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विद्रोही और राज: 1857 का विद्रोह

10 मई 1857 को मेरठ के सिपाहियों ने बग़ावत की और दिल्ली जाकर बूढ़े मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र को नेता बनाया। विद्रोह छावनी से छावनी एक जैसे ढंग से फैला, जिससे योजना और आपसी संपर्क का पता चलता है। अवध सबसे मज़बूत केंद्र बना, क्योंकि 1856 के विलय से नवाब का दरबार, ताल्लुक़दार, सिपाही और किसान सब एक साथ चोट खाए थे। नाना साहब, रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हज़रत महल, कुँवर सिंह और शाह मल जैसे नेताओं ने अगुवाई की। विद्रोहियों की घोषणाओं में हिंदू-मुसलमान एकता और मुग़ल बादशाह का नाम था। अंग्रेज़ों ने सख़्त क़ानूनों और सेना से विद्रोह कुचल दिया। बाद में चित्रों ने इसे अलग-अलग ढंग से दिखाया: अंग्रेज़ी चित्रों में अंग्रेज़ नायक, राष्ट्रवादी चित्रों में वीर विद्रोही।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. सिपाहियों को चलते देखो। 10 मई 1857 को मेरठ के सिपाही उठ खड़े होते हैं और दिल्ली की ओर चलते हैं। अगली सुबह वे बूढ़े मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के पास पहुँचते हैं और उन्हें अपना नेता बनाते हैं।
  2. अब चार मीनारों को एक-एक करके जलते देखो। पहले इशारा, जैसे तोप या बिगुल। फिर शस्त्रागार पर क़ब्ज़ा। फिर ख़ज़ाना। फिर सरकारी इमारतें। बार-बार यही क्रम, यानी पहले से योजना थी।
  3. चार धाराएँ एक तालाब में मिलती हैं: अवध। अंग्रेज़ों ने 1856 में अवध ले लिया और नवाब को हटा दिया। ताल्लुक़दारों की ज़मीन और सेना छिनी। चर्बी वाले कारतूस की अफ़वाह फैली। हर किसी के पास ग़ुस्से की वजह थी।
  4. पाँच नेता एक हरे झंडे के नीचे खड़े होते हैं। घोषणाओं में कहा गया कि हिंदू और मुसलमान मुग़ल बादशाह के लिए साथ लड़ेंगे। फिर नीली दीवार उठती देखो: अंग्रेज़ सेना और सख़्त क़ानून लेकर लौटते हैं।
  5. दो तस्वीरों के फ़्रेम। बाएँ, अंग्रेज़ी चित्र अंग्रेज़ नायकों को बचाने और सज़ा देने वाला दिखाते हैं। दाएँ, राष्ट्रवादी चित्र रानी लक्ष्मीबाई जैसे वीरों को दिखाते हैं। एक घटना, दो नज़रिए।
  6. अब तुम्हारी बारी। स्लाइडर को महीने-दर-महीने चलाओ, मई 1857 से नवंबर 1858 तक। देखो विद्रोह कैसे उठा और कैसे दबाया गया।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या विद्रोह सिर्फ़ कारतूसों की वजह से हुआ?

नहीं। कारतूस की अफ़वाह बस चिंगारी थी। ज़मीन छिनना, ऊँचा लगान और अवध का विलय गहरे कारण थे। तीसरे चरण में एक नहीं, चार धाराएँ हैं।

सिपाही सबसे पहले दिल्ली क्यों गए?

मुग़ल बादशाह वहीं रहते थे और सब उनका सम्मान करते थे। पहला चरण मेरठ से दिल्ली की यात्रा दिखाता है।

हमें कैसे पता कि योजना थी?

कई शहरों में एक ही क्रम दोहराया गया। दूसरे चरण में चारों मीनारें उसी क्रम में जलती हैं।

हिंदू और मुसलमान साथ क्यों लड़े?

दोनों को अंग्रेज़ी राज से ख़तरा लगता था और दोनों ने मुग़ल बादशाह को साझा नेता माना। चौथे चरण में कई नेताओं के ऊपर एक झंडा है।

क्या 1857 के मशहूर चित्र सच्ची तस्वीरें हैं?

वे एक नज़रिया दिखाते हैं। पाँचवाँ चरण अंग्रेज़ी और राष्ट्रवादी फ़्रेम साथ रखता है।

विद्रोह कब ख़त्म हुआ?

