विजयनगर: शहर और साम्राज्य
विजयनगर का मतलब है 'जीत का शहर'। इसे 1336 में दो भाइयों हरिहर और बुक्का ने बसाया। चार वंशों ने राज किया: संगम, सालुव, तुलुव और अराविडु। शासक राय कहलाते थे। सबसे मशहूर कृष्णदेव राय (तुलुव, 1509 से 1529) ने राज्य बढ़ाया, मंदिर बनवाए और शासन पर तेलुगु ग्रंथ अमुक्तमाल्यद लिखा।
पड़ोसी और युद्ध
रायों की दक्कन की सल्तनतों और ओडिशा के गजपतियों से उपजाऊ नदी-घाटियों और व्यापार के लिए होड़ थी। घुड़सेना के लिए वे अरब और पुर्तगाली व्यापारियों से बढ़िया घोड़े ख़रीदते थे। 1565 में तालीकोटा (राक्षसी-तंगड़ी) की लड़ाई में सुल्तानों ने विजयनगर की सेना हराई, शहर लूटा गया और उजड़ गया।
अमर-नायक
नायक सेना के सरदार थे। अमर-नायकों को शासन के लिए इलाक़े (अमरम्) मिलते थे। वे कर वसूलते, राजा के लिए सैनिक और घोड़े रखते और राय को हिस्सा भेजते। समय के साथ कुछ बहुत ताक़तवर और स्वतंत्र हो गए।
फिर से खोज
1800 में ईस्ट इंडिया कंपनी के इंजीनियर कॉलिन मैकेंज़ी ने हम्पी का पहला सर्वे नक़्शा बनाया। बाद में फ़ोटोग्राफ़रों और विद्वानों ने इमारतें और अभिलेख दर्ज किए।
नगर योजना: दीवारें, हिस्से और सड़कें
शहर पथरीले, सूखे इलाक़े में था, एक तरफ़ नदी। योजनाकारों ने पहाड़ियों को प्राकृतिक दीवार की तरह इस्तेमाल किया।
- क़िलेबंदी: फ़ारसी दूत अब्दुर रज़्ज़ाक़ ने क़िलों की सात पंक्तियाँ बताईं। दीवारें तराशे पत्थरों से, बिना गारे के बनी थीं।
- भीतर खेत: बाहरी दीवारों के भीतर खेत, बाग़ और बगीचे थे, ताकि घेराबंदी में भी खाना मिले।
- द्वार: मेहराब और गुंबद वाले, जिन पर सल्तनत की इमारतों का असर है। यह शैली इंडो-इस्लामिक कहलाती है।
- हिस्से: सड़कों और घरों वाला शहरी हिस्सा, दक्षिण-पश्चिम में राजकीय केंद्र, और उत्तर में नदी के पास धार्मिक केंद्र।
- सड़कें पहाड़ियों के बीच घूमकर द्वारों और बाज़ारों तक जाती थीं। मंदिरों के सामने चौड़े बाज़ार थे।
- आम लोगों के घर कम बचे हैं, पर मिट्टी के बर्तन बताते हैं लोग कहाँ रहते थे। यात्रियों ने फूल, फल, कपड़े और रत्न बेचते भीड़ भरे बाज़ार बताए।
जल प्रबंधन
यहाँ बारिश कम होती है और सूखा मौसम लंबा है। इसलिए पानी जमा करना सबसे ज़रूरी था।
- तुंगभद्रा नदी पथरीली घाटी से उत्तर-पूर्व की ओर बहती है। पहाड़ियों से कई धाराएँ इसमें मिलती हैं।
- धाराओं पर बाँध (तटबंध) बनाकर तालाब बनाए गए।
- कमलापुरम तालाब (15वीं सदी की शुरुआत) का पानी पास के खेतों को सींचता और नालियों से राजकीय केंद्र तक जाता।
- हिरिया नहर तुंगभद्रा के बाँध से पानी घाटी के खेतों तक ले जाती। इसे शायद संगम राजाओं ने बनवाया।
- कृष्णदेव राय ने भी तालाब बनवाया; डोमिंगो पेस ने हज़ारों मज़दूरों को इसे बनाते देखा।
वास्तुकला: राजकीय केंद्र
राजकीय केंद्र में 60 से ज़्यादा मंदिर थे, यानी राजा देवताओं का आशीर्वाद पास रखना चाहते थे।
- राजा का महल: सबसे बड़ा घेरा, जिसमें दो बड़े चबूतरे: दरबार का हॉल और महानवमी डिब्बा।
- महानवमी डिब्बा: विशाल चबूतरा (नीचे लगभग 11,000 वर्ग फ़ुट, 40 फ़ुट ऊँचा) जिसकी दीवारों पर नक़्क़ाशी है। यहाँ से राजा नौ रात का महानवमी उत्सव देखता: जुलूस, घोड़े, हाथी, संगीत और सेना का निरीक्षण। इससे उसकी ताक़त और दौलत दिखती थी।
- कमल महल: मेहराबों वाली सुंदर इमारत। इसका उपयोग पक्का नहीं; शायद सलाह-सभा का भवन।
- हज़ार राम मंदिर: शायद सिर्फ़ राजा और परिवार के लिए। दीवारों पर रामायण के दृश्य।
- पास में हाथियों के अस्तबल।
