Spain 2º ESO Geography and History
अध्याय: 3
1. Challenges of today's world
Spatial location and maps · Climate emergency · Biodiversity and ecosystems · Information technologies · Knowledge society · Demographic challenges · Urban and rural spaces · Competition for resources · Distribution of wealth · Gender equality worldwide · Sustainable Development Goals
- मानचित्र कौशल: नक्शे पढ़ना और इस्तेमाल करना – मानचित्र (map) किसी जगह का ठीक ऊपर से देखा गया, छोटा किया गया चपटा चित्र है। इसे पढ़ने के लिए चाहिए: संकेत-सूची (चिह्न), मापनी (दूरी नापने के लिए), दिशा (दिशा-बिंदु और दिकमान), ग्रिड संदर्भ (जगह ढूँढने और बताने के लिए) और समोच्च रेखाएँ (ऊँचाई और ढलान देखने के लिए)। आज GPS उपग्रहों से हमारी जगह बताता है, और GIS कंप्यूटर पर आँकड़ों की कई परतें जोड़कर जगहों के बारे में सवालों के जवाब देता है।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।
- जीवों में विविधता और वर्गीकरण – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं, और भारत सबसे समृद्ध जगहों में है। इन्हें पढ़ने के लिए हम आसान सवाल पूछकर समूह बनाते हैं: केंद्रक है या नहीं? एक कोशिका या कई? भोजन खुद बनाता है? इससे पाँच जगत बनते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। जंतु अकशेरुकी और कशेरुकी में बँटते हैं। हर जाति का दो शब्दों का वैज्ञानिक नाम होता है। वायरस कोशिका नहीं है, इसलिए किसी जगत में नहीं आता।
- डिजिटल पदचिह्न और नेट शिष्टाचार – डिजिटल पदचिह्न वह डेटा का निशान है जो हम ऑनलाइन छोड़ते हैं। सक्रिय पदचिह्न जान-बूझकर साझा होते हैं (पोस्ट, कमेंट, फ़ॉर्म); निष्क्रिय पदचिह्न हमारी जानकारी के बिना इकट्ठे होते हैं (कुकीज़, ब्राउज़िंग हिस्ट्री, लोकेशन, IP पता)। ये मिटाना कठिन है और बाद में दूसरे देख सकते हैं। हम डिजिटल समाज में रहते हैं जहाँ पढ़ाई, बैंकिंग, ख़रीदारी और सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन हैं; इसका ज़िम्मेदार उपयोगकर्ता डिजिटल नागरिक (नेटिज़न) है। नेट शिष्टाचार: नैतिक (कॉपीराइट मानें, भरोसेमंद जानकारी), सम्मानजनक (निजता, विविधता, बुलिंग नहीं) और ज़िम्मेदार (ज़्यादा निजी बातें नहीं, ट्रोल को जवाब नहीं)। संचार शिष्टाचार: सटीक, विनम्र, विश्वसनीय; सोशल मीडिया शिष्टाचार: सोच-समझकर पासवर्ड और प्राइवेसी, अपलोड से पहले सोचें, साझा करने से पहले जाँचें।
- सामाजिक विज्ञान की विधियाँ: हम लोगों और समाज को कैसे पढ़ते हैं – सामाजिक वैज्ञानिक लोगों और समाज को वैसे ही पढ़ते हैं जैसे वैज्ञानिक प्रकृति को: साफ़ सवाल पूछो, सबूत इकट्ठा करो (स्रोत, सर्वे, साक्षात्कार, अवलोकन, आँकड़े, नक्शे), उनका विश्लेषण करो, पक्षपात जाँचो और सावधानी से निष्कर्ष निकालो। अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान अलग सवाल पूछते हैं, पर औज़ार एक जैसे हैं।
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
