Netherlands HAVO 4 (bovenbouw, 2e fase) History
अध्याय: 5
1. Historical awareness
Time and chronology · Change and continuity · Historical inquiry and explanation · Judging the past
- समयरेखा-1: कालक्रम का विचार (60 लाख वर्ष पहले से 1 ई.पू.) – कालक्रम का मतलब है घटनाओं को सही समय के क्रम में रखना। वर्षों के लिए ई.पू. और ई. लिखते हैं। बहुत पुराने समय के लिए बी.पी. (वर्तमान से पहले) और MYA (दस लाख वर्ष पहले) लिखते हैं। मिट्टी की परतें और कार्बन डेटिंग तिथि बताती हैं। समयरेखा-1 दो पैरों पर चलने वाले पूर्वजों (लगभग 60 लाख वर्ष पहले) से खेती, नगर और लेखन तक जाती है और 1 ई.पू. पर रुकती है।
- ऐतिहासिक चिंतन: इतिहासकार कैसे काम करते हैं – इतिहास साक्ष्य के सहारे अतीत का अध्ययन है। घटनाओं को समय-रेखा पर क्रम से रखिए और उनके संदर्भ में पढ़िए। प्राथमिक स्रोत (उसी समय बने) और द्वितीयक स्रोत (बाद में बने) दोनों का उपयोग कीजिए। हर स्रोत को परखिए: किसने, कब, क्यों बनाया और क्या छूट गया। घटनाओं के कई कारण होते हैं: धीमे दीर्घकालिक कारण और एक तात्कालिक कारण। परिवर्तन और निरंतरता दोनों देखिए, महत्व तय कीजिए और साक्ष्य के साथ तर्क दीजिए।
2. Eras 1-4: prehistory to late Middle Ages
Era 1: Hunters and farmers (until 3000 BC) · Era 2: Greeks and Romans (3000 BC - 500 AD) · Era 3: Monks and knights (500-1000) · Era 4: Cities and states (1000-1500)
- प्रारंभिक मानव और सभ्यता की शुरुआत – आज के इंसान (होमो सेपियन्स) लगभग 3 लाख साल पहले अफ़्रीका में आए और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैले। इतिहासकार बीते समय को औज़ारों के हिसाब से युगों में बाँटते हैं: पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण, फिर ताँबा, कांसा और लोहा। खेती सीखने पर लोग गाँवों में बस गए, अनाज जमा करने लगे और बर्तन बनाने लगे। कुछ गाँव बढ़कर योजनाबद्ध नगर बने, जैसे सिंधु और घग्गर नदियों के किनारे हड़प्पा के नगर। लगभग उसी समय मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन में भी नदी-घाटी सभ्यताएँ बनीं।
- तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य: रोमन साम्राज्य – रोमन साम्राज्य भूमध्य सागर के चारों ओर की ज़मीन पर फैला था: यूरोप, पश्चिम एशिया और उत्तर अफ़्रीका के हिस्से। सत्ता तीन के बीच बँटी थी: सम्राट, सीनेट और सेना। अर्थव्यवस्था खेती, नगरों, जहाज़ों, सिक्कों और जैतून तेल, शराब व अनाज के व्यापार पर चलती थी। समाज परतों में बँटा था, ऊपर अमीर सीनेटर और नीचे बहुत सारे दास। रोमन व्यापारी मानसूनी हवाओं से भारत के बंदरगाहों तक आते थे। चौथी सदी से बदलाव आया: ईसाई धर्म मुख्य धर्म बना, कुस्तुंतुनिया नई राजधानी बनी और 476 ई. में पश्चिमी हिस्सा टूट गया। इस बदलाव के दौर को 'उत्तर-पुरातन काल' कहते हैं।
- तीन वर्ग: यूरोप का सामंती समाज – लगभग 9वीं से 16वीं सदी तक पश्चिमी यूरोप में सामंती समाज था। लोगों को तीन वर्गों में देखा जाता था: प्रार्थना करने वाले पादरी, लड़ने वाले अभिजात और काम करने वाले किसान। लॉर्ड राजा से ज़मीन लेते थे और अपनी जागीर (मेनर) चलाते थे, जहाँ कृषिदास काम करते थे। नए औज़ारों और व्यापार से शहर बढ़े, पर 14वीं सदी में ठंडे मौसम, अकाल और ब्लैक डेथ से संकट आया। इसके बाद फ़्रांस, इंग्लैंड, स्पेन के राजाओं ने स्थायी सेना और कर-व्यवस्था बनाई; यहीं से राष्ट्र-राज्यों की शुरुआत हुई।
