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महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन

गांधीजी 1915 में भारत लौटे। 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद में आम किसान और मज़दूर शामिल होने चाहिए। चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद के सत्याग्रहों से वे जाने गए। असहयोग आंदोलन (1920–22) में भारी संख्या में लोग जुड़े, और खादी, चरखा, सादा जीवन और आम बोली से गांधीजी जनता के नेता बने। 1930 की नमक यात्रा से सविनय अवज्ञा शुरू हुई; फिर गोलमेज़ सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौता (1931) हुए। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेज़ों से जाने को कहा। 1947 में आज़ादी मिली, साथ में बँटवारे का दर्द भी। गांधीजी अंतिम महीनों में शांति के लिए काम करते रहे और 30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या हुई। इतिहासकार यह सब भाषणों, अख़बारों, चिट्ठियों, आत्मकथा और पुलिस रिपोर्टों से जानते हैं, जिनका अपना-अपना नज़रिया है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. मिलो गांधीजी से, जो जनवरी 1915 में दक्षिण अफ़्रीका से लौटे। 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में वे अमीर श्रोताओं से कहते हैं कि आंदोलन ग़रीब किसानों और मज़दूरों का होना चाहिए। तीन हरे खंभे बढ़ते देखो: चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद की जीत।
  2. बीच में चरखा घूमता है। हर रंग के लोग आते जाते हैं: किसान, मज़दूर, छात्र, महिलाएँ। यह असहयोग आंदोलन (1920–22) है। गांधीजी आम लोगों के नेता बनते हैं। 1922 में चौरी चौरा की हिंसा के बाद वे इसे रोक देते हैं।
  3. साबरमती से समुद्र किनारे दांडी (1930) तक चलने वालों के पीछे चलो। एक चुटकी नमक बनाकर अन्यायी क़ानून तोड़ा गया: यही सविनय अवज्ञा है। पीछे एक गोल मेज़: लंदन में बातचीत और 1931 का गांधी-इरविन समझौता।
  4. नारंगी भीड़ "भारत छोड़ो" (1942) कहती है। झंडा ऊपर उठते देखो: 1947 में आज़ादी। पर देश बँट भी गया और भयानक दंगे हुए। देखो गांधीजी अकेले शांति के लिए चलते हैं। 30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या हुई।
  5. हमें कैसे पता? काग़ज़ों के चार ढेर: भाषण और अख़बार (सार्वजनिक आवाज़), चिट्ठियाँ (निजी आवाज़), उनकी आत्मकथा, और पुलिस रिपोर्टें। हर ढेर गांधीजी को अलग कोण से देखता है।
  6. अब तुम्हारी बारी। साल वाला स्लाइडर 1915 से 1948 तक चलाओ और पढ़ो हर साल क्या हुआ।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

गांधीजी ने BHU में अमीरों की आलोचना क्यों की?

वे चाहते थे कि सब समझें कि आज़ादी ग़रीब किसानों और मज़दूरों तक पहुँचनी चाहिए। पहला चरण उन्हें और आम लोगों के लिए उनकी पहली जीतें दिखाता है।

एक व्यक्ति के इतने अनुयायी कैसे बने?

सादे कपड़े, चरखा, आसान बोली, और गाँवों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संदेश फैलाया। दूसरे चरण में लोग चरखे के चारों ओर जुड़ते हैं।

गोलमेज़ सम्मेलन से क्या मिला?

बहुत कम। दूसरा सम्मेलन (1931) नाकाम रहा क्योंकि दूसरे समूहों ने अपने समुदायों की ओर से बोलने का दावा किया। तीसरे चरण में यात्रा के पीछे मेज़ दिखती है।

क्या गांधीजी 15 अगस्त 1947 को ख़ुश थे?

वे बँटवारे के दंगों से दुखी थे और कलकत्ता में शांति के लिए काम कर रहे थे। चौथा चरण उनकी शांति यात्रा दिखाता है।

क्या चिट्ठियों पर भाषणों से ज़्यादा भरोसा करें?

चिट्ठियाँ निजी विचार दिखाती हैं, पर लिखने वाले कभी-कभी जानते थे कि वे छप सकती हैं। पाँचवाँ चरण चारों तरह के स्रोतों की तुलना करता है।

पहले क्या हुआ, पूर्ण स्वराज या नमक यात्रा?

