति व्यवस्था और राष्ट्र संघ ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। 1920 के दशक की शुरुआती अशांति के बाद थोड़ी स्थिरता आई, पर 1929 के शेयर बाज़ार पतन से महामंदी शुरू हुई। भारी बेरोज़गारी ने लोकतंत्रों को कमज़ोर किया; ज़्यादातर नए राज्य सत्तावादी बने, जबकि फ़ासीवादी इटली, नाज़ी जर्मनी और स्टालिन का सोवियत संघ सर्वसत्तावादी बने। सरकारें अर्थव्यवस्था सँभालने लगीं, राष्ट्र संघ आक्रमण नहीं रोक सका, और स्पेनी गृहयुद्ध व तुष्टीकरण 1939 के युद्ध तक ले गए।
4. Central-Eastern Europe
States of the region
- दो विश्व युद्धों के बीच का काल (1918–1939) – प्रथम विश्व युद्ध के अंत (1918) से द्वितीय के आरंभ (1939) तक चार साम्राज्य टूटे और मध्य-पूर्वी यूरोप में कई नए राज्य बने। वर्साय-वॉशिंगटन शांति व्यवस्था और राष्ट्र संघ ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। 1920 के दशक की शुरुआती अशांति के बाद थोड़ी स्थिरता आई, पर 1929 के शेयर बाज़ार पतन से महामंदी शुरू हुई। भारी बेरोज़गारी ने लोकतंत्रों को कमज़ोर किया; ज़्यादातर नए राज्य सत्तावादी बने, जबकि फ़ासीवादी इटली, नाज़ी जर्मनी और स्टालिन का सोवियत संघ सर्वसत्तावादी बने। सरकारें अर्थव्यवस्था सँभालने लगीं, राष्ट्र संघ आक्रमण नहीं रोक सका, और स्पेनी गृहयुद्ध व तुष्टीकरण 1939 के युद्ध तक ले गए।
5. Asia and Latin America
Asia and Latin America between the wars
- विउपनिवेशीकरण: साम्राज्य कैसे खत्म हुए और नए देश कैसे बने – विउपनिवेशीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें उपनिवेश स्वतंत्र देश बने। यह ज़्यादातर 1945 से 1970 के दशक तक हुआ। दूसरे विश्व युद्ध ने शासक देशों को कमज़ोर किया, आज़ादी के आंदोलन मज़बूत हुए, और संयुक्त राष्ट्र ने हर जनता के स्वशासन के अधिकार का साथ दिया। कुछ उपनिवेश बातचीत और जन-आंदोलन से आज़ाद हुए (भारत 1947, घाना 1957), कुछ लंबे युद्ध से (अल्जीरिया 1962)। नए देशों के सामने गरीबी, एक फ़सल पर टिकी अर्थव्यवस्था, अनुचित सीमाएँ और शीत युद्ध का दबाव था; कई ने गुटनिरपेक्षता चुनी।
6. Road to WWII
Origins of WWII
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
7. Second World War
Course and consequences of WWII
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
8. Everyday life and culture, first half of 20th c.
Culture and science
- सांस्कृतिक इतिहास: लोगों के विचार, कलाएँ और जीने के ढंग कैसे बदलते हैं – सांस्कृतिक इतिहास इतिहास का वह हिस्सा है जो पढ़ता है कि लोग क्या सोचते, मानते, बनाते और कैसे जीते थे, सिर्फ़ राजाओं और सेनाओं ने क्या किया यह नहीं. इसके चार स्तंभ हैं: विश्वास और धर्म, कलाएँ (साहित्य, संगीत, चित्र, भवन), ज्ञान (शिक्षा, विज्ञान, तकनीक) और रोज़ का जीवन (भोजन, पहनावा, परिवार, त्योहार, खेल). इतिहासकार वस्तुएँ, भवन, किताबें, चित्र और चिट्ठियाँ जैसे स्रोत इस्तेमाल करते हैं. व्यापार मार्गों, यात्राओं, धर्म-प्रचार और प्रवास से विचारों के लेन-देन से संस्कृति बदलती है, जैसे कागज़, अंक और धर्म फैले. छपाई, अख़बार, रेडियो और इंटरनेट जैसी तकनीकों से ज्ञान तेज़ी से फैला, और सबके लिए स्कूलों से दुनिया की साक्षरता 1820 के लगभग 12% से आज लगभग 87% हुई. हर देश में राष्ट्रीय स्कूल, विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक संस्थाएँ, लेखक और कलाकार लोगों की पहचान गढ़ते हैं.