मध्यकाल कब था?
प्राचीन और आधुनिक दुनिया के बीच के समय को इतिहासकार मध्यकाल (Middle Ages) कहते हैं. यूरोप में यह लगभग 476 ई. से, जब आख़िरी पश्चिमी रोमन सम्राट की सत्ता गई, लगभग 1500 ई. तक चला.
- आरंभिक मध्यकाल (लगभग 500–1000): नए राज्य, कम क़स्बे, खेती वाले गाँव.
- उच्च मध्यकाल (लगभग 1000–1300): ज़्यादा लोग, व्यापार और क़स्बे; बड़े गिरजाघर; धर्मयुद्ध.
- उत्तर मध्यकाल (लगभग 1300–1500): अकाल, प्लेग और युद्ध, पर मज़बूत राज्य और नए विचार भी.
ये तारीख़ें मोटा अंदाज़ा हैं. बदलाव धीरे-धीरे और हर इलाक़े में अलग तरह से आया.
आरंभिक मध्यकाल: प्रवास, फ़्रैंक और बाइज़ेंटाइन
300 से 500 ई. के बीच कई लोग (जिन्हें अक्सर जर्मन क़बीले कहते हैं, जैसे गोथ, फ़्रैंक और सैक्सन) पश्चिमी रोमन साम्राज्य की ज़मीन में आ बसे. साम्राज्य छोटे-छोटे राज्यों में टूट गया.
फ़्रैंक और शार्लमेन
फ़्रैंकों ने पश्चिमी यूरोप का सबसे मज़बूत राज्य बनाया. उनका राजा क्लोविस लगभग 500 ई. में ईसाई बना. बाद में शार्लमेन ने बड़ा इलाक़ा एक किया और 800 ई. में पोप ने उसे सम्राट का ताज पहनाया. उसने स्कूलों और किताबों की नक़ल को बढ़ावा दिया. उसकी मौत के बाद साम्राज्य पोतों में बँट गया (वर्दून संधि, 843).
बाइज़ेंटाइन साम्राज्य
पूरब में रोमन साम्राज्य बाइज़ेंटाइन साम्राज्य के रूप में चलता रहा, राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल (आज इस्तांबुल). इसमें शक्तिशाली सम्राट, यूनानी भाषा, लिखित क़ानून (जस्टिनियन संहिता) और ऑर्थोडॉक्स चर्च था. इसने हागिया सोफ़िया (537) बनवाया. यह 1453 तक चला. 1054 में ईसाई चर्च पश्चिम के कैथोलिक और पूरब के ऑर्थोडॉक्स में बँट गया.
सामंतवाद और जागीर
कमज़ोर केंद्रीय सरकार और लगातार हमलों में लोगों को पास से सुरक्षा चाहिए थी. सामंतवाद यानी ज़मीन के बदले वफ़ादारी और सेवा की व्यवस्था.
- राजा बड़े सामंतों और बिशपों को ज़मीन (जागीर, fief) देता था.
- सामंत राजा के जागीरदार (vassal) बनते: वफ़ादारी की शपथ लेते और युद्ध में शूरवीर भेजते.
- शूरवीर (knight) घोड़े पर लड़ने वाले प्रशिक्षित सैनिक थे जो किसी सामंत की सेवा करते.
- किसान खेत जोतते. कई कृषिदास (serf) थे: ग़ुलाम नहीं, पर ज़मीन से बँधे; बिना इजाज़त जा नहीं सकते थे.
ज़िंदगी मैनर (जागीर-गाँव) के चारों ओर घूमती थी: सामंत का बड़ा घर या क़िला, गाँव, चर्च, चक्की और खुले खेत. कृषिदास हफ़्ते में कुछ दिन सामंत के खेत में काम करते और फ़सल का हिस्सा देते; बदले में उन्हें अपनी ज़मीन और सुरक्षा मिलती.
समाज को अक्सर "तीन वर्ग" कहा जाता है: प्रार्थना करने वाले (पादरी), लड़ने वाले (सामंत, शूरवीर) और काम करने वाले (किसान).
चर्च, भिक्षु और धर्मयुद्ध
रोम के पोप के नेतृत्व वाला कैथोलिक चर्च पश्चिमी यूरोप की सबसे शक्तिशाली संस्था था. उसके पास बहुत ज़मीन थी, वह टाइद (उपज का दसवाँ हिस्सा) लेता था, स्कूल और अस्पताल चलाता था, और त्योहारों का कैलेंडर तय करता था.
भिक्षु और भिक्षुणियाँ सख़्त नियमों के साथ मठों में रहते थे, जैसे संत बेनेडिक्ट का नियम (लगभग 529): प्रार्थना, काम और पढ़ाई. वे हाथ से किताबें नक़ल करते और पुराना ज्ञान बचाए रखते.
धर्मयुद्ध (crusades) (1096–1291) पोपों द्वारा बुलाए गए युद्धों की कड़ी थी, जिनका मक़सद येरुशलम और आसपास का इलाक़ा पाना था. लंबे समय में वे सफल नहीं हुए, पर उनसे यूरोप और पूर्वी भूमध्य सागर की दुनिया के बीच संपर्क और व्यापार बढ़ा, नई चीज़ें और विचार आए.
