Poland Liceum ogólnokształcące, klasa III History
अध्याय: 17
1. Polish lands under partition, late 19th – early 20th century
Polish lands under partition, late 19th – early 20th century
जल्द आ रहा है
2. Polish culture and science, late 19th – early 20th century
Polish culture and science, late 19th – early 20th century
- सांस्कृतिक इतिहास: लोगों के विचार, कलाएँ और जीने के ढंग कैसे बदलते हैं – सांस्कृतिक इतिहास इतिहास का वह हिस्सा है जो पढ़ता है कि लोग क्या सोचते, मानते, बनाते और कैसे जीते थे, सिर्फ़ राजाओं और सेनाओं ने क्या किया यह नहीं. इसके चार स्तंभ हैं: विश्वास और धर्म, कलाएँ (साहित्य, संगीत, चित्र, भवन), ज्ञान (शिक्षा, विज्ञान, तकनीक) और रोज़ का जीवन (भोजन, पहनावा, परिवार, त्योहार, खेल). इतिहासकार वस्तुएँ, भवन, किताबें, चित्र और चिट्ठियाँ जैसे स्रोत इस्तेमाल करते हैं. व्यापार मार्गों, यात्राओं, धर्म-प्रचार और प्रवास से विचारों के लेन-देन से संस्कृति बदलती है, जैसे कागज़, अंक और धर्म फैले. छपाई, अख़बार, रेडियो और इंटरनेट जैसी तकनीकों से ज्ञान तेज़ी से फैला, और सबके लिए स्कूलों से दुनिया की साक्षरता 1820 के लगभग 12% से आज लगभग 87% हुई. हर देश में राष्ट्रीय स्कूल, विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक संस्थाएँ, लेखक और कलाकार लोगों की पहचान गढ़ते हैं.
3. First World War
First World War
- प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918): कारण, घटनाक्रम और परिणाम – प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक मित्र राष्ट्रों (फ़्रांस, ब्रिटेन, रूस, बाद में इटली, अमेरिका आदि) और केंद्रीय शक्तियों (जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ऑटोमन साम्राज्य और बुल्गारिया) के बीच लड़ा गया। चार दीर्घकालिक कारणों ने तनाव बढ़ाया: सैन्यवाद, गठबंधन, साम्राज्यवाद और राष्ट्रवाद (MAIN)। चिंगारी थी 28 जून 1914 को साराजेवो में आर्चड्यूक फ़्रांज़ फ़र्डिनेंड की हत्या। पश्चिमी मोर्चे पर युद्ध खाइयों का गतिरोध बन गया; नए हथियारों ने इसे बहुत घातक बनाया। यह संपूर्ण युद्ध था: पूरी अर्थव्यवस्था, महिला कामगार और उपनिवेश लगाए गए, जिनमें लगभग 13 लाख भारतीय भी थे। 1917 की क्रांति के बाद रूस बाहर हुआ, अमेरिका 1917 में आया, और 11 नवंबर 1918 के युद्धविराम से लड़ाई रुकी। 1919–1920 की शांति संधियों, जिनमें वर्साय भी है, ने यूरोप को नया रूप दिया, चार साम्राज्य ख़त्म किए, राष्ट्र संघ बनाया और ऐसा ग़ुस्सा छोड़ा जिसने दूसरे विश्व युद्ध का रास्ता बनाया।
4. The Polish question before and during the First World War
The Polish question before and during the First World War
