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भारत में राष्ट्रवाद

पहले विश्व युद्ध से भारत में टैक्स, महँगाई और ज़बरदस्ती भर्ती बढ़ी। गांधीजी के सत्याग्रह (सच और अहिंसा) ने चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में जीत पाई। रॉलट एक्ट और जलियाँवाला बाग़ के बाद कांग्रेस ने ख़िलाफ़त का साथ दिया और 1920 में असहयोग शुरू किया; शहर, किसान, आदिवासी और बाग़ान मज़दूर अपने-अपने तरीक़े से जुड़े। चौरी चौरा के बाद 1922 में यह रुका। 1930 में नमक यात्रा से सविनय अवज्ञा शुरू हुई: अमीर-ग़रीब किसान, व्यापारी, मज़दूर और महिलाएँ जुड़े, पर कई दलित और मुसलमान दूर रहे। गीतों, भारत माता, लोककथाओं, झंडों और इतिहास ने सामूहिक अपनेपन का भाव बनाया।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. दो खंभे देखो। लाल खंभा बताता है कि पहले विश्व युद्ध (1914–18) में दाम लगभग दोगुने हो गए। आदमी सेना में जा रहे हैं, अक्सर ज़बरदस्ती। लोग ग़रीब और नाराज़ हैं।
  2. गांधीजी सत्याग्रह लाते हैं: सच के साथ, बिना हिंसा के लड़ना। तीन हरे खंभे तीन जीतें हैं: चंपारण (नील किसान) 1917, खेड़ा (किसानों का लगान) 1917, अहमदाबाद (मिल मज़दूर) 1918। फिर गहरा खंड: जलियाँवाला बाग़, 13 अप्रैल 1919।
  3. 1920: कई धाराएँ (शहर, अवध के किसान, आदिवासी, बाग़ान मज़दूर) एक नदी में मिलती हैं: ख़िलाफ़त के साथ असहयोग आंदोलन। विदेशी कपड़े का ढेर छोटा होता देखो, क्योंकि लोग उसका बहिष्कार करते हैं।
  4. 12 मार्च 1930: गांधीजी 78 साथियों के साथ साबरमती से दांडी चलते हैं। गिनती देखो: 24 दिन, लगभग 385 किमी। 6 अप्रैल को वे समुद्र के पानी से नमक बनाकर नमक कानून तोड़ते हैं।
  5. सविनय अवज्ञा: कौन जुड़ा? खंभे देखो। अमीर किसान और व्यापारी ऊँचे हैं। ग़रीब किसान, मज़दूर और महिलाएँ भी जुड़े। दलित और कई मुसलमान धुँधले हैं: उनकी चिंताओं का जवाब नहीं मिला, इसलिए वे दूर रहे।
  6. अब तुम खेलो: वर्ष का स्लाइडर 1917 से 1932 तक खिसकाओ। नारंगी खंभा वर्ष और उसकी घटना दिखाता है। तिरंगा याद दिलाता है कि निशानों ने लोगों को एक महसूस कराया।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

ब्रिटेन जीता, फिर भी भारतीय युद्ध के बाद नाराज़ क्यों थे?

क्योंकि युद्ध का बोझ भारतीयों ने टैक्स और महँगाई से उठाया और आदमियों को ज़बरदस्ती सेना में लिया गया। 3D का लाल खंभा दाम लगभग दोगुने दिखाता है।

क्या अहिंसा सच में साम्राज्य से जीत सकती है?

1920 से पहले सत्याग्रह तीन बार जीता: चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद। तीन हरे खंभे देखो।

तुर्की के ख़िलाफ़त मुद्दे में हिंदू क्यों जुड़े?

गांधीजी चाहते थे हिंदू और मुसलमान मिलकर लड़ें। ख़िलाफ़त की धारा असहयोग की नदी में मिल गई।

नमक के लिए इतनी दूर पैदल क्यों?

लंबी यात्रा पर पूरे देश का ध्यान गया; रास्ते के हर गाँव तक संदेश पहुँचा। दिन की गिनती 24 तक पहुँचते देखो।

क्या सब सविनय अवज्ञा में जुड़े?

नहीं। दलित और कई मुसलमान दूर रहे, क्योंकि उनकी माँगें पूरी नहीं हुईं। उनके खंभे धुँधले हैं।

एक तस्वीर या गीत से राष्ट्र कैसे बनता है?

