आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय पहचान क्या हैं?
आधुनिकीकरण यानी ज़्यादातर खेती वाले, स्थानीय समाज से उद्योग वाले, शहरी समाज की ओर बढ़ना, जिसमें सबके लिए स्कूल, तेज़ संचार और मज़बूत राज्य हो। यह पश्चिमी यूरोप से शुरू हुआ और 19वीं-20वीं सदी में पूरी दुनिया में फैला।
राष्ट्रीय पहचान यह साझा एहसास है कि "हम" एक समुदाय हैं जिनकी भाषा, इतिहास, प्रतीक और भविष्य साझा है। यह जन्म से अपने-आप नहीं आती। इसे बनाना पड़ता है, और आधुनिकीकरण ने औज़ार दिए: छपाई, स्कूल, अखबार, रेल और सेनाएँ।
राष्ट्रीय आंदोलन पाठ में तुम देखते हो कि राष्ट्रों ने स्वशासन कैसे माँगा। यहाँ हम संस्कृति वाला पक्ष देखते हैं: विचार, नीतियाँ और पहचानें।
सांस्कृतिक धाराएँ: प्रबोधन, रोमांटिकवाद, आधुनिकतावादी और परंपरावादी
सांस्कृतिक धारा उन विचारों की लहर है जिन्हें बहुत से लेखक, कलाकार और विचारक साझा करते हैं।
- प्रबोधन (18वीं सदी): तर्क, विज्ञान, सबके लिए शिक्षा और बराबर अधिकारों पर भरोसा। इसने आधुनिकीकरण चाहने वालों को लक्ष्य दिए।
- रोमांटिकवाद (19वीं सदी की शुरुआत): भावनाओं, प्रकृति, लोकगीतों, पुरानी गाथाओं और "जनता की आत्मा" से प्रेम। लेखकों ने लोककथाएँ और गीत इकट्ठे किए और राष्ट्रीय भाषा को खज़ाना माना। उदाहरण: ग्रिम भाइयों की परीकथाएँ (1812) और फिनलैंड का महाकाव्य कालेवाला, जिसे एलियास लोन्रोट ने लोक-कविताओं से जोड़ा (पहला रूप 1835)।
- उदारवादी और राष्ट्रीय विचार: राष्ट्र को खुद पर शासन करना चाहिए और नागरिकों के अधिकार होने चाहिए।
- आधुनिकतावाद (19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी में): कला, साहित्य, संगीत और वास्तुकला की नई शैलियाँ जिन्होंने पुराने रूप तोड़े।
लगभग हर देश में लोग दो समूहों में बँटे: आधुनिकतावादी, जो ज़्यादा उन्नत राज्यों के स्कूल, कानून और उद्योग की नकल करना चाहते थे, और परंपरावादी, जो पुराने मूल्य, धर्म और गाँव का जीवन बचाना चाहते थे। ज़्यादातर समाजों में उधार और स्थानीय चीज़ों का मेल बना, ठीक 3D के नीले और नारंगी ब्लॉकों की तरह।
सांस्कृतिक नीतियाँ: राज्य संस्कृति को कैसे ढालते हैं
सांस्कृतिक नीति वह है जो सरकार भाषा, शिक्षा, कला और स्मृति को ढालने के लिए जान-बूझकर करती है। आम औज़ार:
- मानक भाषा और लिपि। सब इलाकों के लिए एक लिखित रूप। 1928 में तुर्की ने पढ़ाई बढ़ाने के लिए लैटिन लिपि अपनाई; 1800 के मध्य में रोमानियाई क्षेत्रों ने भी सिरिलिक से लैटिन लिपि की ओर बदलाव किया।
- स्कूल। जापान के 1872 के शिक्षा आदेश ने सभी बच्चों के लिए पढ़ाई शुरू की। स्कूल एक भाषा, एक इतिहास और एक तरह के नायक सिखाते हैं।
- अकादमियाँ, पुस्तकालय, संग्रहालय, रंगमंच। विद्वत समितियाँ शब्दकोश और व्याकरण लिखती हैं (रोमानियाई अकादमी 1860 के दशक में शुरू हुई; ग्रिम शब्दकोश 1838 में शुरू हुआ)। संग्रहालय "हमारी" चीज़ें दिखाते हैं और राष्ट्रीय रंगमंच "हमारे" नाटक करता है।
- प्रतीक और कैलेंडर। झंडे, गान, राष्ट्रीय छुट्टियाँ और मूर्तियाँ।
- प्रेस और मीडिया। अखबार, बाद में रेडियो और टेलीविज़न।
सांस्कृतिक नीति लोगों को शामिल कर सकती है (सबको स्कूल और आवाज़ मिले) या बाहर कर सकती है (अल्पसंख्यक भाषा पर रोक, या ऐसा राज्य जो सेंसरशिप और प्रचार से लोगों की सोच काबू में रखे)। हमेशा पूछो: फायदा किसे है, और कौन छूट गया?