- प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918): कारण, घटनाक्रम और परिणाम – प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक मित्र राष्ट्रों (फ़्रांस, ब्रिटेन, रूस, बाद में इटली, अमेरिका आदि) और केंद्रीय शक्तियों (जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ऑटोमन साम्राज्य और बुल्गारिया) के बीच लड़ा गया। चार दीर्घकालिक कारणों ने तनाव बढ़ाया: सैन्यवाद, गठबंधन, साम्राज्यवाद और राष्ट्रवाद (MAIN)। चिंगारी थी 28 जून 1914 को साराजेवो में आर्चड्यूक फ़्रांज़ फ़र्डिनेंड की हत्या। पश्चिमी मोर्चे पर युद्ध खाइयों का गतिरोध बन गया; नए हथियारों ने इसे बहुत घातक बनाया। यह संपूर्ण युद्ध था: पूरी अर्थव्यवस्था, महिला कामगार और उपनिवेश लगाए गए, जिनमें लगभग 13 लाख भारतीय भी थे। 1917 की क्रांति के बाद रूस बाहर हुआ, अमेरिका 1917 में आया, और 11 नवंबर 1918 के युद्धविराम से लड़ाई रुकी। 1919–1920 की शांति संधियों, जिनमें वर्साय भी है, ने यूरोप को नया रूप दिया, चार साम्राज्य ख़त्म किए, राष्ट्र संघ बनाया और ऐसा ग़ुस्सा छोड़ा जिसने दूसरे विश्व युद्ध का रास्ता बनाया।
5. Europe and the world after the First World War
Europe and the world after the First World War
- दो विश्व युद्धों के बीच का काल (1918–1939) – प्रथम विश्व युद्ध के अंत (1918) से द्वितीय के आरंभ (1939) तक चार साम्राज्य टूटे और मध्य-पूर्वी यूरोप में कई नए राज्य बने। वर्साय-वॉशिंगटन शांति व्यवस्था और राष्ट्र संघ ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। 1920 के दशक की शुरुआती अशांति के बाद थोड़ी स्थिरता आई, पर 1929 के शेयर बाज़ार पतन से महामंदी शुरू हुई। भारी बेरोज़गारी ने लोकतंत्रों को कमज़ोर किया; ज़्यादातर नए राज्य सत्तावादी बने, जबकि फ़ासीवादी इटली, नाज़ी जर्मनी और स्टालिन का सोवियत संघ सर्वसत्तावादी बने। सरकारें अर्थव्यवस्था सँभालने लगीं, राष्ट्र संघ आक्रमण नहीं रोक सका, और स्पेनी गृहयुद्ध व तुष्टीकरण 1939 के युद्ध तक ले गए।
6. Rise of totalitarian regimes between the wars
Rise of totalitarian regimes between the wars
- सर्वसत्तावाद (Totalitarianism) – सर्वसत्तावादी शासन एक-दलीय राज्य है जो जीवन के हर हिस्से — राजनीति, अर्थव्यवस्था, अख़बार, स्कूल और लोगों के विचार तक — को एक नेता, प्रचार और आतंक के सहारे नियंत्रित करना चाहता है। पहले विश्व युद्ध और 1929 की मंदी के बाद ऐसे शासन फ़ासीवादी इटली (1922), स्तालिन के सोवियत संघ (1920 के दशक का अंत) और नाज़ी जर्मनी (1933) में आए। उनके विचार अलग थे पर तरीक़े मिलते-जुलते, और उनका उदय दूसरे विश्व युद्ध की एक वजह बना।
7. Struggle for the rebirth of Poland after the First World War
Struggle for the rebirth of Poland after the First World War
- राज्य निर्माण: नए राज्य कैसे जन्म लेते हैं – राज्य को भू-क्षेत्र, जनता, सरकार और संप्रभुता चाहिए, और आम तौर पर दूसरे राज्यों की मान्यता। 1917–1918 में जब रूसी, जर्मन, ऑस्ट्रो-हंगेरियन और उस्मानी साम्राज्य गिरे, तो राष्ट्रों ने आत्मनिर्णय के विचार से पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया, फ़िनलैंड और बाल्टिक देशों जैसे राज्य बनाए या फिर से खड़े किए, और रोमानिया बड़ा हुआ। सीमाएँ संधियों, जनमत संग्रह और कभी युद्ध से तय हुईं। फिर हर राज्य को संस्थाएँ बनानी पड़ीं: संविधान, संसद, अदालतें, एक मुद्रा, सेना, स्कूल और जुड़ा परिवहन। बाद में भी लहरें आईं (1945 के बाद उपनिवेशवाद का अंत, 1991), और आज के कमज़ोर राज्य शांति, निष्पक्ष चुनाव, क़ानून के राज और सोची-समझी बाहरी मदद से फिर खड़े होते हैं।