- भू-राजनीति: जगह से कैसे बनती है शक्ति – भू-राजनीति यह पढ़ती है कि भूगोल (स्थान, आकार, संसाधन, समुद्री मार्ग) देशों की शक्ति, उनकी होड़ और गठबंधनों को कैसे आकार देता है। शक्ति यानी दूसरों से अपनी बात मनवाने की क्षमता। हार्ड पावर बल या पैसे से काम करती है (सेना, अर्थव्यवस्था); सॉफ़्ट पावर आकर्षित करती है (संस्कृति, भाषा, विश्वविद्यालय, तकनीक)। शक्तियाँ उठती और गिरती हैं, जैसे ऑटोमन साम्राज्य, और 1991 के बाद रूस ने दोबारा खड़ा होने की कोशिश की। देश संसाधनों, क्षेत्र और रास्तों (जलडमरूमध्य, नए रेशम मार्ग) के लिए होड़ करते हैं, पर संधियों, गठबंधनों, अनन्य आर्थिक क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन और खुले समुद्र की रक्षा में सहयोग भी करते हैं।
- आय असमानता – आय असमानता का मतलब है कि लोगों के बीच आय बराबर नहीं बँटी है। अर्थशास्त्री लोगों को सबसे ग़रीब से सबसे अमीर तक क्रम में रखकर 20-20% के पाँच समूहों (पंचमक, quintiles) में बाँटते हैं और उनके हिस्से की तुलना करते हैं। लॉरेंज़ वक्र लोगों के संचयी % के सामने आय का संचयी % दिखाता है; यह समानता की सीधी रेखा से जितना ज़्यादा झुके, असमानता उतनी ज़्यादा। गिनी गुणांक = A ÷ (A + B) इसे 0 (पूरी समानता) से 1 (सारी आय एक व्यक्ति के पास) के बीच एक संख्या बना देता है। संपत्ति (जो तुम्हारे पास है) आमतौर पर आय (जो तुम कमाते हो) से ज़्यादा असमान होती है। सरकार प्रगतिशील कर, सहायता, न्यूनतम मज़दूरी और मुफ़्त शिक्षा-स्वास्थ्य से असमानता घटाती है।
- समानता और भेदभाव: बराबर कीमत, निष्पक्ष मौक़े – हर इंसान की कीमत और अधिकार बराबर हैं, भले ही हम सब अलग हैं। भेदभाव का मतलब है किसी से सिर्फ़ इसलिए बुरा व्यवहार करना कि वह कौन है: लिंग, रंग, मूल, धर्म, जाति, विकलांगता, उम्र या यौन रुझान। भेदभाव काम, नियम या शब्दों से होता है। सबसे बिल्कुल एक जैसा व्यवहार हमेशा काफ़ी नहीं; असली समानता रुकावटें हटाती है और ज़रूरत के हिसाब से मदद देती है। लैंगिक हिंसा लैंगिक असमानता का सबसे गंभीर रूप है। खेल और रोज़ के जीवन में हम आवाज़ उठाकर और सबको शामिल करके भेदभाव को ठुकराते हैं।
- पर्यावरण और धारणीय विकास – पर्यावरण हमें संसाधन देता है, हमारा कचरा सोखता है, जीवन चलाता है और सुंदरता देता है। जब हम संसाधन प्रकृति के नवीकरण से तेज़ लेते हैं, या कचरा उसकी सोखने की क्षमता से ज़्यादा फेंकते हैं, तो धारण क्षमता पार होती है और पर्यावरण संकट आता है। भारत में भूमि अपक्षय, वायु-जल प्रदूषण, वन और जैव-विविधता की हानि है। जीवाश्म ईंधन जलाने से गर्मी फँसती है और वैश्विक उष्णता होती है; CFC ओज़ोन परत पतली करते हैं। धारणीय विकास आज की ज़रूरतें पूरी करता है बिना भावी पीढ़ियों की क्षमता घटाए।
2. Societies and territories
Research methods in geography and history · Historical and archaeological sources · Historical time and timelines · Human origins and first societies · Rise of civilisations · War and armies in history · Social complexity and authority · Hidden people in history · Political organisation in history · Classical roots of Western culture · Religion in history · Economy and society in history · City and countryside in history · Voyages and world economy · Spain in world history · Art in civilisations · Science and medicine in history