राष्ट्रीय और यूरोपीय पहचानें
बहुत से राष्ट्र खुद को अकेला नहीं देखते थे। 1800 और 1900 के दशकों में यूरोप के किनारे के कई समाज खुद को यूरोपीय सभ्यता का पूरा सदस्य दिखाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने यूरोपीय कानून, स्कूल और कला अपनाई और साथ ही अपनी लोक संस्कृति पर ज़ोर भी दिया। दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोपीय देशों ने साझा संस्थाएँ बनाईं: यूरोप परिषद (1949), यूरोपीय समुदाय (1957) और यूरोपीय संघ (1993)।
इसलिए आज एक व्यक्ति की परतदार पहचानें हो सकती हैं: स्थानीय (मेरा शहर), क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और यूरोपीय (और वैश्विक भी)। ये परतें एक-दूसरे को नहीं काटतीं। यूरोपीय पहचान आम तौर पर राष्ट्रीय पहचान के ऊपर बनती है, जिसमें मानव अधिकार, लोकतंत्र और कानून के राज जैसे साझा मूल्य, साझा इतिहास, यात्रा, पढ़ाई और व्यापार शामिल हैं।
बहस जारी है: कुछ लोग मानते हैं कि यूरोपीय पहचान राष्ट्र को समृद्ध करती है; दूसरों को चिंता है कि वह उसे कमज़ोर करती है। निष्पक्ष नज़र दोनों पक्ष देखती है।
विदेश में संस्कृति: सीमा पार बसे समुदाय
जब लोग काम, पढ़ाई या सुरक्षा के लिए विदेश जाते हैं, तो वे प्रवासी समुदाय (डायस्पोरा) बनाते हैं। वे नई जगहों में भाषा, खाना, त्योहार और कहानियाँ ले जाते हैं और नए विचार घर भी लाते हैं।
- विदेश में रहने वाले कलाकार और विद्वान राष्ट्र की संस्कृति को मशहूर कर सकते हैं। जैसे मूर्तिकार कॉन्स्टेंटिन ब्रांकुशी (रोमानियाई, 1904 से ज़्यादातर पेरिस में) और संगीतकार जॉर्ज एनेस्कू ने रोमानियाई लोक धुनों को ऐसे काम में इस्तेमाल किया जो पूरे यूरोप में देखा-सुना गया।
- विदेश में पढ़ने या काम करने वाले नए विचार वापस लाते हैं। मोहनदास गांधी 1893 से 1914 तक दक्षिण अफ्रीका में रहे और वहाँ शांतिपूर्ण विरोध के तरीके बनाए जो उन्होंने बाद में भारत में अपनाए।
- विदेशी समुदाय अपनी भाषा में स्कूल, मंदिर-गिरजे, सांस्कृतिक क्लब और अखबार खोलते हैं।
अब कई राज्यों की विदेश में बसे नागरिकों के लिए नीतियाँ हैं: सांस्कृतिक संस्थान, भाषा की कक्षाएँ, छात्रवृत्तियाँ, आसान यात्रा, कभी वोट देने का अधिकार या दोहरी नागरिकता। इस तरह संस्कृति सीमाओं के आर-पार दोनों दिशाओं में चलती है।
कारण-परिणाम की एक कड़ी
- छपाई और रेल फैलती हैं (कारण)।
- साझा लिखित भाषा में ज़्यादा अखबार और किताबें पढ़ी जाती हैं (परिणाम)।
- दूर-दूर के लोग महसूस करते हैं कि उनकी भाषा और कहानियाँ साझा हैं (परिणाम)।
- राज्य स्कूल, संग्रहालय और प्रतीकों से इसे सहारा देता है (नीति)।
- राष्ट्रीय पहचान बनती है; बाद में वह बड़ी यूरोपीय पहचानों से जुड़ती है (नतीजा)।
करके देखो: अपनी परतों का नक्शा
3D में: आखिरी चरण पर जाओ और ब्लॉकों को पूरे अपने से पूरे उधार तक चलाओ। कौन-सा छोर नकली लगता है? हर असली संस्कृति बीच में ही क्यों बैठती है?
घर पर या कक्षा में: एक के अंदर एक तीन घेरे बनाओ: मैं और मेरा शहर, मेरा राष्ट्र, बड़ी दुनिया या यूरोप। हर घेरे में उससे जुड़ी दो चीज़ें लिखो (खाना, गीत, खेल, शब्द)। फिर किसी बड़े रिश्तेदार से पूछो कि उनकी जवानी में इनमें से क्या अलग था। एक चीज़ खोजो जो विदेश से आई और एक जो अतीत से बची रही।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आधुनिकीकरण = स्कूल + छपाई + रेल + मज़बूत राज्य
- सांस्कृतिक नीति = मानक भाषा + स्कूल + अकादमी, संग्रहालय, रंगमंच + प्रतीक + मीडिया
- सांस्कृतिक धाराएँ: प्रबोधन (तर्क) → रोमांटिकवाद (लोक भावना) → आधुनिकतावाद (नए रूप)
- परतदार पहचान = स्थानीय + क्षेत्रीय + राष्ट्रीय + यूरोपीय (ये जुड़ती हैं, कटती नहीं)
- प्रवासी समुदाय = अपनी मातृभूमि से बाहर रहने वाले लोग जो सांस्कृतिक रिश्ता रखते हैं
हल किए गए उदाहरण
1. 19वीं सदी में राज्यों ने मानक लिखित भाषा बनाने की कोशिश क्यों की?
