राष्ट्र और राष्ट्रवाद क्या हैं?
राष्ट्र लोगों का बड़ा समुदाय है जो एक होने का एहसास करता है। उनमें अक्सर साझी भाषा, संस्कृति, इतिहास और यादें, कभी धर्म या मातृभूमि, और सबसे बढ़कर अपना भविष्य ख़ुद तय करने की इच्छा होती है।
राष्ट्रवाद यह विचार है कि हर राष्ट्र को अपनी बात कहने का हक़ हो, आमतौर पर अपना राज्य या कम से कम स्वशासन। राष्ट्र-राज्य वह राज्य है जहाँ ज़्यादातर लोग ख़ुद को एक राष्ट्र मानते हैं।
1800 से पहले लोग ज़्यादातर किसी राजा, धर्म या गाँव के प्रति वफ़ादार थे, राष्ट्र के प्रति नहीं। फ़्रांसीसी क्रांति (1789), छपाई, स्कूलों और रेल का फैलाव, और जन संप्रभुता (सत्ता जनता से आती है) के विचार ने 19वीं सदी में राष्ट्रीय भावना फैलाई।
राष्ट्रवाद लोगों को जोड़कर आज़ादी दिला सकता है, पर जब कोई समूह ख़ुद को श्रेष्ठ माने तो अल्पसंख्यकों को बाहर कर सकता है या संघर्ष पैदा कर सकता है।
राष्ट्रीय आंदोलन कैसे बढ़ते हैं: चरण A, B और C
यूरोप के कई छोटे राष्ट्रों की तुलना करने वाले इतिहासकारों ने तीन आम चरण देखे (यह मॉडल चेक इतिहासकार मिरोस्लाव ह्रोख़ से जुड़ा है):
- चरण A: सांस्कृतिक जागरण। कुछ विद्वान, शिक्षक और पुरोहित लोगों की भाषा, लोकगीत, रीति-रिवाज और इतिहास पढ़ते हैं। उस भाषा में पहले व्याकरण, शब्दकोश और कविताएँ लिखते हैं।
- चरण B: संगठन। कार्यकर्ता अध्ययन मंडल, वाचनालय, रविवारी स्कूल, अख़बार और समितियाँ बनाते हैं ताकि विचार ज़्यादा लोगों तक पहुँचे।
- चरण C: जन आंदोलन। आम लोग जुड़ते हैं। राजनीतिक दल बनते हैं, लोग याचिका देते, वोट डालते और विरोध करते हैं। माँगें सांस्कृतिक अधिकारों से बढ़कर स्वायत्तता (साम्राज्य के अंदर स्वशासन) या पूरी स्वतंत्रता तक पहुँचती हैं।
हर आंदोलन सारे चरण पार नहीं करता; गति स्कूलों, शहरों, अख़बारों, मताधिकार के क़ानूनों और साम्राज्य की प्रतिक्रिया पर निर्भर है।
1848 और साम्राज्यों का जवाब
1848 में यूरोप के कई शहरों में क्रांतियाँ हुईं: 'राष्ट्रों का वसंत'। लोगों ने संविधान, प्रेस की आज़ादी और राष्ट्रीय अधिकार माँगे। ऑस्ट्रियाई साम्राज्य में भूदास प्रथा (ज़मींदारों के लिए बिना मज़दूरी का बेगार) ख़त्म हुई। 1849 तक ज़्यादातर क्रांतियाँ हार गईं, पर विचार ज़िंदा रहे।
साम्राज्यों ने दो मुख्य तरह जवाब दिया:
- सुधार: स्थानीय भाषा में स्कूल, अख़बार या सभाओं की इजाज़त, मताधिकार बढ़ाना (जैसे 1907 में ऑस्ट्रिया-हंगरी में पुरुषों का समान मताधिकार)।
- दमन: किसी भाषा की किताबों-अख़बारों पर पाबंदी, समितियाँ बंद करना, कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी या देश-निकाला, या 1830–31 और 1863–64 के पोलिश विद्रोह जैसे सशस्त्र विद्रोहों को कुचलना।
दमन ने आंदोलनों को कुछ समय धीमा किया, पर अक्सर उन्हें और दृढ़ भी बनाया।
केस स्टडी: दो साम्राज्यों में यूक्रेनी राष्ट्रीय आंदोलन
19वीं सदी में यूक्रेनी लोग रूसी साम्राज्य और ऑस्ट्रियाई (बाद में ऑस्ट्रो-हंगेरियन) साम्राज्य में बँटे थे। उनका आंदोलन तीनों चरण दिखाता है:
