राज्य क्या है?
राज्य लोगों का ऐसा समूह है जो एक निश्चित क्षेत्र में रहता है, एक सरकार के अधीन संगठित है और संप्रभु है। चार तत्व:
- जनसंख्या: वहाँ स्थायी रूप से रहने वाले लोग। संख्या मायने नहीं रखती: किसी राज्य में 1 लाख से कम लोग हैं, किसी में 140 करोड़ से ज़्यादा।
- क्षेत्र: ज़मीन, नदियाँ-झीलें, तट के पास का समुद्र (12 समुद्री मील) और ऊपर का आकाश।
- सरकार: वह संगठन जो फ़ैसले बनाता और लागू करता है।
- संप्रभुता: सर्वोच्च शक्ति। आंतरिक = देश के अंदर आख़िरी फ़ैसला। बाहरी = दूसरे देशों से स्वतंत्रता।
कई लोग पाँचवाँ तत्व भी जोड़ते हैं: दूसरे राज्यों की मान्यता। राष्ट्र अलग है: वह ऐसे लोग हैं जो भाषा, इतिहास, संस्कृति से जुड़ाव महसूस करते हैं। राज्य एक कानूनी-राजनीतिक इकाई है।
नागरिक राज्य के पूरे सदस्य हैं। उनके अधिकार (वोट, सुरक्षा) और कर्तव्य (कानून मानना, कर देना) हैं।
राज्य और सरकार में अंतर
| राज्य | सरकार |
|---|---|
| स्थायी | अस्थायी, चुनाव के बाद बदलती है |
| चारों तत्व हैं | राज्य का एक तत्व है |
| अमूर्त (दिखता नहीं) | मूर्त (असली लोग: मंत्री, अधिकारी) |
| संप्रभु | राज्य की ओर से शक्ति चलाती है |
सरकार के तीन अंग: विधायिका (संसद कानून बनाती है), कार्यपालिका (राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री और अधिकारी लागू करते हैं) और न्यायपालिका (न्यायालय)। इन्हें अलग रखना (शक्तियों का पृथक्करण) किसी एक अंग को बहुत ताक़तवर बनने से रोकता है।
राज्य और सरकार के रूप
राज कौन करता है?
- लोकतंत्र: शक्ति नागरिकों से आती है, स्वतंत्र चुनाव से। प्रत्यक्ष (लोग खुद कानून पर वोट दें) या प्रतिनिधि (प्रतिनिधि चुनें)।
- राजतंत्र: जन्म से राजा या रानी। निरंकुश (पूरी शक्ति) या संवैधानिक (राजा प्रतीक; संसद शासन करती है)।
- तानाशाही / सत्तावादी शासन: एक व्यक्ति या दल बिना निष्पक्ष चुनाव के शक्ति रखता है।
राज्य का प्रमुख
गणराज्य: राज्य प्रमुख चुना जाता है (राष्ट्रपति)। राजतंत्र: पद वंश से मिलता है।
पूरे देश में शक्ति कैसे बँटी है?
एकात्मक राज्य: मुख्य शक्ति एक केंद्र सरकार के पास (फ़्रांस, जापान)। संघीय राज्य: संविधान केंद्र और क्षेत्रीय सरकारों में शक्ति बाँटता है (भारत, ब्राज़ील, जर्मनी, अमेरिका)।
राज्यों के समूह
राज्य व्यापार और सहयोग के लिए क्षेत्रीय समूहों (अफ़्रीकी संघ, आसियान, यूरोपीय संघ) और संयुक्त राष्ट्र से जुड़ते हैं। कुछ समूहों में वे संप्रभुता का एक हिस्सा मिलकर इस्तेमाल करते हैं।
राज्य की बदलती भूमिका
राज्य को क्या-क्या करना चाहिए? समय के साथ सोच बदली है:
- न्यूनतम (चौकीदार) राज्य: बस सुरक्षा, पुलिस, न्यायालय। बाकी बाज़ार करे।
- कल्याणकारी राज्य (1945 के बाद बढ़ा): स्कूल, स्वास्थ्य, पेंशन, बेरोज़गारी मदद भी, करों से।
- नियामक राज्य (1980 के दशक से): राज्य कुछ कंपनियाँ बेचता है (निजीकरण) पर उनके लिए नियम बनाता है, जैसे टेलीकॉम या बैंक।
आज वैश्वीकरण भी है: बड़ी कंपनियाँ, इंटरनेट और जलवायु परिवर्तन सीमाएँ पार करते हैं, इसलिए राज्य मिलकर काम करते हैं। डिजिटल सेवाएँ (ऑनलाइन पहचान, कर भरना) नागरिक और राज्य का रिश्ता बदल रही हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राज्य = जनसंख्या + क्षेत्र + सरकार + संप्रभुता
- आंतरिक संप्रभुता = अंदर आख़िरी फ़ैसला; बाहरी = बाहर स्वतंत्रता
- सरकार = विधायिका + कार्यपालिका + न्यायपालिका
- गणराज्य → चुना हुआ प्रमुख; राजतंत्र → वंश से
- एकात्मक → शक्ति केंद्र में; संघीय → संविधान से बँटी
- राज्य स्थायी है; सरकार बदलती है
हल किए गए उदाहरण
1. कुछ द्वीपों पर लोग, ज़मीन और सरकार है, पर सारे अंतिम फ़ैसले कोई दूसरा देश करता है। क्या यह संप्रभु राज्य है?
नहीं। चौथा तत्व, संप्रभुता, नहीं है। यह एक आश्रित क्षेत्र है।
2. चुनाव के बाद नया दल सरकार बनाता है। क्या राज्य बदल गया?
नहीं। जनसंख्या, क्षेत्र और संप्रभुता वही हैं। बस सरकार (एक तत्व) बदली।
3. एक देश में राजा बस संसद का उद्घाटन करता है और चुना हुआ प्रधानमंत्री शासन करता है। यह कैसा राज्य है?
संवैधानिक राजतंत्र, जिसमें लोकतांत्रिक (संसदीय) सरकार है।
आम गलतियाँ
- राज्य और सरकार को एक ही मान लेना। सरकार राज्य का सिर्फ़ एक हिस्सा है।
- सोचना कि राज्य बड़ा होना चाहिए। आकार और जनसंख्या से राज्य तय नहीं होता।
- संप्रभु 'राज्य' (देश) को संघ के अंदर के 'राज्य' जैसे केरल या टेक्सस से मिला देना, जिनके पास संप्रभुता नहीं।
- सोचना कि हर राजतंत्र अलोकतांत्रिक है। कई संवैधानिक राजतंत्र लोकतंत्र हैं।