अलग-अलग इलाकों में अलग बोलियाँ बोली जाती थीं। मानक लिखित भाषा से अखबार, स्कूल, कानून और सेना सब इलाकों के लिए काम कर सके और लोग एक समुदाय का हिस्सा महसूस करने लगे।
2. रोमांटिकवाद ने राष्ट्र निर्माण में कैसे मदद की? एक उदाहरण दो।
रोमांटिक लेखक लोकगीतों और गाथाओं को जनता की आत्मा मानते थे, इसलिए उन्होंने उन्हें इकट्ठा करके छापा। ग्रिम भाइयों की परीकथाएँ (1812) और फिनलैंड का कालेवाला (लोन्रोट द्वारा संकलित, 1835) ने लोगों को साझी परंपरा दिखाई और राष्ट्रीय भाषा का मान बढ़ाया।
3. जापान की एक और तुर्की की एक सांस्कृतिक नीति बताओ और कहो कि दोनों में क्या समान था।
जापान ने सभी बच्चों के लिए स्कूल शुरू किए (1872)। तुर्की ने लैटिन लिपि अपनाई (1928)। दोनों ने साक्षरता फैलाने और लोगों को एक आधुनिक राष्ट्र में बाँधने के लिए पढ़ाई और लिखाई का इस्तेमाल किया। दोनों बड़े आधुनिकीकरण का हिस्सा थीं।
4. समझाओ कि एक व्यक्ति राष्ट्रीय और यूरोपीय दोनों कैसे महसूस कर सकता है।
पहचानों में परतें होती हैं। कोई अपनी राष्ट्रीय भाषा और परंपराओं से प्रेम कर सकता है और साथ ही मानव अधिकार व लोकतंत्र जैसे यूरोपीय मूल्य साझा कर सकता है और यूरोपीय यात्रा, पढ़ाई, व्यापार का इस्तेमाल कर सकता है। एक परत दूसरी पर टिकती है; उन्हें टकराना ज़रूरी नहीं।
5. आधुनिकतावादी और परंपरावादी का फर्क बताओ।
आधुनिकतावादी उन्नत राज्यों से नए कानून, स्कूल और उद्योग की नकल करना चाहते थे और कभी-कभी पुरानी रीतियों को कमज़ोर करते थे। परंपरावादी धर्म, गाँव का जीवन और पुराने मूल्य बचाना चाहते थे। ज़्यादातर समाजों ने दोनों को मिलाया।
6. सांस्कृतिक नीति लोगों को बाहर कैसे कर सकती है? एक उदाहरण दो।
अगर राज्य स्कूलों और दफ्तरों में सिर्फ एक भाषा की इजाज़त दे और अल्पसंख्यक भाषाओं पर रोक लगाए, तो उन भाषाओं के बोलने वाले बाहर हो जाते हैं। सेंसरशिप वाले राज्य असहमत आवाज़ों को भी बाहर करते हैं।
7. विदेश में बसे नागरिक अपने देश की संस्कृति को किन दो तरीकों से प्रभावित कर सकते हैं?
विदेश में कलाकार और विद्वान देश की संस्कृति को मशहूर करते हैं (जैसे पेरिस में ब्रांकुशी और एनेस्कू)। विदेश में पढ़ने-काम करने वाले नए विचार लाते हैं (गांधी के दक्षिण अफ्रीका के वर्षों ने भारत में उनके बाद के तरीकों को आकार दिया)। समुदाय भाषा और त्योहार भी ज़िंदा रखते हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि राष्ट्र प्राकृतिक हैं और हमेशा से रहे हैं। वे स्कूल, भाषा और प्रतीकों से बनाए जाते हैं।
- यह कहना कि आधुनिकीकरण का मतलब पश्चिम की पूरी नकल है। हर समाज उधार और स्थानीय चीज़ें मिलाता है।
- यह सोचना कि यूरोपीय पहचान राष्ट्रीय पहचान की जगह ले लेती है। वह आम तौर पर एक अतिरिक्त परत है।
- सांस्कृतिक नीति को हमेशा अच्छा या हमेशा बुरा मानना। वह शामिल भी कर सकती है और बाहर भी, इसलिए देखो किसे फायदा और किसे नुकसान है।