- ऐतिहासिक चिंतन: इतिहासकार कैसे काम करते हैं – इतिहास साक्ष्य के सहारे अतीत का अध्ययन है। घटनाओं को समय-रेखा पर क्रम से रखिए और उनके संदर्भ में पढ़िए। प्राथमिक स्रोत (उसी समय बने) और द्वितीयक स्रोत (बाद में बने) दोनों का उपयोग कीजिए। हर स्रोत को परखिए: किसने, कब, क्यों बनाया और क्या छूट गया। घटनाओं के कई कारण होते हैं: धीमे दीर्घकालिक कारण और एक तात्कालिक कारण। परिवर्तन और निरंतरता दोनों देखिए, महत्व तय कीजिए और साक्ष्य के साथ तर्क दीजिए।
- स्रोत विश्लेषण: इतिहासकार सबूत कैसे परखते हैं – स्रोत अतीत का कोई भी निशान है जिससे हमें सबूत मिलता है: चिट्ठी, सिक्का, इमारत, गीत, फ़ोटो या वीडियो। प्राथमिक स्रोत उसी समय के होते हैं जिसका अध्ययन हो रहा है; द्वितीयक स्रोत बाद के विवरण हैं, जैसे इतिहासकारों की किताबें। स्रोत परखने के लिए उसका उद्गम पूछो (किसने, कब, क्यों, किसके लिए बनाया), उसकी बातों को अपनी जानकारी से मिलाओ, पक्षपात ढूँढो, और तय करो कि वह तुम्हारे प्रश्न के लिए कितना विश्वसनीय और कितना उपयोगी है। इतिहासकार स्रोतों को एक-दूसरे से मिलाते हैं (पुष्टि) और अलग-अलग विद्वानों की व्याख्याएँ पढ़कर तर्कपूर्ण टिप्पणी या निबंध लिखते हैं।
- विकास: जीवन की उत्पत्ति, क्रियाविधि और मानव विकास – शुरुआती पृथ्वी पर सरल रसायनों से जीवन शुरू हुआ: ओपेरिन और हाल्डेन ने कहा और मिलर ने फ्लास्क में अमीनो अम्ल बनाए। विकास के प्रमाण जीवाश्म, समजात और समरूप अंग, भ्रूण, अणु और आज दिखने वाले बदलाव (औद्योगिक मेलानिनता, दवा प्रतिरोध) से मिलते हैं। डार्विन ने इसे आबादी की विभिन्नता पर प्राकृतिक वरण से समझाया; आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत जीन जोड़ता है: उत्परिवर्तन, पुनर्योजन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण अलील आवृत्ति बदलते हैं। अगर इनमें से कुछ न हो, आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं: हार्डी–वाइनबर्ग, p² + 2pq + q² = 1। वरण स्थायीकारी, दिशात्मक या विदारक होता है। एक पूर्वज का कई आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाना अनुकूली विकिरण है (डार्विन की फिंच, ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी)। मनुष्य ड्रायोपिथेकस जैसे कपियों से ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल होते हुए होमो सेपियंस बना।
- प्रारंभिक मानव और सभ्यता की शुरुआत – आज के इंसान (होमो सेपियन्स) लगभग 3 लाख साल पहले अफ़्रीका में आए और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैले। इतिहासकार बीते समय को औज़ारों के हिसाब से युगों में बाँटते हैं: पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण, फिर ताँबा, कांसा और लोहा। खेती सीखने पर लोग गाँवों में बस गए, अनाज जमा करने लगे और बर्तन बनाने लगे। कुछ गाँव बढ़कर योजनाबद्ध नगर बने, जैसे सिंधु और घग्गर नदियों के किनारे हड़प्पा के नगर। लगभग उसी समय मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन में भी नदी-घाटी सभ्यताएँ बनीं।