- चरण A: 1800 की शुरुआत से ख़ार्किव के नए विश्वविद्यालय के विद्वानों और कुलीन 'स्वायत्ततावादी' मंडलों ने गीत इकट्ठे किए और इतिहास लिखे। गालिसिया में 'रूथेनियन त्रयी' कहलाने वाले तीन युवा लेखकों ने बोलचाल की भाषा में किताब छापी (1837); ट्रांसकार्पेथिया में स्थानीय 'जागरणकर्ताओं' ने ऐसा ही काम किया।
- चरण B: कीव में गुप्त सिरिल और मेथोडियस ब्रदरहुड (1845–47) ने स्लाव लोगों के स्वतंत्र संघ का सपना देखा और कुचल दिया गया। 1848 में ल्वीव में सर्वोच्च रूथेनियन परिषद और पहला यूक्रेनी भाषा का अख़बार आया। 1860 के दशक से ह्रोमादा (सामुदायिक समितियाँ) रविवारी स्कूल चलाने लगीं; किसानों की तरह रहने वाले युवा कुलीनों को 'ख़्लोपोमानी' कहा गया। वोलोदिमिर अंतोनोविच और मिख़ाइलो द्राहोमानोव जैसे विचारकों ने जनता के बीच काम और संघीय, लोकतांत्रिक भविष्य की बात की। रूसी सरकार ने वालुयेव परिपत्र (1863) और एम्स आदेश (1876) से यूक्रेनी में ज़्यादातर छपाई पर रोक लगाई।
- चरण C: ऑस्ट्रिया-हंगरी में, जहाँ कुछ आज़ादी थी, प्रतिद्वंद्वी धाराएँ (रूस-समर्थक 'रूसोफ़ाइल' और यूक्रेन-समर्थक 'जनवादी') आपस में होड़ करती रहीं, प्रतिनिधि गालिसियाई सभा और वियना संसद में बैठे, और पहले दल बने, शुरुआत रैडिकल पार्टी (1890) से। उसके सदस्यों ने सबसे पहले खुलकर स्वतंत्र, एकजुट यूक्रेन की माँग की। रूसी साम्राज्य में दल 1900 के आसपास बने और 1905–07 की क्रांति में बढ़े; फिर 1914 तक दमन रहा। इन इलाक़ों में यहूदी, क्रीमियाई तातार, पोलिश और दूसरे समुदाय भी रहते थे; आर्थिक तनाव और यहूदियों पर हिंसक हमले (पोग्रोम) इस कठिन दौर का हिस्सा थे।
एशिया और अफ़्रीका में राष्ट्रीय आंदोलन
यूरोप के बाहर राष्ट्रवाद मुख्य रूप से साम्राज्यवाद के जवाब में बढ़ा: लोग अपने देश को आधुनिक बनाना और विदेशी नियंत्रण से आज़ाद करना चाहते थे।
- जापान: मेइजी सुधारों (1868 से) ने स्कूल, सेना, उद्योग और संविधान बनाकर मज़बूत राष्ट्र-राज्य बनाया, जो उपनिवेश बनने से बच गया।
- उस्मानी साम्राज्य: सुधारों (तंज़ीमात) और युवा तुर्क क्रांति (1908) ने साम्राज्य बचाने की कोशिश की; 1918 के बाद तुर्की गणराज्य बना (1923)।
- चीन: विदेशी ताक़तों से हार के बाद सुन यात-सेन के नेतृत्व में 1911 की क्रांति ने राजवंश ख़त्म किया।
- भारत: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1885) याचिकाओं से शुरू हुई; गांधी जी के नेतृत्व में अहिंसक जन आंदोलन बनी और 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ।
- कोरिया: जापानी औपनिवेशिक शासन में शांतिपूर्ण 1 मार्च आंदोलन (1919) ने स्वतंत्रता माँगी।
- अफ़्रीका: शिक्षित नेताओं, मज़दूर संघों और दलों ने आज़ादी माँगी; 1945 के बाद ज़्यादातर उपनिवेश स्वतंत्र हुए, सहारा के दक्षिण में शुरुआत 1957 में घाना से।
नए देशों के सामने राष्ट्र-निर्माण की चुनौती थी: कई भाषाओं और धर्मों को जोड़ना, संविधान लिखना, स्कूल और अर्थव्यवस्था बनाना।
खुद करो: समयरेखा में और घर पर
3D में: साल 1800 से 1960 तक खिसकाओ। किस महाद्वीप के आंदोलन पहले आते हैं? किस दशक में सबसे ज़्यादा स्वतंत्रता की घटनाएँ हैं?
