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राजा, किसान और नगर: आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ (लगभग 600 ई.पू. - 600 ई.)

लगभग 600 ई.पू. से 600 ई. के बीच उत्तर भारत में सोलह बड़े राज्य (महाजनपद) बने। मगध सबसे ताक़तवर बना और चंद्रगुप्त व अशोक के समय मौर्य साम्राज्य बना। बाद में कुषाण, सातवाहन और गुप्त आए, जिन्होंने बड़ी उपाधियाँ और प्रशस्तियाँ अपनाईं। किसानों से ज़्यादा उपज करवाई गई, भूमिदान फैले और नगरों में सिक्कों से व्यापार हुआ। यह सब ज़्यादातर अभिलेखों से पता चलता है, जिन्हें 1838 में जेम्स प्रिंसेप ने पहली बार पढ़ा।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. ब्लॉक गिनो: 16 बड़े राज्य, यानी महाजनपद, लगभग 600 ई.पू.। ज़्यादातर में राजा थे। कुछ में एक समूह शासन करता था, जिसे गण या संघ कहते हैं। लाल ब्लॉक मगध है।
  2. अब मगध को बढ़ते देखो। चार तीर चार कारण हैं: उपजाऊ ज़मीन, लोहे की खानें, जंगलों के हाथी और नावों के लिए गंगा नदी।
  3. यह मौर्य साम्राज्य है। बीच में राजधानी पाटलिपुत्र, चारों ओर चार प्रांतीय केंद्र। ऊँचा स्तंभ अशोक का है। उस पर उसने धम्म लिखा: दया करो, बड़ों का आदर करो, सब मतों का सम्मान करो।
  4. मौर्यों के बाद नए राजा आए। रेखा के साथ चलो। कुषाण राजा खुद को देवपुत्र कहते थे। गुप्त राजाओं के दरबारी कवि प्रशंसा-काव्य लिखते थे, जिसे प्रशस्ति कहते हैं।
  5. अब गाँव और नगर। लोहे का हल और धान की रोपाई से फ़सल बढ़ती है। राजा तांबे की पट्टी पर ज़मीन दान करते हैं। सिक्के, पहले चाँदी के आहत सिक्के और फिर सोने के, नगरों में व्यापार आसान करते हैं।
  6. अब तुम्हारी बारी। इस शिला पर ब्राह्मी अक्षर हैं। बटन दबाओ: प्रिंसेप ने कैसे पढ़ा, यह क्या बताता है और क्या नहीं बता सकता।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या सभी 16 राज्य एक जैसे थे?

नहीं। कुछ में राजा थे, कुछ में समूह (गण) शासन करता था। आकार और ताक़त भी अलग थी।

लोहा इतना ज़रूरी क्यों था?

लोहे से मज़बूत हल बने जिनसे ज़्यादा ज़मीन साफ़ करके खेती हुई, और सेना के लिए मज़बूत हथियार।

क्या धम्म एक धर्म था?

नहीं। यह सबके लिए नैतिक नियम थे, जैसे दया और सहनशीलता; किसी देवता की पूजा नहीं।

राजा प्रशंसा-काव्य क्यों चाहते थे?

यह दिखाने के लिए कि वे महान और शासन के योग्य हैं, ताकि प्रजा और विरोधी सम्मान करें।

ज़मीन दान क्यों दी जाती थी?

पुरोहितों और धार्मिक संस्थाओं का समर्थन पाने के लिए; इससे खेती नई ज़मीनों तक भी फैली हो सकती है।

कोई अनजानी लिपि कैसे पढ़ सकता है?

प्रिंसेप ने ऐसे सिक्के मिलाए जिन पर एक ही राजा का नाम यूनानी और अनजानी लिपि दोनों में था, और अक्षर पहचाने।

राजनीतिक बदलाव: जनपद से साम्राज्य तक

छठी सदी ई.पू. एक मोड़ है: आरंभिक राज्य, नगर, लोहे के औज़ार, सिक्के और बौद्ध व जैन जैसे नए धर्म।