पहले पूर्ण स्वराज (1929), फिर नमक यात्रा (1930)। छठे चरण के स्लाइडर पर दोनों साल देखो।

एक नेता का आगमन

वापसी और BHU भाषण

गांधीजी ने लगभग 20 साल दक्षिण अफ़्रीका में भारतीयों के हक़ के लिए संघर्ष किया। जनवरी 1915 में वे भारत लौटे। फ़रवरी 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन पर उन्होंने साहसी बात कही। उन्होंने कहा कि यहाँ बैठे नेता अमीर और पढ़े-लिखे हैं, जबकि असली भारत ग़रीब किसान और मज़दूर हैं। आज़ादी का मतलब तभी है जब वह उन तक पहुँचे।

पहले स्थानीय आंदोलन

1919 में उन्होंने रॉलट एक्ट के ख़िलाफ़ देशभर में विरोध बुलाया। इस क़ानून से बिना मुक़दमे जेल में रखा जा सकता था।

असहयोग और जनता के नेता का बनना

असहयोग (1920–22)

कांग्रेस ने ख़िलाफ़त नेताओं के साथ मिलकर लोगों से अंग्रेज़ी राज से सहयोग बंद करने को कहा: सरकारी स्कूल, कॉलेज और अदालतें छोड़ो, उपाधियाँ लौटाओ, विदेशी कपड़े का बहिष्कार करो। किसान, मज़दूर, आदिवासी और छात्र जुड़े। फ़रवरी 1922 में चौरी चौरा में भीड़ ने थाने में आग लगा दी, तो गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया क्योंकि वे अहिंसा पर अड़े थे। 1922 में उन्हें जेल हुई।

लोग उनके पीछे क्यों चले

विचार और संस्थाएँ

गांधीजी सत्याग्रह (सत्य और अहिंसा की शक्ति), स्वदेशी (भारतीय सामान) और खादी (हाथ से कता कपड़ा) में विश्वास करते थे। वे छुआछूत के ख़िलाफ़ और हिंदू–मुस्लिम एकता के लिए काम करते थे। साबरमती और वर्धा के आश्रम और कांग्रेस संगठन स्वयंसेवकों को तैयार करते और ये विचार फैलाते थे।

सविनय अवज्ञा और उसके बाद

पूर्ण स्वराज और नमक यात्रा

दिसंबर 1929 में लाहौर में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज (पूरी आज़ादी) को लक्ष्य बनाया, और 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। 12 मार्च 1930 को गांधीजी साबरमती आश्रम से समुद्र तट पर दांडी तक पैदल चले। 6 अप्रैल को उन्होंने नमक बनाकर नमक क़ानून तोड़ा। नमक हर घर में लगता है, इसलिए नमक कर हर घर को चुभता था। पूरे भारत में लोगों ने नमक और जंगल क़ानून तोड़े। दुनिया भर के अख़बारों ने यह यात्रा छापी।

गोलमेज़ सम्मेलन

अंग्रेज़ों ने लंदन में सम्मेलन बुलाए। कांग्रेस पहले सम्मेलन (1930–31) में नहीं गई। गांधी-इरविन समझौते (मार्च 1931) के बाद सविनय अवज्ञा रुकी और गांधीजी दूसरे सम्मेलन में गए, पर वह नाकाम रहा। दूसरे दलों ने मुसलमानों, दलित वर्गों और राजाओं की ओर से बोलने का दावा किया। 1932 के पूना समझौते से दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटें तय हुईं।

भारत छोड़ो (1942)

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, क्रिप्स मिशन नाकाम होने पर, कांग्रेस ने अगस्त 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया। गांधीजी का नारा था "करो या मरो"। बड़े नेता तुरंत गिरफ़्तार हुए, पर युवाओं, छात्रों और मज़दूरों ने पूरे देश में आंदोलन चलाए रखा।

आज़ादी, बँटवारा और आख़िरी वीर दिन

15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद हुआ, पर देश बँट गया और भयानक हिंसा हुई। गांधीजी दिल्ली के जश्न में नहीं थे। वे कलकत्ता में शांति के लिए उपवास और प्रार्थना कर रहे थे। इससे पहले 1946–47 में वे नोआखाली (बंगाल) और बिहार के गाँवों में पैदल घूमे, ताकि डर और नफ़रत शांत हो। वे बार-बार कहते रहे कि हिंदू और मुसलमान साथ रहें। 30 जनवरी 1948 को दिल्ली में उन्हें गोली मार दी गई। पूरी दुनिया ने शोक मनाया।

