वैदिक युग: ग्रंथ, शासन और सामाजिक व्यवस्था
ग्रंथ
वेद भारत के सबसे पुराने ग्रंथ हैं, पुरानी संस्कृत में। ये चार हैं: ऋग्वेद (स्तुति के मंत्र), सामवेद (सुर में गाए मंत्र), यजुर्वेद (यज्ञ के वचन) और अथर्ववेद (उपचार और रोज़मर्रा का जीवन)। ऋग्वेद को आमतौर पर ई.पू. दूसरी सहस्राब्दी का माना जाता है, पर सही तारीख़ पर विद्वानों में चर्चा है। बाद में ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद आए, जो आत्मा और संसार पर गहरे सवाल पूछते हैं।
सदियों तक वेद लिखे नहीं गए। ये मौखिक परंपरा से आगे बढ़े: शिष्य हर ध्वनि ख़ास तरीकों से याद करते (शब्द-शब्द, जोड़ी में, उल्टा), ताकि कोई शब्द न बदले। यूनेस्को ने वैदिक पाठ को अमूर्त विरासत माना है।
शासन
लोग जन (कबीलों) में रहते थे। मुखिया राजन कहलाता। वह युद्ध में आगे रहता और मवेशियों की रक्षा करता, जो मुख्य धन थे। वह सर्वशक्तिमान नहीं था। दो सभाएँ मदद करतीं:
- सभा: बुज़ुर्गों और ख़ास लोगों की छोटी परिषद।
- समिति: लोगों की बड़ी सभा।
कभी-कभी समिति राजन चुनने में मदद करती। पुरोहित सलाह देते और यज्ञ करते।
सामाजिक व्यवस्था
ग्रंथों में चार वर्ण (काम के हिसाब से समूह) बताए गए: ब्राह्मण (पुरोहित, शिक्षक), क्षत्रिय (शासक, योद्धा), वैश्य (किसान, पशुपालक, व्यापारी) और शूद्र (सेवा करने वाले)। शुरू में यह लचीला था; बाद में जन्म से जुड़कर कठोर हुआ और बहुत लोगों के साथ अन्याय हुआ। चार आश्रम (जीवन के चरण) भी बताए गए: ब्रह्मचर्य (छात्र), गृहस्थ, वानप्रस्थ (वन की ओर) और संन्यास। गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी महिलाएँ याद की जाती हैं।
जनपद से साम्राज्य तक
लगभग 600 ई.पू. से लोहे के औज़ारों से किसानों ने गंगा के मैदान में जंगल साफ़ किए और ज़्यादा अनाज उगाया। जन बसकर जनपद बने (जहाँ जन ने पैर रखे)। कुछ बढ़कर 16 महाजनपद बने, जैसे मगध, कोसल, वत्स, अवंति, कुरु, वज्जि।
ज़्यादातर में राजा थे। कुछ, जैसे वज्जि और शाक्य, गण या संघ थे: कई लोग सभा में मिलकर फ़ैसले करते।
मगध सबसे ताक़तवर क्यों बना
- गंगा और सोन के पास उपजाऊ ज़मीन
- पास में लोहे की खानें
- जंगलों से सेना के लिए हाथी
- यातायात के लिए नदियाँ
- बिंबिसार, अजातशत्रु, महापद्म नंद जैसे महत्वाकांक्षी राजा
मौर्य प्रशासन
चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 321 ई.पू. में अपने सलाहकार कौटिल्य (चाणक्य) की मदद से मौर्य साम्राज्य बनाया। कौटिल्य का अर्थशास्त्र बताता है कि राज्य कैसे चले: कर, सेना, गुप्तचर, न्याय और ख़ज़ाना। यूनानी दूत मेगस्थनीज़ ने राजधानी पाटलिपुत्र के बारे में लिखा।
- बीच में राजा, मंत्री और परिषद।
- साम्राज्य प्रांतों में बँटा, जहाँ राजकुमार राज्यपाल होते (जैसे तक्षशिला, उज्जैन)।
- अधिकारी कर लेते (अक्सर फ़सल का छठा भाग), सड़कें और बाज़ार, बाट-माप देखते।
- गुप्तचर राजा को ख़बर देते।
अशोक (लगभग 268–232 ई.पू.) ने कलिंग का ख़ूनी युद्ध लड़ा और फिर धम्म चुना: बड़ों का आदर, जानवरों और सेवकों पर दया, सब धर्मों का सम्मान। उसने अपने संदेश चट्टानों और स्तंभों पर प्राकृत में, ज़्यादातर ब्राह्मी लिपि में खुदवाए और धम्म-महामात्त भेजे।
1000 ई. तक के बाद के राज्य
गुप्त (लगभग 320 ई. से) सामंतों के ज़रिए शासन करते और भूमि-दान देते। हर्षवर्धन, पल्लव, चालुक्य, राष्ट्रकूट आए। चोलों (9वीं सदी से) के गाँवों में सभा और उर नाम की सभाएँ थीं; उत्तरमेरूर के शिलालेख बताते हैं कि ताड़-पत्र पर नाम लिखकर घड़े से पर्ची निकालकर सदस्य चुने जाते।
ज्ञान परंपराएँ और संस्थाएँ
भारत में पढ़ाई से बहुत प्रेम था। छात्र गुरुकुल में गुरु के साथ रहते, सुनते, दोहराते और बहस करते। बौद्ध और जैन मठ भी पढ़ाई की जगह थे।
बड़े शिक्षा केंद्र