सोलह महाजनपद

बौद्ध और जैन ग्रंथ 16 महाजनपदों की सूची देते हैं, जैसे वज्जि, मगध, कोशल, कुरु, पांचाल, गांधार और अवंति। ज़्यादातर में राजा थे। कुछ, जिन्हें गण या संघ कहते हैं, में पुरुषों का एक समूह शासन करता था (जैसे वज्जि)। हर एक की क़िलेबंद राजधानी थी। शासक कर और भेंट लेते और सेना रखते थे। ब्राह्मणों ने धर्मसूत्र लिखे, जिनमें राजा के नियम थे; आदर्श रूप से राजा क्षत्रिय होना चाहिए था।

मगध ताक़तवर क्यों बना

राजधानी: पहाड़ी क़िला राजगाह (राजगीर), बाद में चौथी सदी ई.पू. में पाटलिपुत्र (पटना)।

मौर्य साम्राज्य

चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 321 ई.पू. में इसकी नींव रखी। स्रोत: मेगस्थनीज़ का विवरण (इंडिका, टुकड़ों में), अर्थशास्त्र (जिसके भाग कौटिल्य से जुड़े हैं), बाद के बौद्ध, जैन व पौराणिक ग्रंथ, और अशोक के अभिलेख। पाँच बड़े राजनीतिक केंद्र: पाटलिपुत्र, तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि और सुवर्णगिरि। सेना के लिए छह उपसमितियों वाली एक समिति थी (नौसेना, यातायात, पैदल, घुड़सवार, रथ, हाथी)। राजधानी के पास नियंत्रण मज़बूत, दूर कमज़ोर था।

अशोक (अभिलेखों से जनता से बात करने वाला पहला शासक) ने धम्म फैलाया: बड़ों का आदर, दासों और सेवकों से अच्छा व्यवहार, ब्राह्मणों और भिक्षुओं को दान, और दूसरे धर्मों का सम्मान। धम्म महामात्त नाम के अधिकारी इसे फैलाते थे। 19वीं-20वीं सदी में इतिहासकारों ने मौर्यों को महान साम्राज्य माना, पर यह लगभग 150 साल ही चला।

राजत्व के नए विचार

आर्थिक बदलाव: किसान, भूमिदान और नगर

ज़्यादा उपज

राजाओं को ज़्यादा कर चाहिए था, इसलिए खेती बदली: उपजाऊ घाटियों में लोहे की फाल वाला हल, ज़्यादा उपज के लिए धान की रोपाई, सख़्त ज़मीन में कुदाल, और कुओं, तालाबों व कुछ नहरों से सिंचाई।

गाँव के समाज में अंतर

बौद्ध ग्रंथ गहपति (बड़े ज़मींदार), छोटे किसान और भूमिहीन मज़दूर (दास-कम्मकार) की बात करते हैं। तमिल ग्रंथों में वेल्लालर (ज़मींदार), उलवर (हलवाहे) और अदिमई (दास) हैं। गाँव के मुखिया का पद अक्सर वंशानुगत था।

भूमिदान

ईसवी सदी की शुरुआत से राजा भूमिदान देने लगे, ज़्यादातर धार्मिक संस्थाओं और ब्राह्मणों को, जिनका रिकॉर्ड तांबे की पट्टियों पर है। उदाहरण: रानी प्रभावती गुप्त का भूमिदान। इतिहासकारों में बहस है: दान से खेती नई ज़मीनों तक फैली, या यह राजाओं के कमज़ोर होने का संकेत था।

नगर और व्यापार

नगर नदियों और रास्तों पर बढ़े (पाटलिपुत्र, उज्जयिनी, पुहार)। शिल्पियों और व्यापारियों के संगठन श्रेणी काम संभालते थे। व्यापार रोम, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य एशिया तक था (मसाले, कपड़ा, रत्न)।

सिक्के

चाँदी और तांबे के आहत सिक्के (लगभग छठी सदी ई.पू.) सबसे पहले थे। हिंद-यूनानी राजाओं ने सिक्कों पर राजा के चित्र दिए; कुषाणों ने पहली बार बड़े पैमाने पर सोने के सिक्के चलाए; गुप्त सोने के सिक्के बहुत सुंदर हैं। यौधेय जैसे गणों ने भी सिक्के चलाए। छठी सदी के बाद सोने के सिक्के कम मिलने से कुछ लोग व्यापार घटने की बात कहते हैं।