घर पर: परिवार के किसी बड़े से पूछो कि कौन-से गीत, त्योहार या कहानियाँ उन्हें किसी समुदाय का हिस्सा महसूस कराते हैं। इनमें से कौन-सी चीज़ें चरण A का विद्वान इकट्ठा कर सकता था? छोटी सूची बनाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राष्ट्र = लोग जो एक होने का एहसास करते हैं (भाषा, संस्कृति, इतिहास, इच्छा)
- राष्ट्रवाद = यह विचार कि राष्ट्र ख़ुद पर शासन करे
- चरण A (सांस्कृतिक जागरण) → चरण B (संगठन) → चरण C (जन राजनीतिक आंदोलन)
- साम्राज्य का जवाब: सुधार या दमन
- उपनिवेशों में: राष्ट्रवाद = विदेशी शासन के ख़िलाफ़ संघर्ष → स्वतंत्रता → राष्ट्र-निर्माण
हल किए गए उदाहरण
1. 1830 में एक शिक्षिका अपने लोगों की बोलचाल की भाषा का पहला व्याकरण लिखती है। यह कौन-सा चरण है?
चरण A, सांस्कृतिक जागरण: विद्वान भाषा और संस्कृति को दर्ज करते हैं।
2. 1880 में एक समिति 40 गाँवों में वाचनालय खोलती है और साप्ताहिक अख़बार छापती है। कौन-सा चरण?
चरण B, संगठन: संस्थाओं के ज़रिए राष्ट्रीय विचार फैलाना।
3. वालुयेव परिपत्र और एम्स आदेश यूक्रेनी आंदोलन को ख़त्म क्यों नहीं कर पाए?
पाबंदी रूसी साम्राज्य में छपाई रोकती थी, पर कार्यकर्ता ऑस्ट्रियाई गालिसिया में छापते रहे जहाँ ज़्यादा आज़ादी थी, और पाबंदी ने कई लोगों को और दृढ़ बना दिया।
4. 1900 के आसपास जापान और भारत की तुलना करो।
जापान ऊपर से आधुनिक हुआ (मेइजी सुधार) और स्वतंत्र रहा। भारत उपनिवेश था, इसलिए राष्ट्रवाद अंग्रेज़ी शासन के ख़िलाफ़ आंदोलन बना, याचिकाओं (कांग्रेस 1885) से जन अभियानों तक।
5. राष्ट्रवाद का एक अच्छा और एक बुरा असर बताओ।
अच्छा: लोगों को स्वशासन और स्वतंत्रता दिलाई। बुरा: अल्पसंख्यकों को बाहर किया या समूहों में संघर्ष कराया।
आम गलतियाँ
- सोचना कि राष्ट्र हमेशा से थे। ज़्यादातर राष्ट्रीय भावना 19वीं और 20वीं सदी में फैली।
- सोचना कि राष्ट्र में एक ही धर्म या नस्ल होनी चाहिए। सबसे अहम है साझी पहचान और साथ शासन की इच्छा।
- स्वायत्तता (बड़े राज्य के अंदर स्वशासन) और स्वतंत्रता (पूरी तरह अलग राज्य) को मिला देना।
- सोचना कि राष्ट्रीय आंदोलन हिंसा से शुरू हुए। ज़्यादातर किताबों, स्कूलों और अख़बारों से शुरू हुए।