- मध्यकालीन यूरोप: रोम से पुनर्जागरण तक के हज़ार साल – यूरोप का मध्यकाल लगभग 1000 साल चला, पश्चिमी रोमन साम्राज्य के अंत (476 ई.) से लगभग 1500 ई. तक. आरंभिक काल में बाहर से आए लोगों ने पश्चिम में नए राज्य बनाए, शार्लमेन के समय फ़्रैंक शक्तिशाली हुए, और पूरब में बाइज़ेंटाइन साम्राज्य ने रोमन शासन जारी रखा. समाज सामंतवाद से चलता था: ज़मीन के बदले वफ़ादारी और सेवा. चर्च ने मठ, गिरजाघर और धर्मयुद्धों के ज़रिए रोज़ की ज़िंदगी को आकार दिया. लगभग 1000 ई. के बाद व्यापार लौटा, क़स्बे, गिल्ड और विश्वविद्यालय बढ़े और राजा मज़बूत हुए. 1300 के दशक में काली मौत और लंबे युद्धों के संकट ने मध्यकाल को ख़त्म करने में मदद की.
3. Eras 5-7: early modern period
Era 5: Discoverers and reformers (1500-1600) · Era 6: Regents and monarchs (1600-1700) · Era 7: Wigs and revolutions (1700-1800)
- बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ: पुनर्जागरण, धर्म-सुधार और विज्ञान – 14वीं से 17वीं सदी में इटली के व्यापारी शहरों से यूनानी-रोमन ज्ञान में नई रुचि जगी, जिसे मानवतावाद कहते हैं। कलाकारों ने परिप्रेक्ष्य और शरीर-रचना के अध्ययन से असली जैसे चित्र बनाए; वास्तुकारों ने बड़े गुंबद बनाए। छपाई ने विचार फैलाए। कुछ पढ़ी-लिखी महिलाओं ने लिखा और शासन किया। 1517 में लूथर के विरोध से पश्चिमी चर्च कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट में बँटा, और कैथोलिक चर्च ने भी सुधार किए। कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने ब्रह्मांड की समझ बदली, और नाविकों ने अमेरिका और भारत के समुद्री रास्ते खोजे।
- निरंकुशतावाद: जब सारी ताक़त एक राजा के हाथ में थी – निरंकुशतावाद (लगभग 1600–1789) शासन का ऐसा तरीका था जिसमें लगभग सारी ताक़त एक राजा या रानी के पास होती थी। वही कानून बनाता, वही लागू करता और वही सबसे बड़ा न्यायाधीश होता। राजा कहते थे कि उनकी ताक़त ईश्वर से मिली है (दैवी अधिकार), इसलिए कोई सवाल नहीं कर सकता। देश को काबू में रखने के लिए उन्होंने स्थायी सेना बनाई, वेतन वाले अफ़सर रखे, हर जगह कर वसूले और बड़े कुलीनों को दरबार में उलझाए रखा। फ़्रांस का लुई चौदहवाँ ('सूर्य राजा') और उसका वर्साय महल सबसे बड़ा उदाहरण है। रूस का पीटर महान और ऑस्ट्रिया-स्पेन के हैब्सबर्ग भी ऐसे ही शासक थे। ये राजा अक्सर वाणिज्यवाद अपनाते थे: बाहर ज़्यादा बेचो, कम खरीदो, ताकि सोना देश में आए। इंग्लैंड और डच गणराज्य में संसद और व्यापारियों ने राजा की ताक़त सीमित की, और 1689 के बाद इंग्लैंड संवैधानिक राजतंत्र बना। प्रबोधन (एनलाइटनमेंट) के विचारों और 1789 की फ़्रांसीसी क्रांति ने निरंकुशतावाद को कमज़ोर कर दिया।