साझे निशान अजनबियों को एक परिवार जैसा महसूस कराते हैं। आख़िरी चरण का झंडा और स्लाइडर यही दिखाते हैं।

पहला विश्व युद्ध, ख़िलाफ़त और असहयोग

युद्ध से मुश्किलें

पहले विश्व युद्ध (1914–18) में रक्षा पर ख़र्च बढ़ा, तो टैक्स और सीमा-शुल्क बढ़े और आयकर शुरू हुआ। 1913 से 1918 के बीच दाम लगभग दोगुने हुए। गाँवों से लोगों को ज़बरदस्ती सेना में भर्ती किया गया। 1918–21 में फ़सलें ख़राब हुईं और फ़्लू (इन्फ़्लुएंज़ा) से 1.2 से 1.3 करोड़ लोग मरे।

सत्याग्रह का विचार

गांधीजी जनवरी 1915 में दक्षिण अफ़्रीका से लौटे। सत्याग्रह यानी सच पर डटे रहना। अगर तुम्हारी बात सच्ची है, तो जीतने के लिए हिंसा की ज़रूरत नहीं; ज़ुल्म करने वाले के मन को छूना है।

रॉलट एक्ट और जलियाँवाला बाग़

रॉलट एक्ट (1919) से सरकार राजनीतिक क़ैदियों को बिना मुक़दमे दो साल तक जेल में रख सकती थी। गांधीजी ने 6 अप्रैल 1919 को हड़ताल बुलाई। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ में जनरल डायर ने रास्ते बंद कर शांत भीड़ पर गोलियाँ चलवाईं, सैकड़ों लोग मारे गए। पूरे भारत में गुस्सा फैल गया।

ख़िलाफ़त

युद्ध के बाद तुर्की के ऑटोमन सम्राट, ख़लीफ़ा (मुसलमानों के धार्मिक प्रमुख), पर कठोर संधि थोपी गई। मार्च 1919 में बंबई में मोहम्मद अली और शौकत अली ने ख़िलाफ़त समिति बनाई। गांधीजी ने इसे हिंदू-मुसलमानों को जोड़ने का मौक़ा माना।

असहयोग क्यों?

अपनी किताब हिंद स्वराज (1909) में गांधीजी ने लिखा कि अंग्रेज़ी राज भारतीयों के सहयोग से ही चल रहा है। सहयोग बंद तो राज ख़त्म। दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने असहयोग कार्यक्रम अपनाया: उपाधियाँ लौटाओ, सरकारी नौकरी, सेना, पुलिस, अदालत, परिषद, स्कूल और विदेशी सामान का बहिष्कार करो।

आंदोलन की अलग-अलग धाराएँ

फ़रवरी 1922 में चौरी चौरा (गोरखपुर) में शांत जुलूस हिंसक हो गया और थाना जला दिया गया। गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया।

सविनय अवज्ञा की ओर

कुछ नेताओं (सी.आर. दास, मोतीलाल नेहरू) ने परिषदों में जाने के लिए स्वराज पार्टी बनाई। जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नेता पूरी आज़ादी चाहते थे। 1926 के बाद दुनिया की मंदी से फ़सलों के दाम गिरे।

1928 में साइमन कमीशन भारत आया, पर उसमें एक भी भारतीय नहीं था। लोगों ने "साइमन वापस जाओ" के नारे लगाए। दिसंबर 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की माँग की। 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।

नमक यात्रा

31 जनवरी 1930 को गांधीजी ने वायसराय इरविन को 11 माँगें भेजीं। सबसे बड़ी: नमक कर हटाओ, क्योंकि नमक अमीर-ग़रीब सब खाते हैं। जवाब न मिलने पर 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने 78 स्वयंसेवकों के साथ नमक यात्रा शुरू की। वे 24 दिन में 240 मील (लगभग 385 किमी) चलकर साबरमती से दांडी पहुँचे। 6 अप्रैल 1930 को उन्होंने समुद्र के पानी से नमक बनाया।

सविनय अवज्ञा का मतलब सिर्फ़ सहयोग न करना नहीं, बल्कि औपनिवेशिक कानून तोड़ना भी था: नमक बनाना, विदेशी कपड़े का बहिष्कार, टैक्स न देना, जंगल कानून तोड़ना। सरकार ने नेताओं को गिरफ़्तार किया; अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान की गिरफ़्तारी पर पेशावर में विरोध हुआ। मार्च 1931 में गांधी-इरविन समझौता हुआ और गांधीजी लंदन के दूसरे गोलमेज़ सम्मेलन में गए, पर निराश लौटे। आंदोलन फिर शुरू हुआ और 1934 में ख़त्म हुआ।

