CBSE कक्षा 12 इतिहास
अध्याय: 4
1. भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग-1
ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ: हड़प्पा सभ्यता · राजा, किसान और नगर: आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ · बंधुत्व, जाति तथा वर्ग: आरंभिक समाज · विचारक, विश्वास और इमारतें: सांस्कृतिक विकास
- ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ: हड़प्पा सभ्यता – हड़प्पा (सिंधु घाटी) सभ्यता में दक्षिण एशिया के पहले नगर बने, लगभग 2600 से 1900 ई.पू.। नगरों में ऊँचा दुर्ग, निचला शहर, सीधी सड़कें और ढकी नालियाँ थीं। लोग मनके, शंख और धातु की चीज़ें बनाते, एक जैसे पत्थर के बाट और मुहरें इस्तेमाल करते और ओमान व मेसोपोटामिया तक व्यापार करते थे। इनकी लिपि आज तक पढ़ी नहीं गई। 1920 के दशक में ASI ने इसे खोजा; इतिहासकार ईंटों, मनकों, हड्डियों और मुहरों से इसका जीवन समझते हैं।
- राजा, किसान और नगर: आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ (लगभग 600 ई.पू. - 600 ई.) – लगभग 600 ई.पू. से 600 ई. के बीच उत्तर भारत में सोलह बड़े राज्य (महाजनपद) बने। मगध सबसे ताक़तवर बना और चंद्रगुप्त व अशोक के समय मौर्य साम्राज्य बना। बाद में कुषाण, सातवाहन और गुप्त आए, जिन्होंने बड़ी उपाधियाँ और प्रशस्तियाँ अपनाईं। किसानों से ज़्यादा उपज करवाई गई, भूमिदान फैले और नगरों में सिक्कों से व्यापार हुआ। यह सब ज़्यादातर अभिलेखों से पता चलता है, जिन्हें 1838 में जेम्स प्रिंसेप ने पहली बार पढ़ा।
- बंधुत्व, जाति तथा वर्ग: आरंभिक समाज (लगभग 600 ई.पू. - 600 ई.) – आरंभिक भारतीय समाज को परिवार के रिश्तों (बंधुत्व), विवाह के नियमों, वर्ण व्यवस्था और अनेक जातियों, और संपत्ति के नियमों ने आकार दिया। ब्राह्मणों ने ये नियम धर्मसूत्र और मनुस्मृति जैसे संस्कृत ग्रंथों में लिखे, पर असल जीवन अक्सर अलग था, जैसा बौद्ध ग्रंथ और अभिलेख दिखाते हैं। महाभारत, जो लगभग 1,000 साल में बदलता-बढ़ता रहा, मुख्य स्रोत है; 1919 में शुरू हुए समालोचनात्मक संस्करण से इसका अध्ययन आसान हुआ।
- विचारक, विश्वास और इमारतें: सांस्कृतिक विकास (लगभग 600 ई.पू. - 600 ई.) – लगभग छठी सदी ई.पू. से कई विचारकों ने पुराने विचारों और कर्मकांडों पर सवाल उठाए। महावीर ने अहिंसा को केंद्र में रखकर जैन धर्म सिखाया; बुद्ध ने मध्यम मार्ग सिखाया और संघ बनाया। उनके विचार ग्रंथों, विहारों और साँची के महान स्तूप जैसे स्तूपों से फैले, जिनकी नक़्क़ाशी में बुद्ध के लिए प्रतीक हैं। बाद में महायान बौद्ध धर्म, वैष्णव और शैव परंपराएँ मूर्तियों और आरंभिक मंदिरों के साथ बढ़ीं।
2. भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग-2
यात्रियों के नज़रिए · भक्ति-सूफ़ी परंपराएँ · एक साम्राज्य की राजधानी: विजयनगर · किसान, ज़मींदार और राज्य
- यात्रियों के नज़रिए: बाहर से आए लोगों ने समाज को कैसे देखा – 10वीं से 17वीं सदी के बीच कई विदेशी यात्रियों ने भारत के बारे में लिखा। तीन सबसे मशहूर हैं। अल-बिरूनी 11वीं सदी में ख़्वारिज़्म (उज़्बेकिस्तान) से आया और अरबी में किताब-उल-हिंद लिखी। उसने संस्कृत सीखी और वर्ण व्यवस्था समझाई। इब्न बतूता 14वीं सदी में मोरक्को से आया और रिहला लिखा। उसे भीड़ भरे शहर, बाज़ार और तेज़ डाक व्यवस्था बहुत पसंद आई। फ्रांस का डॉक्टर फ्रांस्वा बर्नियर 17वीं सदी में मुग़ल दरबार आया। उसने भारत की तुलना यूरोप से की और कहा कि सारी ज़मीन बादशाह की है, जो पूरी तरह सही नहीं था। इनकी किताबें काम की हैं, पर इन्हें सावधानी से पढ़ना होता है।