- विश्व इतिहास: किसी समाज को कैसे समझें, और सेनाएँ कैसे बदलीं – विश्व इतिहास एक देश से आगे देखता है कि एक ही समय में अलग-अलग समाज कैसे जीते थे। किसी भी समाज को समझने के लिए पाँच सवाल पूछो: सत्ता किसके पास थी, लोग क्या काम और व्यापार करते थे, क्या मानते थे, क्या बनाते थे, और किससे मिलते थे। 1500–1950 के चार बड़े समाज (मुग़ल भारत, छिंग चीन, रूसी साम्राज्य और संयुक्त राज्य अमेरिका) दिखाते हैं कि लोगों ने जीवन कितने अलग ढंग से चलाया। सेनाएँ भी बदलीं: भाला-ढाल, फिर घुड़सवार और क़िले, फिर बारूद और तोप, फिर वेतन वाली स्थायी सेना, और आख़िर में रेल और कारखानों वाला औद्योगिक युद्ध। हर बदलाव ने और बदलाव लाए, जैसे मज़बूत केंद्रीय सरकार और ज़्यादा कर।
- सामाजिक स्तरीकरण – सामाजिक स्तरीकरण का मतलब है समाज का लोगों के समूहों को परतों (स्तरों) में ऊँचा-नीचा रखना। ऊपर की परतों को ज़्यादा धन, शक्ति और सम्मान मिलता है। चार मुख्य व्यवस्थाएँ हैं: दासता, जागीर, जाति और वर्ग। वर्ग आय, संपत्ति, व्यवसाय और शिक्षा से तय होता है। प्रकार्यवादी कहते हैं असमान इनाम समाज के काम आते हैं; संघर्षवादी कहते हैं इससे अमीर ऊपर बने रहते हैं। एक परत से दूसरी में जाना सामाजिक गतिशीलता है।
- सामाजिक इतिहास: आम लोग कैसे जीते थे – सामाजिक इतिहास सिर्फ़ राजाओं, युद्धों और संधियों का नहीं, आम लोगों के जीवन का अध्ययन है। यह पूछता है कि लोग कैसे काम करते, रहते, खाते, कपड़े पहनते, शादी करते, पूजा करते, बीमार पड़ते और मनोरंजन करते थे, और समाज किन समूहों में बँटा था। आधुनिक समय से पहले ज़्यादातर समाज पिरामिड जैसे थे: ऊपर थोड़े शासक और सामंत, फिर पुरोहित और धनी परिवार, बीच में नगरवासी, व्यापारी और कारीगर, और नीचे किसानों की बहुत बड़ी परत, साथ में कुछ बंधुआ लोग जैसे भूदास या ग़ुलाम। गाँव अपना समुदाय खुद चलाते थे; शहर बाज़ार, गिल्ड और अलग-अलग समूहों के मेल की जगह थे। औद्योगीकरण ने लोगों को खेतों से कारख़ानों में पहुँचाया, मज़दूर वर्ग और बढ़ता मध्य वर्ग बनाया, और यूनियन, नए क़ानून और बाद में कल्याणकारी राज्य लाया। नई रोशनी, यातायात, अख़बार, स्कूल और दवाओं से रोज़ का जीवन बदला। सामाजिक इतिहासकार "छिपे" लोगों (महिलाएँ, ग़रीब, अल्पसंख्यक, प्रवासी) को भी खोजते हैं, और यह भी देखते हैं कि भावनाएँ और रीति-रिवाज कैसे बदले।
- राज्य और सरकार: राज्य किससे बनता है – राज्य एक राजनीतिक समुदाय है जिसके चार तत्व हैं: स्थायी जनसंख्या, निश्चित क्षेत्र, सरकार और संप्रभुता (अंदर सबसे ऊँची शक्ति, बाहर स्वतंत्रता)। सरकार वह टीम है जो राज्य चलाती है और बदलती रहती है; राज्य बना रहता है। राज्य इसमें अलग होते हैं कि फ़ैसला कौन करता है (लोकतंत्र, राजतंत्र, तानाशाही), शक्ति कैसे बँटी है (एकात्मक या संघीय) और वे नागरिकों के लिए कितना करते हैं।
- आर्थिक प्रणालियाँ: क्या, कैसे और किसके लिए, कौन तय करता है? – हर समाज के पास साधन सीमित हैं, इसलिए उसे तय करना पड़ता है कि क्या बनाए, कैसे बनाए और किसके लिए। पारंपरिक अर्थव्यवस्था में रीति-रिवाज, बाज़ार अर्थव्यवस्था में कीमतें और निजी फ़ैसले, और आदेश (नियोजित) अर्थव्यवस्था में सरकार की योजना यह तय करती है। पूँजीवाद निजी संपत्ति और बाज़ार पर टिका है; समाजवाद साझा या सरकारी स्वामित्व और योजना पर। असली देश मिश्रित हैं: ज़्यादातर चीज़ें बाज़ार बनाता है, और सरकार जन-सेवाएँ, नियम और सहायता देती है।