क़स्बे, राजा और उत्तर मध्यकाल का संकट
क़स्बे और व्यापार
लगभग 1000 ई. के बाद बेहतर हल और तीन-खेत प्रणाली से ज़्यादा अनाज उगा, आबादी बढ़ी. व्यापार लौटा और क़स्बे बढ़े. कारीगरों और व्यापारियों ने गिल्ड (श्रेणी) बनाए, जो दाम तय करते और शागिर्दों को सिखाते. कुछ क़स्बों ने सामंतों से आज़ादी के अधिकार-पत्र पाए. बोलोन्या (1088), पेरिस और ऑक्सफ़र्ड जैसे विश्वविद्यालय शुरू हुए.
मज़बूत राज्य
राजाओं ने धीरे-धीरे कर, अदालतों और वेतन वाली सेनाओं से मज़बूत राज्य बनाए. इंग्लैंड में मैग्ना कार्टा (1215) ने कहा कि राजा को भी क़ानून मानना होगा; बाद में संसद बैठने लगी.
1300 के दशक का संकट
- महान अकाल (1315–1317), ख़राब फ़सलों के बाद.
- काली मौत (Black Death) (1347–1351), प्लेग जिसने यूरोप के लगभग एक-तिहाई लोगों की जान ली.
- इंग्लैंड और फ़्रांस के बीच सौ वर्षीय युद्ध (1337–1453).
बहुत कम मज़दूर बचे तो किसान ज़्यादा मज़दूरी माँगने लगे, और पश्चिम में कृषिदास प्रथा कमज़ोर पड़ी. किसान विद्रोह हुए. बारूद ने क़िलों और शूरवीरों का महत्व घटाया. छापाख़ाने (लगभग 1450) ने विचार तेज़ी से फैलाए. कॉन्स्टेंटिनोपल के पतन (1453) के साथ इन बदलावों ने पुनर्जागरण और आरंभिक आधुनिक युग का रास्ता खोला.
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मध्यकाल: लगभग 476 – 1500 ई. (आरंभिक 500–1000, उच्च 1000–1300, उत्तर 1300–1500)
- जागीर (fief): सेवा और वफ़ादारी के बदले दी गई ज़मीन
- जागीरदार (vassal): ज़मीन पाकर वफ़ादारी का वादा करने वाला
- कृषिदास (serf): मैनर की ज़मीन से बँधा किसान
- मैनर: सामंत की जागीर, जिसमें गाँव, खेत, चक्की और चर्च
- गिल्ड (श्रेणी): क़स्बे के कारीगरों या व्यापारियों का संघ
- टाइद: उपज का दसवाँ हिस्सा जो चर्च को दिया जाता था
- काली मौत: 1347–1351 का प्लेग, लगभग 1/3 यूरोपीय मरे
हल किए गए उदाहरण
1. काली मौत से कृषिदास प्रथा के कमज़ोर होने तक कारण-प्रभाव की कड़ी बनाओ.
प्लेग से लगभग 1/3 लोग मरे → खेत जोतने वाले कम → हर मज़दूर क़ीमती → किसान मज़दूरी माँगते या दूसरे सामंत के पास चले जाते → सामंत कृषिदासों को बाँधकर नहीं रख पाए → पश्चिमी यूरोप में कृषिदास प्रथा कमज़ोर हुई.
2. 1340 में एक गाँव में 300 लोग थे. प्लेग में लगभग एक-तिहाई मरे, तो लगभग कितने बचे?
300 का एक-तिहाई = 100. तो लगभग 300 − 100 = 200 लोग बचे.
3. पश्चिमी रोमन साम्राज्य के अंत के बाद बाइज़ेंटाइन साम्राज्य कितने साल और चला?
1453 − 476 = 977 साल, लगभग 1000 साल.
4. सैन्य रूप से असफल होने पर भी धर्मयुद्धों ने यूरोप को कैसे बदला? एक तरीका बताओ.
पूर्वी भूमध्य सागर से व्यापार बढ़ा. मसाले, रेशम और चीनी जैसी चीज़ें ज़्यादा जानी गईं, जिससे वेनिस और जेनोआ जैसे शहर अमीर हुए.
आम गलतियाँ
- पूरे काल को "अंधकार युग" कहना. मठों, बाइज़ेंटाइन और बाद में विश्वविद्यालयों में पढ़ाई चलती रही.
- कृषिदास को ग़ुलाम समझना. कृषिदास अलग से बेचे नहीं जाते थे, उनकी अपनी ज़मीन और कुछ अधिकार थे, पर वे ज़मीन से बँधे थे.
- बाइज़ेंटाइन साम्राज्य को पश्चिमी रोमन साम्राज्य समझ लेना. बाइज़ेंटाइन पूर्वी आधा हिस्सा था जो 1453 तक बचा रहा.
- यह मानना कि सामंतवाद हर जगह एक जैसा था. यह इलाक़े और समय के साथ बदलता रहा.