वास्तुकला: धार्मिक केंद्र और मंदिर
धार्मिक केंद्र तुंगभद्रा के पथरीले उत्तरी किनारे पर है। स्थानीय कथाओं के अनुसार इन पहाड़ियों में रामायण का वानर राज्य था, और स्थानीय देवी पम्पादेवी ने शिव के रूप विरुपाक्ष से विवाह किया।
मंदिर की ख़ास बातें
- राय गोपुरम: बहुत ऊँचे शाही द्वार, अक्सर भीतर के मंदिर से भी ऊँचे। दूर से राजा की ताक़त दिखाते।
- मंडप: खंभों वाले हॉल, खंभों पर घोड़े, नर्तक और देवता खुदे।
- मंदिर के चारों ओर लंबे खंभेदार गलियारे।
- रथ गली: गोपुरम से निकलती चौड़ी सड़क, दोनों तरफ़ खंभेदार विश्राम घर, रथ उत्सव के लिए।
दो मशहूर मंदिर
- विरुपाक्ष मंदिर: सदियों में बढ़ा। कृष्णदेव राय ने राज्याभिषेक की याद में हॉल और गोपुरम जोड़ा।
- विट्ठल मंदिर: विट्ठल, विष्णु का रूप जो महाराष्ट्र में पूजा जाता है। इसमें पत्थर का रथ और 'संगीत' वाले खंभे हैं।
इतना क्यों बनाया? राजा ख़ुद को देवता से जोड़ते थे (विरुपाक्ष की ओर से राज), मंदिरों के जाल से समर्थन मिलता था, और मंदिर ज़मीन व व्यापार भी संभालते थे।
विजयनगर पर यात्रियों के विवरण
- निकोलो दे कोंती (इटली, 1420 के दशक): विशाल, भीड़ भरे शहर का वर्णन।
- अब्दुर रज़्ज़ाक़ (फ़ारस, 1440 के दशक): दूत; क़िलों की सात पंक्तियाँ और रत्न-फूलों से भरे बाज़ार।
- अफ़ानासी निकितिन (रूस, 15वीं सदी): दक्कन और उसके व्यापार पर।
- दुआर्ते बारबोसा (पुर्तगाल, 16वीं सदी की शुरुआत): व्यापार और समाज।
- डोमिंगो पेस (पुर्तगाल, 1520 के दशक): राजकीय केंद्र, महानवमी उत्सव और बनता तालाब। उसने शहर को रोम जितना बड़ा कहा।
- फ़र्नाओ नूनिज़ (पुर्तगाल, 1530 के दशक): वंश का इतिहास और राजमहल।
इतिहासकार इन विवरणों को अभिलेखों और खंडहरों से मिलाते हैं। यात्री बढ़ा-चढ़ा सकते थे, पर कई बातें (क़िले, तालाब) आज भी दिखती हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्थापना 1336 (हरिहर, बुक्का); तालीकोटा का युद्ध 1565
- वंश: संगम → सालुव → तुलुव → अराविडु
- कृष्णदेव राय: 1509 से 1529, तुलुव वंश
- राजकीय केंद्र: महानवमी डिब्बा, कमल महल, हज़ार राम मंदिर
- धार्मिक केंद्र: विरुपाक्ष, विट्ठल; राय गोपुरम = शाही द्वार
- पानी: तुंगभद्रा नदी, कमलापुरम तालाब, हिरिया नहर
हल किए गए उदाहरण
1. विजयनगर ने खेत दीवारों के भीतर क्यों रखे?
चरण 1: दुश्मन घेराबंदी करके शहर को भूखा मारते थे। चरण 2: बाहरी दीवारों के भीतर खेत-बाग़ खाना देते। चरण 3: तालाब का पानी उन्हें सींचता। इसलिए शहर देर तक टिक सकता था।
2. विजयनगर कितने साल राजधानी रहा?
चरण 1: स्थापना 1336। चरण 2: 1565 के बाद उजड़ा। चरण 3: 1565 - 1336 = 229 साल।
3. कमलापुरम तालाब ने शहर की मदद कैसे की?
चरण 1: बारिश और धाराएँ तालाब भरतीं। चरण 2: नालियाँ पास के खेतों तक पानी ले जातीं। चरण 3: एक नाली राजकीय केंद्र तक जाती। सूखे मौसम में भी पानी मिलता।
4. राय गोपुरम इतने ऊँचे क्यों थे?
चरण 1: इन्हें राजाओं ने बनवाया। चरण 2: दूर से ये मंदिर और राजा की ताक़त का संकेत देते। चरण 3: अक्सर भीतर के मंदिर से ऊँचे। यानी ये शाही अधिकार का संदेश थे।
आम गलतियाँ
- हम्पी को अलग शहर मानना। हम्पी विजयनगर के खंडहरों का नाम है।
- महानवमी डिब्बा को मंदिर कहना। यह राजा के उत्सव का चबूतरा था।
- राजकीय और धार्मिक केंद्र उलटना। राजकीय = महल और चबूतरे; धार्मिक = नदी के पास बड़े मंदिर।
- यात्रियों की संख्याएँ पूरी मान लेना। खंडहरों और अभिलेखों से मिलाओ।