8. Political history of the Second Republic
Political history of the Second Republic
- दो विश्व युद्धों के बीच का काल (1918–1939) – प्रथम विश्व युद्ध के अंत (1918) से द्वितीय के आरंभ (1939) तक चार साम्राज्य टूटे और मध्य-पूर्वी यूरोप में कई नए राज्य बने। वर्साय-वॉशिंगटन शांति व्यवस्था और राष्ट्र संघ ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। 1920 के दशक की शुरुआती अशांति के बाद थोड़ी स्थिरता आई, पर 1929 के शेयर बाज़ार पतन से महामंदी शुरू हुई। भारी बेरोज़गारी ने लोकतंत्रों को कमज़ोर किया; ज़्यादातर नए राज्य सत्तावादी बने, जबकि फ़ासीवादी इटली, नाज़ी जर्मनी और स्टालिन का सोवियत संघ सर्वसत्तावादी बने। सरकारें अर्थव्यवस्था सँभालने लगीं, राष्ट्र संघ आक्रमण नहीं रोक सका, और स्पेनी गृहयुद्ध व तुष्टीकरण 1939 के युद्ध तक ले गए।
9. Society and economy of the Second Republic
Society and economy of the Second Republic
- आर्थिक इतिहास: समय के साथ लोग रोज़ी-रोटी कैसे कमाते रहे – आर्थिक इतिहास पढ़ता है कि लोग समय के साथ कैसे उत्पादन, व्यापार और धन का बँटवारा करते रहे। ज़्यादातर इतिहास में अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी थी और शासक फ़सल, श्रम या सिक्कों में कर लेते थे। व्यापार, मुद्रा और बैंकों ने आय धीरे-धीरे बढ़ाई। औद्योगिक क्रांति ने प्रति व्यक्ति उत्पादन तेज़ी से बढ़ाया। 20वीं सदी में देशों ने बाज़ार, योजनाबद्ध और मिश्रित मॉडल आज़माए। विकास के साथ संकट भी आए: प्रथम विश्व युद्ध के बाद अति-मुद्रास्फीति, 1929 की महामंदी, 1997 का एशियाई वित्तीय संकट और 2008 का वैश्विक संकट। आज चुनौती है न्यायपूर्ण और टिकाऊ विकास।
10. Culture and science in the Second Republic
Culture and science in the Second Republic
- सांस्कृतिक इतिहास: लोगों के विचार, कलाएँ और जीने के ढंग कैसे बदलते हैं – सांस्कृतिक इतिहास इतिहास का वह हिस्सा है जो पढ़ता है कि लोग क्या सोचते, मानते, बनाते और कैसे जीते थे, सिर्फ़ राजाओं और सेनाओं ने क्या किया यह नहीं. इसके चार स्तंभ हैं: विश्वास और धर्म, कलाएँ (साहित्य, संगीत, चित्र, भवन), ज्ञान (शिक्षा, विज्ञान, तकनीक) और रोज़ का जीवन (भोजन, पहनावा, परिवार, त्योहार, खेल). इतिहासकार वस्तुएँ, भवन, किताबें, चित्र और चिट्ठियाँ जैसे स्रोत इस्तेमाल करते हैं. व्यापार मार्गों, यात्राओं, धर्म-प्रचार और प्रवास से विचारों के लेन-देन से संस्कृति बदलती है, जैसे कागज़, अंक और धर्म फैले. छपाई, अख़बार, रेडियो और इंटरनेट जैसी तकनीकों से ज्ञान तेज़ी से फैला, और सबके लिए स्कूलों से दुनिया की साक्षरता 1820 के लगभग 12% से आज लगभग 87% हुई. हर देश में राष्ट्रीय स्कूल, विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक संस्थाएँ, लेखक और कलाकार लोगों की पहचान गढ़ते हैं.