अलग-अलग लोगों ने आंदोलन को कैसे देखा

सीमाएँ

दलित ("अछूत" कहे जाने वाले, जिन्हें गांधीजी ने हरिजन कहा) अलग निर्वाचन क्षेत्र चाहते थे। डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने 1930 में दमित वर्ग एसोसिएशन बनाई। गांधीजी ने अलग निर्वाचन के ख़िलाफ़ अनशन किया; पूना समझौते (सितंबर 1932) से दलितों को इसकी जगह आरक्षित सीटें मिलीं। ख़िलाफ़त के ठंडा पड़ने और सांप्रदायिक झगड़ों के बाद कई मुसलमान दूर हो गए; 1928 में मोहम्मद अली जिन्ना से सीटों पर बात नहीं बनी।

सामूहिक अपनेपन का भाव

राष्ट्र तब बनता है जब लोगों को लगे कि उनकी पहचान एक है। भारत में यह संघर्ष और संस्कृति दोनों से आया:

पर जब अतीत को ज़्यादातर हिंदू प्रतीकों से दिखाया गया, तो दूसरे समुदायों के कुछ लोग ख़ुद को अलग महसूस करने लगे। यह हर राष्ट्र के लिए सबक़ है।

ख़ुद करके देखो

घर पर "नमक यात्रा" करो: एक कप पानी में एक चम्मच नमक घोलो, प्लेट में डालकर 1–2 दिन धूप में रखो और नमक के क्रिस्टल वापस आते देखो। गांधीजी ने दांडी में ऐसे ही नमक बनाया था। फिर 3D में अंदाज़ा लगाओ: यात्रा के किस दिन आधा रास्ता पूरा हुआ? गिनती से जाँचो (लगभग 12वाँ दिन)।

परीक्षा के लिए सुझाव

सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं: गांधीजी ने नमक क्यों चुना, अलग-अलग समूहों ने सविनय अवज्ञा को कैसे देखा, असहयोग क्यों वापस लिया, रॉलट एक्ट, जलियाँवाला बाग़, पूना समझौता, और भारत माता व लोककथाओं से राष्ट्रवाद कैसे बना। वर्ष याद रखो: 1917, 1919, 1920, 1922, 1928, 1929, 1930, 1931, 1932।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. गांधीजी ने सविनय अवज्ञा शुरू करने के लिए नमक क्यों चुना?

नमक हर व्यक्ति की ज़रूरत है, अमीर हो या ग़रीब, इसलिए उस पर टैक्स सबको चुभता था। नमक कानून तोड़ना आसान, शांत और हर जगह संभव था। इससे सब भारतीय एक अन्यायी कानून के ख़िलाफ़ एक हो गए।

2. असहयोग आंदोलन वापस क्यों लिया गया?

फ़रवरी 1922 में चौरी चौरा में शांत भीड़ पुलिस से भिड़ गई और थाना जला दिया। गांधीजी को लगा आंदोलन हिंसक हो रहा है और लोगों को सत्याग्रह की और तैयारी चाहिए, इसलिए उन्होंने इसे रोक दिया।

3. सविनय अवज्ञा असहयोग से कैसे अलग था?

असहयोग में सिर्फ़ सहयोग बंद करना था: स्कूल, अदालत, सामान का बहिष्कार। सविनय अवज्ञा में कानून तोड़ना भी था: नमक बनाना, टैक्स न देना, जंगल कानून तोड़ना।

4. 1931 में अमीर किसानों का उत्साह क्यों घटा?

वे इसलिए जुड़े थे कि दाम गिरने से लगान भारी लग रहा था। 1931 में लगान घटे बिना आंदोलन रुक गया, तो वे निराश हुए और 1932 में दोबारा शुरू होने पर कई नहीं जुड़े।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. रॉलट एक्ट (1919) से क्या संभव हुआ?
2. असहयोग कार्यक्रम कहाँ अपनाया गया?
3. नमक यात्रा कहाँ ख़त्म हुई?
4. गूडेम पहाड़ियों के आदिवासी संघर्ष के नेता कौन थे?
5. पूना समझौता कब हुआ?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में राष्ट्रवाद अध्याय किस बारे में है?

1919 से 1930 के दशक की शुरुआत तक भारतीय असहयोग, ख़िलाफ़त और सविनय अवज्ञा से अंग्रेज़ी राज के ख़िलाफ़ कैसे एक हुए, और संस्कृति ने एक राष्ट्र का भाव कैसे बनाया।

गांधी-इरविन समझौता क्या था?

मार्च 1931 का समझौता: गांधीजी ने सविनय अवज्ञा रोकी और गोलमेज़ सम्मेलन में जाना माना; सरकार ने राजनीतिक क़ैदियों को छोड़ना माना।

भारत माता का चित्र किसने बनाया?

अबनींद्रनाथ टैगोर ने भारत माता को शिक्षा, भोजन और कपड़ा देती शांत माँ के रूप में बनाया।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 10इतिहास: भारत और समकालीन विश्व – II

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