- मानव बस्तियाँ: ग्रामीण और नगरीय प्रकार, नगरों का विकास, नगरीकरण और स्मार्ट सिटी – बस्ती वह जगह है जहाँ लोग घर बनाकर रहते हैं, एक झोपड़ी से लेकर बड़े नगर तक। ग्रामीण बस्तियाँ खेती और दूसरे प्राथमिक कामों पर टिकी हैं; नगरीय बस्तियाँ उद्योग, व्यापार और सेवाओं पर। गाँव गुच्छित, अर्ध-गुच्छित, पल्ली या परिक्षिप्त हो सकते हैं। भारतीय नगर तीन कालों में बढ़े: प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक। नगरीय हिस्सा 1901 में 11% से 2011 में 31% हुआ। नगरों को मुख्य काम से पहचानते हैं: प्रशासनिक, औद्योगिक, परिवहन, वाणिज्यिक, खनन, छावनी, शैक्षिक, धार्मिक और पर्यटन। स्मार्ट सिटी मिशन (2015) 100 नगरों को साफ़, सुरक्षित और रहने में आसान बनाना चाहता है।
- खोज का युग (लगभग 1400–1600) – लगभग 1400 से 1600 के बीच पुर्तगाल और स्पेन के नाविकों ने, और बाद में दूसरे यूरोपीय देशों ने, दुनिया के महासागरों में नए समुद्री रास्ते खोले। वे बिचौलियों के बिना मसाले और सोना चाहते थे, ईसाई धर्म फैलाना चाहते थे और नाम कमाना चाहते थे। कैरवेल जहाज़, कुतुबनुमा, एस्ट्रोलैब और बेहतर नक्शों ने लंबी यात्राएँ मुमकिन कीं। डियास अफ़्रीका के दक्षिणी सिरे तक पहुँचा (1488), कोलंबस अमेरिका पहुँचा (1492), वास्को द गामा भारत पहुँचा (1498) और मैगलन के बेड़े ने दुनिया का चक्कर लगाया (1519–22)। इससे पहले चीन के झेंग हे के बड़े बेड़े अफ़्रीका तक गए थे (1405–33)। इन यात्राओं ने पहली बार पूरी दुनिया को जोड़ा। यूरोप को व्यापार, नई फ़सलें और धन मिला, पर दूसरों को जीत लिया जाना, जानलेवा बीमारियाँ और अटलांटिक दास व्यापार झेलना पड़ा।
- कला का इतिहास: गुफा की दीवारों से आज तक – मनुष्य कम से कम 40,000 साल से कला बना रहा है। प्रागैतिहासिक कला में गुफा की दीवारों पर जानवर और हाथ की छाप हैं। प्राचीन सभ्यताओं ने शासकों, देवताओं और परलोक के लिए कला बनाई। शास्त्रीय परंपराएँ यूनान-रोम, भारत, चीन, अफ़्रीका और अमेरिका में पनपीं। पुनर्जागरण ने परिप्रेक्ष्य और यथार्थ दिया; आधुनिक कला (लगभग 1860 से) ने ये नियम तोड़े; समकालीन कला कोई भी सामग्री अपनाती है। किसी कलाकृति को समझने के लिए वर्णन, विश्लेषण, संदर्भ में व्याख्या और कारण सहित निर्णय करें।
- चिकित्सा का इतिहास – लगभग 1000 से 1500 तक ज़्यादातर डॉक्टर प्राचीन यूनानी विचार मानते थे: शरीर के चार द्रवों का संतुलन बिगड़ने से बीमारी होती है, इलाज खून निकालना, जड़ी-बूटी और प्रार्थना। पुनर्जागरण (1500–1700) में शरीर की सही रचना (वेसेलियस), खून का घूमना (हार्वे) और पहला टीका (जेनर, 1796) आया। 1800 के दशक में रोगाणु सिद्धांत (पाश्चर, कोख) ने बताया कि कीटाणु बीमारी करते हैं; सर्जरी में दर्द, संक्रमण और खून बहना हल हुए। 1900 के बाद एंटीबायोटिक, एक्स-रे, डीएनए, युद्ध, तकनीक और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ने चिकित्सा बदल दी। बदलाव में व्यक्ति, विज्ञान, तकनीक, युद्ध, सरकार और संचार ने मदद की; परंपरा और ज्ञान की कमी ने रोका।