11. The road to the Second World War
The road to the Second World War
- दो विश्व युद्धों के बीच का काल (1918–1939) – प्रथम विश्व युद्ध के अंत (1918) से द्वितीय के आरंभ (1939) तक चार साम्राज्य टूटे और मध्य-पूर्वी यूरोप में कई नए राज्य बने। वर्साय-वॉशिंगटन शांति व्यवस्था और राष्ट्र संघ ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। 1920 के दशक की शुरुआती अशांति के बाद थोड़ी स्थिरता आई, पर 1929 के शेयर बाज़ार पतन से महामंदी शुरू हुई। भारी बेरोज़गारी ने लोकतंत्रों को कमज़ोर किया; ज़्यादातर नए राज्य सत्तावादी बने, जबकि फ़ासीवादी इटली, नाज़ी जर्मनी और स्टालिन का सोवियत संघ सर्वसत्तावादी बने। सरकारें अर्थव्यवस्था सँभालने लगीं, राष्ट्र संघ आक्रमण नहीं रोक सका, और स्पेनी गृहयुद्ध व तुष्टीकरण 1939 के युद्ध तक ले गए।
12. Poland’s defensive war of 1939
Poland’s defensive war of 1939
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
13. Second World War and its stages
Second World War and its stages
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
14. Poland under German and Soviet occupation
Poland under German and Soviet occupation
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
15. German policy of extermination
German policy of extermination
- होलोकॉस्ट – होलोकॉस्ट (हिब्रू में शोआ) 1933 से 1945 के बीच नाज़ी जर्मनी और उसके साथियों-मददगारों द्वारा यूरोप के लगभग 60 लाख यहूदियों का योजनाबद्ध, राज्य द्वारा संगठित उत्पीड़न और जनसंहार था। यह पुराने यहूदी-विरोध (antisemitism) और नाज़ी नस्लवादी विचारधारा से पैदा हुआ। यह क़दम-दर-क़दम बढ़ा: बहिष्कार और क़ानून (1933–38), घेटो और सामूहिक गोलीबारी (1939–41), और मृत्यु शिविर (1942–45)। रोमा और सिंती, विकलांग लोग, पोलिश और सोवियत नागरिक, सोवियत युद्धबंदी और दूसरे लोग भी सताए और मारे गए। यहूदियों ने कई तरह से प्रतिरोध किया, कुछ लोगों ने जान जोखिम में डालकर उन्हें बचाया, जबकि बहुत से चुप रहे। युद्ध के बाद मुक़दमे, 1948 का जनसंहार अभिसमय और स्मृति के प्रयास हुए, ताकि ऐसा अपराध फिर न हो।
16. Polish authorities in exile and in occupied Poland
Polish authorities in exile and in occupied Poland
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) – द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का सबसे जानलेवा युद्ध था। इसकी जड़ें थीं: पहले विश्व युद्ध के बाद की नाराज़गी, महामंदी, और जर्मनी, इटली व जापान में तानाशाहों का उदय। यह 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन और उसका साम्राज्य, फ़्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन आदि) से लड़े। यह संपूर्ण युद्ध और विनाश का युद्ध था: होलोकॉस्ट में लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या हुई और कुल 7–8.5 करोड़ लोग मरे। जर्मनी ने मई 1945 और जापान ने सितंबर 1945 में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र बना, शीत युद्ध शुरू हुआ और साम्राज्य टूटे।
17. The world after the Second World War; start of the Cold War
The world after the Second World War; start of the Cold War
- शीत युद्ध (1945–1991) – शीत युद्ध (1945–1991) दो महाशक्तियों के बीच लंबी होड़ थी: पश्चिमी साथियों के साथ अमेरिका (पूँजीवाद, बहुदलीय चुनाव) और पूर्वी साथियों के साथ सोवियत संघ (साम्यवाद, एक दल का शासन)। दोनों आपस में सीधे कभी नहीं लड़े। उन्होंने विरोधी गुट बनाए (नाटो, वारसा संधि), परमाणु हथियार और अंतरिक्ष की होड़ की, छद्म युद्धों में उलटे पक्षों का साथ दिया (कोरिया, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान) और 1962 में क्यूबा में परमाणु युद्ध के करीब पहुँचे। भारत जैसे कई नए देश गुटनिरपेक्ष रहे। 1970 के दशक में तनाव-शैथिल्य आया। सोवियत सुधार, बर्लिन दीवार का गिरना (1989) और सोवियत संघ का विघटन (1991) इसका अंत बने।