1858 के अंत तक। छठे चरण के स्लाइडर से देखो: 1857 में दिल्ली वापस ली गई और नवंबर 1858 में रानी विक्टोरिया की घोषणा हुई।

विद्रोह कैसे शुरू हुआ और फैला

मेरठ से दिल्ली

10 मई 1857 को मेरठ छावनी के सिपाहियों (कंपनी की सेना के भारतीय सैनिक) ने बग़ावत की। छावनी यानी सेना की बस्ती। वे रात भर चलकर दिल्ली पहुँचे। 11 मई को लाल क़िले पर जाकर उन्होंने बहादुर शाह ज़फ़र से नेतृत्व माँगा। बूढ़े बादशाह मान गए। इससे विद्रोह को एक बड़ा नाम और केंद्र मिल गया।

फैलने का एक जैसा ढंग

एक के बाद एक शहर में यही क्रम दिखा:

सिपाहियों के बाद शहर और गाँव के लोग भी जुड़ जाते। वे उन साहूकारों और अमीरों पर हमला करते जो अंग्रेज़ों के साथ थे।

योजना के संकेत

अलग-अलग छावनियों के सिपाही एक-दूसरे से संपर्क में थे। संदेश एक छावनी से दूसरी जाते थे। रात में सिपाहियों की पंचायतें होती थीं जहाँ मिलकर फ़ैसले होते। रहस्यमय चपातियाँ गाँव-गाँव बाँटी गईं, जिन्हें बहुतों ने संकेत माना। यानी यह सिर्फ़ अचानक ग़ुस्सा नहीं था; संपर्क और योजना भी थी।

नेता और अनुयायी

नेता

अफ़वाहें और भविष्यवाणियाँ

अफ़वाह थी कि नई एनफ़ील्ड राइफ़ल के कारतूसों पर गाय और सुअर की चर्बी लगी है, और आटे में हड्डियों का चूरा मिलाया गया है। लोग मान गए क्योंकि उन्हें डर था कि अंग्रेज़ उनका धर्म और रीति-रिवाज तोड़ना चाहते हैं। एक भविष्यवाणी यह भी थी कि प्लासी की लड़ाई (1757) के सौ साल बाद अंग्रेज़ी राज ख़त्म हो जाएगा।

अवध में विद्रोह

अवध ही क्यों

गवर्नर-जनरल डलहौज़ी ने 1856 में अवध का विलय कर लिया, यह कहकर कि वहाँ शासन ख़राब है। लोकप्रिय नवाब वाजिद अली शाह को कलकत्ता भेज दिया गया। उनके दरबार के संगीतकार, रसोइए और सैनिक बेरोज़गार हो गए।

ताल्लुक़दार और किसान

ताल्लुक़दार बड़े ज़मींदार थे जिनके पास क़िले और छोटी सेनाएँ थीं। 1856 के एकमुश्त बंदोबस्त में अंग्रेज़ों ने उनकी सेनाएँ भंग कीं और बहुत-सी ज़मीन छीन ली। किसानों को ऊँचा लगान सीधे अंग्रेज़ों को देना पड़ा। कई सिपाही अवध के गाँवों से थे, इसलिए उनके परिवारों का दुख सेना तक पहुँचा। दरबार, ज़मींदार, किसान और सिपाही एक हो गए, इसलिए अवध सबसे लंबा लड़ा।

एकता का सपना और अंग्रेज़ों का दमन

विद्रोही क्या चाहते थे

विद्रोहियों की घोषणाओं (सार्वजनिक ऐलान) में सभी लोगों, हिंदू और मुसलमान, को मिलकर लड़ने को कहा गया। मुग़ल बादशाह का नाम इस्तेमाल हुआ, ताकि वह पुरानी दुनिया याद आए जिसे वे लौटाना चाहते थे। 1857 की आज़मगढ़ घोषणा में ज़मींदारों, व्यापारियों, सरकारी नौकरों, कारीगरों और धार्मिक लोगों की तकलीफ़ें लिखी गईं। विद्रोहियों ने अंग्रेज़ी राज और उसके साथियों, जैसे साहूकारों, को ठुकराया।

अंग्रेज़ों ने कैसे कुचला

मई–जून 1857 से अंग्रेज़ों ने ऐसे क़ानून बनाए जिनसे आम अंग्रेज़ भी शक के आधार पर बिना सामान्य मुक़दमे के सज़ा दे सकते थे। ब्रिटेन से सेना बुलाई गई। सितंबर 1857 में दिल्ली वापस ली गई। मार्च 1858 में लखनऊ गिरा। जून 1858 में रानी लक्ष्मीबाई लड़ते हुए शहीद हुईं। 1858 के अंत तक विद्रोह ख़त्म हुआ, और रानी विक्टोरिया की घोषणा से कंपनी का राज समाप्त हुआ।