गांधीजी को जानना: अख़बार और चिट्ठियाँ जैसे स्रोत

सार्वजनिक आवाज़ और निजी आवाज़

गांधीजी के भाषण और लेख (उनके अख़बार यंग इंडिया और हरिजन में) उनकी सार्वजनिक आवाज़ हैं: जो वे देश को सुनाना चाहते थे। उनकी चिट्ठियाँ निजी आवाज़ दिखाती हैं: शंकाएँ, चिंताएँ और साथियों से बहस। पर कई चिट्ठियाँ बाद में छपीं, इसलिए लिखने वाले जानते थे कि वे सार्वजनिक हो सकती हैं।

आत्मकथा

उनकी आत्मकथा सत्य के प्रयोग उनकी ज़िंदगी को वैसे बताती है जैसे उन्हें याद थी। आत्मकथा याद के सहारे, पीछे मुड़कर लिखी जाती है और उसमें वही होता है जो लेखक बताना चाहता है।

सरकारी रिकॉर्ड

पुलिस और अफ़सर राजनीतिक घटनाओं पर पाक्षिक रिपोर्ट (हर पंद्रह दिन की रिपोर्ट) लिखते थे। इनसे पता चलता है कि सरकार किससे डरती थी, पर इनमें अक्सर आंदोलन की ताक़त को कम करके दिखाया गया।

अख़बार

भारतीय और अंग्रेज़ी अख़बारों ने अंग्रेज़ी और भारतीय भाषाओं में आंदोलन की ख़बरें छापीं। हर अख़बार की अपनी राजनीति थी, इसलिए एक ही घटना अलग-अलग ढंग से लिखी गई।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 1916 का BHU भाषण क्यों महत्वपूर्ण है?

इसमें गांधीजी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रवाद अमीर और पढ़े-लिखे लोगों तक सीमित है और इसमें किसान-मज़दूर शामिल होने चाहिए। इससे पता चला कि वे आम लोगों का जन आंदोलन बनाएँगे।

2. गांधीजी ने 1922 में असहयोग आंदोलन क्यों रोका?

चौरी चौरा में भीड़ ने थाने में आग लगा दी, जिसमें पुलिसवाले मारे गए। गांधीजी मानते थे कि आंदोलन अहिंसक रहना चाहिए, इसलिए उन्होंने इसे रोक दिया, भले ही वह बहुत मज़बूत था।

3. 1930 में नमक चुनना समझदारी क्यों थी?

नमक अमीर-ग़रीब सबको चाहिए था, इसलिए नमक कर सबको चुभता था। नमक क़ानून तोड़ना आसान और शांतिपूर्ण था, समुद्र के पास कोई भी कर सकता था, इसलिए लोग एक हुए और दुनिया का ध्यान खिंचा।

4. ऐतिहासिक स्रोत के रूप में चिट्ठियाँ भाषणों से कैसे अलग हैं?

भाषण वह दिखाते हैं जो नेता जनता को सुनाना चाहता था। चिट्ठियाँ अक्सर निजी भावनाएँ, शंकाएँ और मतभेद दिखाती हैं। पर इतिहासकार याद रखते हैं कि चिट्ठियाँ भी यह सोचकर लिखी जा सकती थीं कि वे छपेंगी।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. गांधीजी दक्षिण अफ़्रीका से भारत कब लौटे?
2. नमक यात्रा कहाँ ख़त्म हुई?
3. "करो या मरो" का नारा किस आंदोलन में दिया गया?
4. 1931 में किस समझौते से सविनय अवज्ञा रुकी?
5. चिट्ठियाँ मुख्य रूप से नेता की कौन-सी आवाज़ दिखाती हैं?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन अध्याय किस बारे में है?

गांधीजी ने स्वतंत्रता संग्राम को जन आंदोलन कैसे बनाया: 1915 की वापसी से असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो होते हुए 1947–48 तक, और हम यह स्रोतों से कैसे जानते हैं।

'सविनय अवज्ञा और उसके बाद' में क्या आता है?

नमक यात्रा (1930), गोलमेज़ सम्मेलन, गांधी-इरविन समझौता, पूना समझौता, भारत छोड़ो (1942) और आज़ादी व बँटवारे तक का रास्ता।

गांधीजी के बारे में कौन-से स्रोत मदद करते हैं?

उनके सार्वजनिक भाषण और लेख, निजी चिट्ठियाँ, आत्मकथा, सरकारी पुलिस रिपोर्टें और अख़बार।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग-3

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