3. Civic commitment
Human dignity and children's rights · Respect for others · Gender equality · Interest in current issues · Social networks and online safety · Democratic culture · Environmental awareness · Protecting heritage · Solidarity and empathy · Managing emotions · Life cycles and lifestyles · State and peace · European citizenship · Road safety and public space
- मानव अधिकार: अर्थ, इतिहास, प्रकार और संरक्षण – मानव अधिकार वे मूल स्वतंत्रताएँ और सुरक्षाएँ हैं जो हर व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण मिलती हैं। ये सार्वभौमिक, अविच्छेद्य, अविभाज्य और गरिमा पर आधारित हैं। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) ने सबके लिए एक साझा मानक बनाया, जिसे बाद में संधियों से बाध्यकारी बनाया गया। संविधान, न्यायालय, आयोग, संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज इनकी रक्षा करते हैं, और केवल दूसरों की रक्षा के लिए बने उचित क़ानून ही इन्हें सीमित कर सकते हैं।
- समानता और भेदभाव: बराबर कीमत, निष्पक्ष मौक़े – हर इंसान की कीमत और अधिकार बराबर हैं, भले ही हम सब अलग हैं। भेदभाव का मतलब है किसी से सिर्फ़ इसलिए बुरा व्यवहार करना कि वह कौन है: लिंग, रंग, मूल, धर्म, जाति, विकलांगता, उम्र या यौन रुझान। भेदभाव काम, नियम या शब्दों से होता है। सबसे बिल्कुल एक जैसा व्यवहार हमेशा काफ़ी नहीं; असली समानता रुकावटें हटाती है और ज़रूरत के हिसाब से मदद देती है। लैंगिक हिंसा लैंगिक असमानता का सबसे गंभीर रूप है। खेल और रोज़ के जीवन में हम आवाज़ उठाकर और सबको शामिल करके भेदभाव को ठुकराते हैं।
- नागरिक सहभागिता: नागरिक कैसे भाग लेते हैं – नागरिक सहभागिता यानी अपने समुदाय और देश के जीवन में भाग लेना। यह एक सीढ़ी जैसी है: जानकारी रखें, वोट दें, समूहों से जुड़ें, स्वेच्छा से सेवा करें, फिर आयोजन और अभियान करें। नागरिक चुनाव में प्रतिनिधि चुनते हैं और जनमत संग्रह में एक प्रश्न का सीधा उत्तर देते हैं। वे राजनीतिक दलों (जो सरकार चलाना चाहते हैं), मज़दूर संघों (जो मज़दूरों की रक्षा करते हैं) और संगठनों या NGO (जो साझा उद्देश्य के लिए काम करते हैं) से जुड़ते हैं। चुनावों के बीच वे याचिका पर हस्ताक्षर करते हैं, सेवा करते हैं, स्थानीय झगड़ों में मध्यस्थता करते हैं और तथ्य जाँचकर ऑनलाइन अभियान चलाते हैं। व्हिसलब्लोअर छिपे ग़लत काम उजागर करते हैं, और स्वतंत्र प्रेस व जनमत उसे कार्रवाई में बदलते हैं। कोई सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करना ये सब कौशल सिखाता है: योजना, टीमवर्क और ज़िम्मेदारी।
- साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा – साइबर अपराध वह अपराध है जिसमें कंप्यूटर, फ़ोन या इंटरनेट साधन या निशाना हो। आम रूप: हैकिंग (बिना अनुमति सिस्टम में घुसना; एथिकल हैकर अनुमति से सुरक्षा जाँचते हैं), ईव्सड्रॉपिंग (चुपके से बातचीत पकड़ना), फ़िशिंग (नकली ईमेल, SMS या वेबसाइट जो पासवर्ड, OTP या कार्ड की जानकारी चुराएँ), रैंसमवेयर (फ़ाइलें बंद करके पैसे माँगने वाला मालवेयर), साइबर ट्रोल (भड़काने वाले अपमानजनक संदेश) और साइबर बुलिंग (ऑनलाइन परेशान करना, धमकाना, अपमानित करना)। मालवेयर: वायरस (फ़ाइलों से फैलता है), वर्म (अपने-आप फैलता है), ट्रोजन (उपयोगी दिखकर पिछला दरवाज़ा खोलता है), स्पाइवेयर और एडवेयर (अनचाहे पॉप-अप विज्ञापन)। सुरक्षित ब्राउज़िंग: https, अपडेट, एंटीवायरस, फ़ायरवॉल, अनजान लिंक नहीं। पहचान सुरक्षा: मज़बूत अलग-अलग पासवर्ड, टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन, OTP कभी साझा नहीं, सोच-समझकर जानकारी देना, साझा उपकरण पर लॉग आउट।
- पर्यावरण संरक्षण: तकनीक इस्तेमाल करते हुए धरती की देखभाल – पर्यावरण संरक्षण (environmental stewardship) का मतलब है धरती के संसाधनों को सोच-समझकर इस्तेमाल करना ताकि वे लंबे समय तक चलें, और जहाँ नुक़सान हुआ हो उसे ठीक करना। फ़ोन हो या अस्पताल की मशीन, हर उत्पाद का एक जीवन-चक्र होता है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। हर चरण में ऊर्जा लगती है और कचरा बनता है। अच्छा संरक्षक चीज़ें लंबे समय तक चलाता है, कम बिजली वाली मशीनें चुनता है, कचरा-पदानुक्रम मानता है, ई-कचरा सही जगह देता है और प्रकृति बचाने वाले नियमों का साथ देता है।
- सांस्कृतिक विरासत – सांस्कृतिक विरासत वह सब है जो किसी समुदाय को अतीत से मिला, जिसे वह आज महत्व देता है और आगे सौंपना चाहता है: इमारतें और स्मारक, संग्रहालय की चीज़ें, भाषाएँ, संगीत, नृत्य, त्योहार, हुनर, खाना और ज्ञान। मूर्त विरासत छू सकते हैं (अचल जैसे मंदिर और पुल, चल जैसे सिक्के और पांडुलिपियाँ); अमूर्त विरासत जी और निभाई जाती है; प्राकृतिक विरासत में ख़ास भू-दृश्य और जीव हैं। विरासत पहचान देती है, इतिहास सिखाती है, पर्यटन से कमाई लाती है और संस्कृतियों को जोड़ती है। मौसम, प्रदूषण, भीड़, लापरवाह निर्माण, उपेक्षा और संघर्ष इसे ख़तरे में डालते हैं; संरक्षण, कानून, संग्रहालय, विरासत सूचियाँ, शिक्षा और स्थानीय लोग इसे बचाते हैं।
- सामाजिक न्याय: सबको उचित हिस्सा – न्याय = हर व्यक्ति को उसका उचित हक़ देना। सामाजिक न्याय समाज में चीज़ों, सेवाओं और अवसरों के उचित बँटवारे के बारे में है। तीन सिद्धांत मार्गदर्शन करते हैं: बराबर वालों से बराबर बर्ताव, मेहनत और कौशल के अनुपात में इनाम, और विशेष ज़रूरत पर अतिरिक्त मदद। इनमें संतुलन चाहिए। जॉन रॉल्स ने कहा कि समाज के नियम 'अज्ञानता के पर्दे' के पीछे से चुनें, यानी यह जाने बिना कि हमें कौन सी जगह मिलेगी; तब समझदार व्यक्ति सबसे कमज़ोर की रक्षा करेगा। सामाजिक न्याय की शुरुआत सबकी बुनियादी ज़रूरतें (भोजन, पानी, घर, स्वास्थ्य, शिक्षा, न्यूनतम मज़दूरी) पूरी करने से होती है। तरीके पर मतभेद है: मुक्त बाज़ार वाले खुली प्रतियोगिता और छोटा राज्य चाहते हैं; दूसरे राज्य से कल्याण चाहते हैं। भारत दोनों मिलाता है।