- भक्ति-सूफ़ी परंपराएँ: विश्वास और भक्ति में बदलाव – लगभग 8वीं से 18वीं सदी में भारत में बहुत लोग प्यार भरी, सीधी पूजा की ओर मुड़े। भक्ति में भक्त एक भगवान से सीधे प्रेम करता है, महँगे कर्मकांड के बिना। तमिल अलवार (विष्णु के) और नयनार (शिव के) अपनी भाषा में गाते थे और जाति पर सवाल उठाते थे। कर्नाटक में बसवन्ना के वीरशैवों ने जाति और कर्मकांड ठुकराए। सूफ़ी मुसलमान संत थे जो प्रेम, पीर और संगीत से ख़ुदा के क़रीब जाना चाहते थे। चिश्ती सिलसिला बहुत लोकप्रिय हुआ। उत्तर में कबीर और गुरु नानक ने बिना रूप वाले ईश्वर की भक्ति की, और मीराबाई ने कृष्ण से प्रेम किया। इनके गीत आज भी गाए जाते हैं।
- एक साम्राज्य की राजधानी: विजयनगर (हम्पी) – विजयनगर यानी 'जीत का शहर'। यह 1336 से 1565 तक दक्षिण भारत के बड़े साम्राज्य की राजधानी थी। इसके खंडहर कर्नाटक में तुंगभद्रा नदी के किनारे हम्पी में हैं। शहर में मज़बूत दीवारों के कई घेरे थे, दीवारों के भीतर खेत थे, तालाबों और नहरों की समझदार व्यवस्था थी, बड़े चबूतरे वाला राजकीय केंद्र और ऊँचे मंदिर-द्वारों वाला धार्मिक केंद्र था। अब्दुर रज़्ज़ाक़, डोमिंगो पेस और फ़र्नाओ नूनिज़ जैसे विदेशी यात्रियों ने इसकी दौलत और बाज़ारों के बारे में लिखा। 1565 में तालीकोटा की लड़ाई के बाद शहर उजड़ गया। 1800 में कॉलिन मैकेंज़ी ने खंडहरों का नक़्शा बनाना शुरू किया।
- किसान, ज़मींदार और राज्य: मुग़ल साम्राज्य में खेतिहर समाज – 16वीं और 17वीं सदी में मुग़ल साम्राज्य के लगभग 85 प्रतिशत लोग गाँवों में रहते थे। किसान अनाज और नक़दी फ़सलें उगाते थे, बारिश, कुओं और नहरों के सहारे। गाँव में मुखिया वाली पंचायत होती थी। किसानों के ऊपर ज़मींदार थे, जो राजस्व वसूलते और क़िले व सैनिक रखते थे। मुग़ल राज्य भू-राजस्व लेता था, अक्सर फ़सल का लगभग एक-तिहाई, जिसे अधिकारी नापते और दर्ज करते थे। अबुल फ़ज़ल की आइन-ए-अकबरी हमारा मुख्य स्रोत है। यह ज़मीन को चार तरह में बाँटती है। मक्का और तंबाकू जैसी नई फ़सलों और दुनिया के व्यापार से आई चाँदी ने गाँव की ज़िंदगी बदली।
3. भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग-3
उपनिवेशवाद और देहात · विद्रोही और राज · महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन · संविधान का निर्माण
- उपनिवेशवाद और देहात – ईस्ट इंडिया कंपनी ज़मीन से पक्की कमाई चाहती थी। बंगाल में 1793 में स्थायी बंदोबस्त हुआ: ज़मींदार हमेशा के लिए तय रकम देगा। रकम बहुत ऊँची थी, इसलिए कई ज़मींदारियाँ नीलाम हुईं और गाँव के अमीर किसान, जोतदार, ताक़तवर बने। राजमहल की पहाड़ियों में अंग्रेज़ों ने संथालों को बसाया, 1832 में दामिन-इ-कोह की सीमा बनी, पहाड़िया लोग पीछे धकेले गए और 1855–56 में संथालों ने विद्रोह किया। बंबई दक्कन में रैयतवाड़ी से लगान सीधे किसान से लिया गया; कपास का उछाल (1861–65) गिरावट में बदला, कर्ज़ बढ़ा और 1875 में दक्कन दंगे हुए। यह सब हम पाँचवीं रिपोर्ट, बुकानन के सर्वे और दक्कन दंगा आयोग जैसे सरकारी अभिलेखों से जानते हैं, जिन्हें सावधानी से पढ़ना होता है।
- विद्रोही और राज: 1857 का विद्रोह – 10 मई 1857 को मेरठ के सिपाहियों ने बग़ावत की और दिल्ली जाकर बूढ़े मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र को नेता बनाया। विद्रोह छावनी से छावनी एक जैसे ढंग से फैला, जिससे योजना और आपसी संपर्क का पता चलता है। अवध सबसे मज़बूत केंद्र बना, क्योंकि 1856 के विलय से नवाब का दरबार, ताल्लुक़दार, सिपाही और किसान सब एक साथ चोट खाए थे। नाना साहब, रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हज़रत महल, कुँवर सिंह और शाह मल जैसे नेताओं ने अगुवाई की। विद्रोहियों की घोषणाओं में हिंदू-मुसलमान एकता और मुग़ल बादशाह का नाम था। अंग्रेज़ों ने सख़्त क़ानूनों और सेना से विद्रोह कुचल दिया। बाद में चित्रों ने इसे अलग-अलग ढंग से दिखाया: अंग्रेज़ी चित्रों में अंग्रेज़ नायक, राष्ट्रवादी चित्रों में वीर विद्रोही।
- महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन – गांधीजी 1915 में भारत लौटे। 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद में आम किसान और मज़दूर शामिल होने चाहिए। चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद के सत्याग्रहों से वे जाने गए। असहयोग आंदोलन (1920–22) में भारी संख्या में लोग जुड़े, और खादी, चरखा, सादा जीवन और आम बोली से गांधीजी जनता के नेता बने। 1930 की नमक यात्रा से सविनय अवज्ञा शुरू हुई; फिर गोलमेज़ सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौता (1931) हुए। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेज़ों से जाने को कहा। 1947 में आज़ादी मिली, साथ में बँटवारे का दर्द भी। गांधीजी अंतिम महीनों में शांति के लिए काम करते रहे और 30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या हुई। इतिहासकार यह सब भाषणों, अख़बारों, चिट्ठियों, आत्मकथा और पुलिस रिपोर्टों से जानते हैं, जिनका अपना-अपना नज़रिया है।
- संविधान का निर्माण – भारत का संविधान दिसंबर 1946 से नवंबर 1949 के बीच संविधान सभा ने बनाया, ऐसे समय में जब उम्मीद भी थी और हिंसा भी। सभा के सदस्य प्रांतीय विधानसभाओं ने चुने थे। 11 सत्रों में 165 दिन बैठकें हुईं और बहसें छपती थीं, ताकि जनता भी पढ़ सके। नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव रखा, डॉ. बी.आर. आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे और डॉ. राजेंद्र प्रसाद सभा के अध्यक्ष। बड़ी बहसें तीन थीं: अल्पसंख्यकों की रक्षा कैसे हो (पृथक निर्वाचिका ठुकराई गई, पर दलितों और आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटें रखी गईं), केंद्र और राज्यों को कितनी ताक़त मिले (तीन सूचियों के साथ मज़बूत केंद्र), और देश की भाषा क्या हो (देवनागरी में हिंदी राजभाषा, अंग्रेज़ी 15 साल और)। संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
4. मानचित्र कार्य
विषयों से संबंधित मानचित्र कार्य
- कक्षा 12 इतिहास मानचित्र कार्य: समय के साथ स्थान खोजें – कक्षा 12 इतिहास में मानचित्र का प्रश्न 5 अंक का होता है। आपको एक रेखा-मानचित्र मिलता है। उस पर जगहें अंकित करनी होती हैं और उनके नाम लिखने होते हैं। जगहें आपके पाठों से आती हैं: हड़प्पा के नगर, 16 महाजनपद, अशोक के अभिलेख, बौद्ध स्थल, विजयनगर और मुग़ल स्थान, और 1857 व राष्ट्रीय आंदोलन के केंद्र। तरीका आसान है। हर जगह को उसकी नदी, तट या पड़ोसी से याद रखिए। जगहों को युग के हिसाब से बाँटिए। फिर अंकित करना जल्दी और पक्का हो जाता है।
- कक्षा 12 भूगोल के लिए भारत मानचित्र कार्य (लोग और अर्थव्यवस्था) – कक्षा 12 के मानचित्र कार्य में आप 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' पुस्तक के स्थानों को भारत के रूपरेखा मानचित्र पर खोजकर नाम लिखते हैं: फ़सल क्षेत्र, खानें, तेल क्षेत्र, औद्योगिक केंद्र, पत्तन और हवाई अड्डे। पहले चिह्नों का संकेत सीखिए, फिर हर स्थान को एक सुराग (कौन-सा तट, नदी या पठार) से याद कीजिए, और साफ़-सुथरे ढंग से नाम सहित दर्शाने का अभ्यास कीजिए। केवल आधिकारिक रूपरेखा मानचित्र का उपयोग होता है; हम कोई सीमा नहीं बनाते।
- विश्व मानचित्र कार्य (कक्षा 12): कृषि क्षेत्र, रेलमार्ग टर्मिनल, पत्तन, हवाई अड्डे और जलमार्ग – कक्षा 12 के विश्व मानचित्र कार्य में आप रेखा-मानचित्र पर मानव भूगोल की चीज़ें अंकित करते हैं। संग्रहण घने वनों और ठंडे भागों में होता है; चलवासी पशुचारण शुष्क भूमि में; व्यापारिक पशुपालन, विस्तृत अनाज कृषि और मिश्रित कृषि शीतोष्ण घास के मैदानों और विकसित मैदानों में। चार पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग महाद्वीपों को एक तट से दूसरे तट तक पार करते हैं। समुद्री पत्तन तट पर होते हैं, हवाई अड्डे कहीं भी। स्वेज़ और पनामा नहरें महासागरों के बीच छोटे रास्ते हैं; राइन और सेंट लॉरेंस जहाज़ों को अंदर तक ले जाते हैं।