- तक्षशिला: बहुत पुराना केंद्र; दूर-दूर से छात्र चिकित्सा, क़ानून, धनुर्विद्या पढ़ने आते।
- नालंदा (बिहार): 5वीं सदी ई. से गुप्तों और बाद के राजाओं के समय बढ़ा। कई मठ, कक्षाएँ और विशाल पुस्तकालय। चीनी यात्री ह्वेनसांग (श्वेनत्सांग) ने यहाँ पढ़ाई की।
- विक्रमशिला (बिहार) और वलभी (गुजरात)।
- दक्षिण में मंदिर-विद्यालय घटिका।
क्या पढ़ा जाता था
- व्याकरण: पाणिनि की अष्टाध्यायी।
- गणित-खगोल: आर्यभट, ब्रह्मगुप्त।
- चिकित्सा: चरक और सुश्रुत।
- राज-काज: अर्थशास्त्र; तर्क और दर्शन।
- संस्कृत, प्राकृत और तमिल (संगम कविताएँ) साहित्य।
व्यापार मार्ग, श्रेणियाँ और शिल्प
ज़्यादा अनाज और बड़े नगरों से व्यापार बढ़ा। दो बड़े स्थल-मार्ग थे:
- उत्तरापथ: उत्तर-पश्चिम (तक्षशिला) से गंगा के मैदान होते हुए पूर्व तक।
- दक्षिणापथ: दक्कन और दक्षिण की ओर।
नदियाँ और तट भी रास्ते थे। भरुच, ताम्रलिप्ति, अरिकामेडु, मुज़िरिस जैसे बंदरगाह समुद्र पार के देशों से जोड़ते।
सिक्के
लगभग 500 ई.पू. से चाँदी-ताँबे के आहत सिक्के (पंच-मार्क्ड), जिन पर चिह्न ठोंके जाते, ख़रीद-बिक्री आसान करते। बाद में राजाओं के नाम वाले सिक्के आए; गुप्तों के सोने के सुंदर सिक्के प्रसिद्ध हैं।
श्रेणी (गिल्ड)
एक ही काम करने वाले कारीगर या व्यापारी मिलकर श्रेणी बनाते। श्रेणी:
- सदस्यों को सिखाती, गुणवत्ता और दाम ठीक रखती,
- आपसी झगड़े सुलझाती,
- बैंक जैसा काम करती: लोग पैसा जमा करते और श्रेणी ब्याज देती,
- मंदिरों और मठों को दान देती (शिलालेखों में दर्ज)।
शिल्प
बारीक सूती कपड़ा, रेशम, मनके, हाथी-दाँत, उत्तरी काली पॉलिश वाले बर्तन, लोहे के औज़ार और दिल्ली का जंग न लगने वाला लौह स्तंभ (गुप्त काल) कारीगरी दिखाते हैं।
करके देखें
3D के आख़िरी चरण में पहले 1 श्रेणी, फिर 5 श्रेणियाँ रखो। पहले अंदाज़ा लगाओ: व्यापार मार्ग पर गाड़ियाँ कितनी होंगी? घर पर: अपने इलाके में एक ही काम करने वाले 5 लोगों (दर्ज़ी, दुकानदार) की सूची बनाओ। क्या उनका कोई संघ है? उसकी तुलना श्रेणी से करो: प्रशिक्षण, उचित दाम, झगड़े सुलझाना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 4 वेद: ऋग, साम, यजुर, अथर्व
- सभा = बुज़ुर्गों की परिषद; समिति = लोगों की सभा
- जन → जनपद → 16 महाजनपद → मगध → मौर्य साम्राज्य (लगभग 321 ई.पू.)
- अर्थशास्त्र = कौटिल्य का राज-काज ग्रंथ
- अशोक: कलिंग युद्ध → धम्म, शिला और स्तंभ लेख
- श्रेणी = गिल्ड; उत्तरापथ और दक्षिणापथ = मुख्य स्थल-मार्ग
हल किए गए उदाहरण
1. बिना लिखे वेद सैकड़ों साल कैसे बचे रहे?
शिष्य उन्हें कई तरीकों से (शब्द-शब्द, जोड़ी में, आगे-पीछे) ठीक-ठीक याद करते, ताकि कोई ग़लती पकड़ में आ जाए। यह मौखिक परंपरा गुरु से शिष्य तक चली।
2. मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद क्यों बना? चार कारण।
उपजाऊ गंगा मैदान, पास में लोहे की खानें, सेना के लिए हाथी, यातायात के लिए नदियाँ, और ताक़तवर राजा।
3. उत्तरमेरूर में चोल ग्राम-सभा का सदस्य कैसे चुना जाता?
योग्य लोगों के नाम ताड़-पत्र पर लिखकर घड़े में डाले जाते और एक बच्चा एक पर्ची निकालता। यह नियमों वाली लॉटरी थी।
4. श्रेणी के तीन काम बताओ।
प्रशिक्षण और गुणवत्ता, झगड़े सुलझाना, और बैंक जैसा काम (जमा लेना, ब्याज देना)।
5. अशोक ने लगभग 268–232 ई.पू. राज किया। कितने साल?
268 − 232 = 36 साल।
आम गलतियाँ
- सोचना कि शुरुआती वैदिक राजन सर्वशक्तिमान सम्राट था। वह सभा-समिति की सलाह वाला मुखिया था।
- सभा (छोटी परिषद) और समिति (बड़ी सभा) को उलट देना।
- सोचना कि हर महाजनपद में राजा था। वज्जि जैसे गण सभा से चलते थे।
- कहना कि नालंदा मौर्यों ने बनाया। यह 5वीं सदी ई. से गुप्तों और बाद के राजाओं के समय बढ़ा।