- मानसिक स्वास्थ्य: भावनाएँ, तनाव और सहारा – मानसिक स्वास्थ्य यानी हम कैसे सोचते, महसूस करते, मुश्किलें सँभालते और दूसरों से जुड़ते हैं। शारीरिक स्वास्थ्य की तरह यह सबके पास है और ऊपर-नीचे होता है। भावनाएँ काम के संकेत हैं। तनाव बाल्टी में पानी की तरह जमा होता है; अच्छे तरीके (नींद, व्यायाम, बात करना, धीमी साँस, योजना) उसे बाहर निकालते हैं। आत्म-सम्मान और अच्छे रिश्ते हमें बचाते हैं। अगर भारी भावनाएँ दो हफ़्ते या ज़्यादा रहें, या रोज़ का जीवन रुकने लगे, तो भरोसेमंद बड़े या विशेषज्ञ से बात करें — मदद माँगना हिम्मत है।
- गाँव और नगर में सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक व्यवस्था – सामाजिक परिवर्तन यानी समाज के ढाँचे में बड़ा और टिकाऊ बदलाव। यह धीमा (उद्विकासीय) या अचानक (क्रांतिकारी) हो सकता है, और ढाँचे, विचार या मूल्य बदल सकता है। इसके कारण हैं पर्यावरण, तकनीक और अर्थव्यवस्था, राजनीति और संस्कृति। सामाजिक व्यवस्था दूसरा पहलू है: समाज साझा मूल्यों, प्रभुत्व, सत्ता और कानून से स्थिर रहता है। व्यवस्था को प्रतिरोध, अपराध और हिंसा चुनौती देते हैं। गाँव, कस्बा और नगर आकार, घनत्व और काम में अलग हैं, और सब अपने ढंग से बदलते हैं।
- नागरिकशास्त्र और सरकार: नागरिक और सरकार मिलकर कैसे काम करते हैं – नागरिकशास्त्र (civics) यह सिखाता है कि लोग ख़ुद पर शासन कैसे करते हैं और नागरिक कैसे भाग लेते हैं। लोकतंत्र में शक्ति जनता की होती है, जो स्वतंत्र चुनाव में प्रतिनिधि चुनती है। सरकार के तीन अंग हैं: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है और न्यायपालिका जाँचती है कि वे संविधान के अनुसार हों। ज़्यादातर देशों में सरकार के स्तर भी होते हैं: स्थानीय, राज्य या प्रांतीय, और राष्ट्रीय। क़ानून एक विचार से शुरू होकर विधेयक बनता है, बहस और मतदान के बाद स्वीकृत होता है। नागरिकों के अधिकार भी हैं और कर्तव्य भी। सक्रिय नागरिक जानकारी रखते हैं, वोट देते हैं, सेवा करते हैं और शांतिपूर्ण ढंग से बदलाव लाते हैं।
- यूरोपीय संघ – यूरोपीय संघ (EU) 27 यूरोपीय देशों का समूह है जो कुछ फ़ैसले और क़ानून साझा करते हैं। इसकी शुरुआत 1951 में हुई, जब छह देशों ने कोयला और इस्पात साझा किया ताकि उनके बीच युद्ध असंभव हो जाए। धीरे-धीरे यह एकल बाज़ार बना जहाँ सामान, लोग, सेवाएँ और पैसा आज़ादी से चलते हैं। आयोग क़ानून का प्रस्ताव रखता है, संसद और परिषद उसे पारित करते हैं, और न्यायालय देखता है कि उसका पालन हो। 21 सदस्य यूरो चलाते हैं। यूनाइटेड किंगडम 2020 में बाहर हो गया।
- सड़क सुरक्षा: रुकने का विज्ञान और सुरक्षित रहना – कोई भी गाड़ी तुरंत नहीं रुकती। पहले चालक को खतरा देखकर संभलने में समय लगता है, इसे प्रतिक्रिया समय कहते हैं (लगभग 1 सेकंड)। इस बीच गाड़ी पूरी गति से चलती रहती है: यह सोचने की दूरी है = चाल × प्रतिक्रिया समय। फिर ब्रेक गाड़ी को धीमा करते हैं: यह ब्रेकिंग दूरी है = चाल² ÷ (2 × मंदन)। रुकने की दूरी = सोचने की दूरी + ब्रेकिंग दूरी। चाल दोगुनी हो तो ब्रेकिंग दूरी चार गुनी हो जाती है। गीली या बर्फ़ीली सड़क और घिसे टायर पकड़ (घर्षण) कम करते हैं। टक्कर में सीट बेल्ट, हेलमेट, एयरबैग और क्रम्पल ज़ोन रुकने का समय बढ़ाते हैं, जिससे शरीर पर बल कम होता है। पैदल यात्री, साइकिल सवार, स्कूटर चालक और यात्री, सब नियम मानकर, दिखाई देकर और चलते समय फ़ोन न चलाकर सुरक्षित रहते हैं।