विद्रोह की छवियाँ

अंग्रेज़ी चित्र

अंग्रेज़ चित्रकारों और कार्टूनिस्टों ने बहुत-सी तस्वीरें बनाईं। कुछ में घिरे अंग्रेज़ों को बचाने वाले अफ़सरों का गुणगान था, जैसे लखनऊ की राहत। कुछ में ख़तरे में घिरी अंग्रेज़ औरतें और बच्चे दिखाकर ग़ुस्सा भड़काया गया। कुछ में न्याय की देवी या ब्रिटिश शेर दिखाकर सज़ा की माँग की गई। इनमें अंग्रेज़ रक्षक और विद्रोही क्रूर दिखाए गए।

राष्ट्रवादी चित्र

20वीं सदी में राष्ट्रवादियों ने 1857 को पहला स्वतंत्रता संग्राम माना। चित्रों, कविताओं और गीतों में रानी लक्ष्मीबाई को घोड़े पर तलवार लिए, अन्यायी राज से लड़ती वीरांगना के रूप में दिखाया गया। इन छवियों ने आगे के स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरणा दी।

तस्वीर कैसे पढ़ें

तस्वीर सच का फ़ोटो नहीं होती। पूछो: किसने बनाई, किसके लिए, और वह कौन-सी भावना जगाना चाहती थी?

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. विद्रोह के बार-बार दोहराए गए क्रम से क्या पता चलता है?

कई शहरों में विद्रोही पहले इशारा करते, फिर शस्त्रागार, ख़ज़ाना और सरकारी इमारतों पर एक ही क्रम में क़ब्ज़ा करते। ऐसा दोहराव बताता है कि सिपाहियों में योजना और संपर्क था, यह सिर्फ़ अचानक ग़ुस्सा नहीं था।

2. अवध के विलय से वहाँ विद्रोह इतना मज़बूत क्यों हुआ?

इससे सब एक साथ आहत हुए: नवाब हटाए गए, दरबार के लोग बेरोज़गार हुए, ताल्लुक़दारों के क़िले और ज़मीन छिनी, किसानों पर ऊँचा लगान लगा और कई सिपाही अवध के ही थे। इसलिए सभी वर्ग एक हो गए।

3. विद्रोहियों ने बहादुर शाह ज़फ़र का नाम क्यों लिया?

मुग़ल बादशाह का हिंदू और मुसलमान दोनों सम्मान करते थे। उनके नाम से विद्रोह को वैधता (राज करने का हक़) और अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ एकता का भाव मिला।

4. 1857 के अंग्रेज़ी चित्रों ने लोगों की भावना कैसे मोड़ी?

उनमें अंग्रेज़ नायक अपने लोगों को बचाते और अंग्रेज़ औरतें-बच्चे असहाय दिखते थे। इससे ब्रिटेन के लोगों में ग़ुस्सा भड़का और विद्रोहियों को कड़ी सज़ा का समर्थन मिला।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. 1857 का विद्रोह कहाँ से शुरू हुआ?
2. विद्रोहियों ने किस मुग़ल बादशाह को नेता बनाया?
3. अंग्रेज़ों ने अवध का विलय कब किया?
4. बेगम हज़रत महल ने कहाँ विद्रोह की अगुवाई की?
5. 1857 की राष्ट्रवादी छवियों में अक्सर क्या दिखाया गया?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विद्रोही और राज अध्याय किस बारे में है?

1857 के विद्रोह के बारे में: यह कैसे शुरू हुआ और फैला, अवध क्यों उठा, नेता कौन थे, विद्रोही क्या चाहते थे, अंग्रेज़ों ने कैसे दबाया, और बाद में तस्वीरों ने इसे कैसे दिखाया।

1857 में 'एकता की परिकल्पना' क्या है?

विद्रोहियों का यह विचार कि हिंदू, मुसलमान और कई वर्ग मुग़ल बादशाह के नेतृत्व में मिलकर अंग्रेज़ी राज के ख़िलाफ़ लड़ेंगे।

1857 को पहला स्वतंत्रता संग्राम क्यों कहते हैं?

वी.डी. सावरकर जैसे बाद के राष्ट्रवादियों ने इसे यह नाम दिया, क्योंकि पहली बार बड़े पैमाने पर बहुत से भारतीयों ने मिलकर अंग्रेज़ी राज को चुनौती दी।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग-3

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