अभिलेखों को पढ़ना

अभिलेख पत्थर, धातु या मिट्टी के बर्तन जैसी कठोर सतह पर खुदा लेख है। इसमें लिखा होता है किसने आदेश दिया, क्या हुआ और कभी-कभी तारीख़।

ब्राह्मी और खरोष्ठी पढ़ना

अशोक के ज़्यादातर अभिलेख प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि (बाएँ से दाएँ) में हैं। उत्तर-पश्चिम में खरोष्ठी (दाएँ से बाएँ) चलती थी। 1838 में जेम्स प्रिंसेप (ईस्ट इंडिया कंपनी की टकसाल के अधिकारी) ने इन्हें पढ़ा; उन सिक्कों से मदद मिली जिन पर एक ही राजा का नाम यूनानी और खरोष्ठी दोनों में था। ज़्यादातर अभिलेख राजा को देवानांपिय पियदस्सी (देवताओं का प्रिय, देखने में सुंदर) कहते हैं; कुछ में सीधे अशोक नाम है, जिससे पहचान पक्की हुई।

इतिहासकार कैसे पढ़ते हैं

कोष्ठक के शब्द अनुवादक जोड़ते हैं; 'देवताओं का प्रिय' जैसी बातें उपाधियाँ हैं। इतिहासकार अभिलेखों को ग्रंथों और सिक्कों से मिलाते हैं।

अभिलेखों की सीमाएँ

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. मगध के सबसे ताक़तवर महाजनपद बनने के चार कारण बताओ।

1. गंगा घाटी की उपजाऊ ज़मीन से बड़ी फ़सल और कर। 2. पास की लोहे की खानों से औज़ार और हथियार। 3. जंगलों से सेना के लिए हाथी। 4. गंगा से सस्ता आवागमन। साथ ही महत्वाकांक्षी राजाओं और मंत्रियों ने इनका अच्छा उपयोग किया।

2. कैसे पता चला कि अभिलेखों का 'पियदस्सी' अशोक है?

चरण 1: ज़्यादातर अभिलेख केवल उपाधि देवानांपिय पियदस्सी लिखते हैं। चरण 2: कुछ अभिलेखों (जैसे मास्की) में उपाधि के साथ अशोक नाम भी है। चरण 3: ग्रंथ भी अशोक का वर्णन करते हैं। तो उपाधियाँ अशोक की हैं।

3. प्रशस्ति साधारण ऐतिहासिक रिकॉर्ड से कैसे अलग है?

प्रशस्ति दरबारी कवि राजा की प्रशंसा में लिखता है, इसलिए राजा को वीर, दानी और अजेय दिखाती है। इतिहासकार को इसे सावधानी से, सिक्कों और दूसरे स्रोतों से मिलाकर पढ़ना चाहिए, क्योंकि इसमें हार और समस्याएँ छिप जाती हैं।

4. भूमिदान पर इतिहासकारों में बहस क्यों है?

मत 1: दान से खेती जंगल और नई ज़मीनों तक फैली, क्योंकि ब्राह्मण वहाँ बसे। मत 2: दान दिखाते हैं कि राजा कमज़ोर थे और स्थानीय ताक़तवर लोगों का समर्थन पाने के लिए ज़मीन देते थे। दोनों के सबूत हैं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. बौद्ध और जैन ग्रंथों में कितने महाजनपद हैं?
2. मगध के उदय का कारण कौन-सा नहीं था?
3. 1838 में ब्राह्मी किसने पढ़ी?
4. इलाहाबाद स्तंभ प्रशस्ति किसकी प्रशंसा करती है?
5. कुषाण राजा कौन-सी उपाधि लेते थे?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मगध के उदय के मुख्य कारण क्या हैं?

उपजाऊ ज़मीन, लोहे की खानें, हाथी, आवागमन के लिए गंगा और महत्वाकांक्षी राजा व मंत्री।

अशोक का धम्म क्या था?

एक नैतिक संहिता: बड़ों का आदर, सेवकों और सभी जीवों पर दया, दान और दूसरे मतों का सम्मान।

प्रशस्ति क्या है?

दरबारी कवि द्वारा राजा की प्रशंसा में लिखी कविता, जैसे हरिषेण की समुद्रगुप्त प्रशस्ति।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग-1

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