- ज्ञानोदय (प्रबोधन युग) – ज्ञानोदय (लगभग 1680–1800) यूरोप का एक आंदोलन था जिसने कहा कि दुनिया को समझने और समाज चलाने में सिर्फ़ परंपरा नहीं, तर्क और सबूत काम में लाओ। यह वैज्ञानिक क्रांति से निकला। लॉक, मॉन्टेस्क्यू, वॉल्टेयर, रूसो, कांट और मैरी वॉल्स्टनक्राफ़्ट जैसे विचारकों ने प्राकृतिक अधिकार, शक्तियों का बँटवारा, बोलने और धर्म की आज़ादी और जनता की सहमति से सरकार की बात की। विचार किताबों, अख़बारों, सैलूनों और विश्वकोश से फैले। कुछ राजाओं ने सुधार किए (प्रबुद्ध निरंकुशता); इन विचारों ने अमेरिकी (1776) और फ़्रांसीसी (1789) क्रांति और बाद में भारत समेत दुनिया भर के सुधारकों को प्रेरणा दी।
4. Historical context: the British Empire 1585-1900
English colonies in the Americas (1585-1833) · India becomes the key colony (1765-1885) · Colonies and social-economic change in Britain (1750-1900)
- ब्रिटिश साम्राज्य: अमेरिकी उपनिवेशों से भारत तक (1585–1885) – 1585 से अंग्रेज़ों ने उत्तरी अमेरिका में बस्तियाँ बसाईं, गुलाम अफ़्रीकी लोगों से प्लांटेशन में फ़सलें उगवाकर कमाई की और 1776 में तेरह उपनिवेश खो दिए। 1807 में दास व्यापार और 1833 में गुलामी ख़त्म हुई। उधर ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापारी से भारत की शासक बन गई। 1857 के बाद ताज का सीधा शासन आया और 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बनी।
- औद्योगीकरण का युग – फ़ैक्टरी से पहले सौदागर गाँव के परिवारों को कच्चा माल देते थे और वे घर पर कातते-बुनते थे (आदि-औद्योगीकरण)। 1760 के दशक से ब्रिटेन में कॉटन मिलें, स्पिनिंग जेनी जैसी मशीनें और जेम्स वॉट का बेहतर भाप इंजन आए। बदलाव धीमा था: हाथ का श्रम सस्ता और आम रहा। भारत के बुनकर पहले दुनिया भर को कपड़ा देते थे; ईस्ट इंडिया कंपनी ने गुमाश्तों के ज़रिए उन पर क़ब्ज़ा किया और बाद में मैनचेस्टर का कपड़ा भारत में भर गया। 1854 से बंबई और दूसरी जगहों पर भारतीय मिलें बनीं और छोटे कारख़ाने भी बढ़े। सामान बेचने के लिए लेबल, कैलेंडर और विज्ञापन आए, और स्वदेशी विज्ञापनों ने देशप्रेम जगाया।
5. Rule of law, democracy and themes
History of the rule of law and parliamentary democracy · Themes (chosen by the school)
- संसदीय लोकतंत्र – संसदीय लोकतंत्र में नागरिक संसद के सदस्य (सांसद) चुनते हैं। जिस दल या गठबंधन के पास बहुमत हो, वह सरकार बनाता है; उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है और संसद में से मंत्रिमंडल चुनता है। सरकार तभी तक रहती है जब तक उसे संसद का विश्वास हासिल है। राष्ट्र प्रमुख (राजा या राष्ट्रपति) की भूमिका ज़्यादातर औपचारिक होती है, न्यायालय स्वतंत्र होते हैं और सब कानून के शासन के अधीन हैं। यह प्रणाली इंग्लैंड में सदियों में बनी (1215, 1689, मंत्रिमंडल का उदय, सबको वोट) और भारत, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि ने इसे अपनाया।
- ऐतिहासिक चिंतन: इतिहासकार कैसे काम करते हैं – इतिहास साक्ष्य के सहारे अतीत का अध्ययन है। घटनाओं को समय-रेखा पर क्रम से रखिए और उनके संदर्भ में पढ़िए। प्राथमिक स्रोत (उसी समय बने) और द्वितीयक स्रोत (बाद में बने) दोनों का उपयोग कीजिए। हर स्रोत को परखिए: किसने, कब, क्यों बनाया और क्या छूट गया। घटनाओं के कई कारण होते हैं: धीमे दीर्घकालिक कारण और एक तात्कालिक कारण। परिवर्तन और निरंतरता दोनों देखिए, महत्व तय कीजिए और साक्ष्य के